Friday, March 30, 2018

कल है बाबा हनुमान जी का जन्मोत्सव ।।करे ये कार्य ।।

कल लाल लंगोटी वाले बाबा यानी बाबा हनुमान जी का
जन्मदिन है तो हम सभी आपको एक उपाय दे रहे रहे जो हमने पिछले साल ओर उसके पिछले साल भी दिया था ओर जो शत्रु पंडित है उनके लिए भी एक मंत्र विधी विधान सहित कहाँ गया है आप दोनो करो तो बहुत अच्छा है कल सुबह जल्दी समय मिल जाये तो बहुत अच्छा है अपने घर मे पुजा के लिए बाबा की पुजा करे उनके साथ जो आपके इष्ट आदि देवता है उनकी भी पुजा करे तो बहुत अच्छा है फिर किसी भी बाबा के मंदिर जाये उनको सिंदूर पीले वाला (माँग भरने वाली कुमकुम नही ) ओर चमेली का तेल जाये दोनो को मिलाकर उनसे बाबा की मालिस करे ओर आपके जो हाथो मे जो सिंदूर लगा रह जाये उसको एक पात्र मे एक्कट्ठा कर लिजिये ओर अपने घर के हर दरवाजे के ऊपर स्वास्तिक बना दिजिये ओर अपनी छत के ऊपर भी दक्षिणी दिशा मे स्वास्तिक बना कर बाबा के नाम का पीला भगवा झण्डा लगा दिजिये अगर उस पर बाबा का चित्र बना हो तो सबसे अच्छा ओर बाबा हनुमान जी के मंदिर मे बाबा को चोला चढाने जाओ तो रक्त पुष्पो की माला लेते जाओ गुड़हल ओर कनेर के फुल,इत्र की शीशी ओर मीठे पान पान पर लोंग का बंध लगाना है, ओर एक नारियल ले जाना है उसको अपने सिर के ऊपर सात बार वार कर उनको यही कहना है कि , *हम आपकी शरण मे है यही हमारे गुरदेव का कहना है* यही बोलना है ओर आक के एक सौ आठ पतो की माला बनानी है कलवा के साथ ओर जो चोला नही चढा सके वो उनके चरणो से सिंदूर लाकर घर पर ऊपर वाली क्रिया कर सकती है। ओर वो आक के पतो की माला जो बाबा को चढी हुयी आप अगर सुबह अपने घर पर ला सको रविवार को लाकर उससे हवन कर लिजिये माला को चंदन लगाकर बाबा को पहनानी है घर मे हवन करने से रोग दोषो का विनाश होगा ओर सिंदूर से स्वास्तिक बनाने से आपके घर पर कोई अघात नही कर सकेगा कल जब भी बाबा के मंदिर जाओ तो मीठे के रूप मे मावे के पडे ओर पाँच तरह के फल भी लेकर जाये ओर कल बाबा के नाम से जो दान पुण्य हो करे केवल खाने की वस्तू का ध्यान रहे बाकी आगे जैसी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही पोस्ट को सभी मे फोरवड करे ओर पोस्ट के साथ छेड़ छाड़ करने पर दोष तो माना ही जाता है फलीभूत हो वो कोई जरूरी नही ये सब हमारे गुरू ओर इष्ट की देने है उसी पर क्रिया ओर ये सब उनकी देने बाकी आपकी इच्छा,,,
इसके लाथ एक मंत्र विधान,,
सर्व शत्रु निवारण मंत्र ये मंत्र हमने पंचमुखी हनुमान कवचम् से लिया है ओर भी काफी मंत्र है इस कवच मे जिसको कोई तोड नहीं है...

ॐ पूर्वकपिमुखाय पच्चंमुखहनुमते टं, टं, टं, टं, टं, सकलशत्रुसंहरणाय स्वाहा..

इस मंत्र को इक्कीस हजार बार यानी २१००० बार जप हवन (जप के साथ हवन करना है )कर के सिद्ध कर ले इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद शत्रु भी आपसे मित्रवत व्यवहार करने लगेगे ओर शत्रु भय समाप्त हो जायेगा बाबा हनुमानजी को कोई भी मंत्र सिद्ध करो जाप पुणे होने पर उस मंत्र को भोजपत्र पर लाल चंदन से या लाल स्याही से उतार ले फिर उसको अभिमंत्रित करके फिर उसको ताबीज मे धारण करे ये हमारा अनुभव है की फल तुरंत मिलेगा पर बात आस्था ओर विश्वास की है
बाकी छेड़ छाड़ किसी को फलित हो या ना हो ये कोई जरूरी नही आगे जैसी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा ।।
नोट, महिलाओं के लिये भी एक पुजा विधान है कल के लिए कल वो बाबा हनुमान जी के मंदिर जाकर उनको परिक्रमा करके उनको प्रणाम करके फिर माँ पार्वती ओर बाबा भोले नाथ को की पुजा कर सकती है बाबा के नाम की बाबा भोलेनाथ को बिलपत्र चढा सकती है पर बिलपत्र पर ॐ श्री राम लिखा होना चाहिए चंदन से इससे उनके घर कलह मे ओर बाहरी रूकावटो से आराम मिल जायेगा बाकी जैसी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा मानो तो अच्छा नही मानो तो बहुत अच्छा ।।।।
जो मंत्र नही कर सकते उनके लिये रामायण, रामचरित्र मानस, सुंदरकाण्ड, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, संकटमोचन, हनुमान जंजीरा ओर भी बहुत कुछ है,,,,
,
ऐसी की ऐसी ही शेयर करे सभी मे अगर नाम कमाने का शोक है तो आपकी इच्छा ।।
आप सभी को बाबा के जन्मोत्सव की बहुत बहुत शुभकामनाएं
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधेकृष्णा अंलख आदेश

🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻

Tuesday, March 27, 2018

शत शत नमन ऐसे गुरूओ को जय हो आदि जगदगुरू शंकराचार्य ।

है किसी में हिम्मत, जो इस समाचार को गलत कहे?
श्रृंगेरी पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य ने राहुल और सिद्धरमैय्या (कर्नाटक के मुख्यमंत्री) को आशीर्वाद देने से किया इनकार !
जगदगुरु ने कहा  "आप मठ में आए हैं, धन्यवाद। लेकिन, आप जो कुछ कर रहे हैं, उसके बाद हम आपको आशीर्वाद तो नहीं दे सकते ।"
बैठक के समय जगदगुरु ने राहुल और सिद्धरमैय्या से कहा कि यदि आप हिंदू धर्म के प्रति असहिष्णुता रखते हैं, तो कृपया हिंदू धर्म से दूर ही रहें, बजाय इसके कि आप अपने कार्यों से हिंदू धर्म के अन्दर बैमनस्य पैदा करें। हिंदू मठ और मंदिरों ने क्या गलत किया है, जो मंदिरों का प्रबंध सरकार ने अपने हाथों में लिया है | इतना ही नहीं तो चढोतरी के रूप में आने वाले धन की राशि से मंदिरों का पुनर्निर्माण करने के स्थान पर दूसरे धर्म के कल्याण के लिए वही धन खर्च किया जाता है | यह स्वीकार्य नहीं है | जगदगुरु ने उन दोनों से दो टूक कहा कि, "यह अच्छा है कि आप हमारे मठ में पधारे, लेकिन आप जिस प्रकार हिंदू-विरोधी गतिविधियों में संलग्न हैं, हम आपको आशीर्वाद प्रदान नहीं कर सकते हैं। "
दोनों राजनेताओं को जगदगुरु से ऐसी तीखी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। दोनों बेहद सकपका गए और बैठक से निकलने के बाद इस उधेड़बुन में लग गए कि जगदगुरु की प्रतिक्रिया मीडिया तक पहुंचने से कैसे रोकी जाये ।
मठ से जुड़े हुए सभी भक्तगण व कर्मचारी जगदगुरु की प्रतिक्रिया जानकर आनंद से झूम उठे और सबने अविलम्ब इसे हर स्तर पर साझा किया ।

आधार: जगदीशचंद्र बी, संपादक, हिंदुत्व-बंधुत्व, मासिक पत्रिका

है किसी में हिम्मत, जो इस समाचार को गलत कहे?
श्रृंगेरी पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य ने राहुल और सिद्धरमैय्या (कर्नाटक के मुख्यमंत्री) को आशीर्वाद देने से किया इनकार !
जगदगुरु ने कहा  "आप मठ में आए हैं, धन्यवाद। लेकिन, आप जो कुछ कर रहे हैं, उसके बाद हम आपको आशीर्वाद तो नहीं दे सकते ।"
बैठक के समय जगदगुरु ने राहुल और सिद्धरमैय्या से कहा कि यदि आप हिंदू धर्म के प्रति असहिष्णुता रखते हैं, तो कृपया हिंदू धर्म से दूर ही रहें, बजाय इसके कि आप अपने कार्यों से हिंदू धर्म के अन्दर बैमनस्य पैदा करें। हिंदू मठ और मंदिरों ने क्या गलत किया है, जो मंदिरों का प्रबंध सरकार ने अपने हाथों में लिया है | इतना ही नहीं तो चढोतरी के रूप में आने वाले धन की राशि से मंदिरों का पुनर्निर्माण करने के स्थान पर दूसरे धर्म के कल्याण के लिए वही धन खर्च किया जाता है | यह स्वीकार्य नहीं है | जगदगुरु ने उन दोनों से दो टूक कहा कि, "यह अच्छा है कि आप हमारे मठ में पधारे, लेकिन आप जिस प्रकार हिंदू-विरोधी गतिविधियों में संलग्न हैं, हम आपको आशीर्वाद प्रदान नहीं कर सकते हैं। "
दोनों राजनेताओं को जगदगुरु से ऐसी तीखी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। दोनों बेहद सकपका गए और बैठक से निकलने के बाद इस उधेड़बुन में लग गए कि जगदगुरु की प्रतिक्रिया मीडिया तक पहुंचने से कैसे रोकी जाये ।
मठ से जुड़े हुए सभी भक्तगण व कर्मचारी जगदगुरु की प्रतिक्रिया जानकर आनंद से झूम उठे और सबने अविलम्ब इसे हर स्तर पर साझा किया ।
आधार: जगदीशचंद्र बी, संपादक, हिंदुत्व-बंधुत्व, मासिक पत्रिका
है किसी में हिम्मत, जो इस समाचार को गलत कहे?
श्रृंगेरी पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य ने राहुल और सिद्धरमैय्या (कर्नाटक के मुख्यमंत्री) को आशीर्वाद देने से किया इनकार !
जगदगुरु ने कहा  "आप मठ में आए हैं, धन्यवाद। लेकिन, आप जो कुछ कर रहे हैं, उसके बाद हम आपको आशीर्वाद तो नहीं दे सकते ।"
बैठक के समय जगदगुरु ने राहुल और सिद्धरमैय्या से कहा कि यदि आप हिंदू धर्म के प्रति असहिष्णुता रखते हैं, तो कृपया हिंदू धर्म से दूर ही रहें, बजाय इसके कि आप अपने कार्यों से हिंदू धर्म के अन्दर बैमनस्य पैदा करें। हिंदू मठ और मंदिरों ने क्या गलत किया है, जो मंदिरों का प्रबंध सरकार ने अपने हाथों में लिया है | इतना ही नहीं तो चढोतरी के रूप में आने वाले धन की राशि से मंदिरों का पुनर्निर्माण करने के स्थान पर दूसरे धर्म के कल्याण के लिए वही धन खर्च किया जाता है | यह स्वीकार्य नहीं है | जगदगुरु ने उन दोनों से दो टूक कहा कि, "यह अच्छा है कि आप हमारे मठ में पधारे, लेकिन आप जिस प्रकार हिंदू-विरोधी गतिविधियों में संलग्न हैं, हम आपको आशीर्वाद प्रदान नहीं कर सकते हैं। "
दोनों राजनेताओं को जगदगुरु से ऐसी तीखी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। दोनों बेहद सकपका गए और बैठक से निकलने के बाद इस उधेड़बुन में लग गए कि जगदगुरु की प्रतिक्रिया मीडिया तक पहुंचने से कैसे रोकी जाये ।
मठ से जुड़े हुए सभी भक्तगण व कर्मचारी जगदगुरु की प्रतिक्रिया जानकर आनंद से झूम उठे और सबने अविलम्ब इसे हर स्तर पर साझा किया ।
आधार: जगदीशचंद्र बी, संपादक, हिंदुत्व-बंधुत्व, मासिक पत्रिका
(श्री Ha

Monday, March 26, 2018

ब्लाँग को हेक कर सकते हो पर हमे लिखने से रोक नही सकते

मित्रो कुछ दिनो से हमारा ब्लाँग शो नही हो रहा था शायद किसी ने हैक करने की कोशिश की थी या पता नही कुछ ना कुछ तो किया है तभी पंद्रह दिन से ब्लाँग शो नही हो रहा था बारह लाख विजिटर थे अब वापस ब्लाँग को रिकवर किया तो नो लाख पचास हजार विजिटर रह गये है ।।आप सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद आप सभी को यहाँ तंत्र मंत्र वशीकरण की शाबर के बारे मे नित नई जानकारी मिलती रहेगी नादान बालक की कलम से आज बस इतना बाकी फिर कभी बाकी आप सभी समझदार है आगे माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा ।
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश ।।

पाप ओर पूण्य है क्या ओर आप हो क्या

अपने आप को उसको समर्पित करना और मे से हम हो जाना ही उसके साथ की निशानी है,
बाकी जैसा आया है वैसे ही जायेगा ओर वापस भी आना पडेगा अपने कर्मो को कोई देखना नही चाहता पर दूसरो के कर्म विधान का जानने का इच्छुक है,
आज की इस दुनिया मे अपने घर मे क्या हो रहा है इसको जानने की किसी को फुरसत नही पर पडोसी के घर मे क्या हो रहा है इसको जानने का शौक है,
पाप निन्दा पर स्त्री आध्यात्मिक की सबसे बडी शुत्र है पर इनको कोई त्यागना नही चाहता क्योंकि उनको इनमे अपना भगवान दिखता है,
कर्म अपने बूरे है दोष भगवान को देते है यहाँ जानना कोई नही चाहाता की हम क्या है पर भगवान तूने ये क्या किया जैसे भगवान ने इनको ही चोट पुहचाये है,
कर्म फल के हिसाब से सभी को दण्ड भोगना पडता है उससे तो भगवान भी अछुते नही रहे थे चाहे प्रभु श्री राम को लेलो या प्रभु श्री हरि कृष्ण को तो फिर आप अकेले दुखी क्यू है,
नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही बाकी फिर कभी आजकल अपने कर्मो का जानने का सभी इच्छुक है ओर अपने पिछले जन्म मे तक जाना चाहते है पर,,
इस जन्म को कैसे सुधारे ये कोई करना नही चाहते पाप सहना भी गलत है ओर पाप करना भी अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनो ,अपने अंदर जाने की कोशिश करो अपने आपको समझने की कोशिश करो वो आपको आपके सौ जन्मो से मिला देगै बाकी जैसी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा ।।
जो उलझता है अपने वचनो मे,
वो ना अपना रहता है ना किसी,
का बनता है जो कहते थे कि हमारे,
बिना दुनिया नही चलती आज ,
वो है कहाँ आज उनकी मिट्टी ,
या राख नही मिलती यही दुनिया है,
माया नूमा है महल देखो लो कि,
आप को रहना कैसे है जो समझा,
इस माया को उसका भवसागर ,
पार है बाकी दुनिया मे आना जाना शेष है,
घणा ग्यानी मर गया उसकी लीला,
किसी समझ मे ना आयी बस,
समझ मे आया तो यही की वो ही,
एक सत्य है बाकी सब नश्वर बाकी,
जैसी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा,,
शब्द ही अम्रत शब्द ही जहर,
शब्दो से जो बिगड जाये वो,
वापस कभी नही बनते यही सत्य है,
बाकी बनना बिगाडना तो काम है,
उसका जो शब्दो से खेल लेते है,
उनको लाटी तलवार से जंग नही ,
नही करनी पडती है यही सत्य है,
बाकी जैसी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा,



जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश ।।

Saturday, March 10, 2018

क्या है गुरू ओर गुरू तत्व

जीवन की लालसा किसको नही होती इच्छाओ का सागर किसका नही झलकता किसको पाने की चाहत नही होती सही प्रकृति की माया है जिसको आज तक कोई समझ नही पाया ,किसी भूखे को पेट भरना है ,किसी को अपने बच्चे का पेट भरना है, किसी को ओर का पेट भरना है, किसी को अपनी तिजोरी भरनी है तो किसी का ओरो का छीनकर भी अपना पेट भरना है, किसी को कुछ पाने की आशा भूखे अन्न,, भक्त को भगवान, साधक को सिद्धि, ओर किसी को तलाश रहती है स्वयंम की तो किसी को भगवान की तो किसी को गुरू की ,खैर मानव जीवन वो अनमोल मोती है जो सागर की गहराई मे जाकर सतह पर आता है जो उस सागर से निकल कर सतह पर आ गया था वापस उस सागर मे जाने की जरूरत नही पड़ती ओर जो उसी सागर मे डूबकीयाँ खाता जाता है उसी सागर मे पता नही किसी मछली का आकार लेगा वापस उसको स्वयंम को पता नही चलता इसलिए ऊपर जितनी बाते लिखी है उनके आप कहाँ स्वयंम परख कर देख लिजिये कही आप आध्यात्मिक मार्ग पर बढते हुये गुरू मार्ग छोड़कर गुरू का अपमान करते हुये तो नही जा रहे है बाकी जीना ओर मरना उन पर छोड़ दिजिये जो भी करो अच्छा बूरा सोच समझकर करे बाकी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा,नादान बालक की कलम से आज बस इतना फिर कभी आपका स्तर है कहाँ स्वयंम पता लहा दिजिये कही देर हो गयी तो कोई रोक नही सकता आपको वापस माया जाल मे जाने से बाकी आपकी इच्छा,यह हमने कई बार पहले भी कहाँ है कि किसी को गुरू यू ही नही मिला करते गुरू तत्व जन्मो से साथ होता है मानव देह का तो आना जाना है मानव देह रूप है गुरू का पर गुरू तत्व तो आप मे जाग्रत है गुरू से छिपाकर जो कुछ भी करो पर गुरू, गुरू होता है चाहे कितना भी छिपावो पर गुरू के तरकश मे कई बाण ऐसे भी होते है जिनको आपको नाम तक पता नही होता अगर आप आध्यात्मिक मे है तो ग़ुरू,गुरू तत्व को समझने की कोशिश करे बाकी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा मानो तो अच्छा नही मानो तो बहुत अच्छा ।।। प्रणाम आपको ।।
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश ।। 🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻

गुरु गीता / Guru Geeta

गुरु गीता / Guru Geeta



"गुरु गीता" भगवान वेद व्यास जी द्वारा रचित एक पवित्र एवं भक्तिभाव से ओतप्रोत अप्रतिम हिन्दू ग्रंथ है। वास्तव में यह स्कन्द पुराण का एक भाग है। इसमें कुल ३५२ श्लोक हैं।

"गुरु गीता" भगवान शिव और माँ पार्वती जी के मध्य का अद्भुत संवाद है जिसमें माँ भगवती पार्वती जी ने भगवान शिव से गुरु और उसकी महत्ता की व्याख्या करने का अनुरोध किया है। इसमें भगवान शंकर जी ने गुरु की परिभाषा , उनका महत्व, गुरु की पूजा करने की विधि, गुरु गीता को पढने के लाभ आदि का वर्णन किया है।

इस ग्रन्थ में सद्गुरु की महिमा ,शिष्य की योग्यता, उसकी मर्यादा, व्यवहार, अनुशासन आदि का सम्पूर्णता से वर्णन किया गया है। सद्गुरु की शरण, शिष्य को पूर्णत्व प्रदान करती है। उनकी कृपा से वह धर्म-अधर्म, पाप-पुण्य आदि से परे होकर गुणातीत हो जाता है। सद्गुरु का वरद हस्त पाकर शिष्य पूर्ण चैतन्य एवं ब्रह्मरूप हो जाता है।



।। श्री गुरुगीता ।। 
। प्रथमोऽध्यायः। 

अचिन्त्याव्यक्तरूपाय निर्गुणाय गणात्मने
समस्तजगदाधारमूर्तये ब्रह्मणे नमः १

ऋषय ऊचुः। 

सूत सूत महाप्राज्ञ निगमागमपारगम्।
गुरुस्वरूपमस्माकं ब्रूहि सर्वमलापहम् २
यस्य श्रवणमात्रेण देही दुःखाद्विमुच्यते।
येन मार्गेण मुनयः सर्वज्ञत्वं प्रपेदिरे ३
यत्प्राप्य न पुनर्याति नरः संसारबन्धनम्।
तथाविधं परं तत्त्वं वक्तव्यमधुना त्वया ४
गुह्याद्गुह्यतमं सारं गुरुगीता विशेषतः।
त्वत्प्रसादाच्च श्रोतव्या तत्सर्वं ब्रूहि सूत नः ५
इति संप्रार्थितः सूतो मुनिसङ्घैर्मुहुर्मुहुः।
कुतूहलेन महता प्रोवाच मधुरं वचः ६

सूत उवाच। 

श्रुणुध्वं मुनयः सर्वे श्रद्धया परया मुदा।
वदामि भवरोगघ्नीं गीतां मातृस्वरूपिणीम् ७
पुरा कैलासशिखरे सिद्धगन्धर्वसेविते।
तत्र कल्पलतापुष्पमन्दिरेऽत्यन्तसुन्दरे ८
व्याघ्राजिने समासीनं शुकादिमुनिवन्दितम्।
बोधयन्तं परं तत्त्वं मध्ये मुनिगणे क्वचित् ९
प्रणम्रवदना शश्वन्नमस्कुर्वन्तमादरात्।
दृष्ट्वा विस्मयमापन्न पार्वती परिपृच्छति १०

पार्वत्युवाच

ॐ नमो देव देवेश परात्पर जगद्गुरो |
त्वां नमस्कुर्वते भक्त्या सुरासुरनराः सदा ११
विधिविष्णुमहेन्द्राद्यैर्वन्द्यः खलु सदा भवान् |
नमस्करोषि कस्मै त्वं नमस्काराश्रयः किल १२
दृष्ट्वैतत्कर्म विपुलमाश्चर्य प्रतिभाति मे |
किमेतन्न विजानेऽहं कृपया वद मे प्रभो १३
भगवन् सर्वधर्मज्ञ व्रतानां व्रतनायकम् |
ब्रूहि मे कृपया शम्भो गुरुमाहात्म्यमुत्तमम् १४
केन मार्गेण भो स्वामिन् देही ब्रह्ममयो भवेत् |
तत्कृपां कुरु मे स्वामिन्नमामि चरणौ तव १५
इति संप्रार्थितः शश्वन्महादेवो महेश्वरः |
आनन्दभरतिः स्वान्ते पार्वतीमिदमब्रवीत् १६

श्री महादेव उवाच। 

न वक्तव्यमिदं देवि रहस्यातिरहस्यकम्।
न कस्यापि पुरा प्रोक्तं त्वद्भक्त्यर्थं वदामि तत् १७
मम रूपासि देवि त्वमतस्तत्कथयामि ते।
लोकोपकारकः प्रश्नो न केनापि कृतः पुरा १८
यस्य देवे परा भक्तिर्यथा देवे तथा गुरौ।
तस्यैते कथिता ह्यर्थाः प्रकाशन्ते महात्मनः १९
यो गुरुः स शिवः प्रोक्तो यः शिवः स गुरुः स्मृतः।
विकल्पं यस्तु कुर्वीत स नरो गुरुतल्पगः २०
दुर्लभं त्रिषु लोकेषु तच्छृणुश्व वदाम्यहम्।
गुरुब्रह्म विना नान्यः सत्यं सत्यं वरानने २१
वेदशास्त्रपुराणानि चेतिहासादिकानि च।
मन्त्रयन्त्रादिविद्यानां मोहनोच्चाटनादिकम् २२
शैवशाक्तागमादीनि ह्यन्ये च बहवो मताः।
अपभ्रंशाः समस्तानां जीवानां भ्रान्तचेतसाम् २३
जपस्तपो व्रतं तीर्थं यज्ञो दानं तथैव च।
गुरुतत्त्वमविज्ञाय सर्वं व्यर्थं भवेत्प्रिये २४
गुरुबुद्ध्यात्मनो नान्यत् सत्यं सत्यं वरानने।
तल्लाभार्थं प्रयत्नस्तु कर्तव्यश्च मनीषिभिः २५
गूढाविद्या जगन्माया देहश्चाज्ञानसम्भवः।
विज्ञानं यत्प्रसादेन गुरुशब्देन कथयते २६
यदङ्घ्रिकमलद्वन्द्वं द्वन्द्वतापनिवारकम्।
तारकं भवसिन्धोश्च तं गुरुं प्रणमाम्यहम् २७
देही ब्रह्म भवेद्यस्मात् त्वत्कृपार्थं वदामि तत्।
सर्वपापविशुद्धात्मा श्रीगुरोः पादसेवनात् २८
सर्वतीर्थावगाहस्य सम्प्राप्नोति फलं नरः।
गुरोः पादोदकं पीत्वा शेषं शिरसि धारयन् २९
शोषणं पापपङ्कस्य दीपनं ज्ञानतेजसः।
गुरोः पादोदकं सम्यक् संसारार्णवतारकम् ३०
अज्ञानमूलहरणं जन्मकर्मनिवारकम्।
ज्ञानविज्ञानसिद्ध्यर्थं गुरुपादोदकं पिबेत् ३१
गुरुपादोदकं पानं गुरोरुच्छिष्टभोजनम्।
गुरुमूर्तेः सदा ध्यानं गुरोर्नाम्नः सदा जपः ३२
स्वदेशिकस्यैव च नामकीर्तनं
भवेदनन्तस्य शिवस्य कीर्तनम्।
स्वदेशिकस्यैव च नामचिन्तनं
भवेदनन्तस्य शिवस्य चिन्तनम् ३३
यत्पादरेणुर्वै नित्यं कोऽपि संसारवारिधौ।
सेतुबन्धायते नाथं देशिकं तमुपास्महे ३४
यदनुग्रहमात्रेण शोकमोहौ विनश्यतः।
तस्मै श्रीदेशिकेन्द्राय नमोऽस्तु परमात्मने ३५
यस्मादनुग्रहं लब्ध्वा महदज्ञान्मुत्सृजेत्।
तस्मै श्रीदेशिकेन्द्राय नमश्चाभीष्टसिद्धये ३६
काशीक्षेत्रं निवासश्च जान्हवी चरणोदकम्।
गुरुविश्वेश्वरः साक्षात् तारकं ब्रह्मनिश्चयः ३७
गुरुसेवा गया प्रोक्ता देहः स्यादक्षयो वटः।
तत्पादं विष्णुपादं स्यात् तत्र दत्तमनन्तकम् ३८
गुरुमूर्ति स्मरेन्नित्यं गुरुर्नाम सदा जपेत्।
गुरोराज्ञां प्रकुर्वीत गुरोरन्यं न भावयेत् ३९
गुरुवक्त्रे स्थितं ब्रह्म प्राप्यते तत्प्रसादतः।
गुरोर्ध्यानं सदा कुर्यात् कुलस्त्री स्वपतिं यथा ४०
स्वाश्रमं च स्वजातिं च स्वकीर्तिं पुष्टिवर्धनम्।
एतत्सर्वं परित्यज्य गुरुमेव समाश्रयेत् ४१
अनन्याश्चिन्तयन्तो ये सुलभं परमं सुखम्।
तस्मात्सर्वप्रयत्नेन गुरोराराधनं कुरु ४२
गुरुवक्त्रे स्थिता विद्या गुरुभक्त्या च लभ्यते।
त्रैलोक्ये स्फुटवक्तारो देवर्षिपितृमानवाः ४३
गुकारश्चान्धकारो हि रुकारस्तेज उच्यते।
अज्ञानग्रासकं ब्रह्म गुरुरेव न संशयः ४४
गुकारो भवरोगः स्यात् रुकारस्तन्निरोधकृत्।
भवरोगहरत्याच्च गुरुरित्यभिधीयते ४५
गुकारश्च गुणातीतो रूपातीतो रुकारकः।
गुणरूपविहीनत्वात् गुरुरित्यभिधीयते ४६
गुकारः प्रथमो वर्णो मायादिगुणभासकः।
रुकारोऽस्ति परं ब्रह्म मायाभ्रान्तिविमोचनम् ४७
एवं गुरुपदं श्रेष्ठं देवानामपि दुर्लभम्।
गरुडोरगगन्धर्वसिद्धादिसुरपूजितम् ४८
ध्रुवं देहि मुमुक्षूणां नास्ति तत्त्वं गुरोः परम्।
गुरोराराधनं कुर्यात् स्वजीवत्वं निवेदयेत् ४९
आसनं शयनं वस्त्रं वाहनं भूषणादिकम्।
साधकेन प्रदातव्यं गुरुसन्तोषकारणम् ५०
कर्मणा मनसा वाचा सर्वदाऽऽराधयेद्गुरुम्।
दीर्घदण्डं नमस्कृत्य निर्लज्जौ गुरुसन्निधौ ५१
शरीरमिन्द्रियं प्राणमर्थस्वजनबान्धवान्।
आत्मदारादिकं सर्वं सद्गुरुभ्यो निवेदयेत् ५२
गुरुरेको जगत्सर्वं ब्रह्मविष्णुशिवात्मकम्।
गुरोः परतरं नास्ति तस्मात्संपूजयेद्गुरुम् ५३
सर्वश्रुतिशिरोरत्नविराजितपदांबुजम्।
वेदान्तार्थप्रवक्तारं तस्मात् संपूजयेद्गुरुम् ५४
यस्य स्मरणमात्रेण ज्ञानमुत्पद्यते स्वयम्।
स एव सर्वसंपत्तिः तस्मात्संपूजयेद्गुरुम् ५५
कृमिकोटिभिराविष्टं दुर्गन्धकुलदूषितम्।
अनित्यं दुःखनिलयं देहं विद्धि वरानने ५६
संसारवृक्षमारूढाः पतन्ति नरकार्णवे।
यस्तानुद्धरते सर्वान् तस्मै श्रीगुरवे नमः ५७
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुरेव परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ५८
अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ५९
अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ६०
स्थावरं जङ्गमं व्याप्तं यत्किञ्चित्सचराचरम्।
त्वंपदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ६१
चिन्मयं व्यापितं सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम्।
असित्वं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ६२
निमिषन्निमिषार्ध्वाद्वा यद्वाक्यादै विमुच्यते।
स्वात्मानं शिवमालोक्य तस्मै श्रीगुरवे नमः ६३
चैतन्यं शाश्वतं शांतं व्योमातीतं निरञ्जनम्।
नादबिन्दुकलातीतं तस्मै श्रीगुरवे नमः ६४
निर्गुणं निर्मलं शान्तं जंगमं स्थिरमेव च।
व्याप्तं येन जगत्सर्वं तस्मै श्रीगुरवे नमः ६५
स पिता स च मे माता स बन्धुः स च देवता।
संसारमोहनाशाय तस्मै श्रीगुरवे नमः ६६
यत्सत्त्वेन जगत्सत्यं यत्प्रकाशेन भाति तत्।
यदानन्देन नन्दन्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः ६७
यस्मिन्स्थितमिदं सर्वं भाति यद्भानरूपतः।
प्रियं पुत्रादि यत्प्रीत्या तस्मै श्रीगुरवे नमः ६८
येनेदं दर्शितं तत्त्वं चित्तचैत्यादिकं तथा।
जाग्रत्स्वप्नसुषुप्त्यादि तस्मै श्रीगुरवे नमः ६९
यस्य ज्ञानमिदं विश्वं न दृश्यं भिन्नभेदतः।
सदैकरूपरूपाय तस्मै श्रीगुरवे नमः ७०
यस्य ज्ञातं मतं तस्य मतं यस्य न वेद सः।
अनन्यभावभावाय तस्मै श्रीगुरवे नमः ७१
यस्मै कारणरूपाय कार्यरूपेण भाति यत्।
कार्यकारणरूपाय तस्मै श्रीगुरवे नमः ७२
नानारूपमिदं विश्वं न केनाप्यस्ति भिन्नता।
कार्यकारणरूपाय तस्मै श्रीगुरवे नमः ७३
ज्ञानशक्तिसमारूढतत्त्वमालाविभूषणे।
भुक्तिमुक्तिप्रदात्रे च तस्मै श्रीगुरवे नमः ७४
अनेकजन्मसंप्राप्तकर्मबन्धविदाहिने।
ज्ञानानिलप्रभावेन तस्मै श्रीगुरवे नमः ७५
शोषणं भवसिन्धोश्च दीपनं क्षरसंपदाम्।
गुरोः पादोदकं यस्य तस्मै श्रीगुरवे नमः ७६
न गुरोरधिकं तत्त्वं न गुरोरधिकं तपः।
न गुरोरधिकं ज्ञानं तस्मै श्रीगुरवे नमः ७७
मन्नाथः श्रीजगन्नाथो मद्गुरुः श्रीजगद्गुरुः।
ममात्मा सर्वभूतात्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः ७८
गुरुरादिरनादिश्च गुरुः परमदैवतम्।
गुरुमन्त्रसमो नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः ७९
एक एव परो बन्धुर्विषमे समुपस्थिते।
गुरुः सकलधर्मात्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः ८०
गुरुमध्ये स्थितं विश्वं विश्वमध्ये स्थितो गुरुः।
गुरुर्विश्वं न चान्योऽस्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः ८१
भवारण्यप्रविष्टस्य दिङ्मोहभ्रान्तचेतसः।
येन सन्दर्शितः पन्थाः तस्मै श्रीगुरवे नमः ८२
तापत्रयाग्नितप्तनामशान्तप्राणिनां भुवि।
यस्य पादोदकं गङ्गा तस्मै श्रीगुरवे नमः ८३
अज्ञानसर्पदष्टानां प्राणिनां कश्चिकित्सकः।
सम्यग्ज्ञानमहामन्त्रवेदिनं सद्गुरु विना ८४
हेतवे जगतामेव संसारार्णवसेतवे।
प्रभवे सर्वविद्यानां शम्भवे गुरवे नमः ८५
ध्यानमूलं गुरोर्मूतिःर् पूजामूलं गुरोः पदम्।
मन्त्रमूलं गुरोर्वाक्यं मुक्तिमूलं गुरोः कृपा ८६
सप्तसागरपर्यन्तं तीर्थस्नानफलं तु यत्।
गुरुपादपयोबिन्दोः सहस्रांशेन तत्फलम् ८७
शिवे रुष्टे गुरुस्त्राता गुरौ रुष्टे न कश्चन।
लब्ध्वा कुलगुरु सम्यग्गुरुमेव समाश्रयेत् ८८
मधुलुब्धो यथा भृङ्गः पुष्पात्पुष्पान्तरं व्रजेत्।
ज्ञानलुब्धस्तथा शिष्यो गुरोर्गुवर्न्तरं व्रजेत् ८९
वन्दे गुरुपदद्वन्द्वं वाङ्मनातीतगोचरम्।
श्वेतरक्तप्रभाभिन्नं शिवशक्त्यात्मकं परम् ९०
गुकारं च गुणातीतं रूकारं रूपवर्जितम्।
गुणातीतमरूपं च यो दद्यात् स गुरुः स्मृतः ९१
अत्रिनेत्रः शिवः साक्षात् द्विबाहुश्च हरिः स्मृतः।
योऽचतुर्वदनो ब्रह्मा श्रीगुरुः कथितः प्रिये ९२
अयं मयाञ्जलिर्बद्धो दयासागरसिद्धये।
यदनुग्रहतो जन्तुश्चित्रसंसारमुक्तिभाक् ९३
श्रीगुरोः परमं रूपं विवेकचक्षुरग्रतः।
मन्दभाग्या न पश्यन्ति अन्धाः सूर्योदयं यथा ९४
कुलानां कुलकोटीनां तारकस्तत्र तत्क्षणात्।
अतस्तं सद्गुरु ज्ञात्वा त्रिकालमभिवादयेत् ९५
श्रीनाथचरणद्वन्द्वं यस्यां दिशि विराजते।
तस्यां दिशि नमस्कुर्याद् भक्त्या प्रतिदिनं प्रिये ९६
साष्टाङ्गप्रणिपातेन स्तुवन्नित्यं गुरुं भजेत्।
भजनात्स्थैर्यमाप्नोति स्वस्वरूपमयो भवेत् ९७
दोर्भ्यां पद्भ्यां च जानुभ्यामुरसा शिरसा दृशा।
मनसा वचसा चेति प्रणामोष्टाङ्ग उच्यते ९८
तस्यै दिशे सततमज्जलिरेष नित्यम्
प्रक्षिप्यतां मुखरितैर्मधुरैः प्रसूनैः।
जागर्ति यत्र भगवान् गुरुचक्रवर्ती
विश्वस्थितिप्रलयनाटकनित्यसाक्षी ९९
अभैस्तैः किमु दीर्घकालविमलैर्व्यादिप्रदैर्दुष्करैः
प्राणायामशतैरनेककरणैर्दुःखात्मकैर्दुजर्यैः।
यस्मिन्नभ्युदिते विनश्यति बली वायुः स्वयं तत्क्षणात्
प्राप्तुं तत्सहजस्वभावमनिशं सेवेत चैकं गुरुम् १००
ज्ञानं विना मुक्तिपदं लभ्यते गुरुभक्तितः।
गुरोः प्रसादतो नान्यत् साधनं गुरुमार्गिणाम् १०१
यस्मात्परतरं नास्ति नेति नेतीति वै श्रुतिः।
मनसा वचसा चैव सत्यमाराधयेद्गुरुम् १०२
गुरोः कृपाप्रसादेन ब्रह्मविष्णुशिवादयः।
सामर्थ्यमभजन् सर्वे सृष्टिस्थित्यन्तकर्मणि १०३
देवकिन्नरगन्धर्वाः पितृयक्षास्तु तुम्बुरुः।
मुनयोऽपि न जानन्ति गुरुशुश्रूषणे विधिम् १०४
तार्किकाश्छान्दसाश्चैव दैवज्ञाः कर्मठाः प्रिये।
लौकिकास्ते न जानन्ति गुरुतत्त्वं निराकुलम् १०५
महाहङ्कारगर्वेण ततोविद्याबलेन च।
भ्रमन्त्येतस्मिन् संसारे घटीयन्त्रं यथा पुनः १०६
यज्ञिनोऽपि न मुक्ताः स्युः न मुक्ता योगिनस्तथा।
तापसा अपि नो मुक्ता गुरुतत्त्वात्पराङ्मुखाः १०७
न मुक्तास्तु गन्धर्वाः पितृयक्षास्तु चारणाः।
ऋषयः सिद्धदेवाद्या गुरुसेवापराङ्मुखाः १०८

।। इति श्रीस्कंदपुराणे उत्तरखंडे उमामहेश्वर संवादे।। 
श्री गुरुगीतायां प्रथमोऽध्यायः।।

माता महाकाली शरणम् 
क्रमशः  

Friday, March 9, 2018

क्या है साधक ओर क्या है साधना

।। क्या है साधक ओर साधना ।। आज कुछ लिखने की इच्छा हो रही है नवरात्रि आ रही है तो कई साधक भक्त साधना करेगे पर क्या वो सफल होंगे ।।???? उस पर नादान बालक की कुछ लाइनें पेश है की क्या है साधक ओर साधना ,कई साधक निरंतर वर्षा तक एक ही साधना को करते रहते है फिर भी वो सफल नही होते ओर वही कोई साधक कुछ समय एक साधना करके सफल हो जाते है क्या कभी सोचा है क्यू, क्योंकि वहाँ भाव प्रधान होता जब तक साधक भावो को समझ नही नही लेता जब तक वो सफल नही हो पाता यही सत्य है कुछ उनकी मानसिक एकात्मता जब तक लक्ष्य के प्रति निष्ठावान ओर भाव ,नजरबंद नही हो सकते तब तक आपको साधना काल मे गर्म ठण्डे कडवे भुख खाना पीने का एहसास होता रहेगा तब तक आप अपनी साधना मे सफल नही हो सकते ओर कई जगह साधक अपने गुरू से बात छिपाते है कि उन्होने क्या किया है क्या नही ओर जहाँ गुरू का अनादर या अनदेखा किया जाता है वहाँ कैसा आध्यात्मिक ओर किसी साधना वहाँ से आध्यात्मिक कोस दुर ही रहता है ओर महत्वपूर्ण बात है साधक का चरित्र जहाँ चरित्र नही वहाँ कुछ भी नही इसलिए कोई भी साधना करो चरित्रहीन मत बनो गुरू का आदर करना सीखो चाहे वो कोई भी हो आपको शर्म या संकोच नही होना चाहिए कि ये मेरा गुरू है ।।गुरू तत्व का बोध आपको होना चाहिए यही सत्य है साधना मे भाव ओर विश्वास की ही जीत होती है ओर चरित्र की ही पुजा होती है ओर ये सब गुरू कृपा के बिना संभव नही जब तक आप मे भटकाव रहेगा की बस मुझे दिक्षा मिल चूकी है अब मे कही से भी साधना सिद्धि प्राप्त कर लूंगा तो वो आपका वहम है यही मान के चलयेगा बाकी गुरू ही आपके इष्ट से मिलता है यही सत्य गुरू रूपी देह को नही गुरू रुपी गुणी को प्रणाम हमारा शंत शंत प्रणाम नमन बाकी आप सभी समझदार है यह बहुत कम लिखा है ज्यादा समझना आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से बाकी गुरू आपका गुरूर है उनके प्रति निष्ठा आपका समर्पण यही सत्य है बाकी जैसी माँ बाबा की ओर आपकी इच्छा ।।। शीतला सप्तमी की हार्दिक शुभकामनाएँ आप सभी को।। प्रणाम आपको ।। जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश ।। 🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻

Tuesday, March 6, 2018

अपने धर्म के प्रति वफादार रहे ओर धर्म के दुकानदारो से सावधान

मित्रो आज सनातन धर्म या हिन्दू मान्यता को नीचा दिखाने की जैसे होड मची हुयी है जैसे अंधविश्वास भगवान को पत्थर बोलना ये जो हम आज आप सभी को बता रहे है ये कोई नई बात नही हम सनातनीयो ने कभी किसी धर्म की खिलाफत या किसी धर्म को आडम्बर या उनके गुरूओ का कभी अनादर नही किया पर पता नही क्यू इन लोगो की इतनी छोटी सोच क्यू है कि कुछ पंथ कबीले तो अब बने है आप सभी तो सनातन धर्म नुमा वटवक्ष की शाखाये हो यानी केवल टहनी मात्र हो सनातन धर्म हजारो सालो से चला आ रहा है जब जब सनातन धर्म पर आँच आयी है तो हिन्दू बागी हुआ है हिन्दू कमजोर नही है बस वो अपने धर्म के कुछ व्यापारियों से दुखी है कि वो पैसे के लिए अपनो को भी बेच देतै है एक संत बना फिरता है व्यापारी जो पतंजलि के नाम से दुकान खोल रखी है उसने तो भगवान को पत्थर तक बोल दिया अरे वो कहता है कि योग से सारे रोग दुर होते है तो ये पतंजलि नाम की दुकान खोलकर काहे व्यापारी बने भाई कुछ नही बस इनको अपना समान बेचना है ओर कुछ तो ऐसे भी है जिनको कही बाहर से पैसा दिया जाता है कि मनुवादीयो से दुर रहो ब्रह्माणो से दुर रहो क्षत्रियो से दुर रहो सारे हिन्दुओ से ओर इनके भगवान का बहिष्कार करो क्या वो तुम्हारे भगवान नही है अरे जब तूम कहाँ से आये भाई इंसान कोई भगवान नही हो सकता संत गुरू हो सकता है बाकी आपका आदर ओर आस्था विश्वास उसको भगवान बना देती है जातियाँ से पहले आप सभी सनातनी है बाकी अभी भी समय है अपने धर्म को मत बेचो बाद मे रोने के सिवा तुम्हारे हिस्से मे कुछ नही आयेगा धर्म के नाम पर आप को भटकाने वालो का इलाज आपके पास है वो आपका जूता उठा के मारो उसको अकल स्वयंम आ जायेगी आप उनका बहिष्कार करे जो सनातन धर्म की खिलाफत करे ओर जो अंधविश्वास कहते है भगवान को वो सभी अपने घरो मे भुतो से दुखी है भुतौ प्रेतो को एक्सट्रा एनर्जी मानते है जिसको शायद पौरोनिरमाल एक्टीविटी कहाँ जाता है तो उनको क्यू मानते हो हाँ तो यहाँ पतंजलि वाले बाबा की बात चल रही थी उनका भाषण हवा ओर सभाओ के हिसाब से होता है आप सच्चे सनातनी है तो उनका बहिष्कार करे अपने हिन्दुस्तान मे पहले से ही कही स्वदेशी कम्पनियां है जो आयुर्वेद समेत कई चीजो उत्पादन करती है गो मुत्र ओर देशी घी के लिये सरकार डेयरीयाँ है पथमेडा गो शाला है ओर भी आपके आस पास कई तरह की गौ शालाये है आप सभी उनसे सामग्री ले सकते है ताकि आपको पुण्य भी साथ मे मिल सके आपका पैसा सही जगह इस्तेमाल हो सके ओर आज कल तक ऐसे कई बंदो के यू टयूब पर विडियो आ रहे है कि बाबा हनुमान जी वानर नही थे तो क्या संत शिरोमणि बाबा तुलसी दास जी ने हनुमान चालीसा या रामचरित्र मानस भांग खाकर लिखी थी ओर राम रावण का अस्तित्व तक नकारा गया इसका मतलब तो परम पुजनीये माहॠषि वाल्मीकि जी ने जो रामायण लिखी थी तब तो वो भी गलत थी ओर भगवान श्री हरिविष्णु के अवतार श्री कृष्णा जी को भी पता नही क्या क्या कहते है क्या आज के हिन्दुओ का यही संस्कार है किसी ने देवी देवता का मजाक उडाया तो लगे आप भी उन मेसेज को फोरवड करने अरे देख तो लो जाने अनजाने कही आप अपने आराध्य का अपमान तो नही कर रहे हो ओर आज के पढे लिखे हमारे भाई वैसे भी उनको बिना सोचे समझे फोरवड करते है जय हो इन सभी की क्या आप इतने कमजोर है बाकी ये हमारी सोच है अब आप कब अम्ल करते है ये हमे नही पता इससे कोई सहमत हो या नही हमे नही पता नादान बालक की कलम से आज बस इतना बाकी फिर कभी बाकी जो करना है सोच समझकर पर अपनी जडो पर कुल्हाड़ी मत मारो ये वटवृक्ष जब टूट जायेगा या सुख जायेगा तो टहनी या शाखाये अग्नि मे ही जलेगी बाकी आपकी ओर माँ बाबा की इच्छा ।। प्रणाम आपको ।। जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश ।। 🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻

रहस्यमय रक्षा मंत्र

मित्रो आज रक्षा मंत्र दे रहा हूँ यह मंत्र रक्षा मन्त्र होने के साथ-साथ  झाड़े का मंत्र भी है |    | मंत्र | ॐ नमो धरती माता, धरती पिता |...

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