Sunday, October 15, 2017

क्या हिन्दूओ के सारे फैसले कोर्ट ही करेगी





जब इस देश में सारे फैसले कोर्ट को ही करने है जैसे कि:-
रोहिंग्या मुसलमान हिंदुस्तान में रहेंगे या नहीं रहेंगे,

कश्मीर में सेना पैलेट गन चलाएगी या कौनसा गन चलाएगी,

दिवाली पर पटाखे चलाएंगे या नहीं चलाएंगे,

मूर्ति विसर्जन होगा या कि नहीं होगा,

दही हांडी की ऊंचाई कितनी होगी,

राम मंदिर बनेगा या नहीं बनेगा,

हिन्दुओ को बच्चे कितने पैदा करने हे,

हिन्दुओ को कितनी शादी करनी हे,

तो फिर यह वोट डाल कर सरकार बनाने की क्या जरूरत है कोर्ट से ही पूछ लिया करो प्रधानमंत्री किसे बनाना है।
ओर प्रधानमंत्री मूक दर्शक बन कर बैठे है ओर एक दिल्ली के भांड ने तो यहाँ तक कह दिया की हिन्दू मुर्दे को लकडीयो से जलाना बंद करो...
ओर एक हिन्दू भांड जो अपना सारा कार्य हिन्दूओ से ही कराता है ओर उसका रोज रोटी ही हिन्दूओ से है वो हिन्दू देवी देवता को गालीयाँ बक सकता है काला पत्थर वैगरहा कह सकता है तो हम उसका ओर उसके सामना का बहिष्कार नही कर सकते क्यू ये समझ के बाहर है जबकि सनातन धर्म सबसे पुराना धर्म बाकी दूसरे धर्म कुछ शतको पहले के कमजोर ना बनो कायर ना बनो कोर्ट या प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री मंत्री या कोई भांड योगाचार्य आप से ऊपर नही है जज, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, भष्टाचारी हो सकते है पर आम जनता नही आवाज उठाईये वरना हिन्दूओ के त्यौहार नाम के रह जायेगे यही सत्य है..
अपने देश मे स्वयंम हिन्दू ही बेगाना हो गया ओर प्रधानमंत्री कठपुतली कोर्ट को ही सब फेसले करने है तो वोटिंग की क्या जरूरत है सब फैसले कोर्ट ओर दिल्ली के भांड लेले या व्यापारी नूमा संत किसी देवता का अपमान कर सकते है समुदाय विशेष को खुश रखने से...
जागो अभी भी वक्त है वरना फिर कुछ नही होगा आपके बच्चे बस नाम के त्योहार मनायेगे वो भी टीवी पर देखकर..

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