Friday, July 28, 2017

"भय हरण कालिका"

"जय माँ जय बाबा की"

"भय हरण कालिका"

जय जय जग जननि देवी
सुर नर मुनि असुर सेवी
भुक्ति मुक्ति दायिनी भय हरण कालिका।
जय जय जग जननि देवी।

मुंडमाल तिलक भाल
शोणित मुख लगे विशाल
श्याम वर्ण शोभित, भय हरण कालिका।
जय जय जग जननि देवी ।

हर लो तुम सारे क्लेश
मांगूं नित कह अशेष
आयी शरणों में तेरी, भय हरण कालिका ।
जय जय जग जननि देवी ।

माँ मैं तो गई हूँ हारी
 माँगूं कबसे विचारी
करो अब तो उद्धार तुम, भय हरण कालिका ।
जय जय जग जननि देवी ।

"इसको नित्य पढने से दोष शंका डर भय का शंका निवारण होता है ओर माँ महाकाली अपने भक्तो पर विशेष कृपा करती है बाकी माँ बाबा का नाम कैसे भी पुणे श्रद्धा ओर विश्वास से जपा जाये फलित जरूर होता है"


"जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश."

बाबा महामृत्युंजय

बाबा महामृत्युंजय स्वरुप का ध्यान..

ॐ त्रियम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मोक्षिय मामृतात्



त्रयम्बकदेव अष्टभुज{उनकी आठ भुजाएं हैं } हैं ,उनके एक हाथ में अक्षमाला और दुसरे में मृगमुद्रा है ,दों हाथों से दो कलशों में अमृतरस लेकर उससे अपने मस्तक को आप्लावित {गीला कर रहे हैं } कर रहे हैं ,और दो हाथों से उन्ही कलशों को थामे हुए हैं ,शेष दो हाथ उन्होंने अपनी गोद में छोड़े हुए हैं ,और उनमे दो अमृत से भरे हुए घड़े हैं ,वे सफ़ेद कमल पर विराजमान हैं ,मुकुट पर बालचंद्र सुशोभित है ,मुखमंडल पर तीन नेत्र शोभायमान हैं ,इसे देवाधिदेव कैलासपति बाबा महादेव जी की मैं शरण लेता हूँ .

माँ बाबा अर्धनारीश्वर स्वरुप का ध्यान

बाबा शंकर जी का शरीर नीलमणि और प्रवाल के सामान सुन्दर है ,तीन नेत्र हैं ,चारों हाथों में पाश ,लाल कमल ,कपाल और त्रिशूल हैं ,आधे अंग में माँ अम्बिका जी और आधे में बाबा महादेव जी हैं .दोनों अलग अलग श्रृंगारों से सज्जित हैं ललाट पर अर्धचन्द्र है और मस्तक पर मुकुट सुशोभित है ,इसे स्वरुप को नमस्कार है .
जो निर्विकार होते हुए भी अपनी माया से विराट विश्व का आकार लेते हैं ,स्वर्ग और मोक्ष जिनकी कृपा कटाक्ष के वैभव बताये जाते हैं ,तथा योगीजन जिन्हें सदा अपने ह्रदय के भीतर अदितीय आत्मज्ञान आनंदस्वरूप में ही देखते हैं ,उन तेजोमय बाबा महादेव को ,जिनका आधा शरीर शैल राजकुमारी माँ पार्वती जी से सुशोभित है ,निरंतर मेरा नमस्कार है ........

...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश.....

🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻

Sunday, July 23, 2017

राम भक्त बाबा हनुमान जी.

करुना कर भक्तो के राम,
जय सिया राम जय जय सिया राम,

हनुमान के स्वामी राम,
दीनन के दुःख हारी राम,।

आदि राम अनंत है राम,
सत चित और अनंत है राम,

जय रघुनन्दन जय सिया राम,
भज मन प्यारे जय सिया राम,

सत्ये सनातन मंगल कारन,
सगुण निरंजन सीता राम,

दशरत नंदन सुर मुनि वंदन,
परेय्पप वंदन सीता राम,

मर्यादा पुर्शोतम राम,
पुरान ब्रम्ह सनातन राम,

राम ही पावन अति मन भावन,
नर नारायण सीता राम,

बोलो राम जय जय राम,
मुनिमन रंजन भव भये भंजन,
असुर निकंदन सीता राम,
पतित उद्धारण जग जन तारण,
नित्ये निरंजन सीता राम,,,

पुरान ब्रम्ह सनातन राम,
तुलसी सुत तुलसी के राम,,

बोलो प्रभु श्री रामभक्त बाबा हनुमान जी जय हो जय हो जय हो.....

जय जय बजरंगी महावीर
तुम बिन को जन की हरे पीर

अतुलित बलशाली तव काया
गति पिता पवन का अपनाया
शंकर से दैवी गुण पाया
शिव पवन पूत हे धीर वीर
जय जय बजरंगी महावीर , तुम बिन को जन की हरे पीर

दुःख भंजन सब दुःख हरते हो
आरत की सेवा करते हो
पल भर विलम्ब ना करते हो
जब भी भक्तों पर पड़े भीर
जय जय बजरंगी महावीर , तुम बिन को जन की हरे पीर

जब जामवंत ने ज्ञान दिया
झट सिय खोजन स्वीकार किया
शत जोजन सागर पर किया
निज प्रभु को जब देखा अधीर
जय जय बजरंगी महावीर , तुम बिन को जन की हरे पीर

शठ रावण त्रासदिया सिय को
भयभीत भई मैया जिय सो
माँगत कर जोर अगन तरु सों
दें मुन्देरी वा को दियो धीर
जय जय बजरंगी महावीर , तुम बिन को जन की हरे पीर

जब लगा लखन को शक्ति बाण
चिंतित हो विलखे बन्धु राम
कपि तुम सांचे सेवक समान
लाये बूटी संग द्रोण गीर
जय जय बजरंगी महावीर , तुम बिन को जन की हरे पीरा,

कुछ विशेष विधान बाबा की पुजा के लिये...

बाबा हनुमानजी की पूजा-अर्चना और व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

पूजा में चरणामृत का उपयोग न करें। शास्त्रों में इसका विधान नहीं है।

बाबा हनुमान जी को लाल फूल (रक्तपुष्प )प्रिय हैं। यानी लाल गुलाब कनेर ओर गुडहल, अत: पूजा में लाल फूल ही चढ़ाएं।

मूर्ति को जल व पंचामृत से स्नान कराने के बाद सिंदूर में तिल का तेल या चमेली का तेल ओर रुद्रअभिषेक के लिए सरसो का तेल मिलाकर उनको लगाना चाहिए। इससे वे प्रसन्न होते हैं।

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश..

🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻

Saturday, July 22, 2017

~ श्री~ श्री कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु और परशुराम के युद्ध का वर्णन ~

~ श्री~ श्री कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु और परशुराम के युद्ध का वर्णन ~

उभयोः सेनयोर्युद्घमभवत्तत्र नारद !
पालयिता रामशिष्या भ्रतश्चमहावलाः !!
क्षत् विक्षत् सर्बांग् कार्तवीर्य प्रपीडिताः !! १
नृपस्यशरजालेनरामः शस्त्रभृता वरः !
न ददर्शस्वसैन्यं न राजसैन्य तथैव च !! २
चिक्षेप रामश्चाssग्नेयंवभूबाग्निमयं रणे !
निर्बापयामास राजा वारुणेव लीलया !! ३
चिक्षेप रामो गान्धर्व शैल सर्प समन्वितम् !
वायव्येन महाराजः प्रेरयामास लीलया !!४
चिक्षेप रामो नागास्त्र दुर्निवार्य भयंकरम् !
गारूणेन महाराजःप्रेरयामास लीलया !!५
माहेश्वर च भगवांश्चिक्षेप भृगुनन्दनः !
निर्वापयामास राजा वैष्णवास्त्रेण लीलया !!६
ब्रहृमास्त्रं चिक्षेप रामो नृप नाशया नारद !
ब्रह्मास्त्रेण च शान्तं तत्प्राणनिर्वापणं रणे !!७
दत्तदत्तं यच्छूलमव्यर्थ मन्त्रपूर्वकम् !
जग्राह राजा परशुरामनाशाय संयुगे !!८
शूलं ददर्श. रामश्च शत् सूर्यसमप्रभम् !
प्रल्याग्निशिखो द्रक्तं दुनिर्वार्य सुरैरपि !!९
पपात शूलं समरे रामस्योपरिनारद !
मूर्छापबाप स. भृगुः पपात च हरि स्मरन् !!१०
पतिते तु तदा रामे सर्वे देवा भया कुलाः !
आजग्मुः समरमं तत्र ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः!!११
शंकरश्च. महाज्ञानी महाज्ञानेन लीलया !
ब्रह्मणं जीवया मास तूर्ण नारायणाज्ञया !!१२
- ब्रह्मवैवर्त पुराण (सत्य प्रत)

भावार्थः-
हे नारद ! अनन्तर दोनो ओर के सैनिको में भयंकर युद्ध आरम्भ हुआ, जिसमे परशुराम के शिष्यगण और महावली भ्राता गण भगवान कार्तबीर्य से अतिपीडित एवं छिन्नभिन्न होकर भाग निकले !१. !!
राजा कार्तवीर्य के बाणजाल से आछन्न होने के कारण परशुराम अपनी सेना और राजा कार्तबीर्य की सेना को नही देख सके ! २ !!
पश्चात परशुराम ने समर मै आग्नेय बाण का प्रयोग किया , जिसमे सव कुछ अग्निमय हो गया , राजा कार्तवीर्य ने वरुण बाण द्वारा उसे लीलापूर्वक भाँति
शान्त कर दिया ! ३ !!
परशुराम ने पर्वत सर्प युक्त गांन्धर्व अस्त्र का प्रयोग किया जिसे कार्तवार्य महाराज ने वायव्य बाण द्वारा समाप्त कर दिया !४!!
फिर परशुराम ने अग्निबार्य एंव भयंकर नागास्त्र का प्रयोग किया , जिसे महाराजा सहस्रबाहु ने गारूण अस्त्र द्वारा बिना यत्न के ही नष्ट कर दिया ! ५ !!
भृगु नन्दन परशुराम ने माहेश्वर अस्त्र का प्रयोग किया जिसे महाराजा ने वैष्णव अस्त्र द्बारा लीलापूर्वक समाप्त कर दिया ! ६!!
हे नारद् !! अनन्तर परशुराम ने कार्तवीर्य महाराजा के विनाशार्थ ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया , कार्तवीर्य महाराजा ने भी ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उस प्राणनाशक को भी युद्ध में शान्त कर दिया !७!!
तब महाराज कार्तवीर्य जी ने उस रण मै परशुराम के वधार्थ दत्तात्रेय द्वारा प्रद्त्त शूल का मन्त्र पूर्वक उपयोग किया , जो कभी भी व्यर्थ ना होने वाला था !८!!
परशुराम ने उस सैकडो सूर्य के समान कान्तिपूर्ण प्रलय कालीन अग्निशिखा से बडा- चडा और देवो के लिये भी दुर्निवार उस शूल को देखा !९!!
हे नारद् !! परशुराम के ऊपर वह शूल गिरा, जिससे भगवान् का स्मरण करते हुए परशुराम मूर्छित होगये !१०!!
परशुराम के गिर जाने के वाद समस्त देव गण व्याकुल होगये , उस समय युद्ध स्थल में ब्रह्मा विष्णु एंव महेश्वर भी आ गये!११ !!
नारायण की आज्ञा से महाज्ञानी शिव ने अपने महाज्ञान द्वारा लीला पूर्वक परशुराम जी को जीवित कर दिया ! १२ !! इति !
- ब्रह्मवैवर्त पुराण (सत्य प्रत)

इसके बाद शिवजी ने दोनों को आशिर्वाद देकर यह युद्ध रोक दिया। इस युद्ध के बाद सहस्त्रबाहु जी ने अपने जेष्ठ पुत्र जयध्वज का राजतिलक करने के पश्चात सन्यास धारण कर शिवजी के साथ महेश्वर स्थित शिवलिंग में विलीन हो गए। जिसे राजराजेश्वर लिंग के नाम से जाना जाता है। आज भी महेश्वर में दीपप्रिय सहस्त्रबाहु जी के राजराजेश्वर मंदिर में ११ अखंड नंददीप प्रज्वलित है। यह राजराजेश्वर शिवलिंग आज करोडो लोगों की आस्था का केंद्र है।

*महाराज कार्तवीर्य अर्जुन को श्री भगवान् दत्तात्रेय का दर्शन*

                   *श्री मार्कंडेय पुराण अध्याय"१८*

*यदि देव प्रसंन्त्वं तत्प्रयाच्छाधि मुक्त माम।*

*यथा प्रजा पाल्यायेम न चा धर्मं मवाप्नुयाम।।*

*परानुस्मरण ज्ञान म प्रति द्वन्दतांरणे।*

*सहस्त्रमाप्तु भिच्छामि बाहुना लघुता गुणाम ।।*

*असँगा गतय: सन्तु शौला काशम्बु मूमिसु।*

*पातालेषु    च सर्वेषु वधश्चाप्याधि कान्नरात।।*

*तथा माग प्रवृ तस्य सन्तु सन्मार्ग देशिवा :।*

*संतुमें तिथय -शलाघ्य  वित्तवान्य तथा क्षयं ।।*

*अन्स्ट द्रव्यता रास्ट्रे  मामनुस्मरणेन च ।*

*त्वयि भक्तिश्च देवाश्तु नित्यं मव्यभि चारणी ।।*
🙏🏻🌹🌹🌹🙏🏻

*ॐ हिंगुले परमहिंगुले अमृतरूपीणी तनुशक्ति मनः शिवे श्री हिंगुलाय नमः*
*जय कुलरक्षणी तिलदानी आपको सर्वदा शंत शंत नमन जय माँ हिंगलाज,,,*

*है कुलगुरु दत महाराज है कुलशेष्ठ महाराज,,*
*||जय जय गुरुदेव दत्त, जय श्री सहस्रार्जुन महाराज ||*

जब महाराज को ये वरदान मिले थे तो उनका भ्रमित होने का कोई चांस नही ओर इनके तो काफी मंत्र ओर तंत्र भी है कल एक प्रभु जन ने महाराज सहस्त्रार्जुन पर टिप्पणी करके दिल को अंदर तक झंझोड दिया इसलिए...
ये वो वरदान थे जी महाराज को गुरुशेष्ट से मिले...

यमाहुर्वाषु देवांश हैहय नां फुर्लात्कम।

      हैहया नामी धिपतिरर्जुन :क्षत्रियर्षम।।

भावार्थ :- महाराजा ययाति के यहाँ वासुदेव के अंश से हैहय नामक पुत्र हुआ। जिनके वंश में कार्तवीर्यार्जुन क्षत्रिय हुए है।
               श्री कार्तवीर्यार्जुन ने दस हजार वर्षो की कठिन तपस्या के पश्चात् श्री भगवान् दत्तात्रेय से दस १०, वरदान प्राप्त किये, वे वरदान निम्न प्रकार से है:-

१-ऐश्वर्य शक्ति प्रजा पालन के योग्य हो, किन्तु अधर्म न बन जावे।
२- दूसरो के मन की बात जानने का ज्ञान हो।
३- युद्ध में कोई समानता न कर सके।
४- युद्ध के समय सस्त्र भुजाएं प्राप्त हो, उनका तनिक भी भार न लगे।
५-पर्वत, आकाश, जल, पृथ्वी और पाताल में अव्याहत गति हो।
६-मेरी मृत्यु अधिक श्रेष्ठ के हाथो से हो ओर जीवित सशरीर मे अपने आराध्य देव भोलेनाथ मे समा जाऊ..।
७-कुमार्ग में प्रवृत्ति होने पर सन्मार्ग का उपदेश प्राप्त हो।
८-श्रेष्ठ अतिथि नी निरंतर प्राप्ति होती रहे।
९-निरंतर दान से धन न घटे।
१०-स्मरण मात्र से धन का आभाव दूर हो जाये एवं भक्ति बनी रहे।,,,

श्री राजराजेश्वर कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु जी सात चक्रवर्ती राजाओं में से एक है। इस पृथ्वीपर सबसे अधिक सालो तक धर्म और न्याय से राज उन्हीका माना गया है। ऐसे योगिराज सहस्त्रबाहु जी की बदनामी और उनके बारे में भ्रामक झूठी कहानियां झूठी पुस्तिका, सीरियल और फिल्मो के माध्यम से फैलाने का काम कुछ अधर्मी धर्मभ्रष्ट लोग कर रहे है। ..खैर आपकी कलम है कुछ भी लिख सकते है ओर पहले भी कुछ इतिहास ओर चापलूसो ने महाराज सहस्त्रार्जुन को विलेन तो बना ही दिया है शास्त्रो मे फेर बदल कर ओर भी कई बात है जिनसे प्रर्दा उठना बाकी है क्योंकि मौज अगर लेनी है तो खोज करनी पडेगी ध्यान लगाना पडेगा. यही सत्य है...
ओर हमे गर्व है कि हम इनके वशंज है....

प्रणाम प्रभु...


जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधेकृष्णा अलख आदेश..
🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻 कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु और परशुराम के युद्ध का वर्णन ~

उभयोः सेनयोर्युद्घमभवत्तत्र नारद !
पालयिता रामशिष्या भ्रतश्चमहावलाः !!
क्षत् विक्षत् सर्बांग् कार्तवीर्य प्रपीडिताः !! १
नृपस्यशरजालेनरामः शस्त्रभृता वरः !
न ददर्शस्वसैन्यं न राजसैन्य तथैव च !! २
चिक्षेप रामश्चाssग्नेयंवभूबाग्निमयं रणे !
निर्बापयामास राजा वारुणेव लीलया !! ३
चिक्षेप रामो गान्धर्व शैल सर्प समन्वितम् !
वायव्येन महाराजः प्रेरयामास लीलया !!४
चिक्षेप रामो नागास्त्र दुर्निवार्य भयंकरम् !
गारूणेन महाराजःप्रेरयामास लीलया !!५
माहेश्वर च भगवांश्चिक्षेप भृगुनन्दनः !
निर्वापयामास राजा वैष्णवास्त्रेण लीलया !!६
ब्रहृमास्त्रं चिक्षेप रामो नृप नाशया नारद !
ब्रह्मास्त्रेण च शान्तं तत्प्राणनिर्वापणं रणे !!७
दत्तदत्तं यच्छूलमव्यर्थ मन्त्रपूर्वकम् !
जग्राह राजा परशुरामनाशाय संयुगे !!८
शूलं ददर्श. रामश्च शत् सूर्यसमप्रभम् !
प्रल्याग्निशिखो द्रक्तं दुनिर्वार्य सुरैरपि !!९
पपात शूलं समरे रामस्योपरिनारद !
मूर्छापबाप स. भृगुः पपात च हरि स्मरन् !!१०
पतिते तु तदा रामे सर्वे देवा भया कुलाः !
आजग्मुः समरमं तत्र ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः!!११
शंकरश्च. महाज्ञानी महाज्ञानेन लीलया !
ब्रह्मणं जीवया मास तूर्ण नारायणाज्ञया !!१२
- ब्रह्मवैवर्त पुराण (सत्य प्रत)

भावार्थः-
हे नारद ! अनन्तर दोनो ओर के सैनिको में भयंकर युद्ध आरम्भ हुआ, जिसमे परशुराम के शिष्यगण और महावली भ्राता गण भगवान कार्तबीर्य से अतिपीडित एवं छिन्नभिन्न होकर भाग निकले !१. !!
राजा कार्तवीर्य के बाणजाल से आछन्न होने के कारण परशुराम अपनी सेना और राजा कार्तबीर्य की सेना को नही देख सके ! २ !!
पश्चात परशुराम ने समर मै आग्नेय बाण का प्रयोग किया , जिसमे सव कुछ अग्निमय हो गया , राजा कार्तवीर्य ने वरुण बाण द्वारा उसे लीलापूर्वक भाँति
शान्त कर दिया ! ३ !!
परशुराम ने पर्वत सर्प युक्त गांन्धर्व अस्त्र का प्रयोग किया जिसे कार्तवार्य महाराज ने वायव्य बाण द्वारा समाप्त कर दिया !४!!
फिर परशुराम ने अग्निबार्य एंव भयंकर नागास्त्र का प्रयोग किया , जिसे महाराजा सहस्रबाहु ने गारूण अस्त्र द्वारा बिना यत्न के ही नष्ट कर दिया ! ५ !!
भृगु नन्दन परशुराम ने माहेश्वर अस्त्र का प्रयोग किया जिसे महाराजा ने वैष्णव अस्त्र द्बारा लीलापूर्वक समाप्त कर दिया ! ६!!
हे नारद् !! अनन्तर परशुराम ने कार्तवीर्य महाराजा के विनाशार्थ ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया , कार्तवीर्य महाराजा ने भी ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उस प्राणनाशक को भी युद्ध में शान्त कर दिया !७!!
तब महाराज कार्तवीर्य जी ने उस रण मै परशुराम के वधार्थ दत्तात्रेय द्वारा प्रद्त्त शूल का मन्त्र पूर्वक उपयोग किया , जो कभी भी व्यर्थ ना होने वाला था !८!!
परशुराम ने उस सैकडो सूर्य के समान कान्तिपूर्ण प्रलय कालीन अग्निशिखा से बडा- चडा और देवो के लिये भी दुर्निवार उस शूल को देखा !९!!
हे नारद् !! परशुराम के ऊपर वह शूल गिरा, जिससे भगवान् का स्मरण करते हुए परशुराम मूर्छित होगये !१०!!
परशुराम के गिर जाने के वाद समस्त देव गण व्याकुल होगये , उस समय युद्ध स्थल में ब्रह्मा विष्णु एंव महेश्वर भी आ गये!११ !!
नारायण की आज्ञा से महाज्ञानी शिव ने अपने महाज्ञान द्वारा लीला पूर्वक परशुराम जी को जीवित कर दिया ! १२ !! इति !
- ब्रह्मवैवर्त पुराण (सत्य प्रत)

इसके बाद शिवजी ने दोनों को आशिर्वाद देकर यह युद्ध रोक दिया। इस युद्ध के बाद सहस्त्रबाहु जी ने अपने जेष्ठ पुत्र जयध्वज का राजतिलक करने के पश्चात सन्यास धारण कर शिवजी के साथ महेश्वर स्थित शिवलिंग में विलीन हो गए। जिसे राजराजेश्वर लिंग के नाम से जाना जाता है। आज भी महेश्वर में दीपप्रिय सहस्त्रबाहु जी के राजराजेश्वर मंदिर में ११ अखंड नंददीप प्रज्वलित है। यह राजराजेश्वर शिवलिंग आज करोडो लोगों की आस्था का केंद्र है।

*महाराज कार्तवीर्य अर्जुन को श्री भगवान् दत्तात्रेय का दर्शन*

                   *श्री मार्कंडेय पुराण अध्याय"१८*

*यदि देव प्रसंन्त्वं तत्प्रयाच्छाधि मुक्त माम।*

*यथा प्रजा पाल्यायेम न चा धर्मं मवाप्नुयाम।।*

*परानुस्मरण ज्ञान म प्रति द्वन्दतांरणे।*

*सहस्त्रमाप्तु भिच्छामि बाहुना लघुता गुणाम ।।*

*असँगा गतय: सन्तु शौला काशम्बु मूमिसु।*

*पातालेषु    च सर्वेषु वधश्चाप्याधि कान्नरात।।*

*तथा माग प्रवृ तस्य सन्तु सन्मार्ग देशिवा :।*

*संतुमें तिथय -शलाघ्य  वित्तवान्य तथा क्षयं ।।*

*अन्स्ट द्रव्यता रास्ट्रे  मामनुस्मरणेन च ।*

*त्वयि भक्तिश्च देवाश्तु नित्यं मव्यभि चारणी ।।*
🙏🏻🌹🌹🌹🙏🏻

*ॐ हिंगुले परमहिंगुले अमृतरूपीणी तनुशक्ति मनः शिवे श्री हिंगुलाय नमः*
*जय कुलरक्षणी तिलदानी आपको सर्वदा शंत शंत नमन जय माँ हिंगलाज,,,*

*है कुलगुरु दत महाराज है कुलशेष्ठ महाराज,,*
*||जय जय गुरुदेव दत्त, जय श्री सहस्रार्जुन महाराज ||*

जब महाराज को ये वरदान मिले थे तो उनका भ्रमित होने का कोई चांस नही ओर इनके तो काफी मंत्र ओर तंत्र भी है कल एक प्रभु जन ने महाराज सहस्त्रार्जुन पर टिप्पणी करके दिल को अंदर तक झंझोड दिया इसलिए...
ये वो वरदान थे जी महाराज को गुरुशेष्ट से मिले...

यमाहुर्वाषु देवांश हैहय नां फुर्लात्कम।

      हैहया नामी धिपतिरर्जुन :क्षत्रियर्षम।।

भावार्थ :- महाराजा ययाति के यहाँ वासुदेव के अंश से हैहय नामक पुत्र हुआ। जिनके वंश में कार्तवीर्यार्जुन क्षत्रिय हुए है।
               श्री कार्तवीर्यार्जुन ने दस हजार वर्षो की कठिन तपस्या के पश्चात् श्री भगवान् दत्तात्रेय से दस १०, वरदान प्राप्त किये, वे वरदान निम्न प्रकार से है:-

१-ऐश्वर्य शक्ति प्रजा पालन के योग्य हो, किन्तु अधर्म न बन जावे।
२- दूसरो के मन की बात जानने का ज्ञान हो।
३- युद्ध में कोई समानता न कर सके।
४- युद्ध के समय सस्त्र भुजाएं प्राप्त हो, उनका तनिक भी भार न लगे।
५-पर्वत, आकाश, जल, पृथ्वी और पाताल में अव्याहत गति हो।
६-मेरी मृत्यु अधिक श्रेष्ठ के हाथो से हो ओर जीवित सशरीर मे अपने आराध्य देव भोलेनाथ मे समा जाऊ..।
७-कुमार्ग में प्रवृत्ति होने पर सन्मार्ग का उपदेश प्राप्त हो।
८-श्रेष्ठ अतिथि नी निरंतर प्राप्ति होती रहे।
९-निरंतर दान से धन न घटे।
१०-स्मरण मात्र से धन का आभाव दूर हो जाये एवं भक्ति बनी रहे।,,,

श्री राजराजेश्वर कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु जी सात चक्रवर्ती राजाओं में से एक है। इस पृथ्वीपर सबसे अधिक सालो तक धर्म और न्याय से राज उन्हीका माना गया है। ऐसे योगिराज सहस्त्रबाहु जी की बदनामी और उनके बारे में भ्रामक झूठी कहानियां झूठी पुस्तिका, सीरियल और फिल्मो के माध्यम से फैलाने का काम कुछ अधर्मी धर्मभ्रष्ट लोग कर रहे है। ..खैर आपकी कलम है कुछ भी लिख सकते है ओर पहले भी कुछ इतिहास ओर चापलूसो ने महाराज सहस्त्रार्जुन को विलेन तो बना ही दिया है शास्त्रो मे फेर बदल कर ओर भी कई बात है जिनसे प्रर्दा उठना बाकी है क्योंकि मौज अगर लेनी है तो खोज करनी पडेगी ध्यान लगाना पडेगा. यही सत्य है...
ओर हमे गर्व है कि हम इनके वशंज है....


जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधेकृष्णा अलख आदेश..
🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻

Friday, July 21, 2017

बाबा पंचमुखी हनुमान जी.

सनातनी मान्यता के अनुशार बाबा पंचमुखी हनुमान का अवतार भक्तों का कल्याण करने के लिए
हुआ हैं।
बाबा हनुमान जी के पांच मुख क्रमश:पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और ऊ‌र्ध्व दिशा में प्रतिष्ठित हैं।

बाबा पंचमुखी हनुमानजी का अवतार मार्गशीर्ष कृष्णाष्टमी को माना जाता हैं।
बाबा के रुद्र अवतार को बाबा हनुमान जी ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं।
इसकी आराधना से बल, कीर्ति, आरोग्य और निर्भीकता बढती है।
रामायण के अनुसार बाबा हनुमान जी का विराट स्वरूप पांच मुख पांच दिशाओं में हैं।
हर रूप एक मुख वाला, त्रिनेत्रधारी यानि तीन आंखों और दो भुजाओं वाला है। यह पांच मुख बाबा नरसिंह जी बाबा गरुड जी प्रभु अश्वराज जी ओर , लाल लंगोटी वाले वानर रुप मे और वराह रूप है।
बाबा हनुमानजी के पांच मुख क्रमश:पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और ऊ‌र्ध्व दिशा में प्रतिष्ठित माने गएं हैं।
बाबा पंचमुख हनुमान के पूर्व की ओर का बाबा का मुख वानर का हैं।
जिसकी प्रभा करोडों सूर्यो के तेज समान हैं। पूर्व मुख वाले बाबा हनुमान जी का पूजन करने से समस्त शत्रुओं का नाश हो जाता है।

पश्चिम दिशा वाला बाबा का मुख गरुड भगवान का हैं।
जो भक्तिप्रद, संकट, विघ्न-बाधा निवारक माने जाते हैं।

गरुड भगवान की तरह बाबा हनुमानजी भी अजर-अमर माने जाते हैं।
कई जगह उल्लेख यही मिलते है,

पर हमारा मानना कुछ अलग है,
प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नही होती
माने क्या जाते है वो शाश्वत अटल सत्य है,
जिसके प्रमाण हम स्वयंम है,,

बाबा हनुमानजी का उत्तर की ओर मुख शूकर (वराह)भगवान का है।
इनकी आराधना करने से अपार धन-सम्पत्ति,ऐश्वर्य, यश, दिर्धायु प्रदान करने वाल व उत्तम स्वास्थ्य देने में समर्थ हैं। है।

बाबा हनुमानजी का दक्षिणमुखी स्वरूप भगवान नृसिंह का है।
जो भक्तों के भय, चिंता, परेशानी को दूर करता हैं।

बाबा हनुमान का ऊ‌र्ध्वमुख घोडे के समान हैं।
बाबा हनुमानजी का यह स्वरुप प्रभु श्री ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर प्रकट हुआ था।
मान्यता है कि हयग्रीवदैत्य का संहार करने के लिए वे अवतरित हुए।
कष्ट में पडे भक्तों को वे शरण देते हैं। ऐसे पांच मुंह वाले रुद्र रुप कहलाने वाले बाबा हनुमान जी बडे कृपालु और दयालु हैं।

हनुमतमहाकाव्य में

बाबा पंचमुखीहनुमान के बारे में एक कथा हैं।

एक बार पांच मुंह वाला एक भयानक राक्षस प्रकट हुआ। उसने तपस्या करके प्रभु श्री ब्रह्माजीसे वरदान पाया कि मेरे रूप जैसा ही कोई व्यक्ति मुझे मार सके।
ऐसा वरदान प्राप्त करके वह समग्र लोक में भयंकर उत्पात मचाने लगा। सभी देवताओं ने भगवान से इस कष्ट से छुटकारा मिलने की प्रार्थना की। तब प्रभु की आज्ञा पाकर बाबा हनुमानजी ने वानर, नरसिंह, गरुड, अश्व और शूकर(वराह) का पंचमुखी स्वरूप धारण किया।
इस लिये एसी मान्यता है कि बाबा पंचमुखीहनुमान जी की पूजा-अर्चना से सभी देवताओं की उपासना के समान फल मिलता है।
बाबा हनुमान जी के पांचों मुखों में तीन-तीन सुंदर आंखें आध्यात्मिक, आधिदैविक तथा आधिभौतिक तीनों तापों को छुडाने वाली हैं। ये मनुष्य के सभी विकारों को दूर करने वाले माने जाते हैं।

भक्त को शत्रुओं का नाश करने वाले बाबा हनुमानजी का हमेशा स्मरण करना चाहिए।
विद्वानो के मत से बाबा पंचमुखी हनुमानजी की उपासना से जाने-अनजाने किए गए सभी बुरे कर्म एवं चिंतन के दोषों से मुक्ति प्रदान करने वाला हैं।
पांच मुख वाले बाबा हनुमानजी की प्रतिमा धार्मिक और तंत्र शास्त्रों में भी बहुत ही चमत्कारिक फलदायी मानी गई है,
रात्रि बारह बजे तंत्र पुजा अति उतम मानी गयी है जो इनकी पीठ पीछे होती है.
ओर मैन फल का प्रयोग इनकी तंत्र पुजा मे भी होता है हमारे परम पूज्य गुरुदेव बरदा बा ओघडबाबा के अनुसार रात्रि की पुजा अति उतम मानी गयी है क्योंकि बाबा इस समय प्रभु श्री राम जी की सेवा से बाबा हनुमान जी मुक्त होते है तो अति उतम फलदायी माना गया है..
हे क्षमता वान, हे धैर्यवान, हे वीर बाबा हनुमान
हे सकल गुण निधान, हे हमारे भगवान....
आप का ही गुणगान करूँ, आपकी ही भक्ति करूँ
दिन- रात करूँ , सुबह -श्याम करूँ
ओ हमारे बाबा लाल लंगोटा वाले वो हाथ मे सोटा वाले,
कृपा करो नादान बालक पर हरो सभी से साथ कष्ट हमारे भी,

.....

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधेकृष्णा अलख आदेश...

जरा कमेन्टस बाबा से बचकर

यहाँ ब्लाँग मे कई संत अपना प्रचार करने आ सकते है जो आपको भ्रमित कर सकते है तो उनसे संभलकर रहे

यहाँ आपको ऐसे संतो के कमेन्ट भी मिल सकते है जो स्वयंम सिद्ध समझ सकते है पर आपको आर्थिक नुकसान पुहचा सकते है अंत सावधान रहे यहाँ सारी साम्रग्री हमने किसी से पूछ कर या सलाह लेकर नही लिखी है उसमे सलाह हमने हमारे गुरुदेव के अलावा पैसे के भुखे बंदे नही दे सकते आप सभी मंत्रो को सिद्ध या उच्चारण कर सकते है अपने गुरुदेव की आग्या लेकर या माँ से आग्या लेकर इष्टदेव को साक्षी मानकर ...बाकी आपका विश्वास आपकी सोच....
जय माँ जय बाबा महाकाल

Sunday, July 9, 2017

दिल्ली के ठगो से सावधान

कुछ लोगो की फ़ितरत ही इतनी गंदी मानसिकता वाली होती है कि अपने आपको भगवान समझने लगते है..
मुंह पर कुछ ओर पीठ पीछे कुछ ओरतो को खिलौना समझते है की ये पावं की जूती है..
अपने पैसे ओर रुतबे पर घमण्ड करना उनका शोक होता है ओर आध्यात्मिक मे अपने आपको गुरु साबित करने मे लगे रहते जबकि आध्यात्मिक के पथ पर कैसे चला जाये उनको पता ही नही होता जिनमे गुरु तत्व का नामो निशान नही वो गुरु बने हुये है ओर बोली तो इतनी मीठी है की कागा (कोऔ) भी शरमा जाये ओर भोकना लगे तो कुता... भी शर्म के मारे आत्महत्या कर ले..
उनका कार्य यही होता है कि किसे किसको लपेटा जाये ओर अपना कार्य निकाला जाये.. ओर या तो नारीशक्ति को अपना चेली बनाया जाया या उनका अपमान कैसे किया जाये जो अपनी बात नही मानते.. अरे जिसके गुरु का पता नही वो क्या अपने आप मे गुरु तत्व को उत्पन कर पायेगा ये वो व्यवसायिक गुरु होतेैहै जो आध्यात्मिक का आडम्बर घारण करके टीम बनाकर लोगो को लूटना उनका प्रथिमकता होती है जो जितना इनकी इज्जत करता है या आदर देता है ये देखते है हम बडे है जब तक इनको इनकी असलियत ना बतायी जाये तब तक ये सही रास्ते नही आते,,
इनका काम ही यही होता है झूठ बोलो झट बोलो ओर जोर से बोलो ताकि अगला हमेशा दबा रहे.. लेकिन आज वो वक्त नही है कि आप इनका विश्वास करे ये अपना काम निकालने के लिए दूसरो का कंधा इस्तेमाल करते है तो आप सभी से निवेदन है कि आजकल ऐसे ठग ओर इंसानी नूमा शक्ल के कुतो से जरा बच कर रहे जो अपनो का ना हो सका वो आपका क्या होगी.. जिंदगी भर जिसने झूठ का आवरण अपने तन पर मला हो उसको आइना दिखाओ तो भडकेगा ही जिनकी असलियत मे इज्जत दो कौडी की नही होेती है यही सत्य है....

खैर आप सभी को ऐसे कुते के बीजो से दुर रहने की हमारी सलाह है जो गुरु ओघड ओघरी बने हुये है जिनके गुरु का पता नही ...गुड खाते है पर गुलगुला से परहेज है इनको बस इनका हाँ मे हाँ मिलाओ ये खुश इनकी विपरीत मत जाओ या इनको आइना मत दिखाओ बस... पैसे दो साधना लो... यही इनका असली चेहरा है.. अपनी विन्रमता को कायरता का रुप ना दे ऐसे ढोगीं पाखण्डीयो को मुंह तोड जवाब दे यही आप सभी के लिये अच्छा होगा कोयले से हाथ काले ही होते है यही सत्य है ओर कुछ नही.. माँ बाबा इनका वक्त अच्छा चलाये ओर सही राह दिखाये..



*आपको सभी को गुरु पूर्णिमा की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ ओर सदा वंदनीय गुरुजनो को शंत शंत दण्डवत प्रणाम जिनमे गुरु तत्व मौजूद हो उनको शंत शंत नमन ..*

*बाकी सभी को सद्धगुरु के दर्शन हो ओर मिले यही हमारी कामना है ओर प्रार्थना है माँ बाबा सही निर्मल मन वालो को आध्यात्मिक के मार्ग मे नये आयाम दे यही हमारी कामना ओर प्रार्थना है बाकी दोगलो को उनकी असलियत का ग्यान कराये ओर सद्धबुद्धि प्रदान कराये..*

*🌹ॐ गुरुदेवाये नमः.. ,🌹*

प्रणाम आप सभी पूजनीयो को... .

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻

बाबा हनुमान जी चालीसा

श्री हनुमान चालीसा हिंदी में अनुवाद सहित  ॐ हं हनमंते रूद्रात्मकाय हुं फट्  इस मंत्र का चालीसा शुरू करने ओर पुणेयता पर जपना चाहिए,   दोहा श्...

DMCA.com Protection Status