Monday, June 22, 2015

टोने-टोटकों के चक्कर में टूटते लोग

टोने-टोटकों के चक्कर में टूटते लोग

क्या तंत्र, मंत्र या यंत्र से लोगों की समस्याओं का हल किया जा सकता है और क्या नग या अंगुठी को अंगुली में पहनने और स्फटिक की माला, उल्लू या शेर के नाखून आदि को गले में पहनने से कोई अपने जीवन में सफलता अर्जित कर सकता है? हर युग में आस्था और अंधविश्वास के बदलते स्वरूप के चलते लोग भी अपनी आस्था बदलते रहते हैं, लेकिन यह धर्म से बहुत दूर ले जाने वाली बात सिद्ध होती है।
कहते हैं कि अगर आपके पास हनुमान और राम-सीता की तस्वीरों वाले पुराने सिक्के हैं तो आप मालामाल हो सकते हैं, आपने कहीं तीन टांगों वाला मेढ़क देखा हो तो इसके बदले लाखों रुपए मिल सकते हैं। और तो और छह नाखून वाले कछुए के लिए कई लोग आसानी से आपको एक लाख रुपए तक देने के लिए तैयार हो सकते हैं।
हाथाजोड़ी का नाम भी सुना ही होगा आपने। मान्यता है कि इसे पास रखने से लोग आपके सामने हाथ जोड़ते नजर आएंगे। लक्ष्मणा का पेड़ आंगन में लगा हो तो लक्ष्मी बरसने लगती है। ऐसे और इस तरह के अनेक उपाय और टोटकों का प्रचलन है।
समाज में कई लोग ऐसे मिल जाएंगे, जो सफलता अर्जित करने, दुख-दर्द दूर करने या फिर किसी भी तरह का वशीकरण करने के लिए इस तरह के पागलपन में ओझा-बैगा-गुनिया यानी तांत्रिकों के चक्कर में भटकते रहते हैं।
अंधविश्वासी लोगों के बीच इस तरह की वस्तुओं को प्राप्त करने की एक होड़-सी मची हुई रहती है। इनके सहारे करोड़पति बनने का सपना देखने वाले लोग घने जंगलों में भटक रहे हैं, पुराने टीले खोद रहे हैं, गांव-गांव की धूल फांक रहे हैं कि कहीं गढ़ा धन मिल जाए।
जाहिर है, आप इसे पागलपन कहेंगे, लेकिन छत्तीसगढ़ में बस्तर से सरगुजा तक यह पागलपन लोगों पर सवार है और सिर्फ छत्तीसगढ़ ही क्यों, देश के कई ऐसे इलाके हैं जहां पर टोटकों में विश्वास करने वाले लोग मिल जाएंगे।
तीन टांग या छह टांगों वाले कछुए पकड़ने के चक्कर में रायगढ़ और सरगुजा इलाके के कुछ लोग तालाब या कुएं में डूबकर जान भी गंवा चुके हैं।
आपने देखा होगा कि कई शहरों में टोने-टोटके करने और बेचने वाले लोग किसी भी बाजार में सड़क किनारे बिछात बिछाकर इसी तरह का सामान बेचते हैं जिनमें सुअर का दांत, हाथी का दांत, घोड़े की नाल, कबूतर या शेर के नाखून, सांप की केंचुली या फिर काली बिल्ली और उल्लुओं की आंख। इस सबके चलते हाथी, शेर और सांप पर तो संकट छा गया है।
हाल ही में घर में फिश पॉट रखने का प्रचलन बढ़ गया है। फेंगशुई के अनुसार फिश पॉट को रखने से घर में प्रसन्नता और समृद्धि बनी रहती है। संकटों का समाधान होता है। इसके चलते लाखों मछलियों को अब पॉट में कैद किया जाने लगा और लगभग इतनी ही मछलियां पॉट में ही दम तोड़ देती है। समुद्र जीव वैज्ञानिकों का मानना है कि मछलियों की हजारों प्रजातियां अब लुप्त हो चुकी है।
अंधविश्वास और ठगी के इस कुचक्र में देशभर में कई जानवर और पंछी मारे जा रहे हैं। अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति इस संबंध में क्या करती है हम नहीं जानते।
किसी ने प्रचारित किया की आंकड़े के पौधे की जड़ में बने गणेश जी की आकृतिनुमा प्रतिमा को घर में रखने से सुख और समृद्धि पाई जा सकती है तो लोगों ने आंकड़े के पौधे को उखाड़ना शुरू कर दिया। पहले सड़क के किनारे उक्त पौधों को बहुतायत में देखा जा सकता था, लेकिन अब कहीं-कहीं ही नजर आते हैं।
आधुनिक युग में पढ़े-लिखें या वैज्ञानिक ‍बुद्धि के लोग भी तंत्र, मंत्र, यंत्र या टोटकों पर विश्वास करते हैं जो कितना ‍उचित हैं ये तो वहीं बता सकते हैं।
टोटकों के चक्कर में जहां एक ओर प्रकृति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, वहीं पशु और पक्षियों का जीवन भी में संकट में हो चला है। इसके अलावा समाज में इस तरह के अंधविश्वास के चलते ईश्वर पर विश्वास कम टोटको और तांत्रिकों पर विश्वास ज्यादा किया जाने लगा है। कबिलाई संस्कृति तो खत्म हो गई है किंतु आज भी उसके लक्षण देखें जा सकते हैं। जो कि धर्म के मर्मज्ञों अनुसार जाहिलाना कृत्य हैं।
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