Tuesday, July 13, 2021

भैरव शाबर मन्त्र 2





“आद भैरों, जुगाद भैरों, भैरों हैं सब भाई । भैरों ब्रह्मा, भैरों विष्णु भैरों ही भोला साईं । भैरों देवी, भैरों सब देवता, भैरों सिद्ध भैरों नाथ, गुरु, भैरों पीर, भैरों ज्ञान, भैरों ध्यान । भैरों योग-वैराग । भैरों बिन होय ना रक्षा । भैरों बिन बजे ना नाद । काल भैरों, विकराल भैरों । घोर भैरों, अघोर भैरों । भैरों की कोई ना जाने सार । भैरों की महिमा अपरम्पार । श्वेत वस्त्र, श्वेत जटाधारी । हत्थ में मुदगर, श्वान की सवारी । सार की जंजीर, लोहे का कड़ा । जहां सिमरुं, भैरों बाबा हाजिर खड़ा । चले मन्त्र, फुरे वाचा । देखा आद भैरों । तेरे इल्म चोट का तमाशा ॥”

 प्रयोग -->41 दिनों तक किसी शिव मंदिर या भैरव मंदिर में भैरव की पंचोपचार पूजा करने के बाद उड़द के बड़े और मद्य का भोग लगाएं । भैरव देव प्रसन्न होकर भक्त की सब मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं ।

भैरव शाबर मन्त्र




“ॐ रिं रिक्तिमा भैरो दर्शय स्वाहा । ॐ क्रं क्रं-काल प्रकटय प्रकटय स्वाहा । रिं रिक्तिमा भैरऊ रक्त जहां दर्शे । वर्षे रक्त घटा आदि शक्ति । सत मन्त्र-मन्त्र-तंत्र सिद्धि परायणा रह-रह । रूद्र, रह-रह, विष्णु रह-रह, ब्रह्म रह-रह । बेताल रह-रह, कंकाल रह-रह, रं रण-रण रिक्तिमा सब भक्षण हुँ, फुरो मन्त्र । महेश वाचा की आज्ञा फट कंकाल माई को आज्ञा । ॐ हुं चौहरिया वीर-पाह्ये, शत्रु ताह्ये भक्ष्य मैदि आतू चुरि फारि तो क्रोधाश भैरव फारि तोरि डारे । फुरो मन्त्र, कंकाल चण्डी का आज्ञा । रिं रिक्तिमा संहार कर्म कर्ता महा संहार पुत्र । ‘अमुंक’ गृहण-गृहण, मक्ष-भक्ष हूं । मोहिनी-मोहिनी बोलसि, माई मोहिनी । मेरे चउआन के डारनु माई । मोहुँ सगरों गाउ । राजा मोहु, प्रजा मोहु, मोहु मन्द गहिरा । मोहिनी चाहिनी चाहि, माथ नवइ । पाहि सिद्ध गुरु के वन्द पाइ जस दे कालि का माई ॥”

इसकी सिद्धि से साधक की सर्व मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा श्री भैरवजी की कृपा बनी रहती है । इस मन्त्र से झाड़ने पर सभी व्याधियों का नाश होता है ।

Monday, July 5, 2021

गुप्त नवरात्रि कब से और क्या करे जानये

मित्रों जैसा कि आप सभी को पता है कि आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि आने वाली है मित्रों यू तो हम हर नवरात्रि पर कुछ ना कुछ लिखते हैं बस मां बाबा इतनी कृपा प्रदान करे कि हम उतना सरलकरणी से लिख सके कि आम इंसान भी उतने ही सरलीकरण से देवी मां नवदुर्गा की आराधना कर सके, मित्रों आप सभी अपने अपने आराध्य देव या देवी के जप तप पुजा हवन या गुप्त ऊर्जा को पाने के लिए और अपने अपने गुरूओ अनुसार या अपने विवेकनुसार कार्य करेंगे , मित्रों गुप्त नवरात्रि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपद से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि शुरू होंगे इस साल गुप्त नवरात्रि 11 जुलाई से शुरू होंगे और 18 जुलाई को समाप्त होंगे, चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह ही गुप्त नवरात्रि में भी देवी मां नवदुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है और गुप्त नवरात्रि में गुप्त नवरात्रि में देवी मां कालिका, देवी मां तारा देवी, देवी मां राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी, देवी मां भुवनेश्वरी, देवी मां चित्रमस्ता, देवी मां त्रिपुर भैरवी, देवी मां धूम्रवती, देवी मां बगलामुखी, देवी मां मातंगी और देवी मां कमला देवी की पूजा भी की जाती है जो‌ हर तरह से गुप्त ही होती है, 

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ तिथि: - 11 जुलाई 2021,
प्रतिपदा तिथि 10 जुलाई को सुबह 07 बजकर 47 मिनट से शुरू होगी, जो कि 11 जुलाई की सुबह 07 बजकर 47 मिनट तक रहेगी,
 तिथि प्रारंभ: - 10 जुलाई 2021 सुबह 06:46
प्रतिपदा तिथि समाप्त: - 11 जुलाई 2021 के समय 07:47
अभिजीत मुहूर्त: - 11 जुलाई, दोपहर 12:05 से 11 जुलाई दोपहर 12:59 तक
घट स्थापना मुहूर्त: - 11 जुलाई सुबह 05:52 से 07:47 तक ,दिन रविवार को घटस्थापना की जाएगी। घटस्थापना के लिए सुबह 05 बजकर 31 मिनट से सुबह 07 बजकर 47 मिनट तक का समय शुभ है, इस वर्ष घटस्थापना की कुल अवधि 02 घंटे 16 मिनट की है फिर दिन में घटस्थापना का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक है, काफी बार सुना गया कि कि गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक और अघोरी साधक संत सन्यासी देवी मां दुर्गा की आधी रात में पूजा करते हैं, ये पुजा साधना साधारण ग्रहस्थ या बालक बालिका भी कर सकते हैं पुणे श्रद्धा और आस्था रखते हुये बस उग्र साधना ना करें बिना गुरू के सबसे पहले देवी मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित कर लाल रंग का सिंदूर और सुनहरे गोटे वाली चुनरी अर्पित करें उसके बाद देवी मां के चरणों में पानी वाला नारियल, या सिम्पल नारियल ,केले, सेब, खील, बताशे और श्रृंगार का सामान अर्पित करें देवी मां दुर्गा को लाल पुष्प यानि रक्त पुष्प चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है ,और भी कई तरह की समाग्री होती है ध्यान रहे मित्रों जैसी शक्ति हो वैसी ही भक्ति करे जबरदस्ती कोई नहीं बस जो श्रद्धा और भक्ति करे वो ही सर्वश्रेष्ठ है ,अन्य समाग्री देवी मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, जौ, धूप,वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, बंदनवार आम के पत्तों का, लाल पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, जौ, बंदनवार, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, जावित्री, नारियल, आसन, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, कलश मिट्टी या पीतल का, हवन सामग्री, पूजन के लिए थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सरसों सफेद और पीली, गंगाजल इत्यादि , यहां हम कुछ नवरात्रि के उपाय या पुजा पद्धति दे रहे हैं जो साधारण जनमानुस भी कर सकते हैं 
कुछ साधारण उपाय जो हर नवरात्रि में हो सकते हैं ,
सुबह-शाम दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्‍तशती का पाठ करें, दोनों वक्त की पूजा में लौंग और बताशे का भोग लगाएं, देवी मां दुर्गा को सदैव लाल ,रक्त पुष्प रंग का पुष्प ही चढ़ाएं,देवी मां दुर्गा के विशिष्ट मंत्र 'ऊं ऐं ह्रूीं क्लीं चामुंडाय विच्चे' का सुबह-शाम 108 बार जप करें,  गुप्त नवरात्रि में अपनी पूजा के बारे में किसी को न बताएं, ऐसा करने से आपकी पूजा और जप तप निष्फल हो जाते हैं या फल बराबर नहीं मिलता , रोग निवारण के लिए सरसों के तेल से दीपक जलाकर 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए, देवी मां कालिका का कोई भी मंत्र हो जाप करना चाहिए,या जिसमें में आपका मन लगे उस मंत्र का जाप करना चाहिए, नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी मित्रों कुछ विस्तार से भी समझ लिजिए अच्छा है जो‌ नये साधक है कोई और करना चाहिए नवरात्रि तो छोटी सी पूजा अल्प विधि , सुबह सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें , ग्रहस्थ के लिए लाल कलर हो कपड़े का तो अच्छा है बाकी साधक गुरु आज्ञानुसार कपड़े पहने,, नवरात्रि की सभी पूजन सामग्री को एकत्रित करें जो हमने ऊपर बता रखी है, उसके बाद पूजा की थाल सजाएं ,देवी मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को लाल रंग के वस्त्र से सजाएं , कोई बाबा हनुमान जी पुजा करता हो बाबा का सिन्दूर जरुर लगाये, मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं (गुप्त नवरात्रि में जरूरी नहीं इच्छा हो तो बो सकते हैं ) और नवमी तक प्रतिदिन पानी जरूर दे, पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, (गंगाजल ना हो तो आप उसमे शुद्ध कुऐ या बोरिंग का पानी भर सकते हैं कुछ बुन्दू गंगाजल की डाल सकते हैं )उसके मुख पर आम की पत्तियां लगाएं या अशोक की पत्तियों लगा सकते हैं, और उस पर नारियल रखें दिजिए, कलश को लाल कपड़े से लपेटें और कलावा (मोली, लच्छा)के माध्यम से उसे बांधें और कलश की स्थापना कर लिजिए, फिर फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें , नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी मां दुर्गा से संबंधित मंत्र या अपने इष्ट या गुरु आज्ञानुसार मंत्रों का जाप और हवन करें ,और मां का स्वागत कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें जगत कल्याण आरोग्य के लिए प्रार्थना करें, मित्रों अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना,खीर, हलवा) का भोग लगाएं यह सब आप श्रद्धानुसार करें हमने पहले ही कहां है कि जैसी शक्ति हो वैसी ही भक्ति करे सच्चे मन से जो अर्पण करे मां बाबा को सब स्वीकार है , आखिरी दिन या अष्टमी नवमी को कन्या भोज कराया अगर अपनी शक्ति कन्या भोज की नहीं है तो कोई बात नहीं कुछ मीठा बनाकर मां को भोग लगाकर देवी मां दुर्गा के पूजा के बाद कन्याओं को कुछ मीठा खिलाकर उनका पुजन करके आशीर्वाद प्राप्त करें और बाद घट विसर्जन करें, देवी मां की आरती गाएं, उन्हें फल फूल, चावल चढ़ाएं और बेदी से कलश को उठाएं , 
आईये जानते हैं कब कोन सी नवरात्रि कब है,
प्रतिपदा तिथि (11 जुलाई 2021
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो रही है, प्रतिपदा तिथि पर घट स्थापित किया जाता है तथा देवी मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है,
द्वितीय तिथि (12 जुलाई 2021)
प्रतिपदा तिथि के बाद आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि प्रारंभ होगी जिस दिन देवी मां ब्रह्माचारिणी की पूजा करने का विधान है,
तृतीया तिथि (13 जुलाई 2021)
नवरात्रि की तृतीया तिथि पर देवी मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है जो मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप हैं, देवी मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को सुख व समृद्धि का वरदान देती हैं, चतुर्थी तिथि (14 जुलाई 2021)
14 जुलाई 2021 के दिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है और इस दिन देवी मां कुष्मांडा की पूजा होगी,देवी मां कुष्मांडा की पूजा करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है,
पंचमी तिथि (15 जुलाई 2021)
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पंचमी तिथि पर देवी मां स्कंदमाता की पूजा और आराधना का विधान है,देवी मां स्कंदमाता अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करती हैं और उनकी रक्षा करती हैं,
षष्ठी तिथि (16 जुलाई 2021)
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के षष्ठी तिथि पर देवी मां कात्यायनी तथा देवी मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी ,देवी मां कात्यायनी की पूजा करने से विवाह बाधा दूर होते हैं तथा भय से मुक्ति मिलती है वही देवी मां कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली माता कही गई हैं,
अष्टमी (17 जुलाई 2021)
17 जुलाई 2021 पर मां दुर्गा अष्टमी का पर्व है और इस दिन देवी मां महागौरी की पूजा की जाती है देवी मां महागौरी की सवारी गाय है और वह सफेद वस्त्र धारण करती हैं देवी मां महागौरी को देवी मां अन्नपूर्णा स्वरूप भी कहा जाता है,
नवमी (18 जुलाई 2021)
अष्टमी तिथि पर देवी मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है, इस वर्ष 18 जुलाई पर नवमी तिथि है, देवी मां सिद्धिदात्री , देवी मां दुर्गा का नवा स्वरूप मानी गई हैं इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं,
दशमी तिथि (19 जुलाई 2021)
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर विजयदशमी या बाबा भेरव जी पूजा होती है इस दिन साधक तांत्रिक पुणे आहुति के लिए एंकात या उजाड़ या श्मशान या जहां शांति प्रतित हो वहां जाकर अपनी अपनी नो दिन की पुणोहुति भी देते हैं सभी की अपनी अपनी क्रिया और फल होता है , यह नवरात्रि मुख्यात सिद्ध विधि के लिए भी मानी गयी जिनका विवरण हमने ऊपर दे रखा है आशा करते हैं आप हमारे द्वारा दी गयी जानकारी से सन्तुष्ट होंगे ,

नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी मित्रों अच्छी लगे पोस्ट तो शेयर करें धन्यवाद जय मां बाबा की 🌹🙏🏻🌹
जय मां जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश 🌹🙏🏻🌹

गणेश चतुर्थी पर जाने प्रभु गणेश जी के पांच मंत्र

गणेश चतुर्थी पर जाने प्रभु गणेश जी के पांच मंत्र गणेश चतुर्थी पर आपसभी को हार्दिक शुभकामनायें,,,,, ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ श्री गणेशाय नमः ॐश...

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