Thursday, December 19, 2019

शाबर तंत्र साधना का बेसिक ग्यान भाग बारहवाँ

मित्रो की जैसा आपने हमारे ग्यारह भागो मे पढा की कैसे शाबर तंत्र की भूमिका क्या है अब नियम ओर सावधानियां जो ग्यारहवे भाग से नियम चालू है तो पिछला भाग जरूर पढे, नादान बालक की कलम से आज बस इतना बाकी फिर कभी, अब आगे,,,, साधक को साधना के बाद भी मंत्र जाप इत्यादि नियमित रखे ताकि उनके तेज ओर शुद्धता बनी रहे,
हमारे ब्लाँग मे आगे मंत्र जप साधना ओर विधान बताये जायेगे तो उनके अनुसरण करते हुये बिना नाग किये यानि बिना क्रम तोडे क्रम बंद होकर ही करे,
साधना पुर्व से साधक को मंत्र का अर्थ समझना चाहिए या जनाना जरूरी है,
क्योंकि मंत्र का अर्थ जाने बैगर साधना करने से फलीभूत नही होती, पर शाबर मंत्रो मे जिनका प्रकटीकरण बोधग्मय मंत्र का अर्थ नही है ,
जिन मंत्रो का स्वरुप स्पष्ट नही है उन पर कोई नियम लागू नही होता,
मंत्र जप हवन काल मे मंत्र के किसी अंग यानि शब्द को भूल जाना, अनावश्यक पुनरावर्ति कर बैठना तथा अर्थ भूल जाना भी जप दोष है, मूल मंत्र को उसके पुणे स्वरुप जपते हुये साधक जप के साथ ही मंत्रार्थ का भी ध्यान करते रहे,
साधना करने से पुर्व मंत्र ओर क्रिया को कंठस्थ याद कर लिजिये,
जो जलपात्र या लोठा साथ लेकर बैठते है उस जल के पात्र को चौबीस घंटे बाद किसी पौधे मे चढा दिजिये या अपनी घर की छत पर या गमलो मे डाल दिजिये, जप के समय क्रोध ,जलन ईष्या मान अपमान से परे रहकर साधना मंत्र जप विधान पुणे करे,
जप काल मे झूठ झाल का पुणे त्याग करे, मंत्रो की संख्या पुरे जप काल मे संतुलित होने चाहिए जो निधार्रण हो या अधिक हो जाये कोई दिक्कत नही पर कम नही होनी चाहिए ओर अनुष्ठान या विधान भी उतने दिनो मे ही पुणे करे ताकि मंत्रो का प्रभाव पुणे रुप से हो,
साधना काल मे धूम्रपान मंधपान मंदिरा, आदि नशे से दुर बनाये रखे मतलब स्वयंम कभी इनका स्वयंम के लिए प्रयोग ना करे,
साधना नीयत स्थान नियत समय ओर एंकात मे ही करनी चाहिए जैसा हम पहले ही बता चूके है,
साधना वाले दिनो मे मौन धारण करके रखे अच्छा है नही तो कटु वचन किसी से नही कहे, यह सब नियम गुरूमंत्र पर भी लागू होते है,
इस प्रकार पहले दिन की भाति ही आने वाले दिनो क्रमवार ही जप करना चाहिए कम या ज्यादा नही करने चाहिए, धीमा या तेज जप कभी चालू नही करे क्योंकि इससे निर्धारण सीमा मे नही करने से दोषयुक्त जप साधना सफल नही पाती,
आजकल इंसान को कई काम होते है तो जब साधना काल मे बोलना आवश्यक हो तो आप बात कर सकते है पर उसके बाद यथावत पुणे रुप से मंत्र जप वापस शुरू करे ताकि उसमे कोई दोष नही रहे,,, यानी पुर्वविधी द्वारा पुजन आरंभ करे,
साधना काल मे जिस मंत्र की आप साधना कर रहे है उस देवता की प्रतिमा या फोटो अवश्य लगाये ताकि मंत्र साधना का पुणे लाभ मिल सके,,
जप शुरू करने से पहले अपने रक्षा मंत्र आसन मंत्र गुरू मंत्र का जाप जरूर करे यह सब आपके गुरूदेव द्वारा ही प्रदान किये जाते है, क्योंकि तंत्र मंत्र यंत्र मे अंग शुद्धि सरलीकरण ओर विधी विधान पूर्वक करना ही उचित है क्योंकि तंत्र साधनाओ मे सरलीकरण होना आवश्यक है, किसी भी तंत्र मंत्र की साधना करते समय पुणे श्रद्धा ओर विश्वास रखना जरूरी है अन्यथा मनोवांछित फल की प्राप्ति नही होती,
किसी भी तंत्र मंत्र साधना के समय शरीर का स्वस्थ ओर पवित्र रहना जरूरी है चित शांत हो ओर मन मे कोई ग्लानि ना हो,
शुद्ध हवादार पवित्र जगह ही हो जहाँ साधना हो ओर जिस तरह का साधना मे विधान हो उसी तरीके से पुणे रुप से हो बाकी मित्रो कल देते है शाबर मंत्र साधना के बेसिक ग्यान के अंतिम भाग,, उसके बाद रोज एक मंत्र साधना पोस्ट की जायेगी, पुणे विधि विधान के साथ पर कुछ उग्र साधनाओ के विधान गुरूद्वारा प्राप्त करे अच्छा है, नही तो साधना कोई भी हो गुरू बिना अहित हो सकता है,,
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश

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