Tuesday, June 30, 2015

शिव चरित्र के अनुसार, सती शक्ति पीठो की संख्या 51 हैं ।

शिव चरित्र के अनुसार, सती शक्ति पीठो की संख्या ५१ हैं ।

कालिका पुराण के अनुसार, सती शक्तिपीठों की संख्या २६ हैं ।

श्री देवी भागवत, पुराण के अनुसार, सती शक्तिपीठों की संख्या १०८ हैं ।

तंत्र चूड़ामणि तथा मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, सती शक्तिपीठों की संख्या ५२ हैं ।

हिंगलाज शक्तिपीठ, ब्रह्मरंध्र (सिर के ऊपर), बलूचिस्तान, पाकिस्तान ।
हिंगलाज या हिंगुला में, ब्रह्मरंध्र (सिर के ऊपर), हिंगलाज पर्वत के पहाड़ी गुफा में, हिंगोल नदी के तट पर, लास बेला के बलूचिस्तान प्रांत, ल्यारी तहसील, पाकिस्तान में गिरी । जो कराची से १२५ कि. मी. उत्तर-पूर्व, हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान के मध्य में स्थित हैं । यहाँ देवी कोट्टरी शक्ति और के रूप में तथा भीमलोचन भैरव के रूप में अवस्थित हैं । मंदिर में सिंदूर के साथ लिप्त गोल शिलाओं के रूप में देवी पूजिता हैं जो यहाँ के प्राकृतिक गुफा में स्थित है ।
शिवहारकराय या करविपुर शक्तिपीठ, (आंखें), कराची, पाकिस्तान ।
शिवहारकराय या करविपुर शक्ति पीठ, यह पाकिस्तान में कराची के, परकै रेलवे स्टेशन के पास स्थित है। हिंदू शास्त्र के अनुसार सती की आँखों यहाँ गिर गया। देवी महिषमर्दिनी और भैरव क्रोधीश के रूप में पूजित तथा विद्यमान हैं ।
सुंगधा शक्तिपीठ, (नाक), बरिसाल, बांग्लादेश ।
सुगंधा शक्तिपीठ, बांग्लादेश में बरिसाल जिले, से २० कि. मी. उत्तर, शिकारपुर नमक स्थान में स्थित एकजटा के रूप में विद्यमान हैं। शिकारपुर गांव, सुगंधा नदी के तट पर, सती की नाक गिरी थी और यहां वह सुगंधा या देवी तारा के एकजटा स्वरूप के रूप में विद्यमान हैं तथा यहाँ के भैरव त्र्यंबक हैं । यह मंदिर शिव शिवरात्रि या शिव चतुर्दशी के उत्सव के लिए प्रसिद्ध है।
महामाया शक्तिपीठ, (गाला), अमरनाथ, पहलगाम, जम्मू और कश्मीर, भारत ।
महामाया शक्तिपीठ, जम्मू और कश्मीर, भारत के पहलगाम जिले में स्थित हैं । सती के गले का भाग यहाँ गिर गया था और यहां वह देवी "महामाया" के रूप में और त्रिसन्ध्येश्वर भैरव के रूप में स्थित है । भगवान शिव के इस पवित्र गुफा में लिंग, बर्फ से तथा प्राकृतिक रूप से बनती है, इस स्थान मैं शिव जी ने अपनी पत्नी पार्वती को जीवन और मरण चक्र से सम्बंधित रहस्य समझाया था । दो अन्य बर्फ संरचनायें माता पार्वती और शिव के पुत्र गणेश का प्रतिनिधित्व करते हैं । अमरनाथ के दर्शन के साथ श्रावण पूर्णिमा पर इस शक्ति पीठ भी दर्शन किया जाता हैं ।
ज्वाला शक्तिपीठ, (जीभ), ज्वालामुखी, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश, भारत ।
ज्वालामुखी, कांगड़ा घाटी के दक्षिण से ३० कि. मी. दूर स्थित हैं । भारत में एक बहुत प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है । पांडवों इस पवित्र पीठ की खोज की । यहाँ, सती की जीभ गिरी थी; यहाँ देवी अंबिका या सिद्धिदा और उन्मत्त भैरव के रूप में विद्यमान हैं । देवी के मंदिर में दर्शन, लौ के रूप में है और लौ चट्टानों की परत के नीचे से जलती रहती हैं । यह मंदिर मुहम्मद गजनी द्वारा १००९ में नष्ट कर दिया गया था। काँगड़ा के राजा भूमि चंद कटोच, देवी दुर्गा के बड़े भक्त थे, उन्हें देवी माँ ने रात को सपने में दर्शन दे, इस पवित्र स्थान के बारे में बताया । राजा ने उस स्थान को खोज कर, उस स्थान पर एक मंदिर का निर्माण किया तथा चमत्कारिक ढंग से, अग्नि का एक स्रोत मिल। सम्राट अकबर ने इस पवित्र अग्नि को बुझाने के लिए, कई बार प्रयास किए लेकिन हर बार असफल उन्हें असफलता ही मिली । अंत में उन्होंने भी यहाँ के अलौकिक शक्ति को स्वीकार कर लिया ।
त्रिपुरा मालिनी शक्तिपीठ, (बायाँ सीना), जालंधर, पंजाब, भारत ।
त्रिपुरा मालिनी, यह पीठ भारत के राज्य में पंजाब, जालंधर रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर दूर जालंधर शहर में स्थित है। सती की बाई छाती गिर गया था, वह देवी "त्रिपुरा-मालिनी" के रूप में और भीषण भैरव के रूप में विद्यमान हैं । वशिष्ठ, व्यास, मनु, जमदग्नि, परशुराम जैसे विभिन्न महर्षिओं ने, त्रिपुरा मालिनी के रूप में, यहाँ आद्या शक्ति की पूजा की। जालंधर नमक दैत्य भगवान शिव द्वारा मारा गया था, दैत्य के नाम से ही शहर का नाम जालंधर पड़ा । यहाँ, ताजा पानी के एक तालाब के साथ, त्रिपुरा मालिनी के मंदिर खूबसूरती बहुत मनमोहक हैं ।
अंबा शक्तिपीठ, (ह्रदय), बनासकांठा, गुजरात, भारत ।
अंबाजी शक्तिपीठ, अंबाजी मंदिर अरावली पर्वत श्रृंखला से घिरा हुआ है, यह पालनपुर से लगभग ६५ कि. मी., माउंट आबू से ४५ किलोमीटर दूर, गुजरात-राजस्थान सीमा पर, श्री अमीरगढ़ से 42 कि. मी. और बनासकांठा जिले में कडियादृ गांव से ५० कि. मी. दुरी पर स्थित हैं । यहाँ, सती का हृदय गिर गया था; आद्या शक्ति देवी, अंबा नाम से और बटुक, भैरव रूप में विद्यमान है। यहाँ देवी यंत्र के रूप में अवस्थित है और केवल इसी रूप में पूजिता हैं; किसी की कोई प्रतिमा नहीं है । अंबा जी मंदिर गब्बर पर्वत के शिखर पर स्थित है । सुंदर पर्यटन स्थलों से युक्त ये एक उत्कृष्ट भ्रमण स्थानों में गिना जाता हैं, सूर्यास्त, गुफाएँ और रोपवे यहाँ के मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं । अंबाजी मंदिर सूर्यवंशी सम्राट अरुण सेन द्वारा, ४ शताब्दी में वल्लभी के शासक द्वारा निर्मित किया गया था ।
गुह्येश्वरी शक्तिपीठ, (दोनों घुटनों), काठमांडू, नेपाल ।
गुह्येश्वरी मंदिर, काठमांडू, नेपाल में पशुपति नाथ मंदिर के पास स्थित है । यहाँ, सती के दोनों घुटने गिरे थे, यहाँ देवी महाशिरा के रूप में और कपाली भैरव रूप में विद्यमान है । यहाँ मंदिर पशुपतिनाथ मंदिर के निकट, बागमती नदी के तट पर स्थित है । गुह्येश्वर मंदिर, धर्मशाला (तीर्थयात्रियों विश्राम गृह) से घिरे हुए एक पक्का आँगन में है, 17 वीं सदी में राजा प्रताप मल्ल द्वारा गुहेश्वरी मंदिर बनाया गया था ।
दाक्षायनी शक्तिपीठ, (दांया हाथ), कैलाश पर्वत, तिब्बत, चीन ।
दाक्षायनी शक्तिपीठ, यह तिब्बत में कैलाश पर्वत, मानसरोवर (चीन) के पास एक शिला के रूप में विद्यमान हैं । यहाँ, सती का दाहिने हाथ गिर गया था, देवी यहाँ दाक्षायनी (दक्षा यज्ञ या यज्ञ को नष्ट कर दिया है) के रूप में और अमर भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
बिराज शक्तिपीठ, (नाभि), जाजपुर, भवनेश्वर, ओडिशा, भारत ।
बिराज शक्तिपीठ, लगभग १२५ कि. मी. भुवनेश्वर से उत्तर दिशा में, भारत के ओडिशा राज्य में है। यहाँ देवी विरजा या गिरिजा के नाम से पूजित हैं । यहाँ, सती की नाभि गिरी थी, वह देवी विमला के रूप में और जगन्नाथ भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
गंडकी चंडी शक्तिपीठ, (माथा), मुक्तिनाथ, नेपाल ।
गंडकी चंडी शक्तिपीठ, गंडकी नदी के किनारे स्थित हैं तथा नेपाल में मुक्तिनाथ, धवलगिरि में स्थित है। यहाँ, सती का माथा गिर गया था तथा देवी गंडकी-चंडी के रूप में और चक्रपाणी भैरव के रूप में विद्यमान । इस पवित्र स्थान के महत्व का विष्णु पुराण में वर्णन किया गया है, यह स्थान मुक्तिनाथ, हिंदुओं और बौद्धों के लिए, मुक्ति या मोक्ष प्रदान करने वाला हैं । यह स्थान चक्र निर्मित शालग्राम शीला के लिया विख्यात हैं ।
बहुला शक्तिपीठ, (बांया हाथ), बर्धमान, पश्चिम बंगाल, भारत ।
बहुला शक्तिपीठ, यह पीठ केतुग्राम, कटवा, वर्धमान जिला, पश्चिम बंगाल, भारत में अजय नदी के तट पर स्थित है। यहाँ, सती का बाँया हाथ गिरा था तथा यहाँ देवी बहुला के रूप में तथा भीरुक या सर्व-सिद्धिदायक, भैरव के रूप में अवस्थित हैं । यहाँ देवी अपने दोनों बेटो, कार्तिक और गणेश के साथ विद्यमान है। यह मंदिर १८ वीं सदी में बनाया गया था।
मंगला चंडिका शक्तिपीठ, ( दायी कलाई ), बर्धमान, पश्चिम बंगाल, भारत ।
मंगला चंडिका शक्तिपीठ, यह पीठ बर्द्धमान जिले के गुस्कारा के उजनी ग्राम, भारत, पश्चिम बंगाल में स्थित है। इस पवित्र स्थान पर, सती के दाहिनी कलाई गिर थी,यहाँ देवी मंगला चंडिका या मंगल चंडी के रूप में और कपिलाम्बर भैरव के रूप में विद्यमान है। यह गुस्कारा रेलवे स्टेशन से १६ किलोमीटर दूर हैं ।
त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ, (दाहिना पैर), उदयपुर, त्रिपुरा, भारत ।
त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ, यह महाराजा धन्य माणिक्य द्वारा १५०१ ईसवी में बनाया हुआ, बहुत ही शक्तिशाली तंत्र पीठ है । अगरतला, भारत में त्रिपुरा राज्य की राजधानी से करीब ५५ कि. मी. दूर, उदयपुर नमक स्थान पर, राधा किशोरपुर गांव में स्थित है तथा माता बाड़ी के नाम से प्रसिद्ध हैं । यहाँ सती देवी का दाहिना पैर गिरा, यहाँ देवी त्रिपुरेश्वरी या त्रिपुर सुंदरी और त्रिपुरेश भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
भवानी या चन्द्रनाथ शक्तिपीठ, (दाहिनी भुजा), चिटगांव, बांग्लादेश ।
भवानी या चन्द्रनाथ शक्तिपीठ, सीताकुंड चन्द्रनाथ मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है, यह पीठ बांग्लादेश के चंद्र-नाथ पर्वत के पास सीताकुंड स्टेशन, चटगांव, पर स्थित हैं । यहाँ, सती का दाहिना हाथ गिरा था, यहाँ देवी भवानी के रूप में और चंद्रशेखर भैरव के रूप में विद्यमान हैं । यहाँ गरम पानी के प्राकृतिक स्रोत हैं ।
भ्रामरी या त्रिसोता शक्तिपीठ, (बाया पैर), वोड़ागंज, जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल, भारत ।
भ्रामरी या त्रिसोता शक्तिपीठ, यह पीठ भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में जलपागुड़ी जिले, के वोड़ागंज ग्राम में तीस्ता नदी के तट पर स्थित हैं । यहाँ, सती के बायाँ पैर गिर गया था, यहाँ देवी भ्रामरी या त्रिस्रोता और अंबर, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
कामाख्या शक्तिपीठ, (योनि या प्रजनन अंग), कामाख्या, आसाम, भारत ।
कामाख्या शक्ति पीठ, सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं महत्त्वपूर्ण, तंत्र पीठ, गुवाहाटी, आसाम, भारत में नील-पर्वत या नीलांचल पर्वत में स्थित है । सती की योनि (प्रजनन अंग), यहाँ गिर गया था । यहाँ देवी कामाख्या और उमानंद भैरव के रूप में विद्यमान हैं । यहाँ पीठ, देव शिल्पी विश्वकर्मा द्वारा बनाया गया था यहाँ देवी की कोई प्रतिमा नहीं हैं । जिस स्थान पर देवी का प्रजनन अंग गिरा था, वहाँ सर्वदा ही प्राकृतिक जल श्रोत का प्रवाह होता रहता हैं ।
जुगाड़्या शक्तिपीठ, (दाहिने पैर का अंगूठा), खीरग्राम, बर्द्धमान, पश्चिम बंगाल, भारत ।
जुगाड़्या शक्तिपीठ, सती के दाहिने पैर का अँगूठा, भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में बर्द्धमान जिले के खीरग्राम गांव, मंगलकोट ब्लॉक के पास गिरा । यहाँ देवी जुगाड़्या शक्ति और क्षीर खंडक, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
कालिका शक्तिपीठ, दाहिने पैर की चार उँगलियाँ, कोलकाता (कलकत्ता), पश्चिम बंगाल, भारत ।
कालिका शक्तिपीठ, सती के दाहिने पैर के चार उँगलियाँ, आदि गंगा, नदी के तट पर गिरी थी । यह जगह कोलकाता के काली-घाट के नाम से प्रसिद्ध हैं, यह भी सती की पीठो के बीच बहुत प्रसिद्ध पीठ हैं । यहाँ देवी महा काली और नकुलेश्वर भैरव के रूप में विद्यमान हैं । भगवान ब्रह्मा ने इसी स्थान पर बैठ, देवी की साधना की थी । देवी काली की प्रतिमा, ब्रह्मा बेदी पर प्रतिष्ठित हैं, जिस आसन पर बैठ ब्रह्मा जी ने तपस्या की थी ।
ललिता या अलोपी शक्तिपीठ, (दोनों हाथों की उंगलियां), इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत ।
ललिता या अलोपी, प्रयाग शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है । सती के दोनों हाथों की उंगलियां, उत्तर प्रदेश राज्य, भारत के, अक्षय वट, इलाहाबाद के पास गिरा । यहाँ देवी "ललिता" शक्ति और वभ, भैरव के रूप में विद्यमान हैं । यह मंदिर तीन नदियों, गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम, इलाहाबाद किले के निकट स्थित है ।
जयंती शक्तिपीठ, (बाईं जांघ), कलजोरे बौरभग गांव, सिलेट जिला, बांग्लादेश ।
जयंती शक्तिपीठ, सती की बाई जाँघ, बांग्लादेश के कलजोरे बौरभग गाँव के पास जयंतिया पुर, सिलेट जिले में गिरा । यहाँ देवी जयंती शक्ति और क्रमदीश्वर, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
विमला शक्तिपीठ, (मुकुट), मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल, भारत ।
विमला शक्तिपीठ, यह पीठ भारत के पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के लालबाग कोर्ट रोड के पास स्थित है। यहाँ, सती के सर का मुकुट गिरा था, यहाँ देवी विमला के रूप में और संवर्त भैरव, के रूप में विद्यमान हैं ।
श्रावणी शक्तिपीठ, (रीढ़ की हड्डी), कुमारी कुंदा, चटगांव, बांग्लादेश ।
श्रावणी शक्तिपीठ, यह पीठ बांग्लादेश के चटगांव जिले, के कुमारी कुंदा गाँव में हैं । यहाँ, सती की रीढ़ की हड्डी गिरी थी, वह देवी श्रावणी के रूप में और भैरव के रूप में निमिष, विद्यमान हैं ।
सावित्री या भद्रकाली शक्तिपीठ, (टखने की हड्डी), थानेसर, कुरुक्षेत्र, हरियाणा, भारत ।
सावित्री या भद्रकाली शक्तिपीठ, द्वैपायन सरोवर के पास थानेसर, कुरुक्षेत्र, हरियाणा, भारत में हैं । सती के टखने की हड्डी यहाँ गिरी थी, यहाँ देवी सावित्री या भद्र काली, स्वरूप में और स्थाणु, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
गायत्री शक्तिपीठ, (कंगन), पुष्कर, राजस्थान, भारत ।
गायत्री शक्तिपीठ, भारत के राजस्थान राज्य, अजमेर में पुष्कर पर्वत श्रृंखला पर, सती के दो कंगन गिरे थे । यहाँ देवी गायत्री और "सर्वानंद भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
महालक्ष्मी शक्तिपीठ, (गर्दन), जौनपुर, सिलेट, बांग्लादेश ।
महालक्ष्मी शक्तिपीठ, बांग्लादेश में सिलेट शहर से 3 कि. मी. उत्तर-पूर्व, जौनपुर गांव के श्री-शैल पर, सती की गर्दन गिरी थी । यहाँ देवी महा-लक्ष्मी (धन की देवी) और शम्बरानन्द, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
देवगर्भ या कनकलेश्वरी शक्तिपीठ, (अस्थि), कनकली ताला या काँच, बोलपुर, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत ।
देवगर्भ या कनकलेश्वरी शक्तिपीठ, सती की अस्थियां, भारत में पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में, बोलपुर (शांतिनिकेतन) के उत्तर पूर्व में कोपाई नदी के तट पर, गिरी । यहां देवी कनकलेश्वरी और रुरु, भैरव के रूप में अवस्थित हैं ।
काली शक्तिपीठ, (बायां कूल्हा), अमरकंटक, शहडोल, मध्य प्रदेश, भारत ।
काली शक्तिपीठ, सती की वाम भाग का कूल्हा, भारत के मध्य प्रदेश राज्य, शहडोल जिले के अमरकंटक नमक स्थान पर सोन नदी के तट पर, एक गुफा में गिरी । यहाँ देवी काली और असितांग, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
नर्मदा शक्तिपीठ, (दांया कूल्हा), सोनदेश, अमरकंटक, मध्य प्रदेश, भारत ।
नर्मदा शक्तिपीठ, सती का दाहिना कूल्हा, भारत में मध्य प्रदेश राज्य, के शहडोल जिले में सोनदेश, अमरकंटक नमक स्थान पर, नर्मदा नदी के उद्गम स्थान पर गिरा । यहाँ देवी नर्मदा और भद्रसेन, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
शिवानी शक्तिपीठ, (दांया स्तन), सीतापुर, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश, भारत ।
शिवानी शक्तिपीठ, सती का दाहिना स्तन, भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के चित्रकूट जिले, सीतापुर गांव के रामगिरी पर्वत श्रंखला में गिरी । यहाँ देवी शिवानी और चांद, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
उमा शक्तिपीठ, (चूड़ामणि), वृन्दावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश, भारत ।
उमा शक्तिपीठ, सती के बालों की चूड़ामणि, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य, के मथुरा जिले में, वृंदावन, भूतेश्वर मंदिर के पास गिरा । यह स्थान, भगवान कृष्ण के जन्म स्थान के रूप में प्रसिद्ध है । यहाँ देवी उमा और भूतेश, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
नारायणी शक्तिपीठ, (ऊपरी जबड़े के दांत), कन्याकुमारी, तमिलनाडु, भारत ।
नारायणी शक्तिपीठ, यह पीठ भारत के तमिलनाडु राज्य की कन्या-कुमारी नमक स्थान के पास शुचितीर्थम में विद्यमान हैं । यहाँ, सती के ऊपरी जबड़े के दांत गिरे थे तथा देवी नारायणी और संहार, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
अपर्णा शक्तिपीठ, (वाम पैर का नुपुर), शेरपुर, बागुरा, बांग्लादेश ।
अपर्णा शक्तिपीठ, यह पीठ बांग्लादेश के बागरा जिले के भवानी पुर गाँव में है । यहाँ, सती की वाम पैर का पायल या नूपुर गिर गया था तथा यहाँ देवी अपर्णा के रूप में है और वामन, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
सुंदरी या बाला-त्रिपुर सुंदरी शक्तिपीठ, (दाहिने पैर का पायल या नुपुर), त्रिपुरान्तकम्, श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश, भारत ।
सुंदरी या बाला-त्रिपुर सुंदरी, सती के दाहिने पैर का पायल या नूपुर, भारत के आंध्र प्रदेश राज्य, श्रीशैलम के पास, त्रिपुरान्तकम् में गिरी । यहां देवी सुंदरी या बाला-त्रिपुर सुंदरी और सुन्दरनन्द, भैरव के रूप में अधिष्ठित हैं ।
कपालिनी शक्तिपीठ, (बाएं टखने), तामलुक, मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल, भारत ।
कपालिनी शक्तिपीठ, सती के बाएँ टखने, भारत में पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले में तामलुक, मैं गिरा । यहां देवी, कपालिनी शक्ति और सर्वानंद, भैरव के रूप में प्रतिष्ठित हैं ।
चंद्रभागा शक्तिपीठ, (पेट), जूनागढ़, गुजरात, भारत ।
चंद्रभागा शक्तिपीठ, देवी सती का पेट या आमाशय, भारत के गुजरात राज्य के जूनागढ़ जिले में सोमनाथ, वेरावल, सौराष्ट्र या प्रभास क्षेत्र में गिरी । यहाँ भगवान शिव का सोमनाथ नमक ज्योतिर्लिंग विद्यमान हैं । यहाँ देवी चंद्रभागा शक्ति के रूप में और वक्रतुंड, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
अवंती शक्तिपीठ, (ऊपरी होंठ), उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत ।
अवंती शक्तिपीठ, देवी सती का ऊपरी होंठ, भारत के मध्य प्रदेश के उज्जैन में गिरा । यहाँ महाकालेश्वर नाम से भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग हैं । यहाँ देवी अवंती शक्ति के रूप में और लम्बकर्ण, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
भ्रामरी शक्तिपीठ, (दोनों ठोड़ी), नासिक, महाराष्ट्र, भारत ।
भ्रामरी शक्तिपीठ, सती की ठोड़ी के दोनों हिस्से, भारत के महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले के गोदावरी नदी-घाटी में जनस्थान में गिरी । यहाँ देवी, भ्रामरी शक्ति के रूप में और वक्रकाटाक्ष, भैरव के रूप में अवस्थित हैं ।
विश्वेश्वरी शक्तिपीठ, (गाल), राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश, भारत ।
विश्वेश्वरि द्राक्षरमं शक्तिपीठ, भारत के आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी जिले के पास, सती के गाल गिरे थे । यहाँ वह विश्वेश्वरि शक्ति के रूप में और वत्साम्भा, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
अम्बिका शक्तिपीठ, (बाएँ पैर की उंगलियां), भरतपुर, राजस्थान, भारत ।
अंबिका शक्तिपीठ, भारत में राजस्थान में भरतपुर जिले के बिरात में, सती के बाएँ पैर की उंगलियां गिरी थी । यहाँ देवी, अंबिका शक्ति के रूप में और अमृतेश्वर, भैरव के रूप में अधिष्ठित हैं ।
कुमारी शक्तिपीठ, (दाएँ कंधे), कृष्णागर, हुगली, पश्चिम बंगाल, भारत ।
कुमारी शक्तिपीठ, खनकुल ग्राम के रत्नाकर नदी के तट पर, भारत, पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के कृष्णागर, सती के दाहिने कंधे गिरे थे । यहाँ देवी, कुमारी शक्ति के रूप में और शिव, भैरव के रूप में प्रतिष्ठित हैं ।
उमा शक्तिपीठ, (बाएं कंधे), मिथिला, बिहार, भारत ।
उमा शक्तिपीठ, भारत के, बिहार राज्य (इंडो नेपाल सीमा के पास), मिथिला में, जनकपुर रेलवे स्टेशन के पास, सती का बायाँ कन्धा गिर था । यहाँ देवी, उमा या नील-सरस्वती शक्ति के रूप में और महोदर, भैरव के रूप में अवस्थित हैं ।
नल्हाटेश्वरी या कालिका, (गले की नली), नलहाटी, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत ।
नल्हाटेश्वरी या कालिका, यह पीठ भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के बीरभूम जिले के, नलहाटी में स्थित हैं । यहाँ, सती के गले की नाली गिरी थी, यहाँ देवी, नल्हाटेश्वरी शक्ति रूप में और योगेश, भैरव रूप में प्रकट हैं ।
चामुंडेश्वरी या दुर्गा शक्तिपीठ, (दोनों कान), मैसूर, कर्नाटक, भारत ।
चामुंडेश्वरी या दुर्गा, यह पीठ भारत के कर्नाटक राज्य के मैसूर के चामुंडी पर्वत पर हैं । यहाँ देवी, सती के दोनों कान गिरे, देवी यहाँ जय दुर्गा शक्ति और अभिरु भैरव के रूप में अवस्थित हैं ।
महिषमर्दिनी शक्तिपीठ, (भौंहें), वक्रेश्वर, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत ।
महिषमर्दिनी शक्तिपीठ, यह पीठ भारत के पश्चिम बंगाल राज्य, बीरभूम जिले के वक्रेश्वर में पम्प्हारा नदी के तट पर अवस्थित हैं । यहाँ देवी सती, कि भौंहें गिरी थी तथा यहाँ देवी महिषमर्दिनी शक्ति रूप में और वक्रनाथ, भैरव के रूप में अवस्थित हैं । यहाँ २०० डिग्री सेल्सियस तापमान तक के गरम पानी के श्रोत हैं, जो अनेक प्रकार के अलौकिक शक्तिओ से सम्पन्न हैं ।
योगेश्वरी शक्तिपीठ, (पैर और हाथ के तलवे), खुलना, बांग्लादेश ।
योगेश्वर शक्तिपीठ, यह पीठ शक्ति काली को समर्पित हैं तथा ईस्वरीपुर गांव, जेसोर, खुलना जिला, बांग्लादेश में हैं तथा जसोरेश्वरी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं । महाराजा प्रतापादित्य ने इस शक्ति पीठ की खोज की तथा वे इस स्थान में काली की पूजा करते हैं। यहाँ देवी सती, के हाथ तथा पैर के तलवे गिरे थे, देवी योगेश्वरी शक्ति के रूप में और चंदा, भैरव के रूप में विद्यमान हैं ।
फुल्लौरा शक्तिपीठ, (निचले होंठ), लाभपुर, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत ।
फुल्लौरा शक्तिपीठ, यह पीठ भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के बीरभूम जिले में, लाभपुर नमक गांव में स्थित हैं । यहाँ, देवी सती के निचले होंठ गिरे थे, देवी फुल्लौरा शक्ति के रूप में और विश्वेश, भैरव के रूप में अवस्थित हैं । यह मंदिर इमली के पेड़ो से घिरा हुआ है ।
नंदिनी शक्तिपीठ, (गर्दन अस्थि), नन्दीपुर ग्राम, सैंथिया, बीरभूम, पश्चिम बंगाल, भारत ।
नंदिनी या नदीकेश्वरी शक्तिपीठ, यह पीठ नन्दीपुर ग्राम, सैंथिया रेलवे स्टेशन के पास, बीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल, भारत में अवस्थित हैं । यहाँ देवी सती की गर्दन अस्थि गिरी थी, यहाँ देवी नंदिनी या नन्दिकेश्वरी शक्ति और नंदिकेश्वर, भैरव के रूप में विद्यमान हैं । देवी कि विग्रह यहाँ सिंदूर से लिप्त है जो बड़ी चट्टान के आकार लिये, कछुये के पीठ के समान हैं ।
इन्द्राक्षी शक्तिपीठ, (पायल), जाफना, श्रीलंका ।
इन्द्राक्षी शक्तिपीठ, यह पीठ नैनातिवु (मणिपल्लवम्), श्रीलंका के जाफना के नल्लूर में स्थित हैं । देवराज इंद्र ने यहाँ पर देवी आदि शक्ति काली के पूजा की थी । दानव रावण (श्रीलंका के शासक या राजा) और भगवान राम ने भी यहाँ, देवी शक्ति की पूजा की हैं । यहाँ देवी सती कि पायल (आभूषण) गिरी थी तथा यहाँ देवी इन्द्राक्षी शक्ति के रूप में और राक्षसेश्वर,भैरव के रूप में अवस्थित हैं ।

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