Saturday, June 20, 2015

क्या श्वास से ध्यान होता है?

क्या श्वास से ध्यान होता है?
स्वास से ही ध्या होता है. किसी भी पद्धति से आप ध्यान मार्ग में आईये आखिर में स्वास ही आधार बनती है. ध्यान के लिए स्वास को आधार बनाने के कई कारण हैं. बाहर भीतर के बीच स्वास ही सेतु है. बहुत सारे साधना विधियों में सिखाया जाता है कि आप मंत्र जप के साथ स्वास की लयबद्धता का ध्यान रखें. धीरे-धीरे मंत्र को स्वांस के साथ जोड़ दें. जैसे जैसे मन में गहरे उतरे मंत्र को छोड़ दें. मंत्र को छोड़ें क्या ऐसी अवस्था आती है जब मंत्र अपने आप छूट जाता है. मंत्र का आभामंडल शेष रहता है. एक उर्जा शक्ति आपको घेर लेती है. वह सकारात्मक उर्जा भी आपको सिर्फ स्वांस पर एकाग्र होने के लिए मदद करती है. इससे ज्यादा उस उर्जा शक्ति को पैदा करने का कोई प्रयोजन नहीं है.

मंत्र शब्दों का समुच्चय हैं जो लय और आभा पैदा करते हैं. मंत्र का जप इसलिए अनिवार्य कहा जाता है कि पहले तो आपके आस-पास सकारात्मक उर्जा का चक्र बने. क्योंकि वातावरण का बहुत असर होता है. आप जैसे वातावरण में रहते हैं वैसा ही आपका शरीर, मन और बुद्धि काम करती है. इसलिए ध्यान में जाने के लिए जरूरी है कि आपके आस-पास का वातावरण शुद्ध हो, सात्विक हो. मंत्र हमें दोनों तरह से मदद करते हैं. वे अंदर बाहर दोनों जगह शुद्धि करते हैं. यह कोई एक दो दिन का काम नहीं है. इसको जीवन के अभ्यास में लाना चाहिए. मंत्र जाप का यही उद्येश्य है. लेकिन यह ध्यान रखना है कि बाहर से जो मंत्र मिला है उसे छूटना है. लोग गलती क्या करते हैं कि मंत्र को ही पकड़कर बैठ जाते हैं. घण्टों जाप करते हैं और कहीं नहीं पहुंचते.

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