Monday, November 1, 2021

दिपावली पूजन का सरल विधान और समाग्री , कैसे करें पुजा,

मित्रों दिपावली सनातन धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है आईये जानते हैं इसकी पुजा विधी और मुर्हुत और पुजा कैसे करें और क्या समाग्री चाहिए,,

मित्रों कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दीपों का पर्व दिपावाली मनाया जाता है. मित्रों इस वर्ष गुरुवार 4 नवंबर 2021 को ये त्योहार मनाया जाएगा. दिपावाली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी का पूजन करने का विधान है. इस साल एक ही राशि में चार ग्रहों के होने से दिपावाली पर दुर्लभ संयोग भी बन रहा है. आईये मित्रों वो क्या दुर्लभ सयोग है कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 4 नंवबर 2021 दिन गुरुवार को दिवाली मनाई जाएगी है. इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है. इस साल दिवाली पर दुर्लभ संयोग बन रहा है.  सनातनी पंचांग और ज्योतिषाचार्या के अुनसार चार ग्रह एक ही राशि में हैं, यानि एक ही राशि में इन चारों ग्रहों की युति है. इस वजह से ये दिपावाली लोगों के लिए अत्यंत शुभ रहेगी. देवु मां लक्ष्मी और बाबा गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त होगा और जातकों को लाभ ही लाभ होगा.तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं. लक्ष्मी जी की पूजा से शुक्र ग्रह की शुभता में वृद्धि होती है. ज्योतिषचार्यो के और हिन्दू शास्त्रों के अनुसार शुक्र को लग्जरी लाइफ, सुख-सुविधाओं आदि का कारक माना गया है. वहीं सूर्य को ग्रहों का राजा, मंगल को ग्रहों का सेनापति और बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा गया है. इसके साथ ही चंद्रमा को मन का कारक माना गया है. वहीं सूर्य पिता तो चंद्रमा को माता कारक माना गया है , दिवाली का पर्व आने वाला है, इस पर्व में अब कुछ ही तीन चार दिन ही शेष है और हम पोस्ट लेट करने के लिए क्षमा चाहते हैं, दिपावाली की तैयारियां सभी घरों में आरंभ हो चुकी है. दिपावाली का पर्व कार्तिक मास का प्रमुख पर्व है. दिपावाली पर लक्ष्मी जी की विशेष पूजा की जाती है. दिपावाली पर लक्ष्मी पूजन को महत्वपूर्ण माना गया है. ये पर्व लक्ष्मी जी को समर्पित है. इस दिन शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक लक्ष्मी जी की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है. इस वर्ष दिपावाली के दिन लक्ष्मी पूजन का शुभ योग में किया जाएगा. दिवाली पूजन का महत्व दिवाली पर लक्ष्मी पूजन जीवन में आने वाली आर्थिक परेशानियों को दूर करना वाला माना गया है. शास्त्रों में लक्ष्मी जी को वैभव की देवी माना गया है. लक्ष्मी जी की कृपा से जीवन में संपन्नता आती है. कष्टों से मुक्ति मिलती है. मान्यता है कि दिवाली की रात शुभ मुहूर्त में पूजा करने से लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्तत होती है. यही कारण है दिपावाली की पूजा का लोगों को इंतजार रहता है. 
पंचांग के अनुसार दिवाली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. 
सनातनी हिंदू कैंलेडर के अनुसार इस वर्ष कार्तिक अमावस्या 4 नवंबर 2021 को है. इस दिन चंद्रमा का गोचर तुला राशि में होगा.
दिपावाली 2021, शुभ मुहूर्त (Dipawali 2021)
दिपावाली पर्व: 4 नवंबर, 2021, गुरुवार
अमावस्या तिथि का प्रारम्भ: 4 नवंबर 2021 को प्रात: 06:03 बजे से.
अमावस्या तिथि का समापन: 5 नवंबर 2021 को प्रात: 02:44 बजे तक.
मां लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (maa Lakshmi Puja 2021 Date)
4 नवंबर 2021, गुरुवार, शाम 06 बजकर 09 मिनट से रात्रि 08 बजकर 20 मिनट
अवधि: 1 घंटे 55 मिनट
प्रदोष काल: 17:34:09 से 20:10:27 तक
वृषभ काल: 18:10:29 से 20:06:20 तक
भारतीय या जगह स्थान काल दिशा के अनुसार कुछ समय आगे पीछे हो सकता है,
दीपावली 2021 शुभ मुहूर्त
दीपावली 04 नवंबर 2021, दिन गुरूवार को है।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
शाम 06:10 बजे से रात्रि 08:06 बजे तक
पूजा की अवधि
01 घंटा 54 मिनट
प्रदोष काल मुहूर्त
शाम 05:34 बजे से रात्रि 08:10 बजे तक
अमावस्या तिथि प्रारंभ
04 नवबंर 2021, सुबह 06:03 बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त
05 नवबंर 2021, 02:44 बजे
दिपावली पुजा की समाग्री और सरलीकरण पुजा विधान, समाग्री और पुजा विधान सही से पढ़कर समाग्री की व्यवस्था कर सकते हैं 
एक लकड़ी की चौकी.
चौकी को ढकने के लिए लाल या पीला कपड़ा.
देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां/चित्र.
कुमकुम
चंदन
हल्दी
रोली
अक्षत
पान और सुपारी
साबुत नारियल अपनी भूसी के साथ
अगरबत्ती
दीपक के लिए घी
पीतल का दीपक या मिट्टी का दीपक
कपास की बत्ती
पंचामृत
गंगाजल
पुष्प
फल
कलश
जल
आम के पत्ते
कपूर
कलाव
साबुत गेहूं के दाने
दूर्वा घास
जनेऊ
धूप
एक छोटी झाड़ू
दक्षिणा (नोट और सिक्के)
आरती थाली
मित्रों दिपावाली की सफाई बहुत जरूरी है. अपने घर के हर कोने को साफ करने के बाद गंगाजल गोमुत्र जरूर छिड़कें हो सके तो इनके साथ बाबा हनुमान जी का चरणामृत भी मिला सकते हैं या किसी तीर्थ स्थान का या किसी सिद्ध पीठ का चरणामृत भी मिला सकते हैं नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी,
लकड़ी की चौकी पर लाल सूती कपड़ा बिछाएं. बीच में मुट्ठी भर अनाज रखें,
कलश (चांदी/कांस्य का बर्तन) को अनाज के बीच में रखें.
कलश में 75% पानी भरकर एक सुपारी (सुपारी), गेंदे का फूल, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने डाल दें.
कलश पर 5 आम के पत्ते गोलाकार आकार में रखें.
केंद्र में देवी लक्ष्मी की मूर्ति और कलश के दाहिनी ओर (दक्षिण-पश्चिम दिशा) में भगवान गणेश की मूर्ति रखें.
एक छोटी थाली लें और चावल के दानों का एक छोटा सा पहाड़ बनाएं,
हल्दी से कमल का फूल बनाएं, कुछ सिक्के डालें और मूर्ति के सामने रखें.
अब अपने व्यापार/लेखा पुस्तक और अन्य धन/व्यवसाय से संबंधित वस्तुओं को मूर्ति के सामने रखें साधक या भक्त अपने माला कवच कडे भी रख सकते हैं ,
अब देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश को तिलक करें और दीपक जलाएं. कलश पर भी तिलक लगाएं.
अब भगवान गणेश और लक्ष्मी को फूल चढ़ाएं. पूजा के लिए अपनी हथेली में कुछ फूल रखें.
अपनी आंखें बंद करें और दिवाली पूजा मंत्र का पाठ करें.
हथेली में रखे फूल को भगवान गणेश और लक्ष्मी जी को चढ़ा दें.
लक्ष्मीजी की मूर्ति लें और उसे पानी से स्नान कराएं और उसके बाद पंचामृत से स्नान कराएं.
इसे फिर से पानी से स्नान कराएं, एक साफ कपड़े से पोछें और वापस रख दें.
मूर्ति पर हल्दी, कुमकुम और चावल डालें. माला को देवी के गले में लगाएं. अगरबत्ती जलाएं.
नारियल, सुपारी, पान का पत्ता माता को अर्पित करें.
देवी की मूर्ति के सामने कुछ फूल और सिक्के रखें.
थाली में दीया लें, पूजा की घंटी बजाएं और लक्ष्मी जी की आरती करें.
#विशेष,,
दिपावाली पर ध्यान रखें ये खास बातें
लक्ष्मी पूजन की सामग्री में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर, भोजपत्र का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए.
मां लक्ष्मी को पुष्प में कमल व गुलाब प्रिय हैं. फल में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े प्रिय हैं. इनका भोग जरूर लगाएं सुगंध में केवड़ा गुलाब, चंदन के इत्र का इस्तेमाल महालक्ष्मी पूजन में जरूर करें. अनाज में चावल और मिठाई में घर में शुद्ध घी से बनी केसर की मिठाई या हलवा नैवेद्य में जरूर रखें. व्यावसायिक प्रतिष्ठान और गद्दी की भी विधि पूर्वक पूजा करें. लक्ष्मी पूजन रात के 12 बजे करने का विशेष महत्व होता है. धन की देवी लक्ष्मी जी को प्रसन्न करना है तो दीयों के प्रकाश के लिए गाय का घी, मूंगफली या तिल के तेल का इस्तेमाल करें. देरे के लिए क्षमा मित्रों नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर,,
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश 🌹🙏🏻

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