Saturday, September 30, 2017

क्यू मानते है हम विजयदश्मी ओर दशहरे ओर सच क्या है



विजयदश्मीओर लंकापति रावण दहन भारत का सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण त्योहारों में से है ....
जो की आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन मनाया जाता है|ये पावन पर्व हर साल नवरात्रि के बाद दसवें दिन में प्रभु श्री राम का लंकापति रावण पर विजय पाने की ...
और ....
माँ दुर्गा का महिषासुर पर विजय विजय पाने की ख़ुशी में मनाया जाता है ..
इसीलिए इस त्योहार को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है ...
नवरात्रि के दिन 9 दिनों तक कई जगह में राम लीला का आयोजन किया जाता है ...
रामलीला में कलाकार रामायण के पात्र बनते हैं ...
और भगवान् राम का रावण के साथ युद्ध करके अपनी धर्मपत्नी सीता को उसके चंगुल से चुदा कर वापस अयोध्या की तरफ आने तक का पूरा सफ़र नाटकीय रूप में दर्शाया जाता है...
और दशहरा (विजयादशमी) के दिन उस युद्ध का अंत करके राम लीला के बड़े बड़े खुले मैदानों में रावण का पुतला ,साथ में मेघनाद और कुम्भकरण का पुतला भी जलाया जाता है...
पर टीवी पर धारावाहिको मे पोरौणिक कथा के आने से राम लीला मंचन ओर माँ दुर्गा की लीला मंचन करने वालो का टोटा है ...
क्योकि स्पेशल इफेक्ट के जरिए टीवी पर मजा आता है ..
पर आजकल टीवी पर हिन्दु सनातनी परम्परा को तोड मरोड कर पेश किया जाता है ...
पर चमत्कार की वजह से हम सब खुश होते है वेसे भी इस बारे मे कुछ नही कहाँ जा सकता क्योकि जब तक ...
अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं,
रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं,
भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगा,
जब हर घर से एक राम निकलेगा.
तो ही अपना भारतवर्ष वापस सनातनी बनेगा...
यही सत्य है नेताओ की पनाह मे यह सब होता है हिन्दु धर्म को विनाश की ओर मोडा जा रहा है..
आने वाले समय मे शायद लोग इसको भी भी भुल जाये की दशहरा ओर विजयदश्मी क्या होती है..
पर हम आप सभी को ये क्यू बता रहे है आज तो इन दोनो की शुभकामना देनी है....
चलो आगे बताते है
ओर कई जगहों पर माता दुर्गा का मिटटी की प्रतिमा बनाया जाता है जिसमें माँ  दुर्गा महिषासुर का वध करती दिखाई देतीं हैं.....
दशहरा  (विजयादशमी) के दिन इस मूर्ति का पूजन किया जाता है...
 और बहुत धूम धाम से विजयदशमी मनाया जाता है....
इस दिन जगह जगह पर मेले लगाये जाते हैं और अनेक प्रकार की वस्तुओं जैसे खानेपीने के सामान, बच्चों के लिए खेलने का सामान और अनेक प्राकर के घर सजावट के सामान का बिक्री किया जाता है .....
जैसा हमारे आसीन्द मे भी पिछले दस सालो से इस परम्परा का निर्वाह किया जा रहा है....
पर दशहरे का मतलब कोई नही समझता दशहरे ओर विजयदश्मी का मतलब क्या हे पहले वो जान ले..
दशा हारा एक संस्कृत शब्द है..
दशहरा ओर विजयदश्मी इन दोनो का मतलब ही अच्छाई पर बुराई की जीत.....
पर रावण दहन तो होता है पर अपने अंदर बैठे रावण का दहन कोई नही करता यही सत्य है.....
ओर इनका मतलब यही है कि आप के भीतर दस बुरे गुणों को दूर करना...
जैसे...
कामवास (वासना)..
क्रोध (क्रोध)...
मोहा (अनुलग्नक)...
लोभ (लालच)...
मादा (गर्व पर)...
मत्सर (ईर्ष्या)...
स्वार्थ (स्वार्थ)...
अन्याया (अन्याय)...
अमानवत्ता (क्रूरता)...
अहंकार (अहं)...

दोनों ही रूपों में दशहरा (विजयादशमी) शक्ति पूजन का पर्व है...
और इस दिन शास्त्र पूजन की तिथि भी होती है इस दिन कोई भी नया कार्य शुरू करने को शुभ माना गया है ....
क्यूंकि ऐसे मान्यता है की विजयादशमी के दिन प्रारंभ किया हुआ कार्य में विजय आवश्य ही प्राप्त होता है...
दशहरा  (विजयादशमी) पर्व को भगवान् की जीत के ख़ुशी में और बुराई पर अच्छाई का प्रतिक मानकर इस त्यौहार को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है...
दशहरा के दिन लोग अपने वाहनों को साफ़ करके ,उसका पूजन करते हैं ..
सब कोई अपने व्यापारों की मुख्य वस्तुओं की पूजन करते हैं जैसे की किसानों अपनी जानवर और फसलों का, व्यापारी अपने लेखा और तराजू का, मैकेनिक अपने मशीनों का आदि क्यूंकि ऐसा माना जाता है ....
की दशहरा पर इन सब का पूजन करने से व्यापार में व्रुदी होती है इस दिन लोग नए कपडे पहन कर मेलों का आनंद उठाने के लिए चलते हैं ...
और साथ में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को दशहरा (विजयादशमी ) की बधाइयां देते हैं पर जब तक आप अपने भीतर के रावण को जो,आग खुद लगायेंगे, तब तक आपके लिए दशहरे ओर विजयदश्मी का कोई मतलब नही होगा...
खैर आज हम आप सभी ये क्यू कह रहे है नेता दीमक की तरह देश को खा रहे है ओर जनता आँखे बंद करके बैठी है मस्त सो रही है..
खैर जाने दो आज हमे तो आपको विजयदश्मी ओर दशहरे की शुभकामनाएं देनी है हम भी क्या फालतू बात कर रहे है....
,
माँ की ज्योति से नूर मिलता है,
सबके दिलों को सुरूर मिलता है,
जो भी जाता है माता के द्वार,
उसे कुछ ना कुछ ज़रूर मिलता है।
अधर्म पर धर्म की विजय
असत्य पर सत्य की विजय
बुराई पर अच्छाई की विजय
पाप पर पुण्य की विजय
अत्याचार पर सदाचार की विजय
क्रोध पर दया, क्षमा की विजय
अज्ञान पर ज्ञान की विजय
रावण पर श्रीराम की विजय के पावन पर्व पर..
खुशी आप के कदम चूमे
कभी ना हो दुखों का सामना
धन ही धन आए आप के आँगन,
दशहरा के शुभ अवसर पर
हमारी है यही मनोकामना
रावण की तरह सभी के मन के विकारों का नाश हो,
माँ दुर्गा ओर प्रभु श्रीराम का हृदय में सर्वदा वास हो...
बुराई का होता हैं विनाश,
दशहरा लाता है उम्मीदों की आस,
हर व्यक्ति के अंदर की बुराई का हो नाश,
आपके घर में ईश्वर का सदा वास.
ओर...
हो आपकी जिंदगी में खुशियों का मेला
कभी ना आए कोई झमेला
सदा सुखी रहे आपका बसेरा..
मुबारक हो आपको यह विजयदश्मी का त्यौहार ओर शुभ दशहरा...
आप आपके परिवार को विजयदश्मी ओर दशहरे की बहुत बहुत शुभकामनाएं...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
🌹🙏🏻🌹

Wednesday, September 27, 2017

आध्यात्मिक है क्या



आध्यात्मिक है क्या...
आध्यात्मिक मे आने से पहले रोग दोष जलन ईष्या मान अपमान को दर किनार करना पडता है ओर मातृशक्ति का सदा ही सम्मान करना ओर अपने बडो को सदा ही आदर करना आध्यात्मिक की पहली सीडी है पर आज कल आध्यात्मिक मे आजकल ऐसे लोग भी है जो जाति से कुछ भी हो पर जट झूठ बोलना जोर से बोलना भेल ही वो नौकरी करते हो अपने आपको बिजनेस मैन बताना लोगो के सामने शरीफ बनना ओर दुसरो से दोस्तो करके उनके कंधो का इस्तेमाल करना यही उनका काम होता है मिंत्रो अगर आप ऐसे बंदो को पर्सनली नही जानते है ओर आपकी पहचान नेट के माध्यम से हुयी है तो इनसे सावधान रहे क्योंकि बाकायदा इनकी रेट लिस्ट है हर काम के लिए पर ये काम किसी ओर से करवा कर वाह वही लूटते है मिंत्रो ऐसे लोगो से जब तक आप ना मिल लो तब तक दुर से नमस्कार करो क्योकि ये अपना पता पहचान छिपा कर चलते है इनको पता होता है कि ये स्वयम क्या है ये इनसे दोस्ती करने से अच्छा है कि दिखता हुआ दुश्मन अच्छा होता है आप सभी से हमारा यही कहना जिसको आप जानते नही उनसे दुर रहये वरना ऐसे पागल आदमी आपके जिंदगी मे आकर आपकी जिंदगी झण्ड ना कर दे बाकी माँ बाबा की इच्छा है मानो तो अच्छा ना मानो तो बहुत अच्छा...
जो अपमान करे बडो का जो स्नेह ओर प्यार ना दे सके अपनो को जो तिरस्कार ओर जलन की दृष्टि से देखे मातृशक्ति को उनके लिये आध्यात्मिक नही है... सबसे पहले दुश्मनी के भाव का त्याग करना पडता है ओर ऐसे व्यक्तियो को अपने इष्टदेव ओर गुरुदेव के ऊपर छोड देना चाहिए...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹

Tuesday, September 26, 2017

क्या जपे क्या ना जपे



आजकल सब आध्यात्मिक मे अपने हिसाब से चल रहे है कोई कहता की ये मत जपो कोई कहता की इसको मत जपो इससे हानि है हालाकि कई बीज मंत्र है जिनको बिना गुरु की सहायता या आग्या के बिना नही जपा जाता ..
अगर हिन्दू शास्त्रो मे आदिकाल से फेर बदल नही होता तो हिन्दु शास्त्रो के मुकाबले कोई शास्त्र नही थे ओर उनके मंत्र ओर तंत्र अपनी ऊर्जो एक बार जपने से ही बता देते पहले सभी हिन्दु जातियो ने अपने आपको बडा बताने के लिए फेर बदल किये जिसमे कई शेष्ठ ओर पुजनीये शामिल है फिर मुगलो ने फेर बदल कर दिये फिर अंग्रेजो ने फिर आज कल गीता प्रेस भी कर रही है जिनका हमे पुणे विश्वास है वो भी कुछ कुल को लेकर चल रही है जब तक हिन्दु सनातन धर्म मे छुआ छुत या जाति पाति का भेद रहेगा तब तक ना सनातन एक हो पायेगा ना ही एक होगा ओर गीता प्रेस के ही पुरानी पुस्तकों ने जैसे नारद पुराण मे छेडछाड की गयी है तीन अध्याय को उसमे से हटा दिया गया है ये उस तरह है की किसी एक कुल को ऊपर किया गया दुसरे कुल के नीचा दिखाया गया... हमे पुणे विश्वास है कि जो बडे बडे धर्म के ठेकेदार है जिनको ऊंची ऊची पदवी मिली हुयी है जब तक वो नही सुधरेगे जब तक सनातन को नीचा देखना ही होगा हर गुरु अपने शिष्य को भगवान मे भेद करना नही सिखाता पर यहाँ धर्म के ठेकेदार जो अपने धर्म का मजाक बनाते है कभी कभी लगता है वो सनातनी है ही नही,

जैसे अभी कुछ दिनो पहले जिनको योग गुरु कहाँ जाता है रामदेव जी.. जिन्होंने बाबा शनिमहाराज का अपमान किया था ओर वहाँ हिन्दु सभा मजोद गणमान्यो मे कोई कुछ नही बोला अभी एक हिन्दु प्रोफेसर ने माँ दुर्गा के बार मे कुछ टिप्पणी की थी तो भी हिन्दु मोन क्यू कोई बोलना नही चाहते ये समझ के बाहर है खैर जिनका अच्छा वक्त आता है उनका आप ओर हम कुछ नही कर सकते ,,बात मंत्रो की हो रही थी अरे मंत्रो वो जपो जो आपका गुरु आपको दे उसमे फेर बदल की क्या अवश्यकता है गुरु जो भी मंत्र दे उसको जपो वो दोष रहित होता है पर आजकल लोग वैसे भी भोले बाबा जो जगत पिता है उनको गुरु मानकर मंत्र जप करते है जैसे भोले बाबा उनको दीक्षित करने आये थे फिर कही गलत हो जाते है तो दोडते रहते है एक पिता अच्छा दोस्त गुरु हो सकते है भौतिक जगत के लिए पर आध्यात्मिक मे आपको भौतिक गुरु खोजना ही पडेगा यह भी अटल सत्य है... आज उसके पास कल उसके पास योग्य गुरु देखो ओर साधना चाहे ग्रहस्थ हो बह्मचारी या हो साधु की पर अपनी जिम्मेदारी से भागना संभव नही जो एक जिम्मेदारी को छोड़कर जाता है वो कही सफल नही होता यही सत्य है भजन के साथ भोजन भी चाहिए होता है तो कर्म के साथ अपने धर्म के प्रति अडिग रहे हमारा तो यही कहना है आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से अच्छा लगे तो शेयर करे बुरा लगा हो तो नंजरअदाज करे कुछ गलत लगा हो तो माफी..

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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Monday, September 25, 2017

चरित्र की पुजा होती है क्यू



चरित्र ओर नाम ओर आचरण आदमी जन्म से लेकर नही आता ये सब उसके कर्मा द्वारा मिलता है ओर किसका साथ कितने दिन का होता है ये ऊपर वाला तय करता है इंसान नही ,प्रवचन बहुत अच्छी चीज है अगर दुसरो पर लागू हो तो ओर वही अगर उस रास्ते पर स्वयंम को चलना पडे तो बहुत मुश्किल होती है ,सच्चा आर्दशवादी वो ही होता है जो निष्पाप निस्वार्थी हो बाकी आप हमेशा किसी की निंदा से तब तक बाहर नही आ सकते तब तक आपका अभिमान आपको छोड कर नही जाता, गुमनामी की जिंदगी हमारी बहुत हसीन थी ना कोई था  हम थे बस वो ही थे जिनको हम अपना मानते है..
अच्छा समय अच्छे दोस्त लेकर आता है बुरा समय बहुत कुछ लूट कर ले जाता है खैर हमे कोई फर्क नही पड़ता ,कोन अपना कोन पराया,,
आप सभी का साथ हमारे साथ रहा इसलिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद कभी कोई गलती हुयी हो तो माफी...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश..

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रिश्ता कोई भी हो दिल से बने


सब को अपनी मौज ही अच्छी लगती है चाहे भौतिक चाहे आध्यात्मिक अपनी ले मे चलना सबको अच्छा लगता है पर जहाँ शब्दों मे प्रेम नही बडो मे आदर नही वो मौज या ले किसी काम की नही जहाँ परिवार मे भेद है वो प्रेम प्यार किसी काम का नही भेद अच्छे बूरे मे करो परिवार मे हो तो बात करो ...भेद नही.... अपनी मौज रहना साधु जीवन को दर्शाता है पर भेद करना या ईष्या करना आपको आध्यात्मिक जीवन या भौतिक जीवन से दुर करता है आप सोचते है आपने अच्छा किया पर कभी मनन करना की हमने क्या किया जो कोई दुर चला गया रिश्ता किसी से भी बनाओ पर दिल से बनाए उसमे मजा है.. जो रिश्ते दिमाग से बनते है उनका टूटना लाजिमी है ओर जो दिल से बनते है उनमे आदर ओर प्यार झलकता है पंथ या सीडीयाँ कोई भी हो जो रिश्ता बनाये वो दिल से बनाये दिमाग से तो वैसे भी बिजनेस होता है दिल से रिश्ते बनते है ओर शब्द वो तलवार होते है जो बिना जख्म दिये घायल कर देते है ओर बिना मलहम के जख्मो को भर भी देते है जो भी करो सोच समझकर करो चाहे वो शब्द हो या अपनो के साथ व्यवहार बाकी सब आपके ऊपर है कि आपको किसी मौज मे ओर ले मे चलना है नादान बालक की कलम से जो हमे भी समझ मे नही आया है आपकी समझ मे आया तो शेयर करो नही तो नजरअंदाज करो...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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क्या नारी नर्क का द्वार है



आज जो भी आध्यात्मिक मे आता है वो शास्त्रो का ग्यान तो तोते की तरह रहता है पर वो व्यवहारकि ग्यान नही प्राप्त करता है या गुरु ग्यान ना लेकर शास्त्रो मे से कही बीते कह कर नारी , नारी शक्ति को नर्क का द्वारा बता देते है या उनका आध्यात्मिक मे अपने पति या बच्चो द्वारा उपहास किया जाता है क्यू या किसी ढोंगी पाखण्डी द्वारा उनका मान भंग हो जाता है या नारी की मर्यादा को चूर चूर किया जाता है आखिर क्यू, क्या ये सही है सतयुग का एक उदाहरण है ऋषि विर्श्वा का नाम आप सभी ने सुना होगा क्या आध्यात्मिक मे नही थे उन्होने दो शादीयाँ की थी क्या उनका आध्यात्मिक सफल नही था उनके बच्चो ने नाम नही कमाया एक भक्त शिरोमणि कहलाया तो दुसरा देवता का खंजाची बना ये सब उनके माता पिता की शिक्षा के कारण हुआ था हालाकि कुछ कर्म शिरोमणि के गलत थे पर नारी का मान भंग करने की उन्होने भी चेष्टा नही की अपमान किया था तो उनको सजा मिली पर आज यूग मे कुछ दोहो का गलत प्रयोग समझाया जाने लगा है. पराये नारी को आप भोग विलास की वस्तू समझते है तो पुरुष के लिये नर्क समान ही होती है ओर उसको आदर या सत्कार किया जाये तो वो वरदान है बस नजरो का फेर है नजर नीयत बदलो नाजारे एर किस्मत स्वयंम बदल जायेगी, पर स्वयंम की पत्नि शक्ति रुपा होती है यही सत्य है इसलिए नारी या मातृशक्ति की उपेक्षा करने वालो को हमारा एक ही निवेदन है जिस तरह आप अपनी माँ बेटी बहन का सम्मान करते हो या जिस दृष्टि से उनको देखते है सभी को उसी रुप मे देखो तो उसमे भी शक्ति का रुप मिलेगा बाकी आपकी इच्छा ओर माँ बाबा का आदेश ज्यादा कुछ आता नही क्योंकि हम स्वयंम आध्यात्मिक मे नये है ओर नादान बालक है जिसको केवल अपने गुरु ओर इष्ट की बतायी हुयी राह पर चलना है ओर चलते रहेगे बस आज इतना ही नादान बालक की कलम से....
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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बाबा हनुमान जी चालीसा

श्री हनुमान चालीसा हिंदी में अनुवाद सहित  ॐ हं हनमंते रूद्रात्मकाय हुं फट्  इस मंत्र का चालीसा शुरू करने ओर पुणेयता पर जपना चाहिए,   दोहा श्...

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