Monday, June 22, 2015

रुद्राक्ष उत्पत्ति मंत्र & रुद्राक्ष शाबर मंत्र

रुद्राक्ष उत्पत्ति मंत्र

अकल सकल सुमेरु की छाया शिव शक्ति मिल वृक्ष लगाया | एक डाल अगम को गई | एक डाल उत्तर को गई | एक डाल पश्चिम को गई | एक डाल दक्षिण को गई | एक डाल आकाश को गई | एक डाल पाताल को गई | उसी पेड़ के फल लगा रुद्राक्ष का |
एक मुखी रुद्राक्ष उकार को बरणे | दो मुखी रुद्राक्ष सूर्य चन्द्र को बरणे | तीन मुखी रुद्राक्ष तीन देवों को बरणे | चार मुखी रुद्राक्ष चार वेदों को बरणे | पांच मुखी रुद्राक्ष पांच पांडवों को बरणे | छः मुखी रुद्राक्ष छः दर्शनों को बरणे | सात मुखी रुद्राक्ष सात सायरों को बरणे | आठ मुखी रुद्राक्ष आठ कुली पर्वतों को बरणे | नौ मुखी रुद्राक्ष नौ कुली नाग को बरणे | दस मुखी रुद्राक्ष दस अवतारों को बरणे | ग्यारह मुखी रुद्राक्ष ग्यारह रुद्र शंकर को बरणे | बारह मुखी रुद्राक्ष बारह पंथों को बरणे | तेरह मुखी रुद्राक्ष तेरह रत्नों को बरणे | चौदह मुखी रुद्राक्ष चौदह विद्याओं को बरणे | पंद्रह मुखी रुद्राक्ष पंद्रह तिथियों को बरणे | सोलह मुखी रुद्राक्ष सोलह कलाओं को बरणे | सत्रह मुखी रुद्राक्ष सीता सतवंती को बरणे | अठारह मुखी रुद्राक्ष अठारह भार वनस्पति को बरणे | उन्नीस मुखी रुद्राक्ष शिव पार्वती गणेश को बरणे | बीस मुखी रुद्राक्ष विश्वासु मुनि साधु को बरणे | इक्कीस मुखी रुद्राक्ष एक अलख को बरणे |
हाथ बांधे हतनापुर का राज पावे, कान के बांधे कनकापुर का राज पावे, कंठ गले के बांधे सात द्विप का राज पावे, मस्तक के बांधे कैलाशपुरी का राज पावे | नहीं जाने रुद्राक्ष जाप अठ्ठत्तर गऊ का लागे पाप, बांधे रुद्राक्ष जाणे जाप जन्म जन्म का पाप समाप्त हो सी | रुद्राक्ष जाप समाप्त हुआ शिव ध्यान में दत्तात्रेय महाराज ने कहा |


रुद्राक्ष शाबर मंत्र
सत नमो आदेश | गुरु को आदेश | ॐ गुरूजी | मुखे ब्रह्मा मध्ये विष्णु लिंग नाम महेश्वर सर्वदेव नमस्कारं रुद्राक्षाय नमो नमः | गगनमंडल में धुन्धुकारा पाताल निरंजन निराकार | निराकार में चर्ण पादुका, चर्ण पादुका में पिंडी, पिंडी में वासुक, वासुक में कासुक, कासुक में कूर्म, कूर्म में मरी, मरी में नागफणी, अलष पुरुष ने बैल के सींग पर राई ठहराई | धीरज धर्म की धूनी जमाई | वहां पर रुद्राक्ष सुमेर पर्वत पर जमाइये उसमे से फूटे ६ डाली |
एक गया पूर्व, एक गया दक्षिण, एक गया पश्चिम, एक गया उत्तर, एक गया आकाश, एक गया पाताल, उसमे लाग्या एक मुख रुद्राक्ष, श्री रुद्र पर चढ़ाइये | श्री ओंकार आदिनाथ जी को | दो मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये चन्द्र सूर्य को | तीन मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये तीन लोकों को | चार मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये चार वेदों को | पांच मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये पांच पांडवों को | छः मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये षट दर्शन को | सात मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये सप्त समुन्द्रों को | अष्ट मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये अष्ट कुली नागों को | नवमुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये नवनाथों को | दशमुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये दश अवतारों को | ग्यारह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये ग्यारह रुद्र को | बारह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये (सूर्य) बारह पंथ को | तेरह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये तैंतीस कोटि देवताओं को | चौदह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये चौदह भुवन (चौदह रत्नों) को | पंद्रह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये पंद्रह तिथियों को | सोलह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये सोलह श्रृंगार को | सत्रह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये श्री सीता माता को | अठारह मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये अठारह भार वनस्पतियों को | उन्नीस मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये अलष पुरुष को | बीस मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये विष्णु भगवान् को | इक्कीस मुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये इक्कीस ब्रह्माण्ड शिव को | निरमुखी रुद्राक्ष चढ़ाइये निराकार को | इतना रुद्राक्ष मंत्र सम्पूर्ण भया | श्रीनाथ जी के चरण कमल में आदेश | आदेश |

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