Friday, May 26, 2017

आध्यात्मिक मे अभिमान कैसा



अकड ,घमण्ड ,अभिमान इन सभी से परे है आध्यात्मिक ,
कोई यहाँ ग्यान ले जल्दी परिपुणे होकर ग्यान देता है तो हम जैसे नादान बालक सुनते है क्या कर सकते है क्योंकि मीराँ बाई, कबीरदास जी, रखान, भक्त रैदास, ओर भी कई संत या भक्त हुये है जिन्होंने भाव का पकड़ा है चाहे उनका भाव कोई भी रहा हो लेकिन आध्यात्मिक हो या साधना सभी मे भाव प्रधान होता है हम स्वयंम नादान बालक है इसमे कोई शंका नही है ओर हम अपने आपको विद्वान भी नही बनाना चाहता है हम है जो वोही रहेगे हमे किसी की होड नही करनी कि कोन क्या कर रहा है ओर कोन हमारे लिये क्या कह रहा है हम जो है वोही रहेगे किसी के बदलने या किसी कहने से हम परिवर्तित नही हो सकते बाकी माँ बाबा की इच्छा वो क्या चाहते है..
सब अच्छे है हमारी सोच मे हमारी बुराई करने वाला भी अच्छा है तो हमारी सुनने वाला भी अच्छा न्याय हमारे हाथ मे नही है हम कोई फैसला नही सुना सकते कोन गलत है कोन सही इसका फैसला तो माँ बाबा ने ही करना है बाकी कोई हमारी वजह से मायूस ना हो यही सोच हमारी है.... *ये सोच हमारी है आप मानो या ना मानो कोई जबरदस्ती नही है...* आगे माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा... ॐ गुरुदेवाये नमः ॐ..

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश.
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