Saturday, April 3, 2021

नवरात्रि कब से है और मुहूर्त कब से हैं कब से पूजा शुरू करें नवरात्रि नवरात्रि में

मित्रों आप सभी जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि आने वाली है और इसी के साथ सनातनी नववर्ष का भी आगमन हो‌ जायेगा 
सनातन धर्म के पवित्र पर्वों में से एक नवरात्रि भी है चैत्र माह की शुरुआत हो चुकी है और कुछ ही दिनों में चैत्र माह की नवरात्रि भी शुरू होने वाली है

यह त्यौहार पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है यह नो दिनों तक चलता है और यह नवदुर्गा और सिद्ध महा विधा को समर्पित होता है पर इन नो‌ दिनो के दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की उपासना की जाती है और सिद्ध महा विधा और अपने अपने इष्ट देव या देवी पुजा साधना की जाती है ओर ‌साथ ही व्रत भी किए जाते हैं एक वर्ष में चार बार नवरात्रि आती हैं इनमें से दो गुप्त नवरात्रि होती हैं तो दो  सार्वजनिक ये तो हम हमारी हर नवरात्रि की पोस्ट बताते ही है इनके अलावा एक पांचवी नवरात्रि भी होती है वो है  शाकंभरी नवरात्रि जो कर मास यानि जनवरी की शुरुआत में आती है तो मित्रों अब आते हैं आने वाली नवरात्रि पर,,,
चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल से शुरू होने जा रहे हैं। इनका समापन 22 अप्रैल को होगा तो आइए जानते हैं नवरात्रि के नौ (9) दिनों के बारे में ,
चैत्र नवरात्रि के लिये घटस्थापना चैत्र प्रतिपदा को होती है जो कि हिन्दु कैलेण्डर का पहला दिवस होता है अतः भक्त लोग साल के प्रथम दिन से अगले नौ दिनों तक माता की पूजा कर वर्ष का शुभारम्भ करते हैं चैत्र नवरात्रि को वसन्त नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है  भगवान राम का जन्मदिवस चैत्र नवरात्रि के अन्तिम दिन पड़ता है और इस कारण से चैत्र नवरात्रि को राम नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है 
वहीं इसी दिन से सनातन धर्म का नया साल यानि नवसंवत्सर 2078 शुरु होगा, इस नवसंवत्सर के राजा और मंत्री दोनों ही मंगल रहेंगे तो आप सभी को नववर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई
चैत्र नवरात्रि 2021 घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा,,
इस बार चैत्र नवरात्रि का आरंभ मंगलवार के दिन से होगा जिसकी वजह से मां घोड़े पर सवार होकर आएंगी इससे पहले शारदीय नवरात्रि पर भी मां घोड़े पर सवार होकर आई थीं देवी मां जब भी घोड़े पर आती हैं तो युद्ध की आशंका बढ़ जाती है 
घटस्थापना विधि 
सबसे पहले एक पात्र लें उस पात्र में मिट्टी बिछाएं फिर पात्र में रखी मिट्टी पर जौ के बीज डालकर उसके ऊपर मिट्टी डालें अब इसमें थोड़े-से पानी का छिड़काव करे अब एक कलश लें इस पर स्वस्तिक बनाएं फिर मौली या कलावा बांधें इसके बाद कलश को गंगाजल और शुद्ध जल से भरें इसमें साबुत सुपारी, फूल और दूर्वा डालें साथ ही इत्र, पंचरत्न और सिक्का भी डालें इसके मुंह के चारों ओर आम के पत्ते लगाएं। कलश के ढक्कन पर चावल डाले देवी का ध्यान करते हुए कलश का ढक्कन लगाएं अब एक नारियल लेकर उस पर कलावा बांधें कुमकुम से नारियल पर तिलक लगाकर नारियल को कलश के ऊपर रखें। नारियल को पूर्व दिशा में रखें कलश पर स्वास्तिक का चिह्न जरूर बनाएं,,,
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त-

दिन- मंगलवार
तिथि- 13 अप्रैल 2021
शुभ मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक।
अवधि- 04 घंटे 15 मिनट
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन शुभ योग

- विष्कुम्भ योग 12 अप्रैल की दोपहर 2:27 बजे से 13 अप्रैल की दोपहर 3:16 मिनट तक

- प्रीति योग 13 अप्रैल की दोपहर 3:16 बजे 14 अप्रैल की दोपहर 4:15 मिनट तक
नवरात्र में महानिशा पूजा सप्तमी युक्त अष्टमी या मध्य रात्रि में निशीथ व्यापिनी अष्टमी में की जाती है. इस साल चैत्र नवरात्रि में महानिशा पूजा 20 अप्रैल को की जाएगी, साधक गण दशमी को भैरव पुजा करके नवरात्रि की  पुर्णाआहुति प्रदान कर‌ सकते हैं नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,,, कैसे जानते हैं 9 दिन में किस-किस मां की किस किस दिन पूजा होगी,
13 अप्रैल, मंगलवार,  नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है इस दिन कलश स्थापना यानी घटस्थापना की जाती है मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति पर मां का आशीर्वाद बना रहता है,
14 अप्रैल, बुधवार,नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है इनकी पूजा करने से व्यक्ति में तप, त्याग, सदाचार और संयम की भावना जागृत होती है,
15 अप्रैल, गुरुवार, नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है इनकी पूजा करने से वाणी मधुर होती है,
16 अप्रैल, शुक्रवार,नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा को समर्पित है इनकी पूजा करने से रोग-शोक दूर होते हैं और आयु और यश में वृद्धि होती है,,
17 अप्रैल, शनिवार, नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है इनकी पूजा करने से मोक्ष के द्वारा खुल जाते हैं,,
18 अप्रैल, रविवार, नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित होता है, इनकी पूजा करने से दुश्मन निर्बल हो जाते हैं,
19 अप्रैल, सोमवार, नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है इनकी पूजा करने से व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है,
20 अप्रैल, मंगलवार, नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित होता है इनकी पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है और सुखों में वृद्धि होती है,
21 अप्रैल, बुधवार, नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है इनकी पूजा करने से व्यक्ति को समस्त नव-निधियों की प्राप्ति होती है
मित्रों जैसा मैंने पहले भी नवरात्रि में राशियों के बारे में मंत्र और कुछ उपाय दिए हैं आप सभी से निवेदन है फिर से एक बार देख लीजिए उपाय मंत्र पहले भी तेरी थी और भी आकर दे देंगे नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,,
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश

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