Thursday, March 31, 2022

चैत्र नवरात्रि कब से है और क्या उपाय करें और क्या रखे सावधानियों

मित्रों आप सभी को सनातन हिन्दू धर्म के नववर्ष 2079 की बहुत बहुत शुभकामनाएं और हार्दिक बधाई मां बाबा आप सभी को स्वास्थ्य और निरोगी रखे यही मां बाबा से हमारी प्रार्थना है,, 🌹

मित्रों इस साल चैत्र नवरात्रि 2 अप्रैल 2022 को शनिवार के दिन से शुरू हो रहे हैं जो 11 अप्रैल 2022 को सोमवार के दिन समाप्त होंगे। वहीं 10 अप्रैल को राम नवमी मनाई जाएगी।
मित्रों सबसे पहले नवरात्रि के पहले दिन घट स्‍थापना की जाती है. याद रखें कि यह कलश स्थापना ईशान कोण यानी कि उत्तर-पूर्व कोण में करें. वास्‍तु शास्‍त्र के में ईशान कोण को पूजा-पाठ के लिए सबसे शुभ और उत्तम माना गया है. इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है.
नवरात्रि के दौरान भक्त माता दुर्गा के 9 रूपों की खास पूजा अर्चना करते हैं। ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक इस बार की चैत्र नवरात्रि बेहद खास और फलदायी साबित होगी क्योंकि इस साल चैत्र नवरात्रि में ग्रहों के योग से विशेष संयोग का निर्माण हो रहा है मित्रों जैसा कि आप सभी जानते हैं कि 2022 चैत्र नवरात्रि शुरू होने वाली है चैत्र नवरात्रि गर्मी के मौसम की शुरुआत करता है नवरात्रि में विभिन्न देवी देवताओं के अनुष्ठान होते हैं पुरा सनातन धर्म समुदाय माता और किसी भी देवी देवताओं को प्रसन्न करने के साधना पुजा, अनुष्ठान करते हैं और देवी देवताओं के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है और साधना ही की जाती है हिंदू पुराण और ग्रंथों के अनुसार चैत्र नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण नवरात्रि हैं और रामायण के अनुसार भगवान राम ने भी इसी चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना कर रावण का वध कर विजय प्राप्ति की थी इसी कारण वर्ष चैत्र नवरात्रि पूरे भारत के पूरे विश्व में धूमधाम से मनाई जाती है और इसी चैत्र नवरात्रि के नवमी को रामनवमी भी कहा जाता है जिस दिन सिद्धिदात्री की पूजा आराधना व साधना की जाती है नवरात्रि नवरात्रि 2 अप्रैल से शुरू हो रही है जो 11 अप्रैल तक दसमी तक रहेगी दसवीं के दिन भैरव पूजा पण पूर्णाहुति गिना जाता है इस बार मां की सवारी घोड़े पर आ रही है उससे क्या फर्क पड़ता है पूजा में क्या विशेष करें वैसे तो हम हर बार नवरात्रि की पोस्ट करते हैं  हैं और यहां कुछ उपाय भी बताते हैं यह सभी उपाय और टोटके अति फलदाई होते हैं इसलिए जो करो सोच समझकर करें, आज हम केवल 2 तारीख को घट स्थापना कब करें और क्या क्या उपाय करने चाहिए वह देखने इस दिन घट स्थापना के लिए सूर्योदय काल से लेकर 12:00 बजे 28 मिनट तक कलश स्थापना कर ली जाए अति उत्तम रहेगा यदि शुभ चौघड़िया मैं की जाई तो 7:30 बजे से लेकर 9:00 बजे तक और दोपहर में 12:00 से लेकर 12:28 तक यही सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है और नवरात्रि का व्रत अगर 11 अप्रैल दिन सोमवार को दशमी तिथि में तोड़ा जाए तो अच्छा है क्योंकि नवरात्रि इस बार खंडित नहीं है और माता के घोड़े पर आगमन का जो मतलब होता है सामाजिक को समाज में अस्थिरता कई दुर्घटनाएं होगी आम जनमानस के सुखों में कमी की वृद्धि होगी असली माता का पूजनीय साधना करके उनसे शमा याचना के लिए प्रार्थना करें अति लाभदायक होगा,
इस साल चैत्र नवरात्रि के दौरान सभी भक्त गण माता दुर्गा के 9 रूपों की और सिद्ध विधा अष्टलक्ष्मी की खास पूजा अर्चना करते हैं  ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक इस बार की चैत्र नवरात्रि बेहद खास और फलदायी साबित होगी क्योंकि इस साल चैत्र नवरात्रि में ग्रहों के योग से विशेष संयोग का निर्माण हो रहा है जिसमें रवि पुष्य, सर्वथसिद्ध योग, यह सब विशेष रहेगे, मित्रों इस दिन, हिंदू देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं भक्तों के लिए चैत्र नवरात्रि का बहुत धार्मिक महत्व है हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार यह वह दिन है जब दुनिया अस्तित्व में आई थी। अलग-अलग राज्य इस त्योहार को अलग-अलग नामों से पहचानते हैं महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता है जबकि कश्मीर में इसे नवरेह के नाम से जाना जाता है ,इस बार नवरात्र शनिवार से शुरू हो रहे हैं तो माता का वाहन घोड़ा होगा ,वो, मान्यता है कि मां दुर्गा जब घोड़े पर सवार होकर आती है तो युद्ध के हालात बनते हैं बिमारियों में वुर्द्धी होती है  इस बार नवरात्र का समापन सोमवार को हो रहा है तथा इस लिहाज से मां दुर्गा भैंसे की सवारी से प्रस्थान करती हैं, जिससे देश में रोग और कष्ट बढ़ता है। ऐसी मान्यता है।
चैत्र नवरात्रि 2022 घटस्थापना मुहूर्त
सुबह में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त: 06 बजकर 10 मिनट से सुबह 08 बजकर 31 मिनट तकदोपहर में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त: 12:00 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक
दिन 1: घटस्थापना / प्रतिपदा- रंग- लाल
दिन 2: द्वितीया- रंग- रॉयल ब्लू
दिन 3: तृतीया- रंग- पीला
दिन 4: चतुर्थी- रंग- हरा
दिन 5: पंचमी- रंग- ग्रे
दिन 6: षष्ठी- रंग- नारंगी
दिन 7: सप्तमी- रंग- सफेद
दिन 8: अष्टमी- रंग- गुलाबी
दिन 9: नवमी- रंग- स्काई ब्लू
क्या करे और क्या ना करें मुर्हुत और उपाय जानते हैं 
मित्रों इस बार की नवरात्रि में खास बात यह है कि इस बार चैत्र नवरात्रि के व्रत में किसी भी तिथि का क्षय ना होने से पूरे नौ दिनों तक मां की पूजा अर्चना होगी। वैसे तो पूर नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्र में शक्ति की आराधना सभी करते हैं वहीं कई लोग व्रत उपवास रखकर माता को प्रसन्न करते हैं नवरात्रि में आध्यात्मिक शक्तियां और सुख समृद्धि को प्राप्त करने के लिए पूजा-पाठ साधना मंत्र विधान इत्यादि किया जाता है
हर नवरात्रि में माता की आराधना के साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए लोगों में अलग-अलग टोटके क्रिया साधना कराने की भी प्रथा होती है माना जाता है कि नवरात्रि में यदि कुछ अच्छे और विशेष कार्य हेतु कोई टोटके क्रिया किया जाए तो जो समस्या है उसकी पीड़ा शीघ्र समाप्त हो जाती हैं आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही टोटकों के और क्रियाओं के बारे में विधान,
मित्रों घर परिवार में रोग आदि समस्या के लिए ,#पति-पत्नी के बीच या घर-परिवार में संबंध अच्छे न हो या रोग घर में बड़ी परेशानी बन गए हों तो नवरात्रि में इस उपाय का प्रयोग करें नवरात्रि के दिनों में प्रतिदिन स्नान आदि कर नीचे दिए हुए मंत्र को पढ़ते हुए 108 बार अग्नि में घी से आहुतियां दें इससे यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा  इसके बाद प्रतिदिन नित्य सुबह उठकर पूजा के समय इस मंत्र का 21 बार जप नियमित करें। संभव हो तो अपने परिवार के सदस्स्यों से भी इस मंत्र का जप करने के लिए कहें इससे जीवन भर परिवार में सभी के आपस में संबंध मधुर रहेंगे और स्वास्थ्य सम्बंधित कष्ट दूर रहेंगे ,
सब नर करहिं परस्पर प्रीति। 
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति।।
आर्थिक लाभ के लिए
नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन आप किसी शांति वाले स्थान पर उत्तर दिशा की ओर अपना मुख कर पीले आसन पर बैठ जाएं अपने सामने तिल के तेल से 9 दीपक जलाएं और उन दीयों में इतना तेल हो जब तक आप साधना कर रहे हो तब तक दीये जलते रहें। इन 9 दीयों के सामने लाल चावल बिछाकर उस पर श्रीयंत्र रखें इस श्रीयंत्र की कुमकुम, फूल, धूप तथा दीप से पूजा करें। इस कार्य के बाद एक तांबे की प्लेट पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाकर उसकी पूजा करें। तब श्रीयंत्र को अपने घर के पूजा स्थल में स्थापित कर दें तथा शेष बची पूजा सामग्री को जल में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से आपको शीघ्र ही आकस्मिक धन लाभ प्राप्त होगा
अच्छी नौकरी पाने के लिए
नवरात्रि में सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सफेद रंग का ऊनी आसन बिछाकर उस पर अपना मुख पूर्व दिशा की और कर बैठ जाएं अब अपने सामने पीला वस्त्र बिछाकर उस पर 108 दानों वाली स्फटिक की माला रख दें तथा इस पर केसर और केवड़े का इत्र छिड़ककर माला की पूजा करें। माला को धूप, दीप और अगरबत्ती दिखाकर इस मन्त्र का जाप करें
'ऊं ह्लीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा'
इस मंत्र का 108  बार जाप करें। इस प्रकार निरंतर 9 दिन तक जप करने से वह माला सिद्ध हो जाएगी। इसके बाद आपको जब भी किसी साक्षात्कार (इंटरव्यू) देने जाना हो या किसी विशेष से भेंट करने जाना हो तो इस माला को धारण कर जाएं। ऐसा करने से साक्षात्कार (इंटरव्यू) या अन्य किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त हो जाएगी 
नवरात्रि के दौरान व्‍यापारी अपने ऑफिस-दुकान के मैन गेट पर एक बर्तन में पानी भरकर पूर्व या उत्तर दिशा में रख दें. साथ ही पानी में लाल और पीले फूल डाल दें. इससे बिजनेस में तरक्‍की मिलती है. 
चैत्र नवरात्रि के 9 दिन पूरे होने के बाद घर में कन्या पूजन जरूर करें. कन्‍याओं को सम्मानपूर्वक भोजन कराएं और सामर्थ्‍यनुसार दक्षिणा दें. इससे घर के सारे वास्‍तु दोष दूर होते हैं.
नवरात्रि के दिनों में किसी शिव मंदिर में जाएं पूरे मंदिर में झाड़ू लगाकर उसे साफ करें वहां शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर चढ़ाते हुए अच्छी तरह से अभिषेक करें तत्पश्चात शुद्ध जल से स्नान करें और शिवजी की चंदन, पुष्प एवं धूप, दीप आदि से पूजा-आरती करें रात में 10 बजे के बाद आम की लकड़ी पर अग्नि प्रज्वलित कर "ऊँ नम: शिवाय" मंत्र का उच्चारण करते हुए 108 आहुति शुद्ध घी से दें नवरात्रि से आरंभ कर इस विधि को 40 दिनों तक नित्य इसी मंत्र का पांच माला का जप शिव जी के सम्मुख करते रहें इस क्रिया से आपकी सर्वमनोकामना बहुत जल्दी पूर्ण होगी,
पूजा के समय एक गुलाब के फूल पर कपूर की एक टिक्की रख कर माता रानी के सामने रख दें फिर महालक्ष्मी मंत्र की 6 माला का जाप करें इसके बाद शाम के समय गुलाब के फूल को तो देवी मां को अर्पित कर दें और कपूर की टिक्की को जलाकर आरती करें  इससे आपके सभी धन संबंधी कष्ट दूर हो जाएंगे,
नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है इस दिन इमली के पेड़ की एक डाल काट कर लाएं और फिर डाल हाथ में रखकर महालक्ष्मी मंत्र का 11 बार जाप करें। जाप करने के बाद इस डाल को अपने धन रखने स्थान अथवा तिजोरी में रख दें इसी मां लक्ष्मी की आप पर खूब कृपा बरसेगी,
जिन लोगों को पैसे की कमी के साथ ही व्यापार या नौकरी में मनमाफिक सफलता नहीं मिल पा रही है उन्हें एक पान के पत्ते की दोनों तरफ सरसों का तेल लगाकर उसे मां दुर्गा के चरणों में अर्पित करना चाहिए फिर रात में सोते समय इस पत्ते को सिरहाने रख कर सो जाएं अगली सुबह देवी के किसी मंदिर के पीछे उस पान के पत्ते को रख आएं इससे आपको व्यापार या नौकरी में सफलता मिलने के साथ ही आर्थिक तंगी भी दूर होगी,
नवरात्रि के दौरान किसी दिन मां दुर्गा की पूजा के दौरान सुबह एक पान के पत्ते पर गुलाब की थोड़ी सी पंखुड़ियां रखकर मां दुर्गा के चढ़ा दें ध्यान रहे कि गुलाब लाल रंग का ही होना चाहिए इस उपाय को करने से आपके घर में सुख-समृद्धि का वास होगा इस उपाय से मां अम्बे ही नहीं लक्ष्मी माता भी प्रसन्न होती हैं,
नवरात्रि के दौरान आप श्रीयंत्र, चांदी का सिक्का और कुबेर यंत्र खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है इनकी पूजा करें। इसके बाद इसे तिजोरी में रख दें ऐसा करने से कभी भी धन-दौलत की कमी नहीं होगी,
नवरात्रि में हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करें ऐसा नवरात्रि में हर दिन करें इससे आ​र्थिक संकट दूर होते हैं घर में सुख-समृद्धि आती है नवरात्रि में पूजा करते समय दीपक में चार लौंग, घी और बत्ती डालकर जलाएं नवरात्रि के दौरान हर दिन सुबह और शाम घी का दीपक जलाएं इससे आपको बिजनेस या जॉब में सफलता मिलेगी,
नवरात्रि में शंख की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है ऐसा माना जाता है कि शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। शंख की पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इससे आप पर मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है,
मित्रों चैत्र नवरात्र के पहले दिन मां लक्ष्‍मी को प्रसन्‍न करने के लिए उनका प्रतीक मानी जाने वाली कौड़‍ियों की पूजा करनी होगी ध्‍यान रखें कि भूरी, सफेद, पीली और काली किसी भी कौड़ी को न चुन लें अपनी आर्थिक संबंधी समस्‍या के मुताबिक ही कौड़‍ियों का प्रयोग करें अन्‍यथा इसका लाभ नहीं मिलता,
तमाम मेहनत के बाद भी आपको लाभ मिलते-मिलते रह जाता है इस पर‍िस्थिति में पीली कौड़ी का प्रयोग करें इसके लिए साधक को चैत्र नवरात्र के पहले दिन मां लक्ष्‍मी को प्रणाम करके पीले रंग के कपड़े में पीले रंग की 7  कौड़‍ियां रखें इसके बाद इसे तिजोरी में या जहां-कहीं भी पैसे रखते हों, उस स्‍थान पर रख दें साथ ही मां लक्ष्‍मी को प्रार्थना करें कि वह आपके जीवन में धन-समृद्धि की वर्द्धि होगी,
अगर भक्त के जीवन में किसी तरह की कोई परेशानी चल रही है तो उसे मां दुर्गा के बीज मंत्र- 
'ऊं ह्रीं दुं दुर्गायै नम: "
का जाप करना चाहिए जाप की संख्या 108  या इससे अधिक होनी चाहिए फिर भगवान शिव पर दही अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं ,
नवरात्रि के दौरान अगर घर में तुलसी का पौधा लगाया जाए तो यह बेहद ही शुभ होता है अगर आपके घर में यह पौधा पहले से ही है तो एक सिक्का लेकर अपनी मन्नत मांगे। फिर उस सिक्के को पौधे की मिट्टी में दबा दें अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको काम में सफलता हासिल होगी, 
नवरात्रि में कौड़ियों भी देती है अनगिनत लाभ ,,
अपने घर की नकारात्‍मकता उर्जा को भी दूर करती हैं कौड़ियों,इसके लिए घर के मुख्‍य द्वार पर लाल रंग के कपड़े में 11 कौड़‍ियां बांधकर टांग दें ऐसा करने से घर में धन-वैभव तो आएगा ही साथ ही यह बुरी नजर से भी बचाव करती है कहा जाता है कि यह नकारात्‍मकता को दूर करने का भी सार्थक उपाय है इसके अलावा पीले रंग की एक कौड़ी लेकर आप इसे ताबीज के रूप में भी पहन सकते हैं इससे निगेटिव ऊर्जा आपको छू भी नहीं सकती, 
आपके घर में किसी के भी पास कभी भी धन की कमी न हो किसी भी तरह का आर्थिक नुकसान न हो तो इसके लिए आप हरे रंग के कपड़े में पीले रंग की  11 कौड़‍ियां रखकर घर की उत्‍तर दिशा में छिपा दें ऐसा करने से भगवान कुबेर अत्‍यंत प्रसन्‍न होते हैं उनकी कृपा से घर-पर‍िवार में कभी भी धन की कमी नहीं होती लेकिन ध्‍यान रखें कि कौड़‍ियां किसी को दिखाकर या बताकर नहीं रखनी है,
अगर आपको व्‍यवसाय में लगातार नुकसान हो रहा है या फिर नौकरी करते हैं और आय संबंधी परेशान‍ियां झेलनी पड़ रही हैं ऐसे में आपको बस इतना करना है कि चैत्र नवरात्र के पहले दिन सफेद रंग की 11 कौड़‍ियों को पीले रंग के कपड़े में बांधकर रखना है इसे आप जहां भी धन रखते हों उसी स्‍थान पर रखना है मां लक्ष्‍मी को प्रणाम करें और प्रार्थना करें कि वह आपके आय में वृद्धि करें व्‍यवसाय में लाभ द‍िलाएं,
देवी मां को लाल रंग बेहद प्रिय है ऐसे में मां को लाल रंग का कपड़ा पहनाएं साथ ही लाल पुष्प भी अर्पित करें मान्यता है कि अगर ऐसा किया जाए तो व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं,
नवरात्रि के पहले दिन घट स्‍थापना की जाती है. याद रखें कि यह कलश स्थापना ईशान कोण यानी कि उत्तर-पूर्व कोण में करें. वास्‍तु शास्‍त्र के में ईशान कोण को पूजा-पाठ के लिए सबसे शुभ और उत्तम माना गया है. इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है,
अपने घर के पूजा स्थान में भगवती दुर्गा, भगवती लक्ष्मी और मां सरस्वती के चित्रों की स्थापना करके उनको फूलों से सजाकर पूजन करें,
नवरात्रि में प्रवेश द्वार पर लक्ष्मीजी के पैर का निशान बनाएं ऐसा करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और घर में सुख-शान्ति और समृद्धि बनी रहती है। इसके साथ ही नवरात्रि के दिनों में आम और अशोक के पत्तों की माला बनाकर मुख्य द्वारा पर बांधने से घर में होने वाली सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है,
नवरात्रि के 9 दिनों में से एक दिन मां लक्ष्मी मंदिर जाएं, पूजा के दौरान केसर के साथ पीले चावल को माता को अर्पित करें, मान्यता है कि ऐसा करने से घर में आ रही बाधा दूर हो जाती है और मां लक्ष्मी का आशिर्वाद मिलता है,
मनचाही इच्छा की प्राप्ति के लिए
नवदुर्गा की पूजा के दौरान माता को शहद और इत्र लगाएं। मां की कृपा हमेशा आप पर बनी रहेगी और आपकी हर इच्छा पूरी होगी,
धन की प्राप्ति के लिए
गुलाब के 7 फूल मां दुर्गा को अर्पित करें और लाल रंग के आसन पर बैठकर मां दुर्गा की आराधना करें,
बांधा दुर करने के लिए,
नवरात्रि के 9 दिनों में से एक दिन मां लक्ष्मी मंदिर जाएं। पूजा के दौरान केसर के साथ पीले चावल को माता को अर्पित करें, मान्यता है कि ऐसा करने से घर में आ रही बाधा दूर हो जाती है और मां लक्ष्मी का आशिर्वाद मिलता है,
रोगों से मुक्ति के लिए
मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाएं, समस्त रोगों से मुक्ति मिलेगी,
लंबी उम्र की प्राप्ति के लिए,
माता ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाएं, मां से लंबी उम्र का वरदान मिलेगा,
सुख की प्राप्ति के लिए
देवी चंद्रघंटा की पूजा करने के बाद दूध का भोग लगाएं, सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी और घर से कलह भी दूर होता है,
मनोबल बढ़ाने के लिए,
देवी कुष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाएं, मनोबल बढ़ा-चढ़ा रहेगा,
बुद्धि और ज्ञान की प्राप्त के लिए
नवदुर्गा को केले का भोग लगाएं, इससे आपकी बुद्धि का विकास होगा,
सौंदर्य की प्राप्ति के लिए,
मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं, इससे सुंदर रंग-रूप की प्राप्ति होती है,
कारोबार में लाभ के लिए,
नवरात्र के शनिवार को सूर्योदय के पहले पीपल के 11 पत्ते लेकर उन पर राम-राम लिखकर इन पत्तों की माला बनाकर इसे हनुमानजी को पहना दें,,, कारोबार में आ रही सारी परेशानियां दूर होंगी,
कर्ज़ मुक्ति के लिए,
मां के श्री चरणों में 108 गुलाब या रक्त पुष्प (लाल कनेर, गुड़हल) के फूल अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर मां का ध्यान करें ,पूजा के बाद मसूर को अपने ऊपर से 7 बार वारकर किसी भी सफाई कर्मचारी को दान दें,
मां भगवती की कृपा पाने के लिए,
नौ दिनों तक माता का व्रत रखें अगर शक्ति न हो तो पहले, चौथे और आठवें दिन का उपवास अवश्य करें ,मां भगवती की कृपा जरूर प्राप्त होगी,
आपदा विपदा से छुटकारा पाने के लिए,
नौ दिनों तक घर में मां दुर्गा के नाम की ज्योत अवश्य जलाएं,
और अधिक से अधिक नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का जाप अवश्य करें,
नवरात्रि मेंइन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करना चाहिए जिससे मां की कृपा बनी रहे,
ध्यान रहे मित्रों पूजन में हमेशा लाल रंग के आसन का उपयोग करना उत्तम होता है आसन लाल रंग का और ऊनी होना चाहिए बाकी सभी कई तरह की साधनोऔ में आसान और पुजा सामग्री बदल भी जाती है ,
लाल रंग का आसन न होने पर कंबल का आसन इतनी मात्रा में बिछाकर उस पर लाल रंग का दूसरा कपड़ा डालकर उस पर बैठकर पूजन करना चाहिए,
पूजा पूरी होने के पश्चात आसन को प्रणाम करके लपेटकर सुरक्षित जगह पर रख दीजिए,
 पूजा के समय लाल वस्त्र पहनना शुभ होता है लाल रंग का तिलक भी जरूर लगाएं लाल कपड़ों से आपको एक विशेष ऊर्जा की प्राप्ति होती है, बाकी दिशा काल समय पर यह सब चेंज या बदल भी जाती है मां को प्रात: काल के समय शहद मिला दूध अर्पित करें, पूजन के बाद इसे ग्रहण करने से आत्मा व शरीर को बल प्राप्ति होती है यह एक उत्तम उपाय है, आखिरी दिन घर में रखीं पुस्तकें, वाद्य यंत्रों, कलम आदि की पूजा अवश्य करें,
अष्टमी व नवमी के दिन कन्या पूजन करें,
#श्री दुर्गा सप्तशती विधान,
मित्रों शास्त्रों में कहा गया है कि स्तुतियों में ‘दुर्गा सप्तशती’ सबसे अधिक व तत्काल फल देने वाली है नवरात्रों में दुर्गा सप्तशती की पूजा से कई गुणा फल अधिक मिलता है
पारिवारिक संकट आने पर दुर्गा सप्तशती का तीन बार पाठ करायें या करें,
यदि घर में कोई तकलीफ पा रहा हो तो पांच बार दुर्गा सत्पशती का पाठ करें,
यदि परिवार में कोई भय पैदा करने वाला संकट आया है तो सात बार पाठ करें,
परिवार की सुख समृद्धि के लिये नौ बार पाठ करें,नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,,
धनवान बनने के लिये ग्यारह बार पाठ करें, 
मनचाही वस्तु पाने के लिये बारह बार पाठ करें,
घर में सुख शांति व श्री वृद्धि के लिये पन्द्रह बार पाठ करें,
पुत्र-पौत्र, धन-धान्य व प्रतिष्ठा के लिये सोलह बार पाठ करें,
यदि परिवार में किसी पर राजदंड, शुत्र का संकट या मुकदमें में फंस गये हो तो (18)अठारह बार पाठ करें,
जेल से छुटकारा पाने के (अगर निदोष हैं) लिये(25) पच्चीस बार पाठ का विधान है,
शरीर में कोई घाव-फोड़ा आदि हो गया हो या आपरेशन कराने की नौबत आ गयी हो तो तीस बार पाठ कराने से फायदा होता है,
भयंकर संकट, असाध्य रोग, वंशनाश या धन नाश की नौबत आये तो सौ बार सत्पशती का पाठ करायें सौ बार पाठ को ही शतचण्डी पाठ कहते हैं,
एक हजार पाठ कराने वाले यजमान को मुक्ति मिल जाती है इसे ही सहस्त्रचण्डी पूजा कहते हैं,
अध्याय 1 इसके पाठ से सभी प्रकार की चिंता दूर होती है एवं शक्तिशाली से शक्तिशाली शत्रु का भी भय दूर होता है शत्रुओं का नाश होता है,नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,,
अध्याय 2 इसके पाठ से बलवान शत्रु द्वारा घर एवं भूमि पर अधिकार करने एवं किसी भी प्रकार के वाद विवाद आदि में विजय प्राप्त होती है,
अध्याय 3 तृतीय अध्याय के पाठ से युद्ध एवं मुक़दमे में विजय, शत्रुओं से छुटकारा मिलता है,
अध्याय 4 इस अध्याय के पाठ से धन, सुन्दर जीवन साथी एवं माँ की भक्ति की प्राप्ति होती है,
अध्याय 5 इस अध्याय के पाठ से भक्ति मिलती है, भय, बुरे स्वप्नों और भूत प्रेत बाधाओं का निराकरण होता है,
अध्याय 6 इस अध्याय के पाठ से समस्त बाधाएं दूर होती है और समस्त मनवाँछित फलो की प्राप्ति होती है,
अध्याय 7 इस अध्याय के पाठ से ह्रदय की समस्त कामना अथवा किसी विशेष गुप्त कामना की पूर्ति होती है,
अध्याय 8 इस अध्याय के पाठ से धन लाभ के साथ वशीकरण प्रबल होता है,
अध्याय 9 इस अध्याय के पाठ से खोये हुए की तलाश में सफलता मिलती है, संपत्ति एवं धन का लाभ भी प्राप्त होता है,
अध्याय 10 इस अध्याय के पाठ से गुमशुदा की तलाश होती है, शक्ति और संतान का सुख भी प्राप्त होता है,
अध्याय 11 ग्यारहवें अध्याय के पाठ से किसी भी प्रकार की चिंता, व्यापार में सफलता एवं सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है,
अध्याय 12 इस अध्याय के पाठ से रोगो से छुटकारा, निर्भयता की प्राप्ति होती है एवं समाज में मान-सम्मान मिलता है,नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,,
अध्याय 13 इस अध्याय के पाठ से माता की भक्ति एवं सभी इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति होती है,
#नवरात्रि को क्या नहीं करना चाहिए,,
नवरात्रि में देवी के विभिन्न रुपों की पुजा की जा सकती है नवदुर्गा,महासिद्धविधा ,महा अष्टलक्ष्मी,या त्रिदेवों में किसी की भी या इतर योनी साधनाएं आदि की अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इन दिनों भक्त व्रत रखकर माता की आराधना करते हैं। नवरात्रि के दौरान मांसाहारी भोजन से दूर रहे,
#लहसुन और प्याज तामसिक भोजन होता है इसके सेवन से मन की एकाग्रता भंग होती है, वह मानसिक थकान होता है,इस लिए नवरात्रि में तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए,
#बाल कटवाना नहीं चाहिए,
नवरात्रि में बाल कटवाना और सेविंग नहीं करना चाहिए, मान्यता है कि कटिंग से धन होती है, वह लक्ष्मी देवी नाराज होती है,
#नाखून काटना
ज्योतिष शास्त्रों के और सनातनी मान्यता के मुताबिक नवरात्रि में नाखून काटने की मनाह है, मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा क्रोधित हो जाती हैं, उनके क्रोध से जातकों को कष्ट का सामना करना पड़ता है,
#नोट,मां दुर्गा को तुलसी दल और दूर्वा चढ़ाना निषिद्ध है,
मित्रों किसी भी प्रकार की शंका निवारण के लिए दिन में बारह बजे से शाम पांच बजे तक कोल या मेसेज कर सकते हैं 9829026579वाटस अप 861983810 कोलिंग,, नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,,
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश 🙏🌹

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