Tuesday, June 1, 2021

साल 2021 में कब कब है ग्रहण क्या करें क्या ना करें,

साल 2021 में कब कब है ग्रहण






चंद्रग्रहण 26 मई जो निकल चूका है और दुसरा 19 नवंबर 2021 को,
सूर्य ग्रहण जो आने वाला है ,10 जून और दुसरा और अंतिम सुर्य ग्रहण 4 दिसंबर 2021 को,

मित्रों साल 2021 का सूर्य ग्रहण लगने में कुछ ही दिन शेष रह गया है पंचांग और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वर्ष 2021 में दो चंद्र ग्रहण और दो सूर्य ग्रहण लगने हैं, आइए जानते हैं कि यह कब लगेगा और किन देशों में दिखाई देगा 2021 का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून 2021 को लगेगा, जो हमें उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग तथा यूरोप और एशिया में आंशिक तौर पर दिखाई देगा, इसके अलावा उत्तरी कनाडा, ग्रीनलैंड और रूस में यह पूर्ण रूप से नजर आएगा ,अगर भारत की बात करें तो यह आंशिक रूप में ही दिखाई देगा ,साल 2021 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर 2021 को लगेगा, इस ग्रहण का असर अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, अटलांटिक के दक्षिणी भाग, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा हालांकि, भारत में सूर्य ग्रहण का असर शून्य होगा, ऐसे स्थिति से भारत में सूतक काल भी मान्य नहीं होगा,
इस साल 26 मई को पहला चंद्र ग्रहण था यह पूर्ण चंद्र ग्रहण था यह भारत में एक उपछाया ग्रहण के तौर पर देखा गया, जबकि पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में पूर्ण चंद्र ग्रहण था इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 19 नवंबर को दोपहर करीब 11.30 बजे लगेगा, जो कि शाम 05 बजकर 33 मिनट पर समाप्त होगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। यह भारत, अमेरिका, उत्तरी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत महासागर में देखा जा सकेगा, और 10 जून गुरूवार को लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, सूर्यग्रहण 10 जून को लगेगा ,यह ग्रहण ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर लग रहा है ,यह इस साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा, ग्रहण दोपहर 01:42 बजे से शुरू होगा जो शाम 06:41 बजे समाप्त होगा, यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा,
मित्रों कितने प्रकार के होते हैं सूर्य ग्रहण,
1. पूर्ण सूर्य ग्रहण
जब चन्द्रमा पृथ्वी के बेहद पास रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। इससे चन्द्रमा पूर्ण रूप से पृ्थ्वी को अपनी छाया क्षेत्र में ले पाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश पृ्थ्वी तक नहीं पहुंच पाता है और पूरी धरती अंधकारमय हो जाती है, इसे ही पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है,
2. आंशिक सूर्य ग्रहण,
जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा कुछ इस प्रकार आए कि सूर्य का कुछ ही भाग पृथ्वी से दिखाई दे इसके परिणाम स्वरुप चन्द्रमा, सूर्य के कुछ ही हिस्से को अपनी छाया क्षेत्र से ढक पाता है, इसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है,
3. वलयाकार सूर्य ग्रहण,
जब चन्द्रमा पृथ्वी से काफी दूर होने के बाद भी पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है यह सूर्य को इस तरह से ढक देता है कि सूर्य का केवल बीच का हिस्सा ही चंद्रमा के छाया क्षेत्र में आ पाता है और जब हम पृथ्वी से देखते हैं तो सूर्य पूरी तरह के ढका हुआ दिखाई नहीं देता है यह कंगन या वलय के रूप में दिखाई देता है इसे ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है, नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी, 
इस ग्रहण में सूतक लगेगा या नहीं,और क्या ना करें और क्या करे सुतक काल में और क्या सावधानियां बरतें,
भारत में दिखाई न देने के कारण ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा ग्रहण काल में सूतक का विचार किया जाता है, इस दौरान कई कार्यों को करने की मनाही होती है, सूर्य ग्रहण का महत्व
ग्रहण एक अशुभ घटना होती है  इसलिए ग्रहण में कई चीजों का विचार किया जाता है हिन्दू धार्मिक आस्था केन्द्रों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं लोग ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए गंगा जैसी पवित्र नदी में डुबकी लगाते हैं पूजा पाठ एवं अन्य प्रकार के मंगल अनुष्ठान रुक जाते हैं पर ग्रहण काल के दौरान तंत्रोकित और गुरु, इष्ट मंत्रो का जाप हवन ज़ारी रहता है, जब ग्रहण समाप्त होता है तो गंगा जल से घरों, मंदिरों, मूर्तियों को शुद्ध किया जाता है ताकि उनके ऊपर से ग्रहण की अशुभ छाया दूर हो जाए, सूर्य ग्रहण के दौरान सावधानियां ,सूर्य ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है  विशेषकर गर्भवती महिलाओं को, उन्हें घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही उन्हें चाकू छुरी या नुकीली चीजों का प्रयोग करना चाहिए, कहा जाता है कि इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु के ऊपर पड़ता है ग्रहण काल के दौरान भोजन इत्यादि करना भी वर्जित है और मल मुत्र का त्याग करना भी वर्जित होता है, पर बिमार ,बुढ्ढे ,बच्चों के लिए सब माफ है,इस सूर्य ग्रहण के बाद स्नान, दान और मंत्र जाप करना विशेष फलदायी रहेगा, नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी मित्रों ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो ग्रहण भारत में दिखाई देगा उसका सूतक काल भी भारत में मान्य होगा, इसके साथ ही इसका प्रत्यक्ष या परोक्ष असर जनमानस पर भी पडेगा इस ग्रहण का देश की राजनीति पर भी असर होगा, यूद्ध के आसार और महामारी का असर बना रहेगा कई राशियों होगी मालामाल तो कई राशियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है , वाहन चलाते समय सावधानी रखें और अपना और अपनो का ख्याल रखें, रोजना पीपल में जल दें चमेली या घी का दीपक जलाएं बाबा हनुमान जी की चालीसा और बाबा शनि महाराज की चालीसा और मुलमंत्र का जाप करें, बाकी आगे जैसी मां बाबा की कृपा और इच्छा,🙏🏻🌹
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश 🙏🏻🌹

Sunday, April 25, 2021

बाबा हनुमान जी का जन्मोत्सव कब है और कुछ चमत्कारी उपाय

मंगलवार 27/4/2021को बाबा लाल लंगोटी वाले बाबा यानी बाबा हनुमान जी का जन्मदिन है तो हम सभी आपको एक उपाय दे रहे रहे जो हमने पिछले साल ओर उसके पिछले साल भी दिया था ओर जो शत्रु पंडित है

उनके लिए भी एक मंत्र विधी विधान सहित कहाँ गया है और उसके साथ कुछ उपाय दिए हैं जो आप रोज कर सकते हैं समझ में नहीं आये तो पुंछ सकते हैं ,आप चारों करो तो बहुत अच्छा है मंगलवार सुबह जल्दी समय मिल जाये तो बहुत अच्छा है अपने घर मे पुजा के लिए बाबा की पुजा करे उनके साथ जो आपके इष्ट आदि देवता है उनकी भी पुजा करे तो बहुत अच्छा है फिर किसी भी बाबा के मंदिर जाये उनको सिंदूर पीले वाला (माँग भरने वाली कुमकुम नही ) ओर चमेली का तेल जाये दोनो को मिलाकर उनसे बाबा की मालिस करे ओर आपके जो हाथो मे जो सिंदूर लगा रह जाये उसको एक पात्र मे एक्कट्ठा कर लिजिये ओर अपने घर के हर दरवाजे के ऊपर स्वास्तिक बना दिजिये ओर अपनी छत के ऊपर भी दक्षिणी दिशा मे स्वास्तिक बना कर बाबा के नाम का पीला भगवा झण्डा लगा दिजिये अगर उस पर बाबा का चित्र बना हो तो सबसे अच्छा ओर बाबा हनुमान जी के मंदिर मे बाबा को चोला चढाने जाओ तो रक्त पुष्पो की माला लेते जाओ गुड़हल ओर कनेर के फुल,इत्र की शीशी ओर मीठे पान पान पर लोंग का बंध लगाना है, ओर एक नारियल ले जाना है उसको अपने सिर के ऊपर सात बार वार कर उनको यही कहना है कि , *हम आपकी शरण मे है यही हमारे गुरदेव का कहना है* यही बोलना है ओर आक के एक सौ आठ पतो की माला बनानी है कलवा के साथ ओर जो चोला नही चढा सके वो उनके चरणो से सिंदूर लाकर घर पर ऊपर वाली क्रिया कर सकती है। ओर वो आक के पतो की माला जो बाबा को चढी हुयी आप अगर सुबह अपने घर पर ला सको रविवार को लाकर उससे हवन कर लिजिये माला को चंदन लगाकर बाबा को पहनानी है घर मे हवन करने से रोग दोषो का विनाश होगा ओर सिंदूर से स्वास्तिक बनाने से आपके घर पर कोई अघात नही कर सकेगा कल जब भी बाबा के मंदिर जाओ तो मीठे के रूप मे मावे के पडे ओर पाँच तरह के फल भी लेकर जाये ओर कल बाबा के नाम से जो दान पुण्य हो करे केवल खाने की वस्तू का ध्यान रहे बाकी आगे जैसी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही पोस्ट को सभी मे फोरवड करे ओर पोस्ट के साथ छेड़ छाड़ करने पर दोष तो माना ही जाता है फलीभूत हो वो कोई जरूरी नही ये सब हमारे गुरू ओर इष्ट की देने है उसी पर क्रिया ओर ये सब उनकी देने बाकी आपकी इच्छा,,, 
इसके लाथ एक मंत्र विधान,, 
सर्व शत्रु निवारण मंत्र ये मंत्र हमने पंचमुखी हनुमान कवचम् से लिया है ओर भी काफी मंत्र है इस कवच मे जिसको कोई तोड नहीं है... 

ॐ पूर्वकपिमुखाय पच्चंमुखहनुमते टं, टं, टं, टं, टं, सकलशत्रुसंहरणाय स्वाहा.. 

इस मंत्र को इक्कीस हजार बार यानी २१००० बार जप हवन (जप के साथ हवन करना है )कर के सिद्ध कर ले इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद शत्रु भी आपसे मित्रवत व्यवहार करने लगेगे ओर शत्रु भय समाप्त हो जायेगा बाबा हनुमानजी को कोई भी मंत्र सिद्ध करो जाप पुणे होने पर उस मंत्र को भोजपत्र पर लाल चंदन से या लाल स्याही से उतार ले फिर उसको अभिमंत्रित करके फिर उसको ताबीज मे धारण करे ये हमारा अनुभव है की फल तुरंत मिलेगा पर बात आस्था ओर विश्वास की है 
बाकी छेड़ छाड़ किसी को फलित हो या ना हो ये कोई जरूरी नही आगे जैसी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा ।।
नोट, महिलाओं के लिये भी एक पुजा विधान है कल के लिए कल वो बाबा हनुमान जी के मंदिर जाकर उनको परिक्रमा करके उनको प्रणाम करके फिर माँ पार्वती ओर बाबा भोले नाथ को की पुजा कर सकती है बाबा के नाम की बाबा भोलेनाथ को बिलपत्र चढा सकती है पर बिलपत्र पर ॐ श्री राम लिखा होना चाहिए चंदन से इससे उनके घर कलह मे ओर बाहरी रूकावटो से आराम मिल जायेगा बाकी जैसी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा मानो तो अच्छा नही मानो तो बहुत अच्छा ।।।।
जो मंत्र नही कर सकते उनके लिये रामायण, रामचरित्र मानस, सुंदरकाण्ड, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, संकटमोचन, हनुमान जंजीरा ओर भी बहुत कुछ है,,,, 
और इसके साथ ही कुछ उपाय यह भी कर लीजिए घर में रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ चमत्कारी उपाय,
सिंदूर को सुख, ,,सौभाग्य और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। खास तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाए, तो इसके जादूई प्रभाव मिल सकते हैं। सिंदूर से केवल पति की उम्र ही लंबी नहीं होती बल्कि रातों रात बदल सकती है किस्मत, घर में भी आपको स्वर्ग से शांति महसूस होगी, इस लेख में बताए जा रहे उपाय को अगर आप जीवन भर करेंगे तो आपके घर-परिवार पर धन सदा बरसता रहेगा और जीवन की सभी बाधाओं को शांत करेगा। सिंदूर और कुमकुम से हो सकते हैं आपके सभी सपने पूरे आईए जानें कैसे,,
प्रतिदिन घर के पुरूष बाबा हनुमान जी को सिंदूर लगाएं और महिलाएं देवी मां भगवती दुर्गा को कुमकुम, ध्यान रहे पुरूष देवी मां भगवती दुर्गा को सिंदूर न लगाएं और महिलाएं बाबा हनुमान जी को,
घर के मुख्य द्वार पर सरसो का तेल और और बाबा हनुमान जी के चरणों का सिंदूर का टीका लगाने से कोई भी बुरी शक्ति घर में प्रवेश नहीं कर सकती, वास्तुदोष समाप्त होते हैं ,,देवी मां लक्ष्मी अपना स्थाई बसेरा बना लेती हैं और बाबा शनिदेव  नजर दोष से रक्षा करते हैं,
मंगलवार को बाबा हनुमान जी के चरणों का सिंदूर लेकर उससे सफेद कागज पर स्वास्तिक बनाएं, उस कागज को मोड़े नहीं सदा इस कागज को अपने पास रखें। प्रतिदिन इस कागज को प्रणाम करें। नौकरी से संबंधित कोई भी समस्याओं का हल होगा तुरंत,
महिलाएं सुबह स्नान करके देवी मां गौरी को सिंदूर लगाएं फिर स्वंय की मांग भरें। पति-पत्नी के बीच प्यार की कमी और छोटे-मोटे विवादों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस उपाय से आप अपनी लाइफ को रोमांटिक और खुशहाल बना सकते हैं,,,
प्रणाम आप सभी पुजनीयो को,,,
ऐसी की ऐसी ही शेयर करे सभी मे अगर नाम कमाने का शोक है तो आपकी इच्छा नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी जय मां बाबा की 🙏🏻🌹
आप सभी को बाबा के जन्मोत्सव की बहुत बहुत शुभकामनाएं 
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधेकृष्णा अंलख आदेश 

🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻

भगवान महावीर स्वामी के जन्मोत्सव कब है,

आप सभी को भगवान महावीर स्वामी के जन्मोत्सव की बहुत बहुत शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई

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भगवान महावीर के जन्मदिवस को  जैन धर्म का सबसे बड़ा पर्व माना गया है. इसी दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म हुआ था. भगवान महावीर का जन्म करीब ढाई हजार साल पहले (ईसा से 599 वर्ष पूर्व), वैशाली के गणतंत्र राज्य क्षत्रिय कुण्डलपुर में हुआ था. तीस वर्ष की आयु में महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव त्याग दिया और संन्यास धारण कर आत्मकल्याण के पथ पर निकल गए. इस बार भगवान महावीर का जन्मोत्सव  25 अप्रैल को मनाई जा रहां है.
अब भगवान महावीर जन्मोत्सव का महत्व- कहते हैं कि 12 साल की कठिन तपस्या के बाद भगवान महावीर को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ और 72 वर्ष की आयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई. इस दौरान महावीर स्वामी के कई अनुयायी बने जिसमें उस समय के प्रमुख राजा बिम्बिसार, कुनिक और चेटक भी शामिल थे. जैन समाज द्वारा महावीर स्वामी के जन्मदिवस को महावीर जन्मोत्सव तथा उनके मोक्ष दिवस को दीपावली के रूप में धूम धाम से मनाया जाता है.
क्या है पंचशील सिद्धांत- जैन धर्म के 24वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी का जीवन ही उनका संदेश है. तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अहिंसा को सबसे उच्चतम नैतिक गुण बताया. उन्होंने दुनिया को जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए, जो है– अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय) और ब्रह्मचर्य. महावीर ने अपने उपदेशों और प्रवचनों के माध्यम से दुनिया को सही राह दिखाई और मार्गदर्शन किया. भगवान महावीर ने अहिंसा की जितनी सूक्ष्म व्याख्या की, वह अन्य कहीं दुर्लभ है. उन्होंने मानव को मानव के प्रति ही प्रेम और मित्रता से रहने का संदेश नहीं दिया अपितु मिट्टी, पानी, अग्नि, वायु, वनस्पति से लेकर कीड़े-मकौड़े, पशु-पक्षी आदि के प्रति भी मित्रता और अहिंसक विचार के साथ रहने का उपदेश दिया है.
भगवान महावीर जी के पांच सिद्धांत क्या है जानते हैं,
मोक्ष पाने के बाद, भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत दर्शाएं जो समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की ओर ले जाते हैं| जिनमें शामिल हैं - अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अंतिम पांचवा सिद्धांत अपरिग्रह |
पहला सिद्धांत है अहिंसा,  इस सिद्धांत के अनुसार जैनों को किसी भी परिस्थिति में हिंसा से दूर रहना चाहिए| भूल कर भी किसी को कष्ट नहीं पहुँचाना है|
दूसरा सिद्धांत है सत्य, भगवान महावीर कहते हैं, हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ| जो बुद्धिमान सत्य के सानिध्य में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है|लोगों को हमेशा सत्य बोलना चाहिए|
तीसरा सिद्धांत है अस्तेय, अस्तेय का पालन करने वाले किसी भी रूप में अपने मन के मुताबिक वस्तु ग्रहण नहीं करते हैं ये लोग संयम से रहते हैं और केवल वही लेते हैं जो उन्हें दिया जाता है|
चौथा सिद्धांत है ब्रह्मचर्य, इस सिद्धांत के लिए जैनों को पवित्रता के गुणों का प्रदर्शन करने की आवश्यकता होती है; जिसके कारण वे कामुक गतिविधियों में भाग नहीं लेते|
पांचवा अंतिम सिद्धांत है अपरिग्रह, यह शिक्षा सभी पिछले सिद्धांतों को जोड़ती है| अपरिग्रह का पालन करके, जैनों की चेतना जागती है और वे सांसारिक एवं भोग की वस्तुओं का त्याग कर देते हैं|
#आप सभी से निवेदन है कि #जयंती केवल महापुरुषों की मनाई जाती है भगवान का केवल #जन्मोत्सव मनाया जाता है इसलिए निवेदन है कि #जयंती नहीं #जन्मोत्सव मनाये 🙏🏻🌹
आप सभी को भगवान महावीर स्वामी के जन्मोत्सव की बहुत बहुत शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई,,🙏🏻🌹
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश 🙏🏻🌹

Sunday, April 11, 2021

सनातन हिंदू धर्म नव वर्ष कब आता है जानिए आप सभी

मित्रों जय मां बाबा की आप सभी को सनातन हिंदू धर्म के *नववर्ष* की और *नवरात्रि* की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई,

मित्रों जैसा कि आप सभी जानते हैं सनातन धर्म का नववर्ष आरंभ होने वाला है वैसे भी सनातन हिंदू धर्म में या हिंदुस्तान में नववर्ष से आरंभ होता है तो इसके साथ ही पश्चिम राज्य महाराष्ट्र गोवा और कई जगह कोकण क्षेत्र में गुड़ी पड़वा के रूप में हिंदू नव वर्ष मनाया जाता है और पुरवा तो राज्य मणिपुर मैं इसे चौरोबा के रूप में मनाया जाता है जम्मू कश्मीर में नव वर्ष को नवरहे के रूप में मनाया जाता है इस दिन चैत्र नवरात्रि का भी पहला दिन होता है मां आदिशक्ति जगत जननी जगदंबा की उपासना का पर्व होता है जिसमें 9 दिन देवी मां मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है मां के भक्तों नवरात्रि का व्रत रखकर उनकी उपासना भी करते हैं साधना करते हैं साधक तपस्वी साधु संत तांत्रिक अघोरी तंत्रोक्त साधना करते हैं इसमें मां से हो उनकी कृपा पात्र बनने की या उनके चरण सेवक बनने की शक्ति मंत्र आदि इत्यादि को साधने का प्रयास सिद्धि पाने का प्रयास कृपा पाने का प्रयास करते हैं इन सब की जानकारी केवल अपने गुरु और शिष्य में ही प्रदान करते हैं भक्त और भवानी के बीच में केवल प्रेम वात्सल्य रूपी साधना होती है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हिन्दू वर्ष की प्रथम तिथि है यह तिथि धार्मिक रूप से बेहद ही महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है इस साल 13 अप्रैल को यह तिथि पड़ रही है और इसी दिन सनातन हिन्दू धर्म नववर्ष 2078 प्रारंभ हो रहा है और चेत्र नवरात्रि का भी आरंभ इसी दिन होता है, सनातनी हिन्दू *नववर्ष* को विक्रम संवत के नाम से जाना जाता है आप सभी को सनातनी हिंदू *नववर्ष* की और *नवरात्रि* की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई इसके साथ ही वैदिक शास्त्र और पुराणों के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी इसीलिए इस पावन तिथि को *नव* *संवत्सर* कहते हैं और इसी रूप में भी मनाया जाता है आप सभी पर देवी मां आदिशक्ति जगत जननी जगदंबा अपनी कृपा बनाए रखें नव वर्ष में आप सभी को खुशहाली प्रदान करें यही मां बाबा से हमारी प्रार्थना है यह साल अत्यदित कष्टदायक भी हो सकता है इसलिए पुणे सावधानी रखें नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी आप सभी से निवेदन है कल भी अमावस्या हैं और सोमवार को भी अमावस्या हैं तो जितना हो सके गुरुमंत्र ओर इष्टमंत्र का जाप करें ताकि आपके सभी संकटो का निवारण हो सके, आप सभी को एक बार फिर से सनातनी हिंदू *नववर्ष* की और *नवरात्रि* की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलग आदेश

Friday, April 9, 2021

सोमवती अमावस्या के कुछ उपाय और टोटके भाग 2

#सोमवती #अमावस्या के कुछ उपाय और टोटके भाग 2
साल 2021 में केवल एक ही अमावस्या ऐसी पड़ रही है जो सोमवती अमावस्या है इसलिए 12 अप्रैल वाली सोमवती अमावस्या का महत्व काफी अधिक माना जा रहा है. ऐसी मान्यता है


कि अगर सोमवती अमावस्या पर कोई उपवास करता है तो उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं. इस दिन पितरों का तर्पण भी किया जाता है. ऐसा करने से व्यक्ति को अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके अलावा सनातनी नववर्ष 2077 की समाप्ति ओर नववर्ष के आगमन का अंतिम दिन है 
 सोमवती अमावस्या शुभ मुहूर्त
अमावस्या प्रारम्भ- 11 अप्रैल 2021 सुबह 06:03 बजे से
अमावस्या समाप्त- 12 अप्रैल  2021 सुबह 08:00 बजे तक
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो इस दिन पवित्र नदियों में स्ना करें
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर भगवान का ध्यान करें
अगर संभव हो तो इस दिन व्रत करें। सोमवती अमावस्या के व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है
भगवान शिव की अराधना कर उन्हें भोग लगाएं
भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की आरती करें
इस दिन आप दिनभर ऊॅं नम: शिवाय का जप भी कर सकते हैं
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का बहुत अधिक महत्व होता है सोमवार के दिन अमावस्या पड़ने से इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है ,2021 में पड़ने वाली ये पहली और अंतिम सोमवती अमावस्या है  इस पावन दिन पवित्र नदियों, तालाबों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है, सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है,
इस दिन सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी उम्र के लिए व्रत भी रखती हैं  विवाहित महिलाएं इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करती हैं और पीपल पर दूध, पुष्प, अक्षत और चंदन अर्पित करती हैं अमावस्या के दिन पितरों से संबंधित कार्य करना भी शुभ होता है। इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व होता है इस दिन दान करने का कई गुना फल मिलता है नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,
भूखे लोगों को भोजन कराएं अमावस्या के दिन भूखे लोगों को भोजना कराने का विशेष महत्व होता है
मछलियों को शक्कर मिश्रित आटे की गोलियां खिलाए
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को तिल के लड्डू, तेल, कंबल और वस्त्र जैसी जरूरी चीजों का दान करना चाहिए
इस दिन पशु- पक्षियों को भोजना कराना भी शुभ रहता है
अब मित्रों कुछ विस्तार से जैसा हमने पिछले पोस्ट में बताया था कि इस साल सोमवती अमावस्या 12 अप्रैल को पड़ रही है सनातन धर्म के अनुसार, अमावस्या के दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दान-पुण्य और पिंडदान किए जाते हैं सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की फेरी लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है  जानिए पीपल की सोमवती अमावस्या के दिन क्यों लगाते हैं फेरी, महत्व और पूजा विधि-
पीपल के पेड़ की पूजा करें इसके साथ ही तुलसी का भी पौधा रखें  पीपल पर दूध, दही, रोली, चंदन, अक्षत, फूल, हल्दी, माला, काला तिल आदि चढ़ाएं वहीं तुलसी में पान, फूल, हल्दी की गांठ और धान चढ़ाएं इसके बाद पीपल की कम से कम 108 बार परिक्रमा करें घर आकर पितरों का तर्पण दें इसके साथ ही गरीबों को र दान-दक्षिणा देना शुभ माना जाता है सनातनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सुहागिन स्त्रियों को सोमवती अमावस्या के दिन स्नान आदि करने के बाद पीपल के पेड़ की विधि-विधान के साथ पूजा करनी चाहिए सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की परिक्रमा करने का भी विशेष महत्व होता है मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन सुखी होता है इसके साथ ही जिन जातकों के विवाह में विलंब हो रहा हो तो इस व्रत के प्रभाव से शीघ्र विवाह होने के योग बनते हैं
सनातन धर्म में पूजा-अर्चना के लिए अमावस्या व पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है कहते हैं कि इस दिन पूजा करने से देवी-देवता आसानी से प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा बरसाते हैं मान्यता है कि अमावस्या के दिन गंगा व अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से कई यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें संभव हो तो इस दिन पवित्र नदियों में स्ना करें अगर नदियों में स्नान नहीं कर सके तो आप अपने नहाने के पानी में पवित्र नदियों का पानी मिलाकर स्नान कर सकते हैं
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर भगवान का ध्यान करें
अगर संभव हो तो इस दिन व्रत करें सोमवती अमावस्या के व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है
भगवान शिव की अराधना कर उन्हें भोग लगाएं
भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की आरती करें
इस दिन आप दिनभर ऊॅं नम: शिवाय का जप भी कर सकते हैं 
कुछ उपाय विस्तार से,
चैत्र अमावस्या विक्रम संवंत वर्ष का अंतिम दिन होता है विक्रम संवंत को आम भाषा में सनातनी हिन्दू कैलेंडर के नाम से भी जाना जाता है चैत्र अमावस्या तिथि की समाप्ति के बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आती है जो सनातन हिन्दू धर्म नववर्ष का पहला दिन होता है जैसा हम पहले ही बता चूके है  मान्यता अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी नवरात्र भी हिन्दू नवर्ष की पहली तिथि से प्रारंभ होता है इस दिन कई लोग व्रत भी रखते हैं  आप चाहे तो मौन व्रत भी रख सकते हैं ,सोमवती अमावस्‍या के दिन अगर पीपल के सूत को 108 बार कच्‍चे सूत से लपेटना चाहिए इसके अलावा गिनती के 108 फल अर्पित करके उन्‍हें अलग रख लें पूजा संपन्‍न होने के बाद फल ब्राह्मणों या बच्‍चों में वितरित कर दें ऐसा करने से व्‍यक्ति के जीवन में धन-धान्‍य की पूर्ति तो होती ही है, मान्यता अनुसार सोमवती अमावस्‍या के द‍िन ॐकार मंत्र का जप करना अत्‍यंत फलदायी होता है इसके जप से मनोवांछित सभी कामनाओं की पूर्ति होती है इसके अलावा अगर इस दिन रात्रि काल में रोटी पर सरसों का तेल लगाकर काले कुत्‍ते को रोटी खिलाएं  इससे जीवन में आने वाले सारे कष्‍ट और करियर में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं ,सोमवती अमावस्‍या के दिन अगर मौन रहकर स्नान करने से हजार गौदान का फल मिलता है। इसके अलावा अगर इस दिन पीपल और भगवान विष्णु का पूजन किया जाए तो भी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है पूजन के बाद पीपल की 108 बार परिक्रमा करें इसके बाद प्रणाम करके प्रार्थना करें कि जीवन में आने वाली आर्थिक समस्‍याएं खत्‍म करें ,सोमवती अमावस्‍या के दिन अगर पीपल के सूत को 108 बार कच्‍चे सूत से लपेटना चाहिए इसके अलावा गिनती के 108 फल अर्पित करके उन्‍हें अलग रख लें पूजा संपन्‍न होने के बाद फल ब्राह्मणों या बच्‍चों में वितरित कर दें ऐसा करने से व्‍यक्ति के जीवन में धन-धान्‍य की पूर्ति तो होती ही है साथ ही संतान की अकाल मृत्यु नहीं होती मान्यता अनुसार ओर आपके विश्वास और श्रद्धानुसार ओर इस दिन तुलसी मां की पूजा करनी चाहिए इसके लिए सबसे पहले तुलसी को जल,फूल चढ़ाएं इसके बाद धूप-दीप दिखाकर श्रद्धा से ‘श्री हर‍ि श्री हरि श्री हरि’ मंत्र का जाप करते हुए 108 बार परिक्रमा करें तुलसी मां से प्रार्थना करें कि वह आपके जीवन की सारी मुसीबतों और धन समृद्धि में आने वाली बाधाओं को दूर करें इस दिन भूखे जीवों को भोजन कराने का भी महत्व है यदि संभव हो तो कम से कम एक भिखारी अथवा गाय को भोजन करावें या किसी निकट के सरोवर में जाकर मछलियों को शक्कर मिश्रित आटे की गोलियां खिलाएं इससे घर में पैसे की आवक शुरू हो जाती है इस दिन निकट के किसी शिवमंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र चढ़ाए इसके बाद वहीं बैठकर ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें इससे कालसर्पयोग दोष का असर खत्म हो जाता है मान्यता अनुसार और शास्त्रों के हिसाब से और इसी दिन सुबहको स्नान के पश्चात चांदी से बने नाग-नागिन की पूजा करें तथा सफेद फूल के साथ बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें इससे कालसर्पयोग का दोष दूर हो जाता है या दोषमुक्त हो जाता है और किसी को पूजा पाठ या मंत्र में कोई दिक्कत आती है तो ज्योतिष की सलाह ले सकते हैं और अपना जो भी कर्मकांड है ज्योतिषी या पुजारी से पंडित से किसी से भी करवा सकते हैं और उनको उचित मान सम्मान दक्षिणा देकर भोजन करवाकर विदा करवा सकते हैं मंत्र ज्योतिष अनुसार,जिसे कालसर्प दोष हो, उन व्यक्तियों को अमावस्या के दिन किसी अच्छे पंडित से अपने घर में शिवपूजन एवं हवन करवाना चाहिए नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी ,इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए इसके सेवन से आपके शरीर और भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं क्योंकि इससे पित्र दोष लगता है और इससे इंसान अपने आराध्य देव देवी दूर हो जाता है उसमें नेगेटिविटी का संचार होता है और देवी देवता पितर कुपित और नाराज होते हैं इसी रात्रि को 5 लाल फूल और 5 जलते हुए दीये बहती नदी के पानी में छोड़ें इस उपाय से धन का लाभ प्राप्त होने के प्रबल योग बनेंगे माल फूलों को रक्त पुष्प भी कहा जाता है जिनमें केवल कनेर और गुड़हल के फूल आते हैं और मित्रों इसी दिन अगर बेरोजगार व्यक्ति रात को ये उपाय करें तो निश्चित ही उसे रोजगार प्राप्त  होगा इसके लिए 1 नींबू को साफ करके सुबह से ही अपने घर के मंदिर में रख दें फिर रात  के समय इसे 7 बार बेरोजगार व्यक्ति के सिर से उतार लें और 4 बराबर भागों में काट लें फिर एक चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में इसको फेंक दें इस उपाय से बेरोजगार व्यक्ति को लाभ की संभावना बनेगी प्रिय मित्रों कोरोना के चलते कई बंधु बेरोजगार हुए हैं तो उनको यह उपाय जरूर करना चाहिए ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो , इसी दिन काली चींटियों को शकर मिला हुआ आटा खिलाएं तवे पर आटे को गर्म करके उसमें शक्कर मिलाएं यानी कच्चे आटे को पकाना या एक गोला ले लीजिए नारियल का गोला अंदर वाला उसमें भर के चीटियों के बिल के पास रख दें या उसको चीटियों के बिल के पास ऊपर थोड़ा सा छेद करके जमीन में कुछ गहराई में डाल दे जहां चीटियां हो ऐसा करने से आपके पाप-कर्मों का क्षय होगा और पुण्य-कर्म उदय होंगे यही पुण्य-कर्म आपकी मनोकामना पूर्ति में सहायक होंगे मित्रों को ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हो समय कि आपके पास कमी है तो इसी दिन शाम को पीपल अथवा बरगद के पेड़ की पूजा करें तथा वहां देसी घी का दीपक जलाएं मां बाबा आपकी मनोकामनाएं जरुर पूरी करेंगे यह सब आपकी आस्था और विश्वास पर निर्भर है मित्रों इसी दिन यानी सोमवती अमावस्या के दिन घर के मंदिर अथवा ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाएं इसमें रूई के स्थान पर लाल रंग के धागे यानी आप लाल रंग का कलावा राजस्थानी भाषा में लच्छा इस्तेमाल कर सकते हैं तथा केसर का उपयोग करें, इससे देवी मां लक्ष्मी कृपा मिलना शुरू हो जाएगी यह हमारा विश्वास है नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी आप सभी को सनातनी नव वर्ष संमत 2078 और नवरात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई मां बाबा आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें यही महासभा से हमारी प्रार्थना हैं
एक बार फिर से इस दिन क्या-क्या करना है देख लीजिए सुबह सुबह
सोमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें
इसके बाद सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें
 इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा रें
 दान-दक्षिणा भी करें.
इस दिन स्नान करने के बाद भगवान शिव और पार्वती के साथ तुलसी पूजा का भी महत्व बताया गया है 
पितरों का तर्पण करें  दान दें भूखे को भोजन कराएं पीपल पूजा करें दीपक जलाएं काले कुत्ते को रोटी खिलाएं चींटियों को आटा खिलाएं और जो ऊपर दिए गए उपाय पर आपको विश्वास है श्रद्धा है अपने पितरों में और भगवान में तो जरूर करें सफलता आपके साथ होगी जय मां बाबा की 🙏🌹
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश

सोमवती अमावस्या कब से है और शुभ मुहूर्त कब से है भाग एक,


#सोमवती #अमावस्या कब से है और शुभ मुहूर्त कब से है 

मित्रों जैसे आप सभी जानते हैं कि सनातन नव वर्ष आरंभ होने वाला है इस साल की यह आखरी अमावस्या है और सोमवती अमावस्या भी है इस नववर्ष में यही एक सोमवती अमावस्या आएगी ,धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस पावन दिन पितरों का तर्पण करने से उनका विशेष आर्शीवाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है,
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व होता है
सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा- अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं इस पावन दिन माता लक्ष्मी की पूजा करना भी शुभ होता है
इस सनातनी नववर्ष में और साल 2021 में केवल एक ही अमावस्या ऐसी पड़ रही है जो सोमवती अमावस्या है इसलिए 12 अप्रैल वाली सोमवती अमावस्या का महत्व काफी अधिक माना जा रहा है, ऐसी मान्यता है कि अगर सोमवती अमावस्या पर कोई उपवास करता है तो उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो सकती है  इस दिन पितरों का तर्पण भी किया जाता है ऐसा करने से व्यक्ति को अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है 
इस दिन सुबह जल्दी उठकर क्या करना चाहिए वह भी जान ले नादान बालक की कलम से बस इतना ही बाकी फिर कभी,
सोमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें
इसके बाद सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें
इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा रें
दान-दक्षिणा भी करें.
इस दिन स्नान करने के बाद भगवान शिव और पार्वती के साथ तुलसी पूजा का भी महत्व बताया गया है,
मित्रों पुरा विस्तार से बता रहे हैं हो सकता है इस पोस्ट के दो भाग  करने पड़े जिसमें उपाय और मुहूर्त समय सारी चीजें दो भागों में विभाजित हो जाए और आप आसानी से हम को समझ सके,
ब्रह्म मुहूर्त- 04:17 ए एम, अप्रैल 13 से 05:02 ए एम, अप्रैल 13 तक
अभिजित मुहूर्त- 11:44 ए एम से 12:35 पी एम तक
विजय मुहूर्त- 02:17 पी एम से 03:07 पी एम तक
गोधूलि मुहूर्त- 06:18 पी एम से 06:42 पी एम तक
अमृत काल- 08:51 ए एम से 10:37 ए एम तक
निशिता मुहूर्त- 11:46 पी एम से 12:32 ए एम, अप्रैल 13 तक
राहुकाल- 07:23 ए एम से 08:59 ए एम तक
यमगण्ड- 10:34 ए एम से 12:10 पी एम तक
गुलिक काल- 01:45 पी एम से 03:20 पी एम तक
दुर्मुहूर्त- 12:35 पी एम से 01:26 पी एम तक
गण्ड मूल- पूरे दिन
पंचक- 05:48 ए एम से 11:30 ए एम तक
इस साल सोमवती``अमावस्या``` के दिन वैधृति और विष्कंभ योग बन रहा है। खास बात यह है कि पूरे साल में सिर्फ एक ही *सोमवती* अमावस्या पड़ रही है
सोमवती अमावस्या के दिन वैधृति योग दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगा इसके बाद विष्कुम्भ योग लग जाएगा
#विष्कुम्भ योग : _ज्योतिष_ शास्त्र में इस योग को विष से भरा हुआ घड़ा माना जाता है इसीलिए इसका नाम विष्कुम्भ योग है। जिस तरह से विष का सेवन करने पर सारे शरीर में धीरे-धीरे विष भर जाता है वैसे ही इस योग में किया गया कोई भी कार्य विष के समान होता है। यानी इस योग में किए गए कार्य का फल अशुभ होता है
#वैधृति योग _यह_ योग स्थिर कार्यों हेतु ठीक है परंतु यदि कोई भाग-दौड़ वाला कार्य अथवा यात्रा आदि करनी हो तो इस योग में नहीं करनी चाहिए मित्रों अगले भाग में कुछ उपाय देंगे नादान बालक की _कलम_ से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,,,
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश

Tuesday, April 6, 2021

इस साल का पहला चंद्र ग्रहण कब है,,,???

इस साल का पहला चंद्र ग्रहण कब है,,,???

सनातनी नववर्ष पंचांग के अनुसार इस वर्ष का पहला ग्रहण चंद्र ग्रहण 26 मई 2021 को लगेगा, 

इस चंद्र ग्रहण को उपछाया ग्रहण कहा जा रहा है, उपछाया चंद्र ग्रहण की स्थिति में पृथ्वी, चंद और सूर्य एक सीधी लाइन में नहीं होते हैं,  इसीलिए इसे उपछाया चंद्र ग्रहण कहते हैं,  इसलिए 26 मई 2021 को लगने जा रहे चंद्र ग्रहण को उपछाया चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है,

क्या इस ग्रहण में सूतक काल की स्थिति रहेगी,,????
मान्यता है कि उपछाया चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल मान्य नहीं होता है, पूर्ण चंद्र ग्रहण की स्थिति में सूतक काल चंद्र ग्रहण लगने से 9 घंटे पूर्व आरंभ होता है, उपछाया चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल के नियमों का पालन नहीं किया जाता है, इसलिए 26 मई को लगने जा रहे चंद्र ग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होगा, यही ध्यान रखें नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,,
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश

Saturday, April 3, 2021

नवरात्रि कब से है और मुहूर्त कब से हैं कब से पूजा शुरू करें नवरात्रि नवरात्रि में

मित्रों आप सभी जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि आने वाली है और इसी के साथ सनातनी नववर्ष का भी आगमन हो‌ जायेगा 
सनातन धर्म के पवित्र पर्वों में से एक नवरात्रि भी है चैत्र माह की शुरुआत हो चुकी है और कुछ ही दिनों में चैत्र माह की नवरात्रि भी शुरू होने वाली है

यह त्यौहार पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है यह नो दिनों तक चलता है और यह नवदुर्गा और सिद्ध महा विधा को समर्पित होता है पर इन नो‌ दिनो के दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की उपासना की जाती है और सिद्ध महा विधा और अपने अपने इष्ट देव या देवी पुजा साधना की जाती है ओर ‌साथ ही व्रत भी किए जाते हैं एक वर्ष में चार बार नवरात्रि आती हैं इनमें से दो गुप्त नवरात्रि होती हैं तो दो  सार्वजनिक ये तो हम हमारी हर नवरात्रि की पोस्ट बताते ही है इनके अलावा एक पांचवी नवरात्रि भी होती है वो है  शाकंभरी नवरात्रि जो कर मास यानि जनवरी की शुरुआत में आती है तो मित्रों अब आते हैं आने वाली नवरात्रि पर,,,
चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल से शुरू होने जा रहे हैं। इनका समापन 22 अप्रैल को होगा तो आइए जानते हैं नवरात्रि के नौ (9) दिनों के बारे में ,
चैत्र नवरात्रि के लिये घटस्थापना चैत्र प्रतिपदा को होती है जो कि हिन्दु कैलेण्डर का पहला दिवस होता है अतः भक्त लोग साल के प्रथम दिन से अगले नौ दिनों तक माता की पूजा कर वर्ष का शुभारम्भ करते हैं चैत्र नवरात्रि को वसन्त नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है  भगवान राम का जन्मदिवस चैत्र नवरात्रि के अन्तिम दिन पड़ता है और इस कारण से चैत्र नवरात्रि को राम नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है 
वहीं इसी दिन से सनातन धर्म का नया साल यानि नवसंवत्सर 2078 शुरु होगा, इस नवसंवत्सर के राजा और मंत्री दोनों ही मंगल रहेंगे तो आप सभी को नववर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई
चैत्र नवरात्रि 2021 घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा,,
इस बार चैत्र नवरात्रि का आरंभ मंगलवार के दिन से होगा जिसकी वजह से मां घोड़े पर सवार होकर आएंगी इससे पहले शारदीय नवरात्रि पर भी मां घोड़े पर सवार होकर आई थीं देवी मां जब भी घोड़े पर आती हैं तो युद्ध की आशंका बढ़ जाती है 
घटस्थापना विधि 
सबसे पहले एक पात्र लें उस पात्र में मिट्टी बिछाएं फिर पात्र में रखी मिट्टी पर जौ के बीज डालकर उसके ऊपर मिट्टी डालें अब इसमें थोड़े-से पानी का छिड़काव करे अब एक कलश लें इस पर स्वस्तिक बनाएं फिर मौली या कलावा बांधें इसके बाद कलश को गंगाजल और शुद्ध जल से भरें इसमें साबुत सुपारी, फूल और दूर्वा डालें साथ ही इत्र, पंचरत्न और सिक्का भी डालें इसके मुंह के चारों ओर आम के पत्ते लगाएं। कलश के ढक्कन पर चावल डाले देवी का ध्यान करते हुए कलश का ढक्कन लगाएं अब एक नारियल लेकर उस पर कलावा बांधें कुमकुम से नारियल पर तिलक लगाकर नारियल को कलश के ऊपर रखें। नारियल को पूर्व दिशा में रखें कलश पर स्वास्तिक का चिह्न जरूर बनाएं,,,
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त-

दिन- मंगलवार
तिथि- 13 अप्रैल 2021
शुभ मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक।
अवधि- 04 घंटे 15 मिनट
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन शुभ योग

- विष्कुम्भ योग 12 अप्रैल की दोपहर 2:27 बजे से 13 अप्रैल की दोपहर 3:16 मिनट तक

- प्रीति योग 13 अप्रैल की दोपहर 3:16 बजे 14 अप्रैल की दोपहर 4:15 मिनट तक
नवरात्र में महानिशा पूजा सप्तमी युक्त अष्टमी या मध्य रात्रि में निशीथ व्यापिनी अष्टमी में की जाती है. इस साल चैत्र नवरात्रि में महानिशा पूजा 20 अप्रैल को की जाएगी, साधक गण दशमी को भैरव पुजा करके नवरात्रि की  पुर्णाआहुति प्रदान कर‌ सकते हैं नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,,, कैसे जानते हैं 9 दिन में किस-किस मां की किस किस दिन पूजा होगी,
13 अप्रैल, मंगलवार,  नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है इस दिन कलश स्थापना यानी घटस्थापना की जाती है मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति पर मां का आशीर्वाद बना रहता है,
14 अप्रैल, बुधवार,नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है इनकी पूजा करने से व्यक्ति में तप, त्याग, सदाचार और संयम की भावना जागृत होती है,
15 अप्रैल, गुरुवार, नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है इनकी पूजा करने से वाणी मधुर होती है,
16 अप्रैल, शुक्रवार,नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा को समर्पित है इनकी पूजा करने से रोग-शोक दूर होते हैं और आयु और यश में वृद्धि होती है,,
17 अप्रैल, शनिवार, नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है इनकी पूजा करने से मोक्ष के द्वारा खुल जाते हैं,,
18 अप्रैल, रविवार, नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित होता है, इनकी पूजा करने से दुश्मन निर्बल हो जाते हैं,
19 अप्रैल, सोमवार, नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है इनकी पूजा करने से व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है,
20 अप्रैल, मंगलवार, नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित होता है इनकी पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है और सुखों में वृद्धि होती है,
21 अप्रैल, बुधवार, नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है इनकी पूजा करने से व्यक्ति को समस्त नव-निधियों की प्राप्ति होती है
मित्रों जैसा मैंने पहले भी नवरात्रि में राशियों के बारे में मंत्र और कुछ उपाय दिए हैं आप सभी से निवेदन है फिर से एक बार देख लीजिए उपाय मंत्र पहले भी तेरी थी और भी आकर दे देंगे नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,,
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश

Sunday, March 28, 2021

होली हुई तब जानिये, पिचकारी गुरुज्ञान की लगे |

होली हुई तब जानिये, पिचकारी गुरुज्ञान की लगे |

सब रंग कच्चे जाय उड़, एक रंग पक्के में रंगे |
अर्थात 

पक्का रंग क्या है ? पक्का रंग है ‘हम आत्मा है’ और ‘हम दु:खी है, हम सुखी है, हम अमुक जाति के है ....’ - यह सब कच्चा रंग है | यह मन पर लगता है लेकिन इसको जाननेवाला साक्षी चैतन्य का पक्का रंग है | एक बार उस रंग में रँग गये तो फिर विषयों का रंग जीव पर कतई नहीं चढ़ सकता |
होली का पर्व भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद की याद में मनाया जाता है। प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लिया था। नृसिंह भगवान तंत्र साधना के लिए भी जाने जाता हैं। होली के अवसर पर नृसिंह स्तोत्र का पाठ करें होलिकाग्नि में नारियल डालें तो यह धन के लिए शुभ होता है। इससे कर्ज के बोझ से मुक्ति मिलती है।
गृह क्लेश से निजात पाने और सुख-शांति के लिए होलिका की अग्नि में जौ-आटा चढ़ाएं। इसके अलावा होलिका दहन के दूसरे दिन राख लेकर उसे लाल रुमाल में बांधकर पैसों के स्थान पर रखने से बेमतलब के खर्च रुक जाते हैं।
दांपत्य जीवन में शांति के लिए होली की रात उत्तर दिशा में एक पाट पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर मूंग, चने की दाल, चावल, गेहूं, मसूर, काले उड़द एवं तिल के ढेर पर नवग्रह यंत्र स्थापित करें। इसके बाद केसर का तिलक कर घी का दीपक जलाएं और नवग्रह एवं कामदेव रति की पूजा करें।
जल्द विवाह के लिए होली के दिन सुबह एक पान के पत्ते पर साबूत सुपारी और हल्दी की गांठ लेकर शिवलिंग पर चढ़ाएं और बिना पीछे मुड़े घर आ जाएं। अगले 21 दिन यह उपाय करते रहें।
होली की रात “ॐ नमो धनदाय स्वाहा” मंत्र के जाप से धन में वृद्धि होती है। इसके अलावा 21 गोमती चक्र लेकर होलिका दहन की रात शिवलिंग पर चढ़ाने से व्यापार में वृद्धि और लाभ होता है ऐसी मान्यताएं कहती हैं।
होली की रात 12 बजे किसी पीपल वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाने और सात बार परिक्रमा करने से तमाम तरह की बाधाएं दूर होती हैं। इसके अलावा उधार की रकम वापस पाने के लिए होलिका दहन स्थल पर जिसने कर्ज लिया है उसका नाम अनार की लकड़ी से लिखकर होलिका से धन वापसी करने की प्रार्थना करने पर धन की वापसी जल्दी हो जाती है ऐसी मान्यताएं कहती हैं।

होली पर कुछ ओर करने योग्य टोटके,

यदि किसी ने आपके व्यवसाय अथवा निवास पर कोई तंत्र क्रिया करवा रखी हो, तो होली की रात्रि में जिस स्थान पर होलिका दहन हो, उस स्थान पर एक गड्ढा खोसकर उसमें 11 अभिमंत्रित कौड़ियाँ दबा दें । अगले दिन कौड़ियों को निकालकर व्यवसाय स्थल की मिट्टी के साथ नीले वस्त्र में बांधकर बहते जल में प्रवाहित कर दें । तंत्र क्रिया नष्ट हो जाएगी ।

यदि आपके कार्यों में लगातार बाधाएँ आ रही हो, अथवा घर में अचानक ही अप्रिय घटनाएँ घटित होती हों, जिसके कारण बड़ी हानि उठानी पड़ती हो अथवा आपको लगता हो कि आपके घर पर कोई ऊपरी चक्कर है अथवा किसी ने कोई बन्दिश करवा दी है, तो आप इस उपाय के माध्यम से उपरोक्त सभी समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं ।
होली की रात्रि में घर में किसी शुद्ध स्थान पर गोबर से लीपकर उसपर अष्टदल बनाएं । फिर एक बाजोट रखकर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर अभिमंत्रित ३ लघु नारियल तथा श्री हनुमान यंत्र को स्थान दें । इसके बाद एक पात्र में थोड़ा-सा गाय का कच्चा दूध रखें तथा अलग से पंचगव्य रखें । फिर नारियल व यंत्र पर रोली से तिलक करके प्रभु श्री हनुमान् जी से अपनी समस्या के समाधान का निवेदन करें और गुड़ का भोग लगाएँ ।
तत्पश्चात् शुद्ध घी के दीपक के साथ चन्दन की अगरबत्ती व गुग्गुल की धूप अर्पित करें । फिर ताँबे की प्लेट पर रोली से “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्” मंत्र लिखकर एक सामान्य नारियल को फोड़कर (पधारकर) उसके पानी को अपने साधना स्थल पर छिड़क दें और नारियल को प्लेट के पास रख दें । फिर मूंगे की माला से “ॐ घण्टाकर्णो महावीर सर्व उपद्रव नाशय कुरु-कुरु स्वाहा” मंत्र की तीन माला का जप करें । मंत्र समाप्त होने के बाद प्रणाम करके बाहर आ जाएँ । गाय के दूध को अपने घर के चारों ओर घुमते हुए धारा के रुप में बिखराकर कवच जैसा बना दें और पंचगव्य से मुख्यद्वार को लीप दें ।
अगले दिन स्नान करके प्रभु को भोग व धूप-दीप अर्पत करके घण्डाकर्ण मंत्र की पुनः तीन माला का जप करें । इस प्रकार यह क्रिया लगातार 11 दिन तक करें । 11वें दिन मंत्र जप के बाद 14-18 वर्ष के किसी लड़के को भोजन कराकर दक्षिणा और वस्त्र आदि दें । फिर उसका चरण स्पर्श कर विदा करें । उसके जाने के बाद लाल वस्त्र पर लघु नारियल, यंत्र और टूटा नारियल रखकर एक पोटली का रुप दें । उसको किसी लकड़ी के डिब्बे में रखकर अपने घर में कहीं भी गड्ढा खोदकर दबा दें ।
अब ताँबे की जिस प्लेट में आपने प्रभु का नाम लिखा था, उसमें गंगाजल डालकर धो लें और उस जल को अपने घर में छिड़क दें । यदि आप किसी फ्लैट में रहते हों, जहाँ आपको पोटली दबाने का स्थान न मिले, तो अपने फ्लैट के पास किसी कच्चे स्थान पर दबा सकते हैं । इस उपाय से कुछ ही समय बाद आप चमत्कारिक परिवर्तन अनुभव करेंगे । यदि यह उपाय होली पर नहीं कर पाते, तो शुक्ल पक्ज़ के प्रथम मंगलवार से आरम्भ करें । सभी समस्या दूर हो जायेगी ।

व्यवसाय में सफलता के लिए आप जब होली जल जाए, तब आप होलिका की थोड़ी-सी अग्नि ले आएं । फिर अपने दुकान एवं व्यवसाय स्थल के आग्नेय कोण में उस अग्नि की मदद से सरसों के तेल का दीपक जला दें । इस उपाय से आपके दुकान व व्यवसाय स्थल की सारी नकारात्मक ऊर्जा जलकर समाप्त हो जाएगी । इससे आपके दुकान एवं व्यवसाय में सफलता मिलेगी ।

 यदि आपके परिवार अथवा परिचितों में कोई व्यक्ति अधिक समय से अस्वस्थ हो, तो उसके लिए यह उपाय लाभकारी होगा । होली की रात्रि में सफेद वस्त्र में 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र, नागकेसर के 21 जोड़े तथा 11 धनकारक कौड़ियाँ बांधकर कपड़े पर हरसिंगार तथा चन्दन का इत्र लगाकर रोगी पर से सात बार उसारकर किसी शिव मन्दिर में अर्पित करें । व्यक्ति तुरन्त स्वस्थ होने लगेगा । यदि बिमारी गम्भीर हो, तो यह क्रिया शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से आरम्भ करके लगातार 7 सोमवार को करें ।

यदि आप अपना कोई विशेष कार्य सिद्ध करना चाहते हों अथवा कोई व्यक्ति गम्भीर रुप से रोगग्रस्त हो, तो होली की रात्रि में किसी काले कपड़े में काली हल्दी तथा खोपरे में बूरा भरकर पोटली बनाकर पीपल के वृक्ष के नीचे गड्ढा खोदकर दबा दें । फिर पीपल के वृक्ष को आटे से निर्मित सरसों के तेल का दीपक, धूप-अगरबत्ती तथा मीठा जल अर्पित करें । इसके बाद आठ अभिमंत्रित गोमती चक्र पीपल पर ही छोड़कर पीछे देखे बिना घर आ जाएं । शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को जाकर सिर्फ उपरोक्त प्रकार से दीपक व धूप-अगरबत्ती अर्पित करके छोड़े गए गोमती चक्र ले आएं । जब तक कार्य सिद्ध न हो, वह गोमती चक्र अपनी जेब में रखें अथवा जो व्यक्ति रोग-ग्रस्त हो, उसके सिरहाने रख दें । कुछ ही समय में आपके कार्य सिद्ध होने लगेंगे अथवा अस्वस्थ व्यक्ति स्वस्थ लाभ करेगा ।

यदि आप आर्थिक संकट से ग्रस्त हैं, तो जिस स्थान पर होलिका जलती हो, उस स्थान पर गड्ढा खोदकर अपने मध्यमा अंगुली के लिए बनने वाले छल्ले की मात्रा के अनुसार चाँदी, पीतल व लोहा दबा दें । फिर मिट्टी से ढककर लाल गुलाल से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं । जब आप होलिका पूजन को जाएं, तो पान के एक पत्ते पर कपूर, थोड़ी-सी हवन सामग्री, शुद्ध घी में डुबोया लौंग का जोड़ा तथा बताशै रखें । दूसरे पान के पत्ते से उस पत्ते को ढक दें और सात बार परिक्रमा करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें । परिक्रमा समाप्त होने पर सारी सामग्री होलिका में अर्पित कर दें तथा पूजन के बाद प्रणाम करके घर वापस आ जाएं । अगले दिन पान के पत्ते वाली सारी नई सामग्री ले जाकर पुनः यही क्रिया करें । जो धातुएं आपने दबाई हैं, उनको निकाल लाएं । फिर किसी सुनार से तीनों धातुओं को मिलाकर अपनी मध्यमा अंगुली के माप का छल्ला बनवा लें । 15 दिन बाद आने वाले शुक्ल पक्ष के गुरुवार को छल्ला धारण कर लें । जब तक आपके पास यह छल्ला रहेगा, तब तक आप कभी भी आर्थिक संकट में नहीं आएंगे ।

यदि आप किसी प्रकार की आर्थिक समस्या से ग्रस्त हैं, तो होली पर यह उपाय अवश्य करें । होली की रात्रि में चन्द्रोदय होने के बाद अपने निवास की छत पर अथवा किसी खुले स्थान पर आ जाएं । फिर चन्द्रदेव का स्मरण करते हुए चाँदी की एक प्लेट में सूखे छुहारे तथा कुछ मखाने रखकर शुद्ध घी के दीपक के साथ धूप एवं अगरबत्ती अर्पित करें । अब दूध से अर्घ्य प्रदान करें । अर्घ्य के बाद कोई सफेद प्रसाद तथा केसर मिश्रित साबूदाने की खीर अर्पित करें । चन्द्रदेव से आर्थिक संखट दूर कर समृद्धि प्रदान करने का निवेदन करें । बाद में प्रसाद और मखानों को बच्चों में बांट दें । आप प्रत्येक पूर्णिमा को चन्द्रदेव को दूध का अर्घ्य अवश्य दें । कुछ ही दिनों में आप अनुभव करेंगे कि आर्थिक संकट दूर होकर समृद्धि बढ़ रही है ।

होली के दिन अपने घर पर अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान में सूर्य डूबने से पहले धूप-दीप करें । घर व प्रतिष्ठान की सारी लाइट जला दें तथा मन्दिर के सामने माँ लक्ष्मी का कोई मंत्र 11बार मानसिक रुप से जपें । तत्पश्चात् घर अथवा प्रतिष्ठान की कोई भी कील लाकर जिस स्थान पर होली जलनी हो, वहां की मिट्टी में दबा दें । अगले दिन उस कील को निकालकर मुख्य-द्वार के बाहर की मिट्टी में दबा दें । इस उपाय से आपके निवास अथवा प्रतिष्ठान में किसी प्रकार की नकारात्मक शक्ति का प्रवेश नहीं होगा । आप आर्थिक संकट में भी नहीं आएंगे ।
यदि आप पर किसी प्रकार का कोई कर्ज है, तो होली की रात्ति में यह उपाय करके कर्ज से मुक्ति पा सकते हैं । जिस स्थान पर होली जलनी हो, उस स्थान पर एक छोटा-सा गड्ढा खोदकर उसमें तीन अभिमंत्रित गोमती चक्र तथा तीन कौड़ियाँ दबा दें । फिर मिट्टी में लाल गुलाल व हरा गुलाल मिलाकर उस गड्ढे को भरकर उसके ऊपर पीले गुलाल से कर्जदार का नाम लिख दें । जब होली जले तब आप पान के पत्ते पर 3 बतासे, घी में डुबोया एक जोड़ा लौंग, तीन बड़ी इलायची, थोड़े-से काले तिल व गुड़ की एक डली रखकर तथा सिन्दूर छिड़ककर पान के पत्ते से ढक दें ।
अब सात परिक्रमा करते हुए प्रत्येक बार निम्न मंत्र का जप करके एक-एक गोमती चक्र होलिका में डालतेजाएं - “ल्रीं ल्रीं फ्रीं फ्रीं अमुक कर्ज विनश्यते फट् स्वाहा” यहां अमुक के स्थान पर कर्जदार का नाम लें । परिक्रमा करने के बाद प्रणाम करके वापस आ जाएं । अगले दिन जाकर सर्वप्रथम तीन अगरबत्ती दिखाकर गड्ढे में से सामग्री निकाल लें और थोड़ी-सी गुलाल मिश्रित मिट्टी भी ले लें । फिर सभी को किसी नदी में प्रवाहित कर दें । कुछ ही समय में कर्ज मुक्ति के मार्ग निर्मित होने लगेंगे ।

आपने देखा होगा कि किसी निवास या व्यवसाय स्थल पर अचानक ही कुछ अजीबो-गरीब घटनाएं घटित होती हैं अथवा उस स्थान पर जो व्यक्ति प्रवेश करता है, उसके मन में डर के साथ अजीब-सी घुटन होने लगती है अथवा बिना बात के नुकसान या झगड़े होने लगते हैं । यदि आपके साथ ऐसा कुछ होता है, तो समझ जाएं कि आप पर अथवा उस स्थान पर किसी प्रकार की कोई ऊपरी बाधा का प्रभाव है । जब तक आप उस बाधा से मुक्ति नहीं पा लेंगे, तब तक आप ऐसे ही परेशान रहेंगे । इस बाधा से मुक्ति पाने के लिए आप यह उपाय अवश्य करें ।
जिस स्थान पर यह बाधा है, उस स्थान के सर्वाधिक निकट जो भी वृक्ष हो, उसको देखें । यदि पीपल का वृक्ष हो, तो बहुत अच्छा है । होली के पूर्व शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को अंधेरा होने पर आप उस स्थान पर जाएं, जिस स्थान पर वृक्ष है । फिर ताँबे के एक पात्र में दूध में थोड़ी-सी शक्कर मिश्रित करें और खोए के तीन लड्डू, थोड़ी-सी साबूदाने की खीर, 11 हरी इलायची, 21 बताशे, दूध से बनी थोड़ी-सी कोई भी अन्य मिठाई तथा एक सूखे खोपरे में बूरा भरकर उसके मध्य लौंग का एक जोड़ा रखकर उस वृक्ष की जड़ में अर्पित करें । साथ ही 21 अगरबत्ती भी अर्पित करें । यही क्रिया किसी मन्दिर में लगे पीपल के वृक्ष पर भी करें । प्रथम बार के प्रयोग से ही आप परिवर्तन अनुभव करेंगे । यदि समस्या अधिक है, तो यह क्रिया 3, 5, 7 या 11 सोमवार तक करें । आप निश्चित रुप से ऊपरी बाधा से मुक्ति पा लेंगे । परन्तु इतना ध्यान रखें कि बाधा से मुक्ति के बाद आप प्रभु श्री हनुमान् जी के नाम पर कुछ दान अवश्य करें ।

यदि आपको ऐसा लगे कि आपके निवास अथवा व्यवसाय स्थल पर कोई ऊपरी बाधा है, तो आप इस उपाय द्वारा उस बाधा से मुक्ति पा सकते हैं । होली की रात्रि में गाय के गोबर से इक दीपक बनाएं । इसके बाद उसमें सरसों का तेल, लौंग का जोड़ा, थोड़ा-सा गुड़ और काले तिल डाल दें । फिर दीफक को अपने मुख्य द्वार के बिल्कुल मध्य स्थान पर रख दें । द्वार की चौखट के बाहर आठ सौ ग्राम काली साबूत उड़द को फैला दें ।
अब द्वार के अन्दर आकर दीपक को जला दें और द्वार बन्द कर दें । अगले दिन ठण्डा दीपक उठाकर घर के बाहर रख दें और झाड़ू की मदद से सारी उड़द को समेट लें । फिर ठण्डा दीपक और उड़द को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें । तत्पश्चात् घर वापस आ जाएं तथा हाथ-पैर धोकर ही घर में प्रवेश करें । इसके बाद आप अगले शनिवार से पुनः यही क्रिया लगातार तीन शनिवार करें । यदि आपको लगे कि बाधा अधिक बड़ी है, तो अगले शुक्ल पक्ष से पुनः तीन बार यह क्रिया दोहराएं । कार्य सिद्ध हो जाने पर शनिवार को ही किसी भी पीपल के वृक्ष में मीठे जल के साथ धूप-दीप अर्पित करें । इस उपाय द्वारा आप ऊपरी बाधा से मुक्ति पा लेंगे ।
‘होलिकायै नमः
होली वैसे तो रंगों का त्योहार है लेकिन हमारे सनातन धर्म में होली के पर्व का विशेष धार्मिक महत्व है। लेकिन होली की रात्रि यंत्र निर्माण, तंत्र साधना एवं मंत्र सिद्धि के लिए एक श्रेष्ठ मुहूर्त होती है। तंत्र क्रियाओं की प्रमुख चार रात्रियों में से एक रात ये भी है। होली की रात्रि को संपन्न की गई साधना शीघ्र सफल व फलदायी होती है।  शास्त्रोक्त मान्यतानुसार होलिकादहन भद्रा के उपरांत ही करना चाहिए। भद्रा में होलिकादहन करने से राज्य, राजा व प्रजा पर संकट आते हैं प्रतिपदा, चतुर्दशी और भद्राकाल में होली दहन के लिए सख्त मनाही है। फाल्गुन पूर्णिमा पर भद्रा रहित प्रदोषकाल में होली दहन को श्रेष्ठ माना गया है। इसी के साथ ही होलिका दहन में आहुति देना भी आवश्‍यक माना गया है। होलिका में कच्चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्तधान्य, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का कुछ भाग गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर. आदि की आहुति दी जाती है 
अगर कोई व्यक्ति पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ होली की रात पूजा-पाठ या कोई उपाय करता है तो उसकी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होने के योग बन सकते हैं होली की सुबह 11 बिल्व पत्रों पर सफेद चंदन की बिंदी लगाएं शिवलिंग पर चढ़ाएं। शिवजी को खीर का भोग लगाएं। इससे शिवजी की कृपा मिल सकती है।
 
 प्राचीन समय में होली के पर्व पर होलिकादहन के उपरांत उठते हुए धुएं को देखकर भविष्य कथन किया जाता था। यदि होलिकादहन से उठा धुआं पूर्व दिशा की ओर जाता है तब यह राज्य, राजा व प्रजा के लिए सुख-संपन्नता का कारक होता है। यदि होलिका का धुआं दक्षिण दिशा की ओर जाता है तब यह राज्य, राजा व प्रजा के लिए संकट का संकेत करता है। यदि होली का धुआं पश्चिम दिशा की ओर जाता है तब राज्य में पैदावार की कमी व अकाल की आशंका होती है। जब होलिकादहन का धुआं उत्तर दिशा की ओर जाए तो राज्य में पैदावार अच्छी होती है और राज्य धन-धान्य से भरपूर रहता है। लेकिन यदि होली का धुआं सीधा आकाश में जाता है तब यह राजा के लिए संकट का प्रतीक होता है अर्थात राज्य में सत्ता परिवर्तन की संभावना होती है, ऐसी मान्यता है।
‘वन्दितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्राणा शंकरेण च। अतस्त्वं पाहि नो देवि विभूतिः भूतिदा भव।।

 
ज्योतिषशास्त्र में भी होली की रात का विशेष महत्व है, क्योंकि इस रात में किए गए उपायों और शुभ काम करने से बहुत ही जल्दी शुभ फल प्राप्त होते हैं। ज्‍योतिष और हिंदू धर्म में होली का बहुत महत्‍व हैं। होलिका दहन के साथ ही होली के पर्व की शुरुआत हो जाती हैं। इस रात किए गए कुछ खास उपायों से आप अपने ज्‍योतिषीय समस्‍याओं को दूर कर हर समस्‍या से निजात पा सकते हैं। इस रात में किए गए उपायों और शुभ काम करने से बहुत ही जल्दी शुभ फल प्राप्त होते हैं।
होली दहन के समय परिवार के सभी सदस्यों को होलिका की तीन या सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करते समय होलिका में चना, मटर, गेहूं, अलसी जैसे अन्‍न जरुर चढ़ाए। होलिका दहन के बाद होली खेलने से पहले किसी मंदिर में देवी-देवताओं को गुलाल चढ़ाएं और परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें। होली दहन के समय होलिका में कर्पूर भी डालें।
होली पर सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि के बाद किसी शिव मंदिर जाएं। एक पान पर साबूत सुपारी और हल्दी की गांठ रखकर शिवजी को चढ़ाएं। शाम को शिवलिंग के पास दीपक जलाएं
सभी मनोकामना की पूर्ति के लिए होली पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद हनुमानजी को पांच लाल फूल चढ़ाएं। इसके बाद रोज सुबह ये उपाय करें। इससे जल्दी ही आपकी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं।
अगर आप धन लाभ पाना चाहते हैं तो होली की रात 12 बजे मुख्य दरवाजे पर गुलाल छिड़कें। दरवाजे की दोनों तरफ दो दोमुखी दीपक जलाएं। दोमुखी यानी दीपक को दो तरफ से जलाना है। जब दीपक बुझ जाए तो दोनों दीपक होलिका दहन में डाल दें।
अगर कोई व्यक्ति बुरी नजर की वजह से लंबे समय से बीमार है और दवाओं का असर नहीं हो रहा है तो होली पर ये उपाय करें। उपाय के अनुसार एक नारियल का गोला लें, उसमें अलसी का तेल भरें और थोड़ा सा गुड़ डालें। इसके बाद बीमार व्यक्ति के शरीर से 7 बार या 11 बार वार लें। वारने के बाद ये नारियल होलिका दहन में डाल दें। इस उपाय से बुरी नजर उतर सकती है।

होलिका दहन की रात को तंत्र साधना होने के कारण आपको ये काम नहीं करने चाहिए सफेद रंग की खाने पीने की चीजों के सेवन से बचना चाहिए। दरअसल इस शाम टोने-टोटके के लिए सफेद खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है। इसलिए इस दिन सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिये। क‍िसी भी तरह के टोटके का प्रयोग सिर पर जल्दी होता है, इसलिए होलिका दहन वाले द‍िन सिर को ढककर रखने की सलाह दी जाती है। टोने-टोटके को प्रभावशाली बनाने के लिए में व्यक्ति के कपड़ों का प्रयोग किया जाता है, इसलिए अपने कपड़ों का ध्यान रखें। इनका कोई भी टुकड़ा इधर उधर न फेंके और न ही इसे अपने से ईर्ष्‍या करने वालों के हाथ लगने दें। अनजानी वस्‍तुओं को न छुएं और ना ही घर में लेकर आएं। होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपड़े में बांधकर काले तिल रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल दें। माना जाता है कि इस तरह आप पर हुआ कोई भी टोटका खत्‍म हो जाएगा।


होलिका दहन में घी से भीगी दो लौंग, एक बतासा और एक पान चढ़ाने से दुश्मनी, संकट और रोगों का नाश होता है। अगर 11 परिक्रमा कर सूखा नारियल होली की अग्नि को अर्पित करें तो घर में लक्ष्मी का आगमन होता है। इस दिन काले कपड़े में काले तिल लेकर जेब में रख लें और होलिका दहन के समय अग्नि में डालें। इससे आप पर किया गया काले जादू का प्रभाव समाप्त हो जाएगा।
रंगोत्सव के दिन हनुमानजी को सिंदूर लगाने एवं 5 लाल पुष्प चढ़ाने से दुर्घटनाओं से रक्षा होती है, अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, मनोकामना शीघ्र पूरी होगी।
‘होली’ अर्थात् हो… ली…। जो हो गया उसे भूल जाओ। निंदा हो ली सो हो ली… प्रशंसा हो ली सो हो ली… तुम तो रहो मस्ती और आनंद में। होली एक ऐसा अनूठा त्यौहार है जिसमें गरीब की संकीर्णता और अमीर का अहं दोनों किनारे रह जाते हैं। दबा हुआ मन एवं अहंकारी मन, दूषित मन और शुद्ध मन – इस दिन ये सारे मन ‘अमन’ होकर प्रभु के रंग में रँगने के लिए मैदान में आ जाते हैं।

यदि अभी भी आप यह निर्णय नहीं कर पा रहे हैं की आपको होली की रात्रि में अथवा चन्द्र ग्रहण में क्या करना चाहिए तो आप भगवान विष्णु के मूल मंत्र का जप करें –

ओम नमोः नारायणाय। ओम नमोः भगवते वासुदेवाय।

होली के दिन विष्णु उपासना को शुभ माना जाता है। होली की सुबह जल्दी उठें। स्नान करें और फिर भगवान विष्णु से संबंधित कोई भी पाठ या मंत्र का  जाप करें। इसके पश्चात विष्णु को पीली मिठाई का भोग लगाएं और सुखद भविष्य की कामना करें
लंबे समय से घर आया धन रुकता नहीं है, धन हानि अधिक हो रही है, लक्ष्मी आपसे नाराज हैं तो होली के दिन एक एकाक्षी नारियल की पूजा करके लाल कपड़े में लपेट कर उसे दुकान में या व्यापार स्थल पर रखें। इसके साथ स्फटिक का शुद्ध श्रीयंत्र रखें। होली पर इस टोटके को करने से दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होगी
होली की भस्म का भगवान शिव से भी खास संबंध है। चूंकि भस्म को भगवान शिव के वस्त्र माना गया है इसलिए वे भक्त द्वारा भस्म अर्पित किए जाने पर प्रसन्न होते हैं। होलिका दहन की भस्म को लगातार 11 दिन भगवान शिव को अर्पित करें। शिव कृपा से जीवन के कई सारे कष्ट दूर हो जाएंगे
बुरी नजर, टोने, किसी व्यक्ति के कराए हुए अनिष्ट कार्य से बचना हो तो होलिका दहन की रात जलती अग्नि के सामने खड़े हो जाएं। हाथ की मुट्ठी में (या कपडे मे ) नमक, लाल मिर्च, राई भरकर अपने ऊपर वार लें। ऐसा करते हुए मन ही मन उस व्यक्ति का नाम लें जिससे आप बचना चाहते हैं और फिर पूरी ताकत से मुट्ठी में लिया सामान अग्नि की ओर फेंक दें

जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश

होली पर करें तंत्र-मंत्र की सिद्धियाँ और जाने टोने-टोटके

होली पर करें तंत्र-मंत्र की सिद्धियाँ और जाने टोने-टोटके


दीपावली की तरह होली भी बहुत महत्वपूर्ण है इस मौके पर भी तंत्र-मंत्र  ,वैदिक सिद्धि और टोने-टोटके की सिद्धियां की जातीं है जो कि आम व्यक्ति नहीं जानते हैं इस अवसर पर की जाने वाली साधनाएं बहुत कम लोग ही जानते हैं। अधिकांश लोग जब होली के हुडदंग में डूबे होते हैं और चारो तरफ मस्ती का आलम होता है, तब गुमनाम और सुनसान जगहों पर तंत्र-मंत्र से टोटकों की होली खेली जा रही होती है। इस होली में लाल, हरे, नीले, पीले रंग नहीं बल्कि देशी पान के पत्ते, काले तिल, सिंदूर, कपूर, नारियल, नीबू, लाल मिर्च और भी बहुत सारी पूजा सामग्री होती हैं। तांत्रिकों की दुनिया में  होली पर भी टोने-टोटके की परंपरा चल पडी है। होलिका दहन के अवसर के समय को तांत्रिक सिद्धि का उचित समय मानते हैं। 
तंत्र के आदि गुरु भगवान् शिव माने जाते है और वे वास्तव में देवों के देव महादेव है। तंत्र शास्त्र का आधार यही है की व्यक्ति का ब्रह्म से साक्षात्कार हो जाये और उसका कुण्डलिनी जागरण हो तथा तृतीय नेत्र (Third Eye) एवं सहस्रार जागृत हो।

भगवान् शिव ने प्रथम बार अपना तीसरा नेत्र फाल्गुन पूर्णिमा होली के दिन ही खोला था और कामदेव को भस्म किया था। इसलिए यह दिवस तृतीय नेत्र जागरण दिवस है और तांत्रिक इस दिन विशेष साधना संपन्न करते है जिससे उन्हें भगवान् शिव के तीसरे नेत्र से निकली हुई ज्वाला का आनंद मिल सके और वे उस अग्नि ऊर्जा को ग्रहण कर अपने भीतर छाये हुए राग, द्वेष, काम, क्रोध, मोह-माया के बीज को पूर्ण रूप से समाप्त कर सकें।

होली का पर्व पूर्णिमा के दिन आता है और इस रात्रि से ही जिस काम महोस्तव का प्रारम्भ होता है उसका भी पूरे संसार में विशेष महत्त्व है क्योंकि काम शिव के तृतीय नेत्र से भस्म होकर पुरे संसार में अदृश्य रूप में व्याप्त हो गया। इस कारण उसे अपने भीतर स्थापित कर देने की क्रिया साधना इसी दिन से प्रारम्भ की जाती है। सौन्दर्य, आकर्षण, वशीकरण, सम्मोहन, उच्चाटन आदि से संबन्धित विशेष साधनाएं इसी दिन संपन्न की जाती है। शत्रु बाधा निवारण के लिए, शत्रु को पूर्ण रूप से भस्म कर उसे राख बना देना अर्थात अपने जीवन की बाधाओं को पूर्ण रूप से नष्ट कर देने की तीव्र साधनाएं महाकाली, चामुण्डा, भैरवी, बगलामुखी धूमावती, प्रत्यंगिरा इत्यादि साधनाएं भी प्रारम्भ की जा सकती हैं तथा इन साधनाओं में विशेष सफलता शीघ्र प्राप्त होती है।
काम जीवन का शत्रु नहीं है क्योंकि संसार में जन्म लिया है तो मोह-माया, इच्छा, आकांक्षा यह सभी स्थितियां सदैव विद्यमान रहेंगी ही और इन सब का स्वरुप काम ही हैं। लेकिन यह काम इतना ही जाग्रत रहना चाहिए कि मनुष्य के भीतर स्थापित शिव, अपने सहस्रार को जाग्रत कर अपनी बुद्धि से इन्हें भस्म करने की क्षमता रखता हो।
और फिर होली का पर्व ... दो महापर्वों के ठीक मध्य घटित होने वाला पर्व! होली के पंद्रह दिन पूर्व ही संपन्न होता है, महाशिवरात्रि का पर्व और पंद्रह दिन बाद चैत्र नवरात्री का। शिव और शक्ति के ठीक मध्य का पर्व और एक प्रकार से कहा जाएं तो शिवत्व के शक्ति से संपर्क के अवसर पर ही यह पर्व आता है। जहां शिव और शक्ति का मिलन है वहीं ऊर्जा की लहरियां का विस्फोट है और तंत्र का प्रादुर्भाव है, क्योंकि तंत्र की उत्पत्ति ही शिव और शक्ति के मिलन से हुई। यह विशेषता तो किसी भी अन्य पर्व में सम्भव ही नहीं है और इसी से होली का पर्व का श्रेष्ठ पर्व, साधना का सिद्ध मुहूर्त, तांत्रिकों के सौभाग्य की घड़ी कहा गया है।
प्रकृति मैं हो रहे कम्पनों का अनुभव सामान्य रूप से न किया जा लेकिन महाशिवरात्रि के बाद और चैत्र नवरात्रि के पहले - क्या वर्ष के सबसे अधिक मादक और स्वप्निल दिन नहीं होतें? ... क्या इन्हीं दिनों में ऐसा नहीं लगता है कि दिन एक गुनगुनाहट का स्पर्श देकर चुपके से चला गया है और सारी की सारी रात आखों ही आखों में बिता दें ... क्योंकि यह प्रकृति का रंग है, प्रकृति की मादकता, उसके द्वारा छिड़की गई यौवन की गुलाल है और रातरानी के खिले फूलों का नाशिलापन है। पुरे साल भर में यौवन और अठखेलियां के ऐसे मदमाते दिन और ऐसी अंगडाइयों से भरी रातें फिर कभी होती ही नहीं है और हो भी कैसे सकती हैं ।

तंत्र भी जीवन की एक मस्ती ही है, जिससे सुरूर से आंखों में गुलाबी डोरें उतर आते हैं, क्योंकि तंत्र का जानने वाला ही सही अर्थ में जीवन जीने की कला जानता है। वह उन रहस्यों को जानता हैं जिनसे जीवन की बागडोर उसके ही हाथ में रहती है और उसका जीवन घटनाओं या संयोगों पर आधारित न होकर उसके ही वश में होता है, उसके द्वारा ही गतिशील होता है। तंत्र का साधक ही अपने भीतर उफनती शक्ति की मादकता का सही मेल होली के मुहूर्त से बैठा सकता है और उन साधनाओं को संपन्न कर सकता है, जो न केवल उसके जीवन को संवार दे बल्कि इससे भी आगे बढ़कर उस उंचे और उंचे उठाने में सहायक हो।

इस साल यह होली पर्व मार्च में संपन्न हो रहा है। जो भी अपने जीवन को और अपने जीवन से भी आगे बढ़कर समाज व् देश को संवारने की इच्छा रखते है, लाखों-लाख लोगों का हित करने, उन्हें प्रभावित करने की शैली अपनाना चाहते है, उनके लिए तो यही एक सही अवसर है। इस दिन कोई भी साधना संपन्न की जा सकती है। तान्त्रोक्त साधनाएं ही नहीं दस महाविद्या साधनाएं, अप्सरा या यक्षिणी साधना या फिर वीर-वेताल, भैरवी जैसी उग्र साधनाएं भी संपन्न की जाएं तो सफलता एक प्रकार से सामने हाथ बाँध खड़ी हो जाती है। जिन साधनाओं में पुरे वर्ष भर सफलता न मिल पाई हो, उन्हें भी एक एक बार फिर इसी अवसर पर दोहरा लेना ही चाहिए।

इस प्रकार होली लौकिक व्यवहार में एक त्यौहार तो है लेकिन साधना की दृष्टी से यह विशेष तंत्रोक्त-मान्त्रोक्त पर्व है जिसकी किसी भी दृष्टी से उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। साधक को इस दिन किसी न किसी साधना का संकल्प अवश्य ही लेना चाहिए। और यदि सम्भव हो होली से प्रारम्भ कर नवरात्री तक साधना को पूर्ण कर लेना चाहिए
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार होलिकाष्टक का काल होली से पहले अष्टमी तिथि से प्रारंभ होता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से होली समस्त काम्य अनुष्ठानो हेतु श्रेष्ठ है। अष्टमी तिथि को चंद्र, नवमी तिथि को सूर्य, दशमी तिथि को शनि, एकादशी तिथि को शुक्र, द्वादशी तिथि को गुरू, त्रयोदशी तिथि को बुध, चतुर्दशी को मंगल व पूर्णीमा तिथि को राहु उग्र हो जाते है जो व्यक्ति के शारिरीक व मानसिक क्षमता को प्रभावित करते हैं साथ ही निर्णय व कार्य क्षमता को कमजोर करते हैं।
होलिका दहन के पश्चात रात्रि से सुबह तक  तांत्रिक विभिन्न प्रकार के तंत्र और मंत्रों को सिद्ध करके अपना और जातकों का कल्याण करते हैं। होली के दिन तांत्रिक तंत्र-मंत्र को सिद्ध करने के लिए पूरे दिन पूजा, पाठ, हवन आदि करते हैं। पीडितों की मांग पर टोटके आदि किए जाते हैं। तांत्रिक प्रक्रिया में दीपावली की तरह पशु-पक्षियों अथवा उनके अंगों का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि वनस्पति और अन्य सामग्री से उतारा आदि किए जाते हैं। होली और श्मशान की राख होली पूर्णिमा की रात को अनिष्टकारी कार्यो के लिए उपयुक्त माना जाता है।तंत्र-मंत्र की दुनिया से जुडे लोग कहते हैं कि समाज में आज भी ईष्र्यालु लोगों की कमी नहीं है। व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा वाले कुछ लोग एक-दूसरे के पतन के लिए टोने-टोटके करवाते हैं। इसमें होली और श्मशान की राख का खास तौर पर उपयोग किया जाता है। दिशाएं बताती हैं, इसी क्रम में दशा मान्यता है कि होलिका दहन के समय उसकी उठती हुई लौ से कई संकेत मिलते हैं।
पूरब की ओर लौ उठना कल्याणकारी होता है, दक्षिण की ओर पशु पी़डा, पश्चिम की ओर सामान्य और उत्तर की ओर लौ उठने से बारिश होने की संभावना होती है ।
आप होली पर अपनी राशि अनुसार भी मंत्र जप कर सकते है,, 

मेष राशि के लिए

ऊं ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायण नम:। इस मंत्र का जप होलिका दहन के समय करने से मां की विशेष कृपा मिलेगी। साथ में होलिका में दुर्वा विश्ेाष रुप से चढ़ाएं। इस मंत्र से धन की सभी परेशानी दूर होगी।

वृषभ राशि के लिए


इस राशि वालों को ऊं गौपालाये उत्तर ध्वजाए:, इस मंत्र का जप करना चाहिए। इस मंत्र के जप से पे्रम की बाधा तो दूर होगी, साथ ही धन का मार्ग भी बनेगा।

 

मिथुन राशि के लिए


इस राशि वाले ऊं क्लीं कृष्णाये नम:, मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से किस्मत के बंद दरवाजे खुलेंगे। जिस दिशा में जाएंगे, वहां से धन मिलेगा।

कर्क राशि वालों के लिए

ये राशि वाले ऊं हिरण्यगर्भाये अव्यक्त रूपिणे नम:, मंत्र का जप करे। ऐसा करने से संतान सुख की प्राप्ति होगी। इसके अलावा धन की समस्या का समाधान होगा।

सिंह राशि वालों के लिए


इस राशि वाले ऊं क्लीं ब्रह्मणे जगदाधाराये नम:, मंत्र का जाप करें ऐसा करने से स्वास्थ तो बेहतर रहता ही है, इसके अलावा धन की समस्या हल होगी।

कन्या राशि वालों के लिए


इस राशि के व्यक्ति होली की रात को ऊं नमो प्रीं पीताम्बरायै नम:, मंत्र का जाप करने से अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है। साथ में हालिका में पीले रंग की मिठाई चढ़ाए तो लक्ष्मी वर्षभर प्रसन्न रहेगी।

तुला राशि वालों के लिए


इस राशि वालों को ऊँ तत्व निरंजनाय तारक रामाये नम:, का जाप करने से जीवन की हर प्रकार की समस्या से समाधन मिलता है। होलिका दहन में सफेद फूल जरूर चढ़ाएं, इससे लक्ष्मी विशेष प्रसन्न होगी।

वृश्चिक राशि वालों के लिए


इस राशि वाले अगर ऊँ नारायणाय सुरसिंहाये नम:, मंत्र का जप करे तो ये मान लिजिए की लक्ष्मी आपके दरवाजे पर सफलता व धन लेकर खड़ी रहेगी।

धनु राशि वालो के लिए

इस राशि वाले ऊँ श्रीं देवकीकृष्णाय ऊर्ध्वषंताये नम:, मंत्र का जप करे। होलिका दहन के समय इस मंत्र को जप करने से हर बाधा का समाधान होगा।

मकर राशि वालों के लिए

इस राशि वालों को ऊँ श्रीं वत्सलाये नम: मंत्र से होलिका की पूजन करना चाहिए। इसके साथ ही नीले रंग के फूल चढ़ाने से लक्ष्मी प्रसन्न होगी।

कुंभ राशि वालों के लिए


इस राशि वालों को श्रीं उपेन्द्रायै अच्युताय नम: मंत्र का जप करने के साथ पीेले रंग के फूल होलिका में चढ़ाने चाहिए। इससे धन का प्रचुर लाभ होगा।

मीन राशि वालों के लिए


इस राशि वालों को ऊं क्लीं उद्धृाताय उद्धारिणे नम: मंत्र का जप करते हुए सरसों होलिका में चढ़ानी चाहिए। इससे बाहरी दुश्मन समाप्त होंगे। इसके अलावा लक्ष्मी की विशेष कृपा होगी।
तांत्रिक मंत्र सिद्धि के लिए होलिका दहन से पूर्व अर्थात भद्रा काल को सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं। यद्यपि पूर्णिमा को प्रात: से मध्य रात्रि तक तात्रिक तंत्र-मंत्र सिद्ध करने का अनुष्ठान करते हैं। किंतु अंतिम तांत्रिक कृत्य रात्रि 12 बजे ही किया जाता है। मंत्र सिद्ध कर तांत्रिक अपना और जातकों का कल्याण करते हैं।
फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि तंत्र साधना के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है। तंत्र-मंत्र को सिद्ध करने के लिए पूरे दिन पूजा, पाठ, हवन आदि करते हैं। पीड़ितों की माग पर टोटके भी किए जाते हैं।

सावधानी

होलिका दहन वाले दिन टोने-टोटके के लिए सफेद खाद्य पदार्थों का
उपयोग किया जाता है। इसलिए
*इस दिन सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिये।
*उतार और टोटके का प्रयोग सिर पर जल्दी होता है,
इसलिए सिर को पगडी रूमाल आदि से ढके रहें।
*टोने-टोटके में व्यक्ति के कपड़ों का प्रयोग किया जाता है, इसलिए
अपने कपड़ों का ध्यान रखें।
*होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले
कपड़े में बांधकर काले तिल रखें। रात को जलती
होली में उन्हें डाल दें। यदि पहले से ही
कोई टोटका होगा तो वह भी खत्म हो जाएगा।

होली के दिन करें ये ख़ास उपाय

स्वास्थय लाभ के लिए

अगर परिवार में कोई लंबे समय से बीमार हो
होली की रात में सफेद कपड़े में 11
गोमती चक्र, नागकेसर के 21 जोड़े तथा 11 धनकारक
कौड़ियां बांधकर कपड़े पर हरसिंगार तथा चन्दन का इत्र लगाकर
रोगी पर से सात बार उतारकर किसी शिव
मन्दिर में अर्पित करें। व्यक्ति स्वस्थ होने लगेगा। यदि
बीमारी गंभीर हो, तो यह
शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से आरंभ कर लगातार 7 सोमवार
तक किया जा सकता है।

आर्थिक समस्या के समाधान के लिए :

होली की रात में चंद्रोदय होने के बाद
अपने घर की छत पर या खुली जगह
जहां से चांद नजर आए पर खड़े हो जाएं। फिर चंद्रमा का स्मरण
करते हुए चांदी की प्लेट में सूखे छुहारे
तथा कुछ मखाने रखकर शुद्ध घी के
दीपक के साथ धूप एवं अगरबत्ती अर्पित
करें। अब दूध से अर्घ्य प्रदान करें। अर्घ्य के बाद कोई सफेद
प्रसाद तथा केसर मिश्रित साबूदाने की खीर
अर्पित करें। चंद्रमा से आर्थिक संकट दूर कर समृद्धि प्रदान
करने का निवेदन करें। बाद में प्रसाद और मखानों को बच्चों में बांट
दें।
फिर लगातार आने वाली प्रत्येक पूर्णिमा की
रात चंद्रमा को दूध का अर्घ्य अवश्य दें। कुछ ही दिनों
में आप महसूस करेंगे कि आर्थिक संकट दूर होकर समृद्धि निरंतर
बढ़ रही है।;

दुर्घटना से बचाव के लिए :

अगर आप अक्सर दुर्घटनाग्रस्त
होते रहते हैं तो होलिका दहन से पहले पांच काली
गोप/गुंजा/धागा/डोरा लेकर होली की पांच
परिक्रमा लगाकर अंत में होलिका की ओर
पीठ करके पांचों गुंजाओं को सिर के ऊपर से पांच बार
उतारकर सिर के ऊपर से होली में फेंक दें।

• होलिका दहन तथा उसके दर्शन से शनि-राहु-केतु के दोषों से शांति
मिलती है।

• होली की भस्म का टीका
लगाने से नजर दोष तथा प्रेतबाधा से मुक्ति मिलती है।

• घर में होली की भस्म चांदी की डिब्बी
में रखने से कई बाधाएं स्वत: ही दूर हो
जाती हैं।

• कार्य में बाधाएं आने पर -

आटे का चौमुखा दीपक सरसों
के तेल से भरकर कुछ दाने काले तिल के डालकर एक बताशा,
सिन्दूर और एक तांबे का सिक्का डालें। होली
की अग्नि से जलाकर घर पर से ये पीड़ित
व्यक्ति पर से उतारकर सुनसान चौराहे पर रखकर बगैर
पीछे मुड़े वापस आएं तथा हाथ-पैर धोकर घर में प्रवेश
करें।

• जलती होली में तीन
गोमती चक्र हाथ में लेकर अपने
(अभीष्ट) कार्य को 21 बार मानसिक रूप से कहकर
गोमती चक्र अग्नि में डाल दें तथा प्रणाम कर वापस
आएं।

• विपत्ति नाश के लिए मंत्र-

राजीव नयन धरें धनु सायक।
भगति विपति भंजन सुखदायक।।
इस मंत्र को जलती होलिका स्म्मुख 108 बार पढ कर 11 परिक्रमा करने से समस्त विपत्तियो का नाश हो जाता हैl
सुख, समृद्धि और सफलता के लिए :

अहकूटा भयत्रस्तै:कृता त्वं होलि बालिशै:
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम: ||
इस मंत्र का उच्चारण एक माला, तीन माला या फिर पांच
माला विषम संख्या के रूप में करना चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि होली की
बची हुई अग्नि और भस्म को अगले दिन प्रात: घर में
लाने से घर को अशुभ ‍शक्तियों से बचाने में सहयोग मिलता है तथा
इस भस्म का शरीर पर लेपन भी किया
जाता है।
भस्म का लेपन करते समय निम्न मंत्र का जाप करना
कल्याणकारी रहता है-
वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।

स्फटिक श्रीयंत्र को होली से एक दिन पूर्व चतुर्दशी की रात्रि में ‘गुलाबजल’ में रखकर ‘फ्रीजर’ में रख दें। प्रातः जमे हुये ‘श्री यंत्र’ को फ्रीजर से निकाल नहाने वाले जल के बर्तन में डुबोकर जमी हुई बर्फ को घुलने दें, फिर बाहर निकाल लें। स्नान के बाद ‘श्री यंत्र’ पूजन करें, फिर ‘श्रीसूक्त’ के प्रत्येक ऋचा के आरंभ और अंत में इस मंत्र -‘‘ऊँ ओम ह्रीं क्रौं ऐं श्रीं क्लीं ब्लूं सौं रं वं श्रीं’- को लगाकर, इत्र से लिप्त नाग-केशर ‘श्री यंत्र’ पर चढ़ायें। इसके बाद रात में ‘श्री यंत्र, के सम्मुख ही उक्त मंत्र की 1008 आहुतियां - मधु, घी, दूध युक्त हवन-सामग्री से अग्नि में आहुतियां दें या 108 आहुतियां सूखे बिल्व पत्र, मधु, घी, दूध से लिप्त कर ‘जलती होली’ में अर्पित करें। अंत में ‘श्रीयंत्र’ तथा अर्पित ‘नाग केशर’- लाल वस्त्र में बांधकर अपनी तिजोरी में रखें। संपूर्ण वर्ष घर धन-धान्य से परिपूर्ण रहेगा, इसमें संदेह नहीं है।

होली की रात्रि को स्थिर लग्न में पीपल के पांच अखंडित (साबुत) पत्ते लेकर, पत्तल में रखें, प्रत्येक पत्ते पर पनीर का एक टुकड़ा तथा एक रसगुल्ला (सफेद) रखें। आटे का दीपक बनाकर, सरसों का तेल भरकर जलायें। मिट्टी की कुलिया (बहुत छोटा-सा कुल्हड़) में, जल-दूध-शहद और शक्कर मिलाकर, भक्ति-पूर्वक सारा सामान पीपल पर चढ़ाकर, हाथ जोड़कर श्रद्धा से आर्थिक संकट दूर होने की प्रार्थना करें, वापसी में पीछे मुड़कर न देखें। यही प्रयोग आने वाले मंगल तथा शनिवार को पुनः करें।
किंतु फिर से पीपल के पत्तों का प्रयोग न करें। तीनों बार घर लौटकर लाल चंदन की माला पर निम्न मंत्र की 3 माला जपें: मंत्र: ‘‘ ऐं ह्री श्री क्लीं सर्वबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः। मनुष्योमत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः क्लीं ह्रीं ऐं।।’’



होली की रात्रि में साबुत उड़द और चावल- एक साथ उबाल कर पत्तल पर रखें। 5 प्रकार की मिठाई और सरसों के तेल के दीपक में 1-1 रुपये के 5 सिक्के डालकर, दीपक जलाकर, निम्न मंत्र का 108 बार जप करके, सभी सामान को निर्जन स्थान पर रख आयें, पीछे मुड़कर न देखें। इससे धन का आगमन होता है। मंत्र -‘‘ऊँ ह्री ह्री बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्री ह्री’’


होली (पूर्णिमा) के दिन प्रातः सूर्योदय से पहले पीपल पर हल्दी मिश्रित गुलाबजल चढ़ायें, देशी घी का दीपक और धूप जलायें, 5 तरह की मिठाई, 5 तरह के फल, 21 किशमिश का भोग लगायें तथा कलावे से 7 परिक्रमा करते हुये पीपल का बंधन करें और निम्न मंत्र का जप करें। इससे घर में धन-समृद्धि आती है। मंत्र - ‘‘ऊँ’’ ह्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी मम् गृहे धन पूरय चिंता दूरय दूरय स्वाहा।’’

होली (पूर्णिमा) की रात्रि को स्थिर लग्न में मां काली की पंचोपचार पूजा कर निम्न मंत्र से 1008 आहुतियां, हवन सामग्री में काली मिर्च, पीली सरसों, भूत केशी मिलाकर- अग्नि में दें। प्रत्येक 108 आहुतियों के बाद पान के पत्ते पर सफेद मक्खन, मिश्री, 2 लौंग, 3 जायफल, 1 नींबू, 1 नारियल (गोला), इत्र लगी रूई, कपूर रखकर मां काली का ध्यान कर अग्नि में अर्पण करें। यह आहुति 10 बार अग्नि में अर्पित करें। यह प्रयोग समस्त नजर दोष, तंत्र एवं रोग बाधाओं को समाप्त कर देता है। मंत्र: ‘‘ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै बिच्चै, ऊँ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै बिच्चै ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।’’

इस  बार होली  सोमवार को है। रविवार को ऐसे पे़ड के नीचे जाए जिस पर चमगादड लटकती हो उस पेड की एक डाल को निमंत्रण  दें। निमंत्रण के लिए चावल को हल्दी से रंग लें और वंहा पेड़ की जड़ पर चावल रोली एक रुपया रख कर जल चढाएं और बोलें हमें जन कल्याण के लिए एक डाली चाहिए वह डाली हम कल ले जाएंगे। होली वाले दिन सूर्योदय से पूर्व उस डाल को तोडकर ले आए। रात को उस डाल एवं उसके पत्तों का पूजन कर अपनी गद्दी के नीचे रखें। व्यवसाय खूब फलेगा-फूलेगा व्यापार ओर कर्ज से बचने के लिए ओर भी उपाय है जो आगे बता दिये जायेगे,।

ऊँ नमो धनदाय स्वाहा होली की रात इस मंत्र का जाप करने से धन में वृद्धि होती है
रोग नाश करने के लिए नमो भगवते रूद्राय  मम शरीर अमृतं कुरू कुरू स्वाहा इस मंत्र का होली की रात जाप करने से कैसा भी रोग हो नाश हो जाता है

शीघ्र विवाह के लिए होली के दिन सुबह एक साबुत पान पर साबुत सुपारी एवं हल्दी की गांठ शिवलिंग पर चढाएं तथा पीछे पलटे बगैर अपने घर आ जाएं यही प्रयोग अगले दिन भी करें। तो इस तरह करने से विवाह में आने वाली रूकावटें दूर होतीं है विवाह के लिए ओर भी उपाय है जो इस पोस्ट मे आगे बताये जायेगे, ।
गोरखमुण्डी का पौधा लाकर उसको धोकर होली की रात उसका पूजन करें फिर उसको होली की अग्नि में सुखा दें तथा पांच दिन सूखने दे पंचमी के दिन उसको पीसकर चूर्ण बना लें। 
यह चूर्ण की काम आता है। रोजाना सुबह और शाम इस चूर्ण को शहद से चाटने पर स्मरण एवं भाषण शक्ति बढती है।दूध के साथ इस चूर्ण का सेवन करने से शरीर स्वस्थ और बलिष्ठ होता है। इस चूर्ण के पानी से बाल धोने पर बाल लंबे और काले घने होते हैं। इस चूर्ण के तेल से शरीर की ऎंठन, जकडन दूर होती है।

टोने-टोटके के लिए सफेद खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है। होलिका दहन वाले दिन अनजान घरों में सफेद खाद्य पदाथों के सेवन से बचना चाहिये।
उतारा और टोटके का प्रयोग सिर पर जल्दी होता है, इसलिए सिर को टोपी आदि से ढके रहें।
टोने-टोटके में व्यक्ति के कपडों का प्रयोग किया जाता है, इसलिए अपने कपडों का ध्यान रखें। होलीका दहन पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपडे में बांधकर काले तिल रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल दें। यदि पहले से ही कोई टोटका होगा तो वह भी खत्म हो जाएगा। 
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश

Tuesday, January 26, 2021

गुप्त नवरात्रि कब से है ओर आईये जानते है इसके बारे मे

गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त रूप से देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों को ‘शक्ति’ के रूप में जाना जाता है। गुप्त नवरात्रि के पीछे मुख्य  कारण क्या है जानते है आईये,।
कि देवी की पूजा गुप्त रूप से की जाती है, जो बाकी दुनिया से छिपी होती है। 
यह मुख्य रूप से साधुओं और तांत्रिकों द्वारा शक्ति की देवी को प्रसन्न करने के लिए व तंत्र साधना के लिए मनाया जाता है जो हमेशा से गलत सोच है ओर कारण भी गुप्त नवरात्रि हो या नवरात्रि हमेशा साधक या सिद्ध संत  ,तांत्रिक हमेशा जो साधनाये करते है उनको गुप्त रखा जाता है यही सत्य है उनको उजागर ना करके गोपनियता बनाये रखता है । जिनकी चर्चा केवल गुरू शिष्य मे हो सकती है यह आम आदमी भी कर सकते है, । जिनमे सेवा ओर परोपकार की दृष्टिकोण हो पर हमेशा ध्यान रहे सिद्धियो के पीछे भागने से सिद्धियाँ नही मिलती बस आप कर्म करते रहे उनकी कृपा मिल ही जाती है, ।

मित्रो गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त अनुष्ठान किए जाते हैं जहां देवी दुर्गा की पूजा इस समय के दौरान देवी दुर्गा के नव रूपो या सिद्ध दसमहाविधा के रूपों को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। इनके अलावा ग्रहण, तीज त्योहार, पर्व मे भी साधनाये होती है जो अति गुप्त रहती है जिनको उजागर नही किया जाता यही सत्य है नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर,,।
ओर मित्रो ऐसा माना जाता है कि इस त्यौहार के दौरान भक्त देवी की पूजा करके अपनी सभी इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं लेकिन अनुष्ठानों को गुप्त रखने की आवश्यकता होती है क्योंकि पूजा की सफलता इसके पीछे गोपनीयता की मात्रा पर निर्भर करती है।


गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजी जाने वाली देवी दुर्गा के विभिन्न रूप हैं-

माँ कालिके
तारा देवी
त्रिपुर सुंदरी
भुवनेश्वरी
माता चित्रमस्ता
त्रिपुर भैरवी
माँ धूम्रवती
माता बगलामुखी
मातंगी
कमला देवी
इस शुभ अवसर के दौरान मंत्रों का जाप, देवी दुर्गा की उत्पत्ति का वर्णन करते हैं और राक्षस महिषासुर का मुकाबला करने के लिए कैसे सभी देवताओं की शक्तियां देवी में समाहित हुईं ताकि वह उसका वध कर सकें, और दुनिया की बुरी शक्तियों पर उनकी जीत हो।

पूजा के दौरान प्रथाऐं - गुप्त नवरात्रि
गुप्त नवरात्रि के दौरान, तंत्र मंत्र साधना में विश्वास करने वाले, अपने गुप्त तांत्रिक क्रियाकलापों के साथ-साथ सामान्य नवरात्रि की तरह ही उपवास करते हैं और अन्य अनुष्ठान करते हैं।

9 दिनों तक अखंड ज्योति जलाई जाती है।
कलश स्थापन
देवी दुर्गा के सामने दुर्गा सप्तशती मार्ग और मार्खदेव पुराण का पाठ किया जाता है।
नवरात्रि के सभी दिनों में उपवास या सात्विक आहार का सेवन किया जाता है।
गुप्त नवरात्रि व्रत का पालन करने के लाभ
गुप्त नवरात्रि, जिसे गायत्री नवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर के आषाढ़ महीने के दौरान मनाया जाता है जो आमतौर पर जून-जुलाई के बीच आता है। इस 9-दिवसीय धार्मिक क्रिया के दौरान देवी दुर्गा को प्रसन्न करने का मुख्य तरीका तंत्र विद्या के मंत्रों के साथ देवी के शक्तिशाली आह्वान को मंत्रमुग्ध करना है।

गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा की सबसे प्रसिद्ध विधि तांत्रिक विद्या है जिसमें धन, बुद्धि और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी दुर्गा की आराधना शामिल है।

गुप्त नवरात्रि की पूजा शैतानी ताकतों के प्रभाव को खत्म करने के लिए की जाती है? जिसे भक्तों के दिलों से बुराई के डर को दूर करने के लिए शक्तिशाली माना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा को शक्तिशाली मंत्र और गुप्त तंत्र विद्या व तांत्रिक साधनाओं के रूप में गुप्त पूजा की पेशकश की जाती है, जो भक्तों को सभी इच्छाओं और आशाओं को पूरा करने के लिए विशेष शक्तियां प्राप्त करने में मदद करती हैं।
ओर दसवे दिन भैरव बाबा की पुजा होती है यह केवल जानकार या गुरू गाम्य शिष्य करते है,।
कुछ पुजा अर्चना के संबंध मे जानकारी, ओर मुर्हत,।
नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री

●  माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र
●  लाल चुनरी
●  आम की पत्तियाँ
●  चावल
●  दुर्गा सप्तशती की किताब
●  लाल कलावा
●  गंगा जल
●  चंदन
●  नारियल
●  कपूर
●  जौ के बीच
●  मिट्टी का बर्तन
●  गुलाल
●  सुपारी
●  पान के पत्ते
●  लौंग
●  इलायची
नवरात्रि पूजा विधि
●  सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें
●  ऊपर दी गई पूजा सामग्री को एकत्रित करें
●  पूजा की थाल सजाएँ
●  माँ दर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र में रखें
●  मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोयें और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें
●  पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें। इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियाँ लगाएं और उपर नारियल रखें। कलश को लाल कपड़े से लपेंटे और कलावा के माध्यम से उसे बाँधें। अब इसे मिट्टी के बर्तन के पास रख दें
●  फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें
●  नौ दिनों तक माँ दुर्गा से संबंधित मंत्र का जाप करें और माता का स्वागत कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें
●  अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं
●  आखिरी दिन दुर्गा के पूजा के बाद घट विसर्जन करें इसमें माँ की आरती गाएं, उन्हें फूल, चावल चढ़ाएं और बेदी से कलश को उठाएं,। नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी 🌹🙏🏻🌹
अब मुहूर्त के बारे मे जानते है,,।

नवरात्रि शुरू : 12 फरवरी 2021, दिन शुक्रवार

नवरात्रि समाप्त : 21 फरवरी 2021, दिन रविवार

कलश स्थापना मुहूर्त सुबह : 08:34 AM से 09:59 AM

अभिजीत मुहूर्त दिन में : 12:13 PM से 12:58 PM

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश🙏🌹🙏

Wednesday, January 20, 2021

शाकंभरी नवरात्रि पर करे ये मंत्र साधना

🌹🌹 *।। शाकंभरी नवरात्रि 2021* 🌹🌹
आठ दिन होगी इन देवी मां जी की साधना, 
28 जनवरी 2021  को मनेगी शाकंभरी जयंती ।।


शाकंभरी नवरात्रि पौष माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक मानी जाती है। मकर संक्रांति से माता शाकंभरी का पावन समय आरंभ हो गया है। यह नवरात्र पर्व  पौष शुक्ल अष्टमी 21 जनवरी 2021 से शुरू होकर  पौष पूर्णिमा 28 जनवरी 2021 तक मनाया जाएगा ।
*पूर्णिमा को गुरुवार एवं पुष्य नक्षत्र एवं सर्वार्द्ध सिद्धि* के साथ अमृत सिद्धि योग  होने से पूजन , तीर्थ अथवा संगम स्थल स्न्नान , दान का अक्षय फल लाभ प्राप्त होता है । 

 धार्मिक शास्त्रों के अनुसार गुप्त नवरात्रि की भांति शाकंभरी नवरात्रि का भी बड़ा महत्व है। माता शाकंभरी (शाकम्भरी) देवी दुर्गा के अवतारों में एक हैं। नवरात्रि के इन दिनों में पौराणिक कर्म किए जाते हैं, विशेषकर माता अन्नपूर्णा की साधना की जाती है। तंत्र-मंत्र के साधकों को अपनी सिद्धि के लिए खास माने जाने वाली शाकंभरी नवरात्रि के इन दिनों में साधक वनस्पति की देवी मां शाकंभरी की आराधना करेंगे।
शाकंभरी नवरात्रि पर जपें यह मंत्र, मिलेगी अन्नपूर्णा की कृपा
 
शाकंभरी नवरात्रि के ८ दिनों में नीचे लिखे मंत्रों का जाप करके मां दुर्गा की आराधना करके कोई भी साधक पूरा जीवन सुख से बिता सकता है। जीवन में धन और धान्य से परिपूर्ण रहने के लिए नवरात्रि के दिनों में इन मंत्रों का प्रयोग अवश्‍य करना चाहिए।

शाकम्भरी लक्ष्मी और उनके मूल बीज मंत्र इस प्रकार है-

श्री शाकम्भरी धान्य लक्ष्मी – ये जीवन में धन और धान्य को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है –
- ॐ श्रीं क्लीं।।

3. श्री शाकम्भरी धैर्य लक्ष्मी – ये जीवन में आत्मबल और धैर्य को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – 
-ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं।।

4. श्री शाकम्भरी गज लक्ष्मी – ये जीवन में स्वास्थ और बल को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – 
-ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं।।

5. श्री शाकम्भरी संतान लक्ष्मी – ये जीवन में परिवार और संतान को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – 
-ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं।।

6. श्री शाकम्भरी विजय लक्ष्मी यां वीर लक्ष्मी – ये जीवन में जीत और वर्चस्व को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – 
-ॐ क्लीं ॐ।।

7. श्री शाकम्भरी विद्या लक्ष्मी – ये जीवन में बुद्धि और ज्ञान को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – 
-ॐ ऐं ॐ।।

8. श्री शाकम्भरी ऐश्वर्य लक्ष्मी – ये जीवन में प्रणय और भोग को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – 
-ॐ श्रीं श्रीं।।
अष्ट शाकम्भरी लक्ष्मी साधना का उद्देश जीवन में धन के अभाव को मिटा देना है। इस साधना से भक्त कर्जे के चक्रव्यूह से बहार आ जाता है। आयु में वृद्धि होती है। बुद्धि कुशाग्र होती है। परिवार में खुशाली आती है। समाज में सम्मान प्राप्त होता है। प्रणय और भोग का सुख मिलता है। व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा होता है और जीवन में वैभव आता है।
अष्ट शाकम्भरी लक्ष्मी साधना विधि: गुरूवार की रात तकरीबन 09:00 बजे से 10:30 बजे के बीच गुलाबी कपड़े पहने और गुलाबी आसान का प्रयोग करें। गुलाबी कपड़े पर श्रीयंत्र और शाकम्भरी का चित्र स्थापित करें। (माँ शाकंभरी का चित्र ना हो तो माँ नवदुर्गा का चित्र रख सकते है गुलाबी आसान ना हो तो लाल, या कुशा आसान काम मे ले सकते है ) किसी भी थाली में गाय के घी के 8 दीपक जलाएं। गुलाब की अगरबत्ती जलाएं। आठ प्रकार के फल-सब्जियों की माला एवं लाल फूलो की माला चढ़ाएं। हरी सब्जियों का प्रसाद लगाये ।
हरी सब्जियां का गरीबो को दान दे ओर किसी भी माँ के मंदिर मे वनस्पतियो या सब्जियों को अर्पण करे । अष्टगंध से श्रीयंत्र और अष्ट लक्ष्मी के चित्र पर तिलक करें और कमलगट्टे हाथ में लेकर इस मंत्र का यथासंभव जाप करें।
मंत्र: ऐं ह्रीं श्रीं अष्टलक्ष्मीयै ह्रीं सिद्धये मम गृहे आगच्छागच्छ नमः स्वाहा।।

जाप पूरा होने के बाद आठों दीपक घर की आठ दिशाओं में लगा दें तथा कमलगट्टे घर की तिजोरी में स्थापित करें। एवं चढ़ाये गए सब्जियों को बनाकर पुरे घर वाले सेवन करे इस उपाय से जीवन के आठों वर्गों में सफलता प्राप्त होगी।

पढ़ें देवी माँ के यह मंत्र- 
अगर समय नही मिल पाये तो आठ दिन तक इन मंत्रो का जाप कर सकते है ओर पुणिमा को सप्तशती का पाठ करे या रोज पाठ कर सकते है ।
 
* 'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति माहेश्वरि अन्नपूर्णे स्वाहा।।'

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति अन्नपूर्णे नम:।।'

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धनधान्य: सुतान्वित:।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।'
 
इन मंत्रों को बतौर अनुष्ठान 10 हजार, 1.25 लाख जप कर दशांस हवन, तर्पण, मार्जन व ब्राह्मण भोजन कराएं या बच्चो को यथाशक्ति भोजन करा सकते है पर जितना हो उतना जाप करे यथाशक्ति वैसी ही भक्ति होनी चाहिए आगे जैसी माँ बाबा की कृपा ओर इच्छा, नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी ।
या फिर नित्य 1 माला जपें। हवन सामग्री में तिल, जौ, अक्षत, घृत, मधु, ईख, बिल्वपत्र, शकर, पंचमेवा, इलायची आदि लें। समिधा, आम, बेल या जो उपलब्ध हो, उनसे हवन पूर्ण करके आप सुखदायी जीवन का लाभ उठा सकते हैं।
 मां शाकंभरी ने अपने शरीर से उत्पन्न शाक-सब्जियों, फल-मूल आदि से संसार का भरण-पोषण किया था। इसी कारण माता 'शाकंभरी' नाम से विख्यात हुईं। तंत्र-मंत्र के जानकारों की नजर में इस नवरात्रि को तंत्र-मंत्र की साधना के लिए अतिउपयुक्त माना गया है। इस नवरात्रि का समापन 28 जनवरी, बृहस्पतिवार को पौष शुक्ल पूर्णिमा के दिन होगा। इसी दिन मां शाकंभरी प्रकाटय दिवस या अवतरण दिवस के रुप मे मनाई जाएगी।
पुराणों में यह उल्लेख है कि देवी ने यह अवतार तब लिया, जब दानवों के उत्पात से सृष्टि में अकाल पड़ गया। तब देवी शाकंभरी रूप में प्रकट हुईं। इस रूप में उनकी 1,000 आंखें थीं। जब उन्होंने अपने भक्तों का बहुत ही दयनीय रूप देखा तो लगातार 9 दिनों तक वे रोती रहीं। रोते समय उनकी आंखों से जो आंसू निकले उससे अकाल दूर हुआ और चारों ओर हरियाली छा गई। देवी दुर्गा का रूप हैं 'शाकंभरी', जिनकी हजार आंखें थीं इसलिए माता को 'शताक्षी' भी कहते हैं।
मान्यता है कि इस दिनों गरीबों को अन्न-शाक यानी कच्ची सब्जी, भाजी, फल व जल का दान करने से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है एवं मां उन पर प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करती हैं। शाकंभरी नवरात्रि का आरंभ पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होता है, जो पौष पूर्णिमा पर समाप्त होता है।
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश ।🙏🏻🌹🙏🏻

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