Friday, December 15, 2017

सोमवार 18/12/2017,को है सोमवती अमावस्या क्या करे क्या ना करे

18/12/2017 को है सोमवती अमावस्या क्या करे क्या ना करे देखे एक कथा ओर एक विधान,

सोमवती अमावस्या की प्रचलित कथा

एक गरीब ब्राह्मण परिवार था। उस परिवार में पति-पत्नी के अलावा एक पुत्री भी थी। वह पुत्री धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। उस पुत्री में समय और बढ़ती उम्र के साथ सभी स्त्रियोचित गुणों का विकास हो रहा था। वह लड़की सुंदर, संस्कारवान एवं गुणवान थी। किंतु गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था।
एक दिन उस ब्राह्मण के घर एक साधु महाराज पधारें। वो उस कन्या के सेवाभाव से काफी प्रसन्न हुए। कन्या को लंबी आयु का आशीर्वाद देते हुए साधु ने कहा कि इस कन्या के हथेली में विवाह योग्य रेखा नहीं है।
तब ब्राह्मण दम्पति ने साधु से उपाय पूछा, कि कन्या ऐसा क्या करें कि उसके हाथ में विवाह योग बन जाए। साधु ने कुछ देर विचार करने के बाद अपनी अंतर्दृष्टि से ध्यान करके बताया कि कुछ दूरी पर एक गांव में सोना नाम की धोबिन जाति की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है, जो बहुत ही आचार-विचार और संस्कार संपन्न तथा पति परायण है।
यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिंदूर लगा दें, उसके बाद इस कन्या का विवाह हो तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट सकता है। साधु ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती-जाती नहीं है।
यह बात सुनकर ब्राह्मणी ने अपनी बेटी से धोबिन की सेवा करने की बात कही। अगल दिन कन्या प्रात: काल ही उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर, साफ-सफाई और अन्य सारे करके अपने घर वापस आ जाती।
एक दिन सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि- तुम तो सुबह ही उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता।
बहू ने कहा- मां जी, मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम खुद ही खत्म कर लेती हैं। मैं तो देर से उठती हूं। इस पर दोनों सास-बहू निगरानी करने लगी कि कौन है जो सुबह ही घर का सारा काम करके चला जाता है।
कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक कन्या मुंह अंधेरे घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है। जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी, पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं?
तब कन्या ने साधु द्बारा कही गई सारी बात बताई। सोना धोबिन पति परायण थी, उसमें तेज था। वह तैयार हो गई। सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे। उसने अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने को कहा।
सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर उस कन्या की मांग में लगाया, उसका पति मर गया। उसे इस बात का पता चल गया। वह घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भंवरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी।
उस दिन सोमवती अमावस्या थी। ब्राह्मण के घर मिले पूए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकडों से 108 बार भंवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया। ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में वापस जान आ गई। धोबिन का पति वापस जीवित हो उठा।
इसीलिए सोमवती अमावस्या के दिन से शुरू करके जो व्यक्ति हर अमावस्या के दिन भंवरी देता है, उसके सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। पीपल के पेड़ में सभी देवों का वास होता है। अतः जो व्यक्ति हर अमावस्या को न कर सके, वह सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन 108 वस्तुओं कि भंवरी देकर सोना धोबिन और गौरी-गणेश का पूजन करता है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
ऐसी प्रचलित परंपरा है कि पहली सोमवती अमावस्या के दिन धान, पान, हल्दी, सिंदूर और सुपाड़ी की भंवरी दी जाती है। उसके बाद की सोमवती अमावस्या को अपने सामर्थ्य के हिसाब से फल, मिठाई, सुहाग सामग्री, खाने की सामग्री इत्यादि की भंवरी दी जाती है और फिर भंवरी पर चढाया गया सामान किसी सुपात्र ब्राह्मण, ननंद या भांजे को दिया जा सकता है।

Thursday, December 14, 2017

गुरु कृपा ओर इष्ट कृपा होती है क्या

आध्यात्मिक मे जब तक आप अपने इष्ट ओर गुरु कृपा से पुणे मंत्र विधान ओर क्रिया ना कर लो
मणिकणिका घाट
जब तक किसी का आश्वासन ना दे ना किसी की क्रिया का काट करे क्योंकि गुरु मंत्र आपका बह्मास्त्रा हो सकता है पर परिवार वालो का नही ये शक्तियां अच्छी भी होती है बुरी भी इसलिए आध्यात्मिक या तंत्र मे अगर आप सांसारिक ओर आध्यात्मिक मे जी रहे है तो दो चीजो का आप हमेशा ध्यान रखे पहली अपनी ओर अपनो की सुरक्षा दुसरी अपने घर बार की सुरक्षा अगर गुरु पदाति से कुछ क्रिया या मंत्र मिला हो तो उसका मानसिक जप ओर क्रिया कम से कम महीने मे एक बार अपने घर ओर कारोबारी वाली जगह पर होनी चाहिए या जब तक पहले अपने भौतिक जीवन की सारी सुविधा को पुणे कीजिये फिर आध्यात्मिक मे पुरी तरह से आ जाये ओर जितना सुरक्षा मंत्र ओर गुरु मंत्र का जाप ओर अनुसरण जितना हो सके करे उतना ही अच्छा है बाकी गुगल गुरु कई मिलेगे पर एक से बढकर एक भविष्यवक्ता पर गुरु ग्यान ओर क्रिया कही से नही मिलेगी यही सत्य है,,
भविष्य वाणी जिसकी फेल हो जाये ओर साल दो साल मे जो भविष्यवक्ता हो ,तो कहना ही क्या जो आजकल कई भविष्यवक्ताओ को हम फेसबुक ओर वाटसअप पर देख चूके है कई बंदे ने सौ से ज्यादा भविष्यवाणीयाँ  की होगी पर जिसमे मे से मौसम की जानकारी जी टीवी न्यूज मे होती है वो ही सत्य साबित हुयी इसके अलावा अपनी पोस्ट को जो भविष्यवाणी फेल होते ही खुद रिमुव करते उनका तो कहना ही क्या गुरु कृपा ओर गुरु भक्ति मे रात दिन का फर्क है जो गुरु भक्ति को समझा वो ही शिष्य जो प्रचार मे रहा ओर जो शिष्य नही माने उनको भी गुरु कहे उनका तो क्या कहना बाकी जय हो गूगल ओर वाटसअप गुरुजनो की हम तो आप सभी से इतना ही कहना चाहते है कि बिना सोचे समझे कोई कार्य ना करे अच्छा है वो ही आपके हित मे तंत्र ओर आध्यात्मिक भक्ति उपासना सिद्धि तंत्र क्रिया एक नंगी तलवार है ओर उस पर चलना ना चलना ये आपकी इच्छा है ओर अच्छा करना बुरा करना आपके ऊपर है भुगतान यही करके जाना है भुगत कर या भुगता कर यही सच है नही किया तो कर के देखो साधक पर जिन शक्तियो की कृपा होती है वो शक्तियां उसके ओर उसके परिवार की उसको मानने वालो को जीवन भर रक्षा करती है पर उसमे भी गुरु इष्ट योग क्रिया उतम कार्य करती है यही आध्यात्मिक का पुणे सत्य है गृहस्थ साधक को शाक्त को शक्ति से उर्जा मिलती है अब उस उर्जा का प्रयोग कहाँ करता है ये शाक्त ही अच्छी तरह कर सकता है पर नारी से दुर बुरे विचारो से दुर इन सभी को अपनो से दुर करने यही साधक की निशानी है बाकी जैसा आपको समझ मे आये करे आगे माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से ॐ नमो सिद्धाये,,

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
🌹🙏🏻🌹

Sunday, December 3, 2017

आज गुरु दत्तात्रेय जयंती

गुरु दत्तात्रेय जयंती

गुरु दत्तात्रेय का जन्म दिवस मार्गशीर्ष की पूर्णिमा जो आज है अतः आज मनाया जा रहा है यह उत्सव महाराष्ट्र में खासतौर से मनाया जाता है
हिन्दुधर्म में तीन देव  भगवान ब्रह्मा विष्णु महेश का सबसे उच्च स्थान है भगवान दत्तात्रेय का रूप इन तीनो देवो के रूप में मिलकर बना है
भगवान दत्तात्रेय सप्त ऋषि अत्रि एविम माता अनुसुइया के पुत्र है माता अनुसुईया एक पतिव्रता नारी थी इन्होंने ब्रह्मा विष्णु महेश के समान बल वाले पुत्र के लिए कठिन तपस्या की थी उनकी कठिन साधना के कारण तीनो देव इनकी प्रशंसा करते थे जिस कारण तीनो देवियो को माता अनुसुईया से ईर्ष्या होनी लगी तब तीनो देवियो के कहने पर त्रिदेव माता अनुसुईया की परीक्षा लेने आश्रम पहुंचे । तीनो देव रूप बदल कर अनुसुईया के पास पहुचे और भोजन कराने को कहा माता ने हां बोल दिया लेकिन तीनो ने कहा कि भोजन तभी ग्रहण करेंगे जब वे निर्वस्त्र हो कर शुद्धता से उन्हें भोजन परसेंगी माता ने कुछ विचार कर हामी भर दी

https://pukhrajmewaraasind7.blogspot.in/2017/12/blog-post_57.html?m=0

माता ने मंत्र उच्चारण कर तीनो त्रिदेवो को तीन छोट छोटे बच्चों में परिवर्तित कर दिया और तीनों को बिना वस्त्र के स्तनपान कराया
जब ऋषि अत्रि आश्रम आये तो माता अनुसुईया ने सारी बात विस्तार से रख्खी जिसे ऋषि अत्रि पहले से जानते थे ऋषि अत्रि ने मंत्रो के द्वारा तीनो देवो को एक रूप में परिवर्तित कर एक बालक का रूप दे दिया जिसके तीन मुख एवं छः हाथ थे अपने पति को इस रूप में देख तीनो देवियो पछतावा होता है और ऋषि अत्रि एवं माता अनुसुईया से छमा मांग अपने पतियों को वापस देने का आग्रह करती है ऋषि अत्रि तीनो देवो को उनका मूर्त रूप दे देते है लेकिन तीनो देवो ने अपने आशीर्वाद के द्वारा दत्तात्रेय भगवान को बनाते है जो तीनों देवो का रूप कहलाते है इस प्रकार माता अनुसुईया परीक्षा में सफल हुई और उन्हें तीनो देवो के समान के पुत्र की प्राप्ति हुई

Thursday, November 23, 2017

मित्रो हमारा न्यू ब्लॉग विजिट जरूर करे वशीकरण सुरक्षा तंत्र मंत्र यंत्र के लिए


मोती शंख के चमत्कारी उपाय जानने के लिये किल्क करे,,

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मित्रो किसी कारण वंश इस ब्लाँग पर पोस्ट नही कर रहे है हमारे नये ब्लाँग पर हम तंत्र मंत्र यंत्र यक्षिणी पश्चिनी या वशीकरण सुरक्षा हेत अन्य मंत्रो की जानकारी के लिय विजिट करे.. हमारे न्यू ब्लाँग पर..

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Friday, November 10, 2017

आज भैरव अष्टमी है ओर पुष्य नक्षत्र भी है




भैरव बाबा को आज के दिन मोतीचूर के लड्डू चढाये या सरसो के तेल मे बाबा को उडद के बने पकोडे दही के साथ चढाये ओर कुतो को मोतीचूर के लड्डू खिलाये भैरव नाथ का मंदिर नही हो तो प्रभु श्री गणेश जी को मोतीचूर के लड्डू बाबा के नाम से चढा सकते है ओर पाँच लड्डू कुतो को खिला दिजिये ओर हो सके तो आज के दिन उपवास या व्रत रखे ओर चालीसा या नामवली का पाठ करे सायः कालीन मे...
इस से राहु की शांति भी होगी ओर आज पुष्य नक्षत्र भी है तो ऐसे सयोग बार बार नही मिला करते आगे आप की इच्छा..
जय माँ जय बाबा महाकाल  की...

Thursday, November 9, 2017

सौ रोगो की एक दवा

*शतावरी,,,,*


सौ रोगों को हरने वाली *शतावरी,,,*
आज हम आपको एक झाड़ीनुमा लता के बारे में बताते है ,
जिसमें फूल मंजरियों में एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं और फल मटर के समान पकने पर लाल रंग के होते हैं ..नाम है *"शतावरी"* ..I
आपने विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों में इसके प्रयोग को अवश्य ही जाना होगा ..अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं, इसके प्रयोग को ..!
आयुर्वेद के आचार्यों के अनुसार , शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीर को रोगों से लड़ने क़ी क्षमता प्रदान करता है ...I
इसे शुक्रजनन,शीतल ,मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है I महर्षि चरक ने भी शतावर को बल्य और वयः स्थापक ( चिर यौवन को बरकार रखने वाला) माना है.I आधुनिक शोध भी शतावरी क़ी जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं I
इसका औषधीय प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में करना अत्यंत लाभकारी होगा ...!!
यदि आप नींद न आने क़ी समस्या से परेशान हैं तो बस शतावरी क़ी जड़ को खीर के रूप में पका लें और थोड़ा गाय का घी डालें ,इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पायेंगे ..!
-शतावरी क़ी ताज़ी जड़ को यवकूट करें ,इसका स्वरस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें,हो गया मालिश का तेल तैयार ...इसे माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगायें और लाभ देखें I
-यदि रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण - 1.5 ग्राम ,वासा के पत्ते का स्वरस 2.5 मिली ,मिश्री के साथ लें और लाभ देखें I
-प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने क़ी समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण -पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है ..!
-यदि पुरुष यौन शिथिलता से परेशान हो तो शतावरी पाक या केवल इसके चूर्ण को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है I
-यदि रोगी को मूत्र या मूत्रवह संस्थान से सम्बंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है I
-शतावरी के पत्तियों का कल्क बनाकर घाव पर लगाने से भी घाव भर जाता है ...!
-यदि रोगी स्वप्न दोष से पीड़ित हो तो शतावरी मूल का चूर्ण -2.5 ग्राम ,मिश्री -2.5 ग्राम को एक साथ मिलाकर ...पांच ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह ,प्री -मेच्युर -इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष ) में लाभ मिलता है I
-गाँव के लोग इसकी जड़ का प्रयोग गाय या भैंसों को खिलाते हैं, तो उनकी दूध न आने क़ी समस्या में लाभ मिलता पाया गया है ...अतः इसके ऐसे ही प्रभाव प्रसूता स्त्रियों में भी देखे गए हैं I
-शतावरी के जड के चूर्ण को पांच से दस ग्राम क़ी मात्रा में दूध से नियमित से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है !
-वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का प्रयोग या इनके क्वाथ का सेवन ज्वर (बुखार ) से मुक्ति प्रदान करता है ..I
-शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन ,दर्द एवं अन्य पित्त से सम्बंधित बीमारीयों में लाभ मिलता है ...I
.. शतावरी हिमतिक्ता स्वादीगुर्वीरसायनीसुस्निग्ध शुक्रलाबल्यास्तन्य मेदोs ग्निपुष्टिदा ..!! चक्षु स्यागत पित्रास्य,गुल्मातिसारशोथजित...उदधृत किया है ..तो शतावरी एक बुद्धिवर्धक,अग्निवर्धक,शुक्र दौर्बल्य को दूर करनेवाली स्तन्यजनक औषधि है ...

Wednesday, November 8, 2017

जो भी कोल करे पहले अपना पुणे परिचय दे

जय माँ जय बाबा महाकाल दोस्तों

यहाँ से हमारे मोबाइल नं पर कोल किया जाता है कि आप ये जानते हो तो हमे बता दो ना अपना परिचय ना पता क्या साधना सिद्धि पेड पर लटकता हुआ फल है क्या जो आपने बताया ओर हमने तोड़कर दे देंगे इसलिये कोल करे हमारी परीक्षा लेने के लिए नही अपने आपका पुणे परिचय देकर बात करे 



फालतू बात करके आपका ओर हमारा टाइम वेस्ट ना करे क्योंकि यह ब्लॉग हमने सनातन धर्म की जानकारी देने के लिए ओर तंत्र मंत्र यंत्र की जानकारी देने के लिए बनाया है जब तक आप अपने बारे मे या किसी डॉक्टर के सामने ना होंगे ओर सही बात नही बता सकते तो वो डाँक्टर आपका इलाज नही कर सकता यही सत्य है कि जब तक अपने बारे मे जब तक सच नही बता सकते तो कोई आपका इलाज नही कर सकता है यही सत्य है..
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश 

Sunday, November 5, 2017

पहचाने अपने आपको ओर गुगल गुरुओ को..


आज हमारे एक परम आदरणिय बडे भाई ने एक ऐसी बात कही कि उसको झुठलाया नही जा सकता कि सब अपने आप मे बडे बनते जा रहे है पंथ या गुरुदीक्षा तक ही अपने आपको सीमित रखा है  उससे बाहर कोई जाना नही चाहाता सब अपने आपमे बडे दिखना चाहाते है भले ही उनको कोई वजूद ना हो सनातन धर्म मे सभी पंथ शेष्ट है यही सत्य है सभी अपने पंथो मे जीना चाहाते है पर सनातन धर्म को कोई नही जीना चाहता पता नही क्यू..अरे गुरु सभी के होते है बस उनको अपने आप मे जाग्रत करना है अगर गुरुतत्व आप मे जाग्रत होता है तो वो चाहे भौतिक हो या आध्यात्मिक आपको भटकने की राह पर नही ले जायेगा यही सत्य है मे मेरा गुरु शेष्ट यही आपकी भूल है यहाँ कोई पुणे नही ओर कोई अपुणे नही सभी एक दूसरे के पूरक है गुरु शब्द ही अपने आप मे बीज मंत्र है बाकी गूगल गुरु के चेले काफी है जिनको गुरु तत्व का बोध नही है पर वो गुरु है उनके कई चेले है जो बीच राह मे उनको छोड़कर चले जाते है क्यू.. कभी सोचा है इस बारे मे अपने आपको बडा दिखाने के चक्कर मे कही हीरा ना गंवा दो दोस्तो हमारा तो यही कहना है कि अगर किसी के बारे मे अगर कोई जानकारी नही रखते हो तो सत्य बोलने से परहेज ना करे वरना आप स्वयंम गुरुदोषी हो सकते हो यही सत्य है अपने आपको पहचाने ओर गुरु बनाने से पहले गुरुतत्व की पुणे जानकारी ले तो अच्छा है बाकी आपके ऊपर है कोई भी गुरु किसी पंथ या रास्ते को छोटा नही बतायेगा यही सत्य है..बाकी सभी आपके ऊपर है कि भौतिक ओर आध्यात्मिक का निर्वाह कैसे करे नादान बालक की कलम से आज बस इतना ही मनन करो पेट तो जानवर भी भर लेता है आप उस प्रभु अनमोल रचना है अपने आपको समझे यही सभी के लिए ठीक होगा...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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Wednesday, November 1, 2017

प्लीज रीड करे जरुर

जय माँ जय बाबा महाकाल दोस्तो

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गंगाजल में अमृत देखाई नहीं देता, सती का तेज देखाई नहीं देता, जति का सवरूप देखाई नहीं देता, पत्थर में भगवान् देखाई नहीं देता, ठीक उसी परकार शाबर मन्त्रों कि अदभूत शक्ति दिखाई नहीं देती। परन्तु प्रयोग कर और आज़मा कर देखिये - दुनिया को हिला कर रख दे ऐसी शक्ति इसमें समाई हुई है -
तन्त्र साधनाओं से संबंधित शाबर मन्त्रम,
चेतावनी-मेरे हर लेख का उद्देश्य केवल प्रस्तुत विषय से संबंधित जानकारी प्रदान करना है लेख को पढ़कर यदि कोई व्यक्ति किसी टोने-टोटके,गंडे,ताविज अथवा नक्स आदि का प्रयोग करता है और उसे लाभ नहीं होता या फिर किसी कारण वश हानि होती है,तो उसकी जिम्मेदारी हमारी कतई नहीं होगी,क्योकि हमारा उद्देश्य केवल विषय से परिचित कराना है। किसी गंभीर रोग अथवा उसके निदान की दशा में अपने योग्य विशेषज्ञ से अवश्य परामर्श ले। साधको को चेतावनी दी जाती है की वे बिना किसी योग्य व सफ़ल गुरु के निर्देशन के बिना साधनाए ना करे। अन्यथा प्राण हानि भी संभव है। यह केवल सुचना ही नहीं चेतावनी भी है। साधको को किसी भी प्रकार की (शारीरिक व मानसिक)हानि के लिए हम उत्तर दाई नहीं रहूंगा ।अत: सोच समझ कर साधनाए प्रारम्भ करे।। बाबा विश्वनाथ, भवानी अन्नपूर्णा, बिन्दुमाधव, मणिकर्णिका, भैरव, भागीरतेहे तथा दण्डपाणी मेरा सतत् कल्याण करें ॥

यह ब्लॉग वेबसाइट हमने अपनी इच्छा के अनुसार बनाया है इसमें जो भी सामग्री दी जा रही है

उसका सोच समझकर कर प्रयोग करे क्योंकि बिना गुरु ग्यान कभी किसी से नही मिलता बाकी जो भी करो सोचसमझकर करो अपने विवेक ओर सोच से करे बाकी गुरु के रहते हुये कोई समस्या आती है तो हमे अवागत कराये आपको पुणे सहयोग मिलेगा ओर  अगर कोई वनस्पति ओर कुछ आध्यात्मिक आइटम भी चाहिए तो बेझिझक हमे कह सकते है
प्रणाम सभी को जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश..
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गुरु नाम की महिमा को समझे की गुरु जरुरी क्यू है


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आजकल गुरु मिले या ना मिले पर साधना का महत्व चल निकाला है कोन गुरुमुखी है या नही है पर उनके शिष्यो की तादात भी अच्छी खासी होती है जिनके गुरु पंथ का पता नही होता कोई जगत पिता को गुरु मानकर चलता है तो कोई जगत गुरु को गुरु मानकर चलता है जैसे वो इनको पुणे मंत्रोभेषक या पुणे संस्कार से या ऊर्जा शक्तिपात से दीक्षित कर के गये हो ओर कोई इनसे सलाह भी ले ले तो उनको राह तो बतायी जायेगी पर इष्टमंत्रोक्ति राह नही जो स्वयंम ने अपनायी है या उनकी पहुच मे होंगे तो स्वयंम दिक्षा दे देंगे जबिक दिक्षा के संस्कार कितने होते है उनको कोन झेलता है यह भी नही पता होता.. पर गुरु कोई बूरा भी नही होता गुरु पाखंडी गुरु पागल गुरु लोभी गुरु कामी हो सकता है पर गुरु निन्दा या पर गुरु निन्दा का चलन जैसे चल निकला हो सुनी सुनायी बाते तो गलत है सकती है पर आँखो दिखी बात भी कभी कभी गलत हो सकती है गुरु कुछ मंत्र या साधना देता है तो पुणे श्रद्धा ओर आस्था के साथ उनको करना चाहिए ओर आपकी गुरु की निंदा हो रही हो चाहे आप उनको गुरु तूल्य मानते हो या वो कई शिष्य के गुरु हो तो वो निंदा आपको पाप का भागी भी बना सकती है पर गुरु निंदा या गुरु निदां गुरु मुखी के लिये नही होती है यही सत्य है बाकी ये दुनिया सतयुग से ही ऐसी ही चल रही है कुछ लोग टांग खीचने ओर नीचा दिखाने के लिये खडे होंगे ओर कुछ छल कपट डट से झूठ बोलने मे महारत हासिल करेगे यही सत्य है इसलिए गुरु चाहे अनपढ हो पर वो आपका गुरु होता है उसकी वाणी ही आपके लिये देव वाणी होती है अक्सर देखा जाता है कि बाहर लोग आवरण बना लेते है कि मे शरीफ एकदम शांत ओर मातृशक्ति का आदर करने वाला पर रियल जिंदगी उनकी ऐसी नही होती क्योंकि वो अपने घरो मे या बाहर मातृशक्ति को नीचा दिखाने से या अपमानित करने से चूकते नही है ओर हमारा तो यही कहना है की शब्दो के साथ आचरण का निर्वाह करोगे तो सफलता जरुर मिलेगी बाकी शब्द भी यही रह जायेगे ओर आध्यात्मिक सफलता कोसो दूर बुरी शक्तियां का समय होता है पर अच्छी शक्तियौ का जब उदय होता है तो उस प्रकाश पुंज के सामने बुरी शक्तियां का कोई महत्व नही रह जाता यही सत्य है बुरी ताकतो के साथ अच्छी ताकतो का भी जन्म हो जाता है बस आप अपने जीवन का उद्देश्य समझे कि यहाँ इस संसार मे आपके होने का क्या कारण अगर गृहस्थ मे है तो माता पिता ओर बच्चो की जिम्मेदारी से बडी साधना कुछ नही हो सकती अगर इस जिम्मेदारी से मुंह छिपा के जाते है तो आध्यात्मिक भी आपके काम का नही है यही सत्य है बाकी जैसा सोचा वैसा मन ओर जैसा मन वैसा तन यही सत्य है. बाकी माँ बाबा की इच्छा ओर उनकी कृपा आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से....

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश..
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Friday, October 27, 2017

संत ओर व्यापारी मे फर्क को समझे



आज कल हिन्दू धर्म के खिलाफ बोलने का एक चलन सा हो गया है चाहे वो कोई संत के रुप मे कोई व्यापारी हो चाहे वो कोई समुदाय विशेष से हो या हो वो नेता या अभिनेता ओर आजकल तो हिन्दू धर्म के बारे मे कार्ट भी तीज त्योहार के बारे मे फैसले सुना देते है जैसे भगवान से बढकर या धर्म से ये यह सब ऊपर  है नेता अभिनेता तो धर्म से भी आगे बनकर बोल जाते मंदिरो के चढावे से इनको कोई तकलीफ हो जाती है पता नही क्यू जैसे इनके घरो से मंदिर को चढावा जा रहा हो जैसे स्वर्गीय राजीव भाई दीक्षित के साथ जो झोला लेकर चलता था वो उनके नाम का सहारा लेकर योग के द्वारा लोगो के रोग मिटाने लगा जब योग से रोग मिट रहे थे तो दुकान खोलने की क्या जरुरत थी उसको ये आज तक समझ मे नही आया जब हिन्दूओ का साथ चाहिए था तो हिन्दूवादी बनकर मंदिर आदि कार्यक्रम मे हिस्सा लेने लगा जब मीडिया ने उसका खुलासा करना चाहा तो पैसे देकर मुंह बंद कर दिया मीडिया चूप पता नही क्यू ऐड दिया न्यूज चैनल पर ऐड आना शुरु हुये तो योग गुरु से बने व्यापारी के खिलाफ कोई आवाज नही क्योंकि पैसा बोलता है पर उसको किसने हक दिया कि वो हिन्दू देवी देवता को पत्थर बोले क्योंकि हिन्दूओ मे बोलने की हिम्मत नही है यही सत्य है कल कोई भी कुते की नस्ल का हिन्दू वादी बनकर आपके परिवार मे आपके बुर्जगो का अपमान करता है तो गुस्सा आता है तो क्या भगवान देवी देवता क्या है क्या वो आपके परिवार का हिस्सा नही है मंदिर पर चढावे मे जो रकम आप चढाते हो दानपात्र मे तो वो मंदिर के रख रखाव ओर अन्य धार्मिक कार्य मे खर्च होती है ओर इन जैसे व्यापारी कुते के बीज मंदिरो पर चढावे के विडियो भेजते है की मत चढावो अरे तेरे जेब से कितना दिया तूमने ओर तेरी क्या ओकात है जो तू पैसे चढा सकता है तू तो उस लायक ही नही की तुमको भगवान के वहाँ जाने दिया जाये वो तूमको मंदिर बुलाया कभी बात होती है कि शिवलिंग पर दुध मत चढावो एक दिन दुध उन पर हमने चढा दिया तो क्या गलत किया साल भार तुम्हारे पास है तो तूम भुखो का पेट भरो ना हमे भाषण देने की बजाय सबको हिन्दूओ के त्योहार ही दिखाये देते है ओर भी हिन्दुस्तान की जमी पर ओर कुछ नही बहुत हिन्दु है जो अपने ग्यान विग्यान से इनको बढावा देते है अगर यही रहा तो तुम्हारे घर मे क्या ओलाद पैदा होगी आने वाले समय मे यही आपके प्यारे लोग करेगे नेता अभिनेता ओर व्यापारी संत जिनको कोई धर्म मजहब नही है यही सत्य है पैसे के लिये ये मल मूत्र खाने पीने से भी नही डरेगे इसलिए आप सभी से अनुरोध है की ऐसे विडियो पोस्ट को शेयर करने की बजाय मुंह तोड जवाब दिया जाये वरना वो दिन दुर नही जब मंदिर मे जाने के लिये कोर्ट की परमिशन लेनी पड़गी यही अटल सत्य है मे मेरा यही रहेगा यही सत्य है अभी भी वक्त है सम्भल जाओ ऐसे धर्म के नाम व्यापार करने वाले व्यापारियों से दुर रहो ओर मुंह तोड जवाब दो यही आपके हित मे है ओर धर्म के हित मे है हमारा इशारा समझदारो के लिए काफी है आज सिर्फ इतना ही नादान बालक की कलम से...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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Wednesday, October 25, 2017

क्या काली मिर्च से तंत्र ओर काट हो सकता है..



एक सवाल आप सभी से क्या..
काली मिर्च से तंत्र हो सकता है..
अगर हाँ तो कैसे.
अगर काली मिर्च तंत्र का काट है तो कैसे..
अगर हा तो कैसे
 सभी को अपनी उम्र के हिसाब काली मिर्च के तीन गुणा या चार गुना या सात गुना ओर नमक की ढलयाँ पीसा हुआ नही.. जितनी आप की उम्र है उतनी ढलयी लेनी है.. जितनी उतने ग्राम सरसो का तेल लेना तीन को मिक्स करके फिर अपने सर पर एन्टी कोल्क वारना है जितनी आपकी उम्र हो एक बार ज्यादा.. ओर गाय के गोबर कन्डो पर उपलो पर इनको डाले दे जैसे किसी पर लट्ठ मारा हो इससे पहले अग्नि इतनी तेज जलानी है कि इनको डालने से बुझे ना ओर अग्नि जलाने से पहले उसमे थोडा घी जरुर डाले.. ये क्रिया अपने अपने गुरुदेव ओर इष्टदेव को याद करके करनी है..
काली मिर्च से तंत्र मारण मोहन की काट भी होती है  होती है ।
धुने /यज्ञ की भभूती या राख में काली मिर्च मिलाकर रात के समय पुरे घर बिखेर दिया जाता है ।फिर सुबह बुहारी से इकट्ठा करके बहते पानी या गड्ढा खोदकर गाड़ दिया जाता हे परिवार जन स्त्री या पुरुष वही कर सकता है बाहरी कोई नही ।
काली मिर्च से मारण मन्तरो में सरसों के तेल के साथ नीम की समिधामें या चिता में हवन किया जाता है।
और
कच्चा कलवा या कलवा को सिद्ध करने में बकरे के खून में सनी कालीमिर्च का प्रयोग सुना है।

ओर हो सके तो अपने घर के प्रत्येक सदस्य पर करना चाहो कर लो अच्छा ही रहेगा ये निर्देश हमे माँ बाबा की तरफ से मिले पर ये क्रिया आप अपने गुरुदेव ओर इष्टदेव को समर्पित करके करे कि वो ही आपको कष्टो से निजात दिलाये. .ओर जरुरी है आप सभी इसको करे हम जो जानकारी मिली वो हमने पोस्ट कर आगे आप सभी समझदार है नादान बालक की कलम से..


जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश

Thursday, October 19, 2017

आप सभी को दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ



*आज रूप चतुर्दशी है,आइये निखारें अपने व्यक्तित्व के रूप को। चेहरे तो ढल जाते हैं,* *व्यक्तित्व दिनों दिन निखरता है.*
*कल दीवाली है, स्वयं के साथ साथ किसी और परिवार की भी दीवाली शुभ हो सके ऐसा प्रयास करें*
*दीप जलते रहे मन से*
*मन मिलते रहे…*
*गिले सिकवे सारे मन से*
*निकलते रहे…*
*सारे विश्व मे सुख-शांति की*
*प्रभात ले आये…*
*ये दीपो का त्योहार खुशी की*
*सोंगात ले आये…*
*माँ अदि-शक्ति महाकाली आप के*
*में सुख,*
*सन्ति और समृद्धि प्रदान करे.*
*ओर....*
*व्यवहार घर का कलश और*
*इंसानियत  घर की तिजोरी कहलाती है।*
*मधुर वाणी घर की धन दौलत*
*और शांति घर की लक्ष्मी कहलाती है।*
*पैसा घर का मेहमान और*
*एकता  घर की ममता कहलाती है*
*व्यवस्था घर की शोभा और*
*समाधान ही घर का सच्चा सुख कहलाता है*
*रेगिस्तान भी हरे हो जाते है*
*जब "अपने" साथ "अपने" खड़े हो जाते है !*
*ओर ऐसे माँ बाबा को हमारा बारम्बार शंत शंत दण्डवत प्रणाम.*
*बाकी हम तो आईना है आईना ही रहेगे फ़िक्र तो वो करे जिनकी शक्ल में कुछ और दिल मे कुछ और है। आगे माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा*
*ओर माँ आदि शक्ति महाकाली को बारम्बार प्रणाम आप सभी को रूपचतुर्दशी यानी काली चौदस तथा दीवाली के पावन पर्व पर आपको और आपके परिवार को हमारे ओर हमारे परिवार की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं ओर उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं ।*

*जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश.....*
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Tuesday, October 17, 2017

बस धर्म की राह मत छोडो



*जय माँ जय बाबा की*
*आप सभी को धनतरेश ओर दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं*
आजकल कई संत है इन्टरनेट की दुनिया मे ओर बाबा लोग है किसी पर हम अपने विचार नही थोपते नीचे लिखते भी है माना तो आपकी इच्छा नही मानो तो बहुत अच्छा पर आकरण ही सबको उसको निशाना बनाया जाये जिनका किसी से कोई लेना देना नही है अगर किसी की निजी लाइफ के बारे मे जानते या किसी नाम का महत्व आपकी समझ मे नही आता तो क्यू किसी पर आरोप प्रत्यारोप करना हम नही कहते की हम दूध के धूले है या हम संत महाराज या साधु है ये बात हमने पहले भी कई बार कही है हम जैसे है वैसे ही रहेगे अरे आप तो संत हो आप तो ग्यानी महाराज बाबा हो आप तो अपने शब्दो को आचरण की तरह उतारो क्यू किसी को टारगेट करना या निशाना बनाना है हमारी लडाई सनातन के लिए है कि किसी व्यक्ति विशेष के लिये जो धर्म के प्रति आडम्बर धारी है या धर्म को आध्यात्मिक का चोला पहन कर बदनाम कर रहे है हमारी नजर मे वो गुनाहगार है हमारी सोच या विचार किसी का नजरिया बदल सके या बदले उसके लिए हम नही कहते बस हमारे लेख से एक हिन्दू जग जाये वो ही हमारे लिए काफी है हमने पहले भी कहाँ है कि इंसान कोई बूरा नही होता वक्त या समय बूरा होता है इन्टरनेट की दुनिया से बाहर आकर आप मिलो उनसे बिने मिले आप कैसे लूटा देते हो उन पर सब कुछ बाकी जो हम रियल जिंदगी मे है वो ही हमारी नेट की दुनियां मे है हमने कभी अपनी असलियत या पता नही छुपाया बाकी माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा है वो जिसको मिलना चाहाते है मिलायेगे जिसको दूर करना है करैगे सब उन पर निर्भर है आपकी ओर हमारी तो ओकात ही क्या हम उनके चरणो की धूल बन जाये वो ही काफी है किसी पर आरोप लगाने से पहले या अपनी निजी राय कायम करने से पहले अपने बारे मे जान लिजिये कि आप हो क्या जो दुसरो पर उंगली उठा रहो हो जिस पर उंगली उठा रहे हो उसके बारे मे जानते क्या है कि वो अपनी निजी लाइफ मे क्या करता है.. हमारी बातो को बूरा लगा हो तो माफी चाहते है पर पहले स्वयंम को उस लायक करो कि किसी पर उंगली उठा सको बाकी सनातन की राह दिखाये उतना अच्छा है पहल आप करोगे तो अच्छा लगेगा आदर सत्कार सनातन धर्म का हिस्सा है नारी को आप किस रुप मे देखते हो वो आपके ऊपर है कोई जबरदस्ती नही नारी तो आपके घर मे भी होगी... हमने एक बार सुना था की रखपत रखापत जैसा करोगे वैसा ही मिलेगा बाकी ये हम किसी को ये नही कहते की नारी को देवी बुलाये या नर को प्रभु..ये हमारी सोच है हम तक रहने दे किसी पर कोई जबरदस्ती नही है.. बाकी सब माँ बाबा के हाथ मे मानो अच्छा ना मानो बहुत अच्छा अपने धर्म के सच्चे सिपाही बनो वो ही सर्वश्रेष्ठ है बाकी कर्म आपके कुछ भी पर धर्म की राह मत छोडो बस खैर आज के दिन हम ये क्या लेके बैठ गयै.. आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से.. बुरा लगे तो माफी पसंद नही आये तो नजरअंदाज करे अच्छा लगे तो शेयर करे..

आप सभी ओर आप सभी के परिवार को धनतेरश की बहुत बहुत शुभकामनाएं..

*नजरे बदलो नजारे बदल जायेगे ..*
*बिना किसी को जाने कोई राय कायम मत करो..*
*किसी के शब्दो का मजाक उडाना अच्छा लगता है*
*बाकी समय की धारा किसको कहाँ ले*
*जाती है पता नही कल किसने देखा है*


जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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Monday, October 16, 2017

अपने आपको ओर अपने धर्म को समझने की कोशिश करे





आज कल हम जैसे लोग अगर कुछ बोलते है या कहते है तो कुछ समाज सुधारक या महात्मा उनको बोरिंग या मिथ्या भाषण या लेख भी कह सकते है कोई बडी बात नही पर जब तक आप अपने उदेश्य को नही समझ सकते तो जिंदगी को क्या समझोगे हम आप से यह नही कह कहते की आध्यात्मिक मे आओ ओर अपना सबकुछ त्याग दो .
हम यह भी नही कहते की ग्रहस्थ को त्याग कर या अपने घर मे क्लेश करके धर्म की स्थापना किजिये सबसे पहले आपको अपने घर को ओर घर वालो को अपने धर्म के बारे मे बताना होगा की कर्म के साथ धर्म जरुरी है जरुरी नही कि अपनी कमीयाँ दुनिया को बताई जाये पर जरुरी ये है कि अपनी कमीयाँ स्वयंम से कभी नही छुपायी जाये आपके पीछे आपको अनुभव मिलेगा तो आगे आपको जिंदगी जीने का सुनहरा अवसर हमने भी कई गलतियां की है ओर उन्ही से शायद हमे भी कई सबक मिले है हमे सांसारिक होने के साथ साथ व्याहरिक भी होना पडेगा कितोबो के साथ साथ जीवन के खट्टे मीठे अनुभवो से गुजरना भी पडेगा यही सत्य है धर्म के प्रति कट्टरता उदारता होना जरुरी है जितनी आपके परिवार के प्रति जिम्मेदारी बनती है उतनी ही आपकी जिम्मेदारी धर्म के प्रति भी बनती है किसी अपने के चेहरे पर वो मुस्कान ला सको या भेदभाव छुआछूत मान अपमान से परे रहकर आप किसी की मदद कर सको या धर्म का पाठ पढा सको तो उससे बडा आपके धर्म के प्रति कोई ओर योगदान नही हो सकता हम भी कोई साधु संत ओर महात्मा नही है हम भी साधारण नादान बालक ही है आज कल की भांड मीडिया ओर भांड राजनेता ही सनातन के असली दुश्मन है क्योंकि आपने जिनको शेर घोडा समझा था वो सब गंदगी खाने वाले निकले है इसलिए आप सभी का अपना अपना उदेश्य होना चाहिए जीवन मे आप अकेले आये थे यह सत्य है ओर आप अकेले ही जावोगे यह भी सत्य है फिर किसी ओर की राह पर क्यू अपनी जिंदगी की राह आप स्वयंंम चूनो वो ही सत्य है जब आपका जन्म लेना ओर आपका अकेले को ही मरना है तो जिंदगी अपने हिसाब ओर उसूलों पर क्यू नही दुनिया कुछ भी कहे बस आपको अपनी जिम्मेदारी समझते हुये लोगो के दिलो मे राज करना है जीना मुश्किल हो सकता है पर कठिन नही यही सत्य है
जिंदगी का मतलब समझोगे तब तक जिंदगी निकल चूकी होंगी मौत से सबको डर लगता है जबकि सब जानते है कि मौत अटल सत्य है उसको तो एक ना एक दिन आना है फिर भी उस झुठी जिंदगी मे अपने आपको ऊपर करने से इंसान चूकता नही पता नही क्यू.. अरे आपकी जिंदगी आपकी ही है जैसा जीना चाहो जीवो पर अपने धर्म के प्रति कुछ जिम्मेदारी निभाना सीख लो बससओर हम क्या कहे दुख तकलीफ होती है जब भाई ही भाई को नीचा दिखाता है पर उनको पता नही है कि जिंदगी ओर दौलत कब तक साथ देगी आज आपकी है तो कल किसी ओर की होगी पर नही
याद रखे वटवक्ष का पत्तीयाँ या टहनी टूटने से वटवक्ष नही सुखता वो सुखता है तो केवल जड़ को काटने से इसलिए आप सभी सनातन की जड़े है सोच समझकर अपनी जड़ो को सीचे अच्छा रहेगा मानो तो अच्छा नही मानो तो बहुत अच्छा हमारी बाते कुछ समाज के ठेकेदारो को कडवी लग सकती है पर क्या करे जो आज हो रहा है उसमे चूप नही रहा जा सकता आज उसकी बारी थी तो कल आपकी बारी भी आयेगी मुक दर्शक बनने से अच्छा है कि आप अभी से आवाज उठाना शुरु नही करेगे तो आप स्वयंम किस्से कहानियों के पात्र बनने से कोई रोक नही पायेगा यही सत्य है
सनातन धर्म मे आकाश से ऊचा पिता को दर्जा दिया गया है ओर धरती से भी बड़ा माँ को दर्जा दिया गया है वो माता पिता पति के हो या पत्नी के आदर सत्कार आप अपने धर्म ओर कर्म के अनुसार ही करे पर आजकल ये भी कुछ लोगो से नही होता पता नही क्यू जब तक लोग अपने माता पिता को नही समझ सकते तो धर्म को क्या संमझेगे जबकि उनको पता होता है कि ये समय उनको भी आयेगा पर पता नही सच्चाई से मुंह क्यू छिपाते है बहू को तकलीफ देते है पर बेटी की तकलीफ पर आसमान सर पर उठा लेते है क्यू भाई आपकी बहु भी तो किसकी की बेटी है बाकी दीपावली आ रही है बम्म फोडो फटाखे फोडो पर देवी देवता फोटो वाले बम्ब पटाखे इस बार ना खरीदे यही इस बारे आपके धर्म के प्रति जिम्मेदारी होगी ओर खरीदी वहाँ से करे जिससे आपकी वजह से किसी के घर मे चूल्हा जल सके बस आज सिर्फ इतना ही नादान बालक की कलम से मानना ना मानना आपके हाथ मे है *आप सभी को धनतेरस ओर दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं* अच्छा लगे तो शेयर करे बुरा लगे ओर आपका टाइम खराब हुआ पढने मे तो माफ करे बाकी नंजरअंदाज करे..

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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Sunday, October 15, 2017

क्या हिन्दूओ के सारे फैसले कोर्ट ही करेगी





जब इस देश में सारे फैसले कोर्ट को ही करने है जैसे कि:-
रोहिंग्या मुसलमान हिंदुस्तान में रहेंगे या नहीं रहेंगे,

कश्मीर में सेना पैलेट गन चलाएगी या कौनसा गन चलाएगी,

दिवाली पर पटाखे चलाएंगे या नहीं चलाएंगे,

मूर्ति विसर्जन होगा या कि नहीं होगा,

दही हांडी की ऊंचाई कितनी होगी,

राम मंदिर बनेगा या नहीं बनेगा,

हिन्दुओ को बच्चे कितने पैदा करने हे,

हिन्दुओ को कितनी शादी करनी हे,

तो फिर यह वोट डाल कर सरकार बनाने की क्या जरूरत है कोर्ट से ही पूछ लिया करो प्रधानमंत्री किसे बनाना है।
ओर प्रधानमंत्री मूक दर्शक बन कर बैठे है ओर एक दिल्ली के भांड ने तो यहाँ तक कह दिया की हिन्दू मुर्दे को लकडीयो से जलाना बंद करो...
ओर एक हिन्दू भांड जो अपना सारा कार्य हिन्दूओ से ही कराता है ओर उसका रोज रोटी ही हिन्दूओ से है वो हिन्दू देवी देवता को गालीयाँ बक सकता है काला पत्थर वैगरहा कह सकता है तो हम उसका ओर उसके सामना का बहिष्कार नही कर सकते क्यू ये समझ के बाहर है जबकि सनातन धर्म सबसे पुराना धर्म बाकी दूसरे धर्म कुछ शतको पहले के कमजोर ना बनो कायर ना बनो कोर्ट या प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री मंत्री या कोई भांड योगाचार्य आप से ऊपर नही है जज, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, भष्टाचारी हो सकते है पर आम जनता नही आवाज उठाईये वरना हिन्दूओ के त्यौहार नाम के रह जायेगे यही सत्य है..
अपने देश मे स्वयंम हिन्दू ही बेगाना हो गया ओर प्रधानमंत्री कठपुतली कोर्ट को ही सब फेसले करने है तो वोटिंग की क्या जरूरत है सब फैसले कोर्ट ओर दिल्ली के भांड लेले या व्यापारी नूमा संत किसी देवता का अपमान कर सकते है समुदाय विशेष को खुश रखने से...
जागो अभी भी वक्त है वरना फिर कुछ नही होगा आपके बच्चे बस नाम के त्योहार मनायेगे वो भी टीवी पर देखकर..

Thursday, October 12, 2017

शुत्र अनुकूलन प्रयोग..

 शुत्र अनुकूलन प्रयोग..

आज आपको शुत्र अनुकूलन विधान कहते है..

मंत्र..
ॐ ह्लीं बगलामुखीं सर्व दुष्टानां वाचं मुख पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धि विनाशय ह्लौं ॐ स्वाहा..

सामग्री.
प्राण प्रतिष्ठा यूक्त माँ बगलामुखी यंत्र, माँ का फोटो, पीली मिठाई तेल का दीपक, जलपात्र ओर..
माला,, हल्दी की ,
दिन, रविवार,
समय ,रात के बारह बजे के बाद कोई भी समय,
आसन, पीले रंग का सुती आसन
दिशा, पश्चिम
जप संख्या, इक्यावन हजार
समय, इक्यावन दिन,,
अब विधान कहते है..

Wednesday, October 11, 2017

अपने धर्म के प्रति वफादार रहे

  नोट इस पोस्ट को पुणे रुप से ध्यान से पढे


इंसान कभी खराब नही होता इंसान का वक्त खराब होता है ओर वक्त के साथ उसकी सोच खराब होती है ओर जिसकी सोच ही उसका साथ ना दे तो वो इंसान क्या करे क्योकि इंसान कभी खराब नही होता उसकी बनाई हुयी कोई भी वस्तू वो चाहे क्रियाशील हो या निष्क्रिय वो कभी खराब नही होती बस वक्त ओर सोच खराब होती है क्योकि वो किसी की सुनना नही चाहाता उस समय वो ही न्यायाधीश ओर वो ही वकील स्वयंम का मुकदमा ओर से तो जीत जाता है पर स्वयंम से हार जाता है इसलिए अच्छा या बुरा समय कुछ भी रहा अपने दिमाग को गति दिजिये सोचने की पर थोपये नही की तू गलत है फैसला करना गलत है इसलिए कोन क्या कर रहा है क्या बोल रहा है उस पर मत जाइये आपके गुरु ओर इष्ट आप से क्या कहना चाहते है वो सुनने की कोशिश कीजिये ये इन्टरनेट की दुनिया है यहाँ कई सिद्ध संत बाबा घूमते है जो स्वयंमभू है बात ना माना या ग्रुप मे ऐड ना हो तो सीधा धमकी जैसे भगवान वो हो कोई बात उनको लग जाये तो सीधा धमकी अरे जब आप गलत नही हो तो आप भी हमारी तरह पाखंड ,छलकपट, छुआछूत, भेदभाव ,परोपकार के लिए लडो ना नारी को सम्मान देना सनातन धर्म का हिस्सा है पर आजकल केवल नारी को भोग की वस्तू माना गया है ये सब कथित तांत्रिक जो बिना बात के कोलचार्य बने हुये है ये उनको मत है जबकि कुलाचार की देवी है कहाँ पता नही पर भैरवी चक्र की साधना सबको करवानी है जय हो ऐसे संतो की.. बुराई बढ रही है क्योंकि हम सनातनी कायर है जो आवाज उठाना नही जानते आज नही तो कल धर्म के रक्षको को हथियार तो उठाना ही पडेगा तैयारी अभी से शुरु कर दो नही तो अपने आपको मिटा दोगे सबसे पहले छुआछूत ओर भेद भाव मिटा दो एक अपनी आध्यात्मिक शक्ति को बुराई के लिए नही सनातनी परोपकार के लिए काम मे तो अच्छा है बाकी ये छोटा मे बड़ा मे मिट जावोगे दोस्तों यही सत्य है बाकी हम कई बार कह चूके है की कोई हमे धमकी दे कोई गाली दे कोई फर्क नही पड़ता कोई हमे दुश्मन समझता है तो समझे पर हम उनके लिए भी माँ बाबा से प्रार्थना करते है कि माँ बाबा आप पहले उनकी सुनी फिर हमारी सुने.. आध्यात्मिक कोई मजाक करने की चीज नही है आज हिन्दू ही हिन्दू धर्म का मजाक उडाना मे लगा है इसलिए आप को जो करना है करे पर अपने धर्म का सम्मान करना सीख लिजिये बाकी आपकी इच्छा ओर माँ बाबा की कृपा करो सको तो किसी का भला कर लो नही तो बूरा तो जानवर भी कर लेते है फिर उनमे ओर हम मे क्या फर्क रह गया इसलिए ऊंच नीच का फर्क हमको मिटाना है कोई भगवान नही आयेगा अपने धर्म की रक्षा हमे स्वयंम करनी है भगवान आपको रास्ता बता सकते है पर चलना आपको है यही सत्य है बाकी हमारा कोई टारगेट इसमे कोई नही हमारी ये पोस्ट केवल आध्यात्मिक मे चल रहे पाखंण्ड के खिलाफ है बाकी कोई ये समझता है की ये उसके ऊपर है तो उसको हम तो क्या माँ बाबा भी नही समझा सकते बाकी पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर करे बुरी लगी हो तो माफी जिसकी समझ से बाहर है वो नजर अंदाज करे आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से माँ बाबा सब पर कृपा करे यही हमारी माँ बाबा से कामना है...... .
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश..
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Saturday, October 7, 2017

ये है असली समस्या सनातन की

ऐसो को तो जहाँ देखो जूते मारने की इच्छा करे तो जरा जोर से मारो




आजकल साधना श्रेत्र कई तांत्रिक महाप्रभु घुम रहे जो सनातन धर्म को तो बदनाम कर ही रहे है साथ मे हिन्दू संत या साधक बन के भगवा धारण करके हिन्दु संतो को भी नही छोड रहे है जिनके गुरु का पता नही गुरु पंथ का पता नही बस भोले भाले साधको या भक्तो को देवी यक्षिणी या देवी कर्णपश्चिनी या अन्य प्रेत जिन्नात की साधना मामुली या गैरमामूली पैसो मे करवाने को तैयार  है नये हारे हुये साधक जिनको गुरु वाणी या गुरु ना मिला हो या भक्त ...इस मृगलता मे या इन साधनाओ के चक्कर मे फस जाते है ये नये साधको का आकर्षण होती है की ये साधनाये फोकट मे सब कुछ देती है जब इन तांत्रिको को ये नही मालूम की इनसे नुकसान क्या ओर फायदा क्या बस लगे पडे है एसे ढोंगी तांत्रिको चक्कर पैसे दो साधना लो,,,
अरे ये सब इनकी जर खरीद गुलाम है क्या अगर ये सभी इतना सुख देती तो वो तूमसे पैसे लेकर साधना क्यू झण्ड बनाने के लिये करवा रहा है क्या अपने धर्म को आप स्वयंम बदनाम करते हो एक कहावत है कि मुर्खो पर अकलमंद राज करता है वो कहावत सही स्वयंम के दिमाग से काम लेते नही फिर नूकसान या कोई अहित हो जाये तो दोड पडते हो किसी अन्य के पास लूटवाने आप स्वयंम इनको बढावा दे रहे हो मंदिर जाने की बजाय या सही संतो की पहचान ना होने के कारण आपका भटकाव होना स्वाभविक है पर इतना भी क्या भटकाव होना जो जिसके पास जा रहे हो उससे कुछ प्रमाण तो लो की जो साधना आप हमे करवा रहे हो क्या आपने की है या नही अगर की है तो पत्यक्ष करवा दो.. क्योकि गुरु शिष्य मे कोई भेद नही होता यही सत्य है कुछ करने से पहले सोचो की आप कहाँ जा रहे हो..
जितना आध्यात्मिक को समझोगे उतना ही सरलीकरण होगा ओर जितना  साधना सिद्धि के चक्करो मे रहोगे ओर ऐसे ढोंगी दुष्ट तांत्रिक बाबा के फेर मे रहेगे या शुभ अशुभ के फेर मे रहोगे तो जटिलता बढती जायेगी भेद को मिटाये ,,,,साल छः महीन मे एक बार अपने घर ओर अपने पतिष्ठान मे हवन आहुति जप कराये कुते की गाय की रोटी रोज आपकी रसाई से निकले कबुतरो को दो मुठ्टी दाना रोज मंदिर या चबुतरे पर डाले (घर पर नही डाले क्योकि वहाँ इंसान बसते है उसको कबुतर खाना ना बनाये )व्रत उपवास करते हो या नही फिर भी किसी भुखे को भोजन भी करावे ताकि शुद्धता बनी रहे..
बाकी साधना सिद्ध आपके गुरु ओर आपके मंत्र जपो पर निर्धारित है हमारा तो यही कहना है कि आप ऐसे पाखण्डीयो के चक्करो मे ना पडे या आपका कुछ नही बिगाड़ सकते है इनको डराने के अलावा कुछ नही आता है *कल ही एक महान साधक तांत्रिक हरेश कुमार मथुरा से हम कुछ बालको की ओर नादान बालको की बात चल रही थी* की यक्षिणी प्रेत जिन्नात कर्णपश्चिनी के क्या लक्षण ओर क्या हानि है बता ही नही पाये जबकि स्वयम की कोई साधना सिद्ध नही है पर दुसरो को सिद्ध करवाने की शमता रखते है ना कोई अनुभव महज उम्र 32 साल पर बस दो साल मे नेट की दुनिया से तांत्रिक बन गये यक्षिणी कर्णपश्चिनी जिन्न प्रेत सिद्ध करवा रहे है जैसे ये सब इनके गुलाम हो .तो दोस्तो ऐसे धर्म के सिद्ध ठेकदारो से जरा बचकर रहे ये तो एक नाम है उदाहरण के लिये बाकी ऐसे कई खुजलीवाले कुते घुम रहे है बजार मे जिनके गुरु पंथ स्थान का पता नही है आप सभी सावधान रहये सेचत रहये हमारा तो यही कहना है आस पास सभी को सेचते करे पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर करे बुरी लगी हो तो माफ करे बाकी नजरअंदाज करे आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से सोमवार से कुछ मंत्र देगे जो आपकी निजी जिंदगी मे बहुत काम आयेगे बस.......

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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Thursday, October 5, 2017

आप हो कहाँ...... कोन है आपका...




आज की दुनिया मे दिल ओर दिमाग सभी के पास होता है पर अपने दिमाग को वो कहाँ काम मे लेते है यह हम नही पता दिमाग वहाँ लगाईये जहाँ से कुछ भौतिक सुख मिलने की आशा होती है ओर जिस से आध्यात्मिक मे कुछ पाने की आस होती है वहाँ दिल ओर दिमाग दोनो से काम लिया जा सकता है हालाकि हमारी बाते कुछ महानभवो को सई की तरह चुभती है पर हमने कभी किसी को टारगेट नही बनाया पर कोई उन बातो को अपने ऊपर ले तो हम क्या कर सकते खैर हमारा काम कहना है वो सुनने ओर पढने के अलावा ओर कर क्या सकते यह बात उसी तरह उन पर लागू होती है की कुते की पुछ छः महीने अगर पाइप मे रखा जाये तो भी वो सीधी नही होती चाहे आप के मुह ये फुल भी गिरेगा तो भी सामने वाले को पत्थर ही लगेगा ओर भौतिक ओर आध्यात्मिक जगत मे आपके सामने ऐसे कई पत्थर आयेगे याद रखे ऐसे कई है इस दुनिया मे जो आपकी पीठ पीछे आपकी बात करेगे आप भूलना चाहो तो भी वो भूलने ना देगे क्योकि यही आपके सच्चे हितैषी होते है इसलिए बहेरे बन जाओ ओर इनकी सुनने की बजाये अपने योग ध्यान पुजा जप तप ओर अपने परिवार पर पुणे ध्यान दे एक कहावत है बहुत पुरानी की"चार लोग देखेगे तो क्या कहेगे" ये वो ही चार लोग होते है जिनका अपने घरों मे नही पर बाहरी लोगो की जिंदगी मे दखल देना अपना धर्म समझते है जिनकी अपने घर ओर गली, गाँव मे दो कोडी इज्जत नही पर लोगो की जिंदगी मे दखल देना अपना अधिकार समझते है बस आपको इन्ही लोगो से बचकर रहना है ओर बहरा बन जाना है ये उसी तरह जिस तरह हम लिखते है आपको अच्छा नही लगता है तो नजरअंदाज करे ..बस निजी ज़िंदगी मे भी यही करना है कि ना ऐसे आदमी को देखना है ना सुनना है बस यही आपके भौतिक  ओर आध्यात्मिक जीवन के लिए जरुरी है कर्म कुछ भी करो पर धर्म की राह नही छोडनी है गुरु नही है तो इष्ट को पकड लो पर ऐसे बंदो पर ध्यान मत दो..
बाकी..
आप हो कहाँ आपके साथ है कोन कोई नही...
*ख़ुशी जल्दी में थी रुकी नहीं,*
*ग़म फुरसत में थे - ठहर गए...!*
*"लोगों की नज़रों में फर्क अब भी नहीं है ....*
*पहले मुड़ कर देखते थे ....*
 *अब देख कर मुड़ जाते हैं*
 *आज परछाई से पूछ ही लिया*
*क्यों चलती हो , मेरे साथ*
*उसने भी हँसके कहा,*
*दूसरा कौन है तेरे साथ*
यही सत्य है.. बाकी आगे माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से जो अच्छा लगे तो शेयर करो बुरा लगे तो माफ करो ओर नजरअंदाज करो..
*🌹ॐ गुरुदेवाये नमः ॐ इष्टदेवाये नमः🌹*



*🙏🏻जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश🌹*

Tuesday, October 3, 2017

अपने मन ओर धर्म को समझे




जब तक आदमी खुद को नही समझ लेता या अपने मन ओर दिमाग पर काबू नही पा लेता जब तक वो मान अपमान ,भेद अभेद की आग मे जलता रहेगा ओर अपने से सामने वाले को नीचा दिखाने की कोशिश मे लगा रहेगा अरे वो इस कोशिश को अपने प्रभु के ध्यान मे लगाने की कोशिश करे तो हो सकता है की माँ बाबा कुछ तो सुन ले किसी धागे मे गांठे पड के उलझ जाये  तो एक मात्र कैंची से ही उसको काट जा सकता है ओर फिर वापस उसका गठजोड़ किया जाता है उसी तरह किसी के मन मे गांठ पड जाये तो लाख चाहकर कर भी सामने वाले उस गांठ को नही निकाल सकता क्योकि धागे ओर मन मे काफी फर्क है इसलिए अपने आपको विद्धवान समझना शेष्ठ समझना बहुत अच्छी बात है पर सामने वाले को चाहे वो नवजात बच्चा ही क्यू ना हो आत्मा.,जीव, तो दोनो मे सेम होता है ना यह बात कब समझ आयेगा यह पता नही पर क्या करे प्रर्दा हटने मे टाइम लगता है पता नही वो भौतिक जगत से आध्यात्मिक जगत मे वो कब आयेगा भौतिक को आध्यात्मिक मे जाना बहुत बडी बात है जहाँ आपको इन सबको पीछे छोडना ही होगा कोपी पोस्ट या किसी के पीछे चलना या किसी ओर के लेख पर अपना नाम देकर पोस्ट करना अच्छी बात है पर झण्ड मत बनो कभी ध्यान लगाकर अपने इष्टदेव ओर गुरुदेव की भी सुन लो जहाँ आदर नही वहां आध्यात्मिक नही जहाँ स्नेह, प्यार आत्मीयता व मान अपमान, जलन ईष्या देषता, दुश्मनी का त्याग नही करता जब तक वो आध्यात्मिक नही है ओर आध्यात्मिक विनाश करने के लिए नही विनाश को रोकने के लिए होती है ओर आध्यात्मिक मे धर्म रक्षा मे अगर हथियार उठाना भी पडे तो उठाओ पर कमजोर मत बनो ओर अपने किसी को नीचा दिखाना बंद करे गले लगाना शुरू करे जाति से नही धर्म ही पहचान हो... यही आज का सत्य है बाकी...
कल जो हमने दो लाइन लिखी थी वो ही सत्य होगा...
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*खाली घडा है मिट्टी का खाली ही जायेगा..*
*जो भरा है इस जग मे कुट कुट के वो मट्टी मे बदला जायेगा.*
*ना परवाह कर कल की जिसने आज तेरा पेट भरा है वो कल भरेगा..*
*पर याद रख उसने तेरे पर दया है कि तू आगे भी दया रख..*
*यही तेरा काम होगा ओर यही तेरी पहचान होगी.*
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यह सच होगा इसलिए अपने यहाँ आने का उदेश्य समझो बाकी आपकी ओर माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा..आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से..

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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Monday, October 2, 2017

क्या आपके पास दिमाग है..

सावधान रहे सचेत रहे यही उदेश्य है हमारा.,,, 





हर कोई साधक का आम आदमी शॉर्टकट चाहता है कोई साधना या सिद्धि के जरिये पैसे कमाना चाहाता है तो कोई एकदम करोड़पति या लखपति बनना चाहते है पर ये कोई नही सोचता की इसकी कीमत क्या चुकानी पर सकती है भौतिक सुख को पाने की चाह मे आदमी क्या नही कर गुज़रता .कोई तांत्रिक भुत बेच रहा है तो कोई यक्षिणी तो कोई पैसो को एक का तीन कर के दे रहे है आप सभी समझदार है जरा ये सोचो की जो आपको पैसे लेके जिन्न बेच रहा है या साधना या बीर, या यक्षिणी बेचा रहा है वो आप से पैसा ले रहा है क्या ये सब उसके काम नही आ सकते अरे वो आप से पैसा मांग रहा है आध्यात्मिक दुष्टि से वो पुरे आध्यात्मिक जगत को बदनाम कर रहा है ओर मानव को ऊपर वाले ने जब बनाया तो, उसमे दिमाग नाम का कीड़ा पहले उत्पन किया क्या आप समझदार नही हो क्या आप वो नही सोच सकते की अगर इसके पास ऐसा कुछ है तो ये लखपति क्यू नही बना इनको बेचकर पैसे कमी रहा है तो मतलब आप समझ जाये तो अच्छा है, ओर आजकल जादू से पैसे के लोग एक के तीन करके दे रहे है अरे आप लोग झण्ड हो क्या जब वो एक से तीन बना रहा है तो वो उसके खुद के लिये नही बना सकता जरा सोचो दिमाग नाम के कीडे को काम मे लो की वो क्या कहता है ये पैसे. बनाने वाले मांत्रिक, कानपुर हरियाणा लखनऊ उज्जैन, काशी अहमदाबाद सुरत वापी.. इधर ज्यादा सक्रिय है तो इनसे जरा बचकर रहो अच्छा है अगला दिमाग से काम ले रहा है तो आपके पास भी दिमाग है जरा सोचकर देखो... बाकी विधी के विधान को कोई नही टाल सकता आगे आपकी इच्छा ओर माँ बाबा की इच्छा ओर कृपा.. नादान का काम रास्ता बताना है अपना उल्लू सीधा करना नही.. नादान बालक की कलम आज इतना ही...
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश 
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Saturday, September 30, 2017

क्यू मानते है हम विजयदश्मी ओर दशहरे ओर सच क्या है



विजयदश्मीओर लंकापति रावण दहन भारत का सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण त्योहारों में से है ....
जो की आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन मनाया जाता है|ये पावन पर्व हर साल नवरात्रि के बाद दसवें दिन में प्रभु श्री राम का लंकापति रावण पर विजय पाने की ...
और ....
माँ दुर्गा का महिषासुर पर विजय विजय पाने की ख़ुशी में मनाया जाता है ..
इसीलिए इस त्योहार को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है ...
नवरात्रि के दिन 9 दिनों तक कई जगह में राम लीला का आयोजन किया जाता है ...
रामलीला में कलाकार रामायण के पात्र बनते हैं ...
और भगवान् राम का रावण के साथ युद्ध करके अपनी धर्मपत्नी सीता को उसके चंगुल से चुदा कर वापस अयोध्या की तरफ आने तक का पूरा सफ़र नाटकीय रूप में दर्शाया जाता है...
और दशहरा (विजयादशमी) के दिन उस युद्ध का अंत करके राम लीला के बड़े बड़े खुले मैदानों में रावण का पुतला ,साथ में मेघनाद और कुम्भकरण का पुतला भी जलाया जाता है...
पर टीवी पर धारावाहिको मे पोरौणिक कथा के आने से राम लीला मंचन ओर माँ दुर्गा की लीला मंचन करने वालो का टोटा है ...
क्योकि स्पेशल इफेक्ट के जरिए टीवी पर मजा आता है ..
पर आजकल टीवी पर हिन्दु सनातनी परम्परा को तोड मरोड कर पेश किया जाता है ...
पर चमत्कार की वजह से हम सब खुश होते है वेसे भी इस बारे मे कुछ नही कहाँ जा सकता क्योकि जब तक ...
अन्याय के रूप में अब नेताओं का भ्रष्टाचार हैं,
रावण के रूप में नेताओं का अत्याचार हैं,
भ्रष्टाचार और अत्याचार मिटाने के लिए शंख बजेगा,
जब हर घर से एक राम निकलेगा.
तो ही अपना भारतवर्ष वापस सनातनी बनेगा...
यही सत्य है नेताओ की पनाह मे यह सब होता है हिन्दु धर्म को विनाश की ओर मोडा जा रहा है..
आने वाले समय मे शायद लोग इसको भी भी भुल जाये की दशहरा ओर विजयदश्मी क्या होती है..
पर हम आप सभी को ये क्यू बता रहे है आज तो इन दोनो की शुभकामना देनी है....
चलो आगे बताते है
ओर कई जगहों पर माता दुर्गा का मिटटी की प्रतिमा बनाया जाता है जिसमें माँ  दुर्गा महिषासुर का वध करती दिखाई देतीं हैं.....
दशहरा  (विजयादशमी) के दिन इस मूर्ति का पूजन किया जाता है...
 और बहुत धूम धाम से विजयदशमी मनाया जाता है....
इस दिन जगह जगह पर मेले लगाये जाते हैं और अनेक प्रकार की वस्तुओं जैसे खानेपीने के सामान, बच्चों के लिए खेलने का सामान और अनेक प्राकर के घर सजावट के सामान का बिक्री किया जाता है .....
जैसा हमारे आसीन्द मे भी पिछले दस सालो से इस परम्परा का निर्वाह किया जा रहा है....
पर दशहरे का मतलब कोई नही समझता दशहरे ओर विजयदश्मी का मतलब क्या हे पहले वो जान ले..
दशा हारा एक संस्कृत शब्द है..
दशहरा ओर विजयदश्मी इन दोनो का मतलब ही अच्छाई पर बुराई की जीत.....
पर रावण दहन तो होता है पर अपने अंदर बैठे रावण का दहन कोई नही करता यही सत्य है.....
ओर इनका मतलब यही है कि आप के भीतर दस बुरे गुणों को दूर करना...
जैसे...
कामवास (वासना)..
क्रोध (क्रोध)...
मोहा (अनुलग्नक)...
लोभ (लालच)...
मादा (गर्व पर)...
मत्सर (ईर्ष्या)...
स्वार्थ (स्वार्थ)...
अन्याया (अन्याय)...
अमानवत्ता (क्रूरता)...
अहंकार (अहं)...

दोनों ही रूपों में दशहरा (विजयादशमी) शक्ति पूजन का पर्व है...
और इस दिन शास्त्र पूजन की तिथि भी होती है इस दिन कोई भी नया कार्य शुरू करने को शुभ माना गया है ....
क्यूंकि ऐसे मान्यता है की विजयादशमी के दिन प्रारंभ किया हुआ कार्य में विजय आवश्य ही प्राप्त होता है...
दशहरा  (विजयादशमी) पर्व को भगवान् की जीत के ख़ुशी में और बुराई पर अच्छाई का प्रतिक मानकर इस त्यौहार को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है...
दशहरा के दिन लोग अपने वाहनों को साफ़ करके ,उसका पूजन करते हैं ..
सब कोई अपने व्यापारों की मुख्य वस्तुओं की पूजन करते हैं जैसे की किसानों अपनी जानवर और फसलों का, व्यापारी अपने लेखा और तराजू का, मैकेनिक अपने मशीनों का आदि क्यूंकि ऐसा माना जाता है ....
की दशहरा पर इन सब का पूजन करने से व्यापार में व्रुदी होती है इस दिन लोग नए कपडे पहन कर मेलों का आनंद उठाने के लिए चलते हैं ...
और साथ में अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को दशहरा (विजयादशमी ) की बधाइयां देते हैं पर जब तक आप अपने भीतर के रावण को जो,आग खुद लगायेंगे, तब तक आपके लिए दशहरे ओर विजयदश्मी का कोई मतलब नही होगा...
खैर आज हम आप सभी ये क्यू कह रहे है नेता दीमक की तरह देश को खा रहे है ओर जनता आँखे बंद करके बैठी है मस्त सो रही है..
खैर जाने दो आज हमे तो आपको विजयदश्मी ओर दशहरे की शुभकामनाएं देनी है हम भी क्या फालतू बात कर रहे है....
,
माँ की ज्योति से नूर मिलता है,
सबके दिलों को सुरूर मिलता है,
जो भी जाता है माता के द्वार,
उसे कुछ ना कुछ ज़रूर मिलता है।
अधर्म पर धर्म की विजय
असत्य पर सत्य की विजय
बुराई पर अच्छाई की विजय
पाप पर पुण्य की विजय
अत्याचार पर सदाचार की विजय
क्रोध पर दया, क्षमा की विजय
अज्ञान पर ज्ञान की विजय
रावण पर श्रीराम की विजय के पावन पर्व पर..
खुशी आप के कदम चूमे
कभी ना हो दुखों का सामना
धन ही धन आए आप के आँगन,
दशहरा के शुभ अवसर पर
हमारी है यही मनोकामना
रावण की तरह सभी के मन के विकारों का नाश हो,
माँ दुर्गा ओर प्रभु श्रीराम का हृदय में सर्वदा वास हो...
बुराई का होता हैं विनाश,
दशहरा लाता है उम्मीदों की आस,
हर व्यक्ति के अंदर की बुराई का हो नाश,
आपके घर में ईश्वर का सदा वास.
ओर...
हो आपकी जिंदगी में खुशियों का मेला
कभी ना आए कोई झमेला
सदा सुखी रहे आपका बसेरा..
मुबारक हो आपको यह विजयदश्मी का त्यौहार ओर शुभ दशहरा...
आप आपके परिवार को विजयदश्मी ओर दशहरे की बहुत बहुत शुभकामनाएं...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
🌹🙏🏻🌹

Wednesday, September 27, 2017

आध्यात्मिक है क्या



आध्यात्मिक है क्या...
आध्यात्मिक मे आने से पहले रोग दोष जलन ईष्या मान अपमान को दर किनार करना पडता है ओर मातृशक्ति का सदा ही सम्मान करना ओर अपने बडो को सदा ही आदर करना आध्यात्मिक की पहली सीडी है पर आज कल आध्यात्मिक मे आजकल ऐसे लोग भी है जो जाति से कुछ भी हो पर जट झूठ बोलना जोर से बोलना भेल ही वो नौकरी करते हो अपने आपको बिजनेस मैन बताना लोगो के सामने शरीफ बनना ओर दुसरो से दोस्तो करके उनके कंधो का इस्तेमाल करना यही उनका काम होता है मिंत्रो अगर आप ऐसे बंदो को पर्सनली नही जानते है ओर आपकी पहचान नेट के माध्यम से हुयी है तो इनसे सावधान रहे क्योंकि बाकायदा इनकी रेट लिस्ट है हर काम के लिए पर ये काम किसी ओर से करवा कर वाह वही लूटते है मिंत्रो ऐसे लोगो से जब तक आप ना मिल लो तब तक दुर से नमस्कार करो क्योकि ये अपना पता पहचान छिपा कर चलते है इनको पता होता है कि ये स्वयम क्या है ये इनसे दोस्ती करने से अच्छा है कि दिखता हुआ दुश्मन अच्छा होता है आप सभी से हमारा यही कहना जिसको आप जानते नही उनसे दुर रहये वरना ऐसे पागल आदमी आपके जिंदगी मे आकर आपकी जिंदगी झण्ड ना कर दे बाकी माँ बाबा की इच्छा है मानो तो अच्छा ना मानो तो बहुत अच्छा...
जो अपमान करे बडो का जो स्नेह ओर प्यार ना दे सके अपनो को जो तिरस्कार ओर जलन की दृष्टि से देखे मातृशक्ति को उनके लिये आध्यात्मिक नही है... सबसे पहले दुश्मनी के भाव का त्याग करना पडता है ओर ऐसे व्यक्तियो को अपने इष्टदेव ओर गुरुदेव के ऊपर छोड देना चाहिए...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹

Tuesday, September 26, 2017

क्या जपे क्या ना जपे



आजकल सब आध्यात्मिक मे अपने हिसाब से चल रहे है कोई कहता की ये मत जपो कोई कहता की इसको मत जपो इससे हानि है हालाकि कई बीज मंत्र है जिनको बिना गुरु की सहायता या आग्या के बिना नही जपा जाता ..
अगर हिन्दू शास्त्रो मे आदिकाल से फेर बदल नही होता तो हिन्दु शास्त्रो के मुकाबले कोई शास्त्र नही थे ओर उनके मंत्र ओर तंत्र अपनी ऊर्जो एक बार जपने से ही बता देते पहले सभी हिन्दु जातियो ने अपने आपको बडा बताने के लिए फेर बदल किये जिसमे कई शेष्ठ ओर पुजनीये शामिल है फिर मुगलो ने फेर बदल कर दिये फिर अंग्रेजो ने फिर आज कल गीता प्रेस भी कर रही है जिनका हमे पुणे विश्वास है वो भी कुछ कुल को लेकर चल रही है जब तक हिन्दु सनातन धर्म मे छुआ छुत या जाति पाति का भेद रहेगा तब तक ना सनातन एक हो पायेगा ना ही एक होगा ओर गीता प्रेस के ही पुरानी पुस्तकों ने जैसे नारद पुराण मे छेडछाड की गयी है तीन अध्याय को उसमे से हटा दिया गया है ये उस तरह है की किसी एक कुल को ऊपर किया गया दुसरे कुल के नीचा दिखाया गया... हमे पुणे विश्वास है कि जो बडे बडे धर्म के ठेकेदार है जिनको ऊंची ऊची पदवी मिली हुयी है जब तक वो नही सुधरेगे जब तक सनातन को नीचा देखना ही होगा हर गुरु अपने शिष्य को भगवान मे भेद करना नही सिखाता पर यहाँ धर्म के ठेकेदार जो अपने धर्म का मजाक बनाते है कभी कभी लगता है वो सनातनी है ही नही,

जैसे अभी कुछ दिनो पहले जिनको योग गुरु कहाँ जाता है रामदेव जी.. जिन्होंने बाबा शनिमहाराज का अपमान किया था ओर वहाँ हिन्दु सभा मजोद गणमान्यो मे कोई कुछ नही बोला अभी एक हिन्दु प्रोफेसर ने माँ दुर्गा के बार मे कुछ टिप्पणी की थी तो भी हिन्दु मोन क्यू कोई बोलना नही चाहते ये समझ के बाहर है खैर जिनका अच्छा वक्त आता है उनका आप ओर हम कुछ नही कर सकते ,,बात मंत्रो की हो रही थी अरे मंत्रो वो जपो जो आपका गुरु आपको दे उसमे फेर बदल की क्या अवश्यकता है गुरु जो भी मंत्र दे उसको जपो वो दोष रहित होता है पर आजकल लोग वैसे भी भोले बाबा जो जगत पिता है उनको गुरु मानकर मंत्र जप करते है जैसे भोले बाबा उनको दीक्षित करने आये थे फिर कही गलत हो जाते है तो दोडते रहते है एक पिता अच्छा दोस्त गुरु हो सकते है भौतिक जगत के लिए पर आध्यात्मिक मे आपको भौतिक गुरु खोजना ही पडेगा यह भी अटल सत्य है... आज उसके पास कल उसके पास योग्य गुरु देखो ओर साधना चाहे ग्रहस्थ हो बह्मचारी या हो साधु की पर अपनी जिम्मेदारी से भागना संभव नही जो एक जिम्मेदारी को छोड़कर जाता है वो कही सफल नही होता यही सत्य है भजन के साथ भोजन भी चाहिए होता है तो कर्म के साथ अपने धर्म के प्रति अडिग रहे हमारा तो यही कहना है आज बस इतना ही नादान बालक की कलम से अच्छा लगे तो शेयर करे बुरा लगा हो तो नंजरअदाज करे कुछ गलत लगा हो तो माफी..

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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Monday, September 25, 2017

चरित्र की पुजा होती है क्यू



चरित्र ओर नाम ओर आचरण आदमी जन्म से लेकर नही आता ये सब उसके कर्मा द्वारा मिलता है ओर किसका साथ कितने दिन का होता है ये ऊपर वाला तय करता है इंसान नही ,प्रवचन बहुत अच्छी चीज है अगर दुसरो पर लागू हो तो ओर वही अगर उस रास्ते पर स्वयंम को चलना पडे तो बहुत मुश्किल होती है ,सच्चा आर्दशवादी वो ही होता है जो निष्पाप निस्वार्थी हो बाकी आप हमेशा किसी की निंदा से तब तक बाहर नही आ सकते तब तक आपका अभिमान आपको छोड कर नही जाता, गुमनामी की जिंदगी हमारी बहुत हसीन थी ना कोई था  हम थे बस वो ही थे जिनको हम अपना मानते है..
अच्छा समय अच्छे दोस्त लेकर आता है बुरा समय बहुत कुछ लूट कर ले जाता है खैर हमे कोई फर्क नही पड़ता ,कोन अपना कोन पराया,,
आप सभी का साथ हमारे साथ रहा इसलिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद कभी कोई गलती हुयी हो तो माफी...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश..

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रिश्ता कोई भी हो दिल से बने


सब को अपनी मौज ही अच्छी लगती है चाहे भौतिक चाहे आध्यात्मिक अपनी ले मे चलना सबको अच्छा लगता है पर जहाँ शब्दों मे प्रेम नही बडो मे आदर नही वो मौज या ले किसी काम की नही जहाँ परिवार मे भेद है वो प्रेम प्यार किसी काम का नही भेद अच्छे बूरे मे करो परिवार मे हो तो बात करो ...भेद नही.... अपनी मौज रहना साधु जीवन को दर्शाता है पर भेद करना या ईष्या करना आपको आध्यात्मिक जीवन या भौतिक जीवन से दुर करता है आप सोचते है आपने अच्छा किया पर कभी मनन करना की हमने क्या किया जो कोई दुर चला गया रिश्ता किसी से भी बनाओ पर दिल से बनाए उसमे मजा है.. जो रिश्ते दिमाग से बनते है उनका टूटना लाजिमी है ओर जो दिल से बनते है उनमे आदर ओर प्यार झलकता है पंथ या सीडीयाँ कोई भी हो जो रिश्ता बनाये वो दिल से बनाये दिमाग से तो वैसे भी बिजनेस होता है दिल से रिश्ते बनते है ओर शब्द वो तलवार होते है जो बिना जख्म दिये घायल कर देते है ओर बिना मलहम के जख्मो को भर भी देते है जो भी करो सोच समझकर करो चाहे वो शब्द हो या अपनो के साथ व्यवहार बाकी सब आपके ऊपर है कि आपको किसी मौज मे ओर ले मे चलना है नादान बालक की कलम से जो हमे भी समझ मे नही आया है आपकी समझ मे आया तो शेयर करो नही तो नजरअंदाज करो...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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क्या नारी नर्क का द्वार है



आज जो भी आध्यात्मिक मे आता है वो शास्त्रो का ग्यान तो तोते की तरह रहता है पर वो व्यवहारकि ग्यान नही प्राप्त करता है या गुरु ग्यान ना लेकर शास्त्रो मे से कही बीते कह कर नारी , नारी शक्ति को नर्क का द्वारा बता देते है या उनका आध्यात्मिक मे अपने पति या बच्चो द्वारा उपहास किया जाता है क्यू या किसी ढोंगी पाखण्डी द्वारा उनका मान भंग हो जाता है या नारी की मर्यादा को चूर चूर किया जाता है आखिर क्यू, क्या ये सही है सतयुग का एक उदाहरण है ऋषि विर्श्वा का नाम आप सभी ने सुना होगा क्या आध्यात्मिक मे नही थे उन्होने दो शादीयाँ की थी क्या उनका आध्यात्मिक सफल नही था उनके बच्चो ने नाम नही कमाया एक भक्त शिरोमणि कहलाया तो दुसरा देवता का खंजाची बना ये सब उनके माता पिता की शिक्षा के कारण हुआ था हालाकि कुछ कर्म शिरोमणि के गलत थे पर नारी का मान भंग करने की उन्होने भी चेष्टा नही की अपमान किया था तो उनको सजा मिली पर आज यूग मे कुछ दोहो का गलत प्रयोग समझाया जाने लगा है. पराये नारी को आप भोग विलास की वस्तू समझते है तो पुरुष के लिये नर्क समान ही होती है ओर उसको आदर या सत्कार किया जाये तो वो वरदान है बस नजरो का फेर है नजर नीयत बदलो नाजारे एर किस्मत स्वयंम बदल जायेगी, पर स्वयंम की पत्नि शक्ति रुपा होती है यही सत्य है इसलिए नारी या मातृशक्ति की उपेक्षा करने वालो को हमारा एक ही निवेदन है जिस तरह आप अपनी माँ बेटी बहन का सम्मान करते हो या जिस दृष्टि से उनको देखते है सभी को उसी रुप मे देखो तो उसमे भी शक्ति का रुप मिलेगा बाकी आपकी इच्छा ओर माँ बाबा का आदेश ज्यादा कुछ आता नही क्योंकि हम स्वयंम आध्यात्मिक मे नये है ओर नादान बालक है जिसको केवल अपने गुरु ओर इष्ट की बतायी हुयी राह पर चलना है ओर चलते रहेगे बस आज इतना ही नादान बालक की कलम से....
जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश
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Sunday, August 6, 2017

आपका आध्यात्मिक स्तर कहाँ तक है

आजकल पश्चिम शिक्षा का स्तर इतना ऊचा हो चुका है कि शिक्षित लोगो का आध्यात्मिक नाम से विश्वास उठ चुका है कुछ दिनो पहले कही पढा था की नीचे के स्तर वाले लोगो पर मंत्र ओर तंत्र का ही इतना प्रभाव क्यू रहता है तो ये बात वैसी ही है जैसे उच्च शिक्षा प्राप्त करते कोई किसान नही बनना चाहता तो खाने के लिए अन्न कोन उगायेगा क्या नौकरी करने से या आफिस मे बैठने से या उच्च शिक्षा ग्रहण करने से गेहू स्वयंम उग जायेगे या उनका बीजारोपण हो जायेगा नही होगा ना उसके लिये भी उन खेतो पर भी फसल उगाने वाले किसान का जरुरत होती है उसी तरह आध्यात्मिक पर विश्वास ओर धैर्य होना जरुरी है जैसा धैर्य महापण्डित लंकापति भक्तशिरोमिणी रावण या प्रभु राजा भागीरथ या अन्य किसी तपस्वी द्वारा गया जप तप जिससे भगवान भी मजबूर हुये थे धरती पर आने के लिये मंत्र ,तीर्थ,देवता ,ओषधि, ब्राह्मण, ओर गुरु, गुरु मे जाति या उसका शिक्षा स्तर नही देखा जाता ओर जैसी इनमे जैसी भावना होती है वैसे ही मंत्र तंत्र जप, सिद्धि देते है ओर जब तीर्थ यात्रा करने पर भी भगवान भी फल देते है तो मंत्रो का स्तर जाति पर आकलन नही करना चाहिए चाहे उनका जप वैदिक हो तांत्रिक हो या साबरी सभी की अपनी पद्धति होती है ये सब अपनी अपनी पद्धति के अनुसार पुणे श्रद्धापूर्वक जपने से ओर उन मंत्रो को उपयोग करने से सभी कार्य पुणे होते है. पहले जिस देवता की उपासना भक्ति या साधना करनी है उसके अधिकारी बनना चाहिए फिर चाहे वैष्णव, शैव, शाक्त, आदि जिस देवता का मंत्र जप करना है करे, वैसे ही गुरु से श्रेष्ठ मुर्हूत मे दीक्षा लेनी चाहिए बाद मे मंत्रो को सिद्ध करना चाहिए गुरु आग्या लेकर, वैसे भी जप तप मंत्र पर किसी का पुणे अधिकार नही होता वो सभी है ओर भगवान भी तो पश्चिम शिक्षा का स्तर बढाने के अलावा अपने धर्म ओर संस्कृति पर भी पुणे जानकारी रखे अच्छी बात है अपने धर्म को नजदीक से जानना चाहिए ओर मंत्रो मे तंत्रो मे जाति का स्तर भी कोई म्याने नही रखते चाहे वो देव हो या देवी.. बस हमे इतना ही कहना है कि ग्यान बच्चे से भी प्राप्त होतो है ओर बुड्ढे से ग्यान की कोई सीमा नही अनन्त है जितना जाना उतना कम है कुछ ज्यादा कहाँ हो तो माफी आज के लिए इतना ही नादान बालक की कलम से..


जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश..

🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻

Saturday, August 5, 2017

क्या आप सही मे आध्यात्मिक मे हो

भक्ति, साधना, आराधना, उपासना,,
ये सब अंहकार या घमण्ड अभिमान से परे होते है जब तक आप अपने आपको उनके चरणो मे नही झुका देते या अपने आपको उनके हवाले नही कर देते जब तक सफलता आप से कोसो दुर है या आप आध्यात्मिक का हिस्सा नही बन सकते जब तक ये आपके अंदर विराजमान है जब तक आप स्वयंम चैतन्य नही होते तब तक ग्यान ओर अग्यान का परिचय खत्म नही होगा वहाँ हमेशा भेदभाव रहता है ग्यान ओर अग्यान मे भेद करने से ही आप आध्यात्मिक रहित बन जाना है जब तक फल प्राप्ति के लिये आप अपने आपको उनके हवाले नही कर देते या कर्म ओर धर्म दोनो का साथ नही होता आप किसी मे उन्नति नही कर सकते उसी तरह प्रार्थना करने का भी सही तरीका होना चाहिए जैसे एक व्यक्ति प्रार्थना करता है, मुझे सुखी करो, दुसरो व्यक्ति प्रार्थना करता है कि मेरे परिवार को सुखी करो.. तो इस प्रार्थना मे उसके सेमते पुरा परिवार आ जाता है तीसरा व्यक्ति ये प्रार्थना करता है कि है प्रभु सारे जग का कल्याण करो या सबको सुखी करो तो वो अपने आपके साथ सबको सुखी कर सकता है ये होता है उसका आध्यात्मिक मे होने का चैतन्य गुण अब आप आध्यात्मिक की किसी सीडी पर हो या कहाँ ये आप पर निर्भर है किसी ओर पर नही सुख ओर दुःख इंसान की सोच पर निर्भर है कि वो क्या चाहते है बाकी कर्म प्रधान होते है यही सत्य है जो किया है या जो कर रहे हो उसका फल आज नही तो निश्चित ही कल जरूर मिलेगा हम ये नही कहते की आप गलत हो क्योंकि हमे ही नही पता कि हम सही है या नही तो हम किसी को गलत कहने के अधिकारी नही है पर कहने वाले से हमेशा सुनने वाले को ध्यान लगाने का जरुरत है कि वो सही है या नही खुद को सुधारने की जरुरत है दुनिया को नही आत्मा से आत्मा सम्बन्ध होता है बचपन मे कही पढ़ा था जो हमे आज लगता है वो सही था अच्छी सोच होगी तो अच्छा ही मिलेगा यही पुणे सत्य है ओर आध्यात्मिक की राह सत्य ही मांगती है आडम्बरहीन ही सच्चा आध्यात्मिक है चाहे किसी को भजो चाहे कुछ भी जपो वो आपका होना चाहिए पुणे श्रद्धा ओर पुणे विश्वास ही आपको उनसे मिलाता है कोन अच्छा कोन बुरा वो सब उस पर छोड दिजिये उसका फैसला वो ही करेगा आप नही पर धैर्य ओर विश्वास आपको होना चाहिए आज इतना ही नादान बालक की कलम से कुछ गलत लिखा हो तो माफी...



जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश ....

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Friday, August 4, 2017

क्यू रुक जाती है साधना ओर सिद्धि

आजकल सबकी एक शिकायत होती है कि हम पुजा पाठ कर रहे है साधना कर रहे है तो भी दुखी है क्यू आखिर कहाँ अटकी है आप की पुजा पाठ क्यू प्रसन्न नही होता फिर सब इसको तंत्र से जोड देते है हम पर किसी ने कुछ कर रखा है या किसी देवता का प्रकोप है पर अपने कर्म कोई नही देखता कि क्यूँ ऐसी है आपकी जिंदगी हर बार आपकी अपने इष्ट से शिकायत रहती है कि हम इतना करते है तो भी आप हमे दुखी कर रहे हो क्यू आप उनकी पुजा करते हो क्या उन्होने कहाँ क्या आपका कोई स्वार्थ नही है बिना स्वार्थ तो कोई मंदिर नही जाता... फिर पुजा क्यू.. गिनती के मंत्र बोलो हो गयी पुजा अपना आज सब देखना चाहते है बीता हुआ कल क्यू भूल जाते है आज अच्छा है हो सकता है जो अभी संजा मिल रही है बीते हुये कल की उसी पुजा पूण्य से आपके कर्म कट रहे हो आज की दुनिया मे कोई दुख से अछूता नही है.. कोई तन से दुखी कोई मन से दुखी कोई धन से दुखी ओर तो ओर कोई अपनी बीवी से दुखी तो कोई बच्चो से दुखी तो एक तो ओर कोई अपने स्वार्थ के चलते अपने पडोसी से दुखी ओर कोई अपने पितरो से तो कोई कुलदेवी से दुखी कोई अपनी पुरानी जो याद ना रही उन मन्नतो से दुखी यह सब आपके प्रारम्भ होते है तो उनका भी कटना जरुरी होता है.. ओर आप ये क्यू भूल जाते है की इस दुनिया मे कई ऐसे है जिनके रहने को घर नही पहनने को कपडे नही.. उनके सामने अपना दुख कुछ नही होता ओर कोई आपको रास्ता दिखाया है तो आपको उस पर चलना होता है अगर आप एक दो दिन या पाँच दस दिन मे किसी चमत्कार की आशा करते है तो वो आपकी सोच है भगवान की नही कई बार आप के आज के साथ पुर्नजन्म के कर्म भी जूडे रहते है आप ये क्यू भूल जाते है कि कष्ट तो भगवान को भी उठाने पडे थे.. अरे जब एक पत्थर पवित्र नदीयों ज्यादा दिन रहने से ओर आपस मे घीसते रहने बाबा शिव बन सकता है तो घरो मे पुजा मे स्थान पा सकता है तो इष्ट का ज्यादा प्रिये उनके चरण मे स्थान क्यु नही पा सकता..
फिर भी किसी की सोच पर हम काबू नही पा सकते आप उसको अधिक प्रिये थे इसीलिए इंसानी जिस्म मे हो जिस्म तो जानवरो को भी मिला है अब देखना आपको है उसको नही सोचना आपको है उसको नही...
आगे आपकी इच्छा आप कहाँ फेल होते हो जो भोगते है वो पाते भी है पर जो हार जाते है उनमे से कुछ वापस कोशिश करते है तो कुछ मैदान छोड़ देते है ओर जिनको शक हो उनका हम कुछ नही कर सकते कोई हमारी गलतियां निकालता है तो हमें खुश होना चाहिए.
क्योंकि कोई तो है जो हमें पूर्ण दोष रहित बनाने के लिए अपना दिमाग और समय दे रहा है ।पर इस बात को कोई मानता नही है जय हो संत की ये बात पर यहाँ समझता कोन है इस बात को फुटपाथ पर रो रहा है भगवान ओर भक्त महलो मे है आजकल
बचपन मे माता पिता से कुछ चाहिए होता तो उनको कैसे मांगते थे ओर अपनी मांग मनवाने के लिये क्या क्या करते थे जिस तरह आपको अपने माता पिता पर पुणे विश्वास था उसी तरह अपने माँ बाबा को समझो वो आपको रुला सकते है पर कभी आपका बुरा नही चाहेंगे वो आपकी एक परीक्षक की भांति परीक्षा भी तो ले सकते है अब फेल होना है या पास ये आप के ऊपर है अगर आपको विश्वास है तो सबकुछ मिलेगा बाकी आपकी सोच ओर उसको हमारीओर से इक्कीस तोपो की सालमी भक्ति ओर भक्त भी अबोध ओर नादान बालक की तरह ही होनी चाहिए..
जो भी करो स्वार्थ रहित करो हजारो हाथ आपकी सहायता के लिये आगे आयेगे बाकी आरोप प्रत्यारोप से कुछ नही होने वाला ओर स्वार्थ वंश चमत्कार की आशा मदारी से की जाये़ तो अच्छा है भगवान ने नही आप भी कोई मट्टी का बर्तन लेते हो तो ठीक बजाकर लेते हो तो वो भी भगवान है उनको भी ठोकना ओर बजाना आता है फिर वो लेते है आगे आपकी इच्छा.. चोरो ओर से दुखी भी हो जाओ तो एक बात ध्यान रखे मानसिक ओर शारिरीक तौर पर आप मजबूत रहे ओर कोई रास्ता बताता है तो उस पर चलते रहये हमारी बातो से कुछ या बहुत विद्धजन सहमत हो या ना हो पर हमारा मनाना यही है कर्म काटने ही पडतेै है चाहे पहले चाहे बाद मे ..नादान बालक की कलम से एक पहल है..

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश

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Friday, July 28, 2017

"भय हरण कालिका"

"जय माँ जय बाबा की"

"भय हरण कालिका"

जय जय जग जननि देवी
सुर नर मुनि असुर सेवी
भुक्ति मुक्ति दायिनी भय हरण कालिका।
जय जय जग जननि देवी।

मुंडमाल तिलक भाल
शोणित मुख लगे विशाल
श्याम वर्ण शोभित, भय हरण कालिका।
जय जय जग जननि देवी ।

हर लो तुम सारे क्लेश
मांगूं नित कह अशेष
आयी शरणों में तेरी, भय हरण कालिका ।
जय जय जग जननि देवी ।

माँ मैं तो गई हूँ हारी
 माँगूं कबसे विचारी
करो अब तो उद्धार तुम, भय हरण कालिका ।
जय जय जग जननि देवी ।

"इसको नित्य पढने से दोष शंका डर भय का शंका निवारण होता है ओर माँ महाकाली अपने भक्तो पर विशेष कृपा करती है बाकी माँ बाबा का नाम कैसे भी पुणे श्रद्धा ओर विश्वास से जपा जाये फलित जरूर होता है"


"जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश."

बाबा महामृत्युंजय

बाबा महामृत्युंजय स्वरुप का ध्यान..

ॐ त्रियम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनं उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मोक्षिय मामृतात्



त्रयम्बकदेव अष्टभुज{उनकी आठ भुजाएं हैं } हैं ,उनके एक हाथ में अक्षमाला और दुसरे में मृगमुद्रा है ,दों हाथों से दो कलशों में अमृतरस लेकर उससे अपने मस्तक को आप्लावित {गीला कर रहे हैं } कर रहे हैं ,और दो हाथों से उन्ही कलशों को थामे हुए हैं ,शेष दो हाथ उन्होंने अपनी गोद में छोड़े हुए हैं ,और उनमे दो अमृत से भरे हुए घड़े हैं ,वे सफ़ेद कमल पर विराजमान हैं ,मुकुट पर बालचंद्र सुशोभित है ,मुखमंडल पर तीन नेत्र शोभायमान हैं ,इसे देवाधिदेव कैलासपति बाबा महादेव जी की मैं शरण लेता हूँ .

माँ बाबा अर्धनारीश्वर स्वरुप का ध्यान

बाबा शंकर जी का शरीर नीलमणि और प्रवाल के सामान सुन्दर है ,तीन नेत्र हैं ,चारों हाथों में पाश ,लाल कमल ,कपाल और त्रिशूल हैं ,आधे अंग में माँ अम्बिका जी और आधे में बाबा महादेव जी हैं .दोनों अलग अलग श्रृंगारों से सज्जित हैं ललाट पर अर्धचन्द्र है और मस्तक पर मुकुट सुशोभित है ,इसे स्वरुप को नमस्कार है .
जो निर्विकार होते हुए भी अपनी माया से विराट विश्व का आकार लेते हैं ,स्वर्ग और मोक्ष जिनकी कृपा कटाक्ष के वैभव बताये जाते हैं ,तथा योगीजन जिन्हें सदा अपने ह्रदय के भीतर अदितीय आत्मज्ञान आनंदस्वरूप में ही देखते हैं ,उन तेजोमय बाबा महादेव को ,जिनका आधा शरीर शैल राजकुमारी माँ पार्वती जी से सुशोभित है ,निरंतर मेरा नमस्कार है ........

...

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश.....

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Sunday, July 23, 2017

राम भक्त बाबा हनुमान जी.

करुना कर भक्तो के राम,
जय सिया राम जय जय सिया राम,

हनुमान के स्वामी राम,
दीनन के दुःख हारी राम,।

आदि राम अनंत है राम,
सत चित और अनंत है राम,

जय रघुनन्दन जय सिया राम,
भज मन प्यारे जय सिया राम,

सत्ये सनातन मंगल कारन,
सगुण निरंजन सीता राम,

दशरत नंदन सुर मुनि वंदन,
परेय्पप वंदन सीता राम,

मर्यादा पुर्शोतम राम,
पुरान ब्रम्ह सनातन राम,

राम ही पावन अति मन भावन,
नर नारायण सीता राम,

बोलो राम जय जय राम,
मुनिमन रंजन भव भये भंजन,
असुर निकंदन सीता राम,
पतित उद्धारण जग जन तारण,
नित्ये निरंजन सीता राम,,,

पुरान ब्रम्ह सनातन राम,
तुलसी सुत तुलसी के राम,,

बोलो प्रभु श्री रामभक्त बाबा हनुमान जी जय हो जय हो जय हो.....

जय जय बजरंगी महावीर
तुम बिन को जन की हरे पीर

अतुलित बलशाली तव काया
गति पिता पवन का अपनाया
शंकर से दैवी गुण पाया
शिव पवन पूत हे धीर वीर
जय जय बजरंगी महावीर , तुम बिन को जन की हरे पीर

दुःख भंजन सब दुःख हरते हो
आरत की सेवा करते हो
पल भर विलम्ब ना करते हो
जब भी भक्तों पर पड़े भीर
जय जय बजरंगी महावीर , तुम बिन को जन की हरे पीर

जब जामवंत ने ज्ञान दिया
झट सिय खोजन स्वीकार किया
शत जोजन सागर पर किया
निज प्रभु को जब देखा अधीर
जय जय बजरंगी महावीर , तुम बिन को जन की हरे पीर

शठ रावण त्रासदिया सिय को
भयभीत भई मैया जिय सो
माँगत कर जोर अगन तरु सों
दें मुन्देरी वा को दियो धीर
जय जय बजरंगी महावीर , तुम बिन को जन की हरे पीर

जब लगा लखन को शक्ति बाण
चिंतित हो विलखे बन्धु राम
कपि तुम सांचे सेवक समान
लाये बूटी संग द्रोण गीर
जय जय बजरंगी महावीर , तुम बिन को जन की हरे पीरा,

कुछ विशेष विधान बाबा की पुजा के लिये...

बाबा हनुमानजी की पूजा-अर्चना और व्रत में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

पूजा में चरणामृत का उपयोग न करें। शास्त्रों में इसका विधान नहीं है।

बाबा हनुमान जी को लाल फूल (रक्तपुष्प )प्रिय हैं। यानी लाल गुलाब कनेर ओर गुडहल, अत: पूजा में लाल फूल ही चढ़ाएं।

मूर्ति को जल व पंचामृत से स्नान कराने के बाद सिंदूर में तिल का तेल या चमेली का तेल ओर रुद्रअभिषेक के लिए सरसो का तेल मिलाकर उनको लगाना चाहिए। इससे वे प्रसन्न होते हैं।

जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधे कृष्णा अलख आदेश..

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Saturday, July 22, 2017

~ श्री~ श्री कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु और परशुराम के युद्ध का वर्णन ~

~ श्री~ श्री कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु और परशुराम के युद्ध का वर्णन ~

उभयोः सेनयोर्युद्घमभवत्तत्र नारद !
पालयिता रामशिष्या भ्रतश्चमहावलाः !!
क्षत् विक्षत् सर्बांग् कार्तवीर्य प्रपीडिताः !! १
नृपस्यशरजालेनरामः शस्त्रभृता वरः !
न ददर्शस्वसैन्यं न राजसैन्य तथैव च !! २
चिक्षेप रामश्चाssग्नेयंवभूबाग्निमयं रणे !
निर्बापयामास राजा वारुणेव लीलया !! ३
चिक्षेप रामो गान्धर्व शैल सर्प समन्वितम् !
वायव्येन महाराजः प्रेरयामास लीलया !!४
चिक्षेप रामो नागास्त्र दुर्निवार्य भयंकरम् !
गारूणेन महाराजःप्रेरयामास लीलया !!५
माहेश्वर च भगवांश्चिक्षेप भृगुनन्दनः !
निर्वापयामास राजा वैष्णवास्त्रेण लीलया !!६
ब्रहृमास्त्रं चिक्षेप रामो नृप नाशया नारद !
ब्रह्मास्त्रेण च शान्तं तत्प्राणनिर्वापणं रणे !!७
दत्तदत्तं यच्छूलमव्यर्थ मन्त्रपूर्वकम् !
जग्राह राजा परशुरामनाशाय संयुगे !!८
शूलं ददर्श. रामश्च शत् सूर्यसमप्रभम् !
प्रल्याग्निशिखो द्रक्तं दुनिर्वार्य सुरैरपि !!९
पपात शूलं समरे रामस्योपरिनारद !
मूर्छापबाप स. भृगुः पपात च हरि स्मरन् !!१०
पतिते तु तदा रामे सर्वे देवा भया कुलाः !
आजग्मुः समरमं तत्र ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः!!११
शंकरश्च. महाज्ञानी महाज्ञानेन लीलया !
ब्रह्मणं जीवया मास तूर्ण नारायणाज्ञया !!१२
- ब्रह्मवैवर्त पुराण (सत्य प्रत)

भावार्थः-
हे नारद ! अनन्तर दोनो ओर के सैनिको में भयंकर युद्ध आरम्भ हुआ, जिसमे परशुराम के शिष्यगण और महावली भ्राता गण भगवान कार्तबीर्य से अतिपीडित एवं छिन्नभिन्न होकर भाग निकले !१. !!
राजा कार्तवीर्य के बाणजाल से आछन्न होने के कारण परशुराम अपनी सेना और राजा कार्तबीर्य की सेना को नही देख सके ! २ !!
पश्चात परशुराम ने समर मै आग्नेय बाण का प्रयोग किया , जिसमे सव कुछ अग्निमय हो गया , राजा कार्तवीर्य ने वरुण बाण द्वारा उसे लीलापूर्वक भाँति
शान्त कर दिया ! ३ !!
परशुराम ने पर्वत सर्प युक्त गांन्धर्व अस्त्र का प्रयोग किया जिसे कार्तवार्य महाराज ने वायव्य बाण द्वारा समाप्त कर दिया !४!!
फिर परशुराम ने अग्निबार्य एंव भयंकर नागास्त्र का प्रयोग किया , जिसे महाराजा सहस्रबाहु ने गारूण अस्त्र द्वारा बिना यत्न के ही नष्ट कर दिया ! ५ !!
भृगु नन्दन परशुराम ने माहेश्वर अस्त्र का प्रयोग किया जिसे महाराजा ने वैष्णव अस्त्र द्बारा लीलापूर्वक समाप्त कर दिया ! ६!!
हे नारद् !! अनन्तर परशुराम ने कार्तवीर्य महाराजा के विनाशार्थ ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया , कार्तवीर्य महाराजा ने भी ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उस प्राणनाशक को भी युद्ध में शान्त कर दिया !७!!
तब महाराज कार्तवीर्य जी ने उस रण मै परशुराम के वधार्थ दत्तात्रेय द्वारा प्रद्त्त शूल का मन्त्र पूर्वक उपयोग किया , जो कभी भी व्यर्थ ना होने वाला था !८!!
परशुराम ने उस सैकडो सूर्य के समान कान्तिपूर्ण प्रलय कालीन अग्निशिखा से बडा- चडा और देवो के लिये भी दुर्निवार उस शूल को देखा !९!!
हे नारद् !! परशुराम के ऊपर वह शूल गिरा, जिससे भगवान् का स्मरण करते हुए परशुराम मूर्छित होगये !१०!!
परशुराम के गिर जाने के वाद समस्त देव गण व्याकुल होगये , उस समय युद्ध स्थल में ब्रह्मा विष्णु एंव महेश्वर भी आ गये!११ !!
नारायण की आज्ञा से महाज्ञानी शिव ने अपने महाज्ञान द्वारा लीला पूर्वक परशुराम जी को जीवित कर दिया ! १२ !! इति !
- ब्रह्मवैवर्त पुराण (सत्य प्रत)

इसके बाद शिवजी ने दोनों को आशिर्वाद देकर यह युद्ध रोक दिया। इस युद्ध के बाद सहस्त्रबाहु जी ने अपने जेष्ठ पुत्र जयध्वज का राजतिलक करने के पश्चात सन्यास धारण कर शिवजी के साथ महेश्वर स्थित शिवलिंग में विलीन हो गए। जिसे राजराजेश्वर लिंग के नाम से जाना जाता है। आज भी महेश्वर में दीपप्रिय सहस्त्रबाहु जी के राजराजेश्वर मंदिर में ११ अखंड नंददीप प्रज्वलित है। यह राजराजेश्वर शिवलिंग आज करोडो लोगों की आस्था का केंद्र है।

*महाराज कार्तवीर्य अर्जुन को श्री भगवान् दत्तात्रेय का दर्शन*

                   *श्री मार्कंडेय पुराण अध्याय"१८*

*यदि देव प्रसंन्त्वं तत्प्रयाच्छाधि मुक्त माम।*

*यथा प्रजा पाल्यायेम न चा धर्मं मवाप्नुयाम।।*

*परानुस्मरण ज्ञान म प्रति द्वन्दतांरणे।*

*सहस्त्रमाप्तु भिच्छामि बाहुना लघुता गुणाम ।।*

*असँगा गतय: सन्तु शौला काशम्बु मूमिसु।*

*पातालेषु    च सर्वेषु वधश्चाप्याधि कान्नरात।।*

*तथा माग प्रवृ तस्य सन्तु सन्मार्ग देशिवा :।*

*संतुमें तिथय -शलाघ्य  वित्तवान्य तथा क्षयं ।।*

*अन्स्ट द्रव्यता रास्ट्रे  मामनुस्मरणेन च ।*

*त्वयि भक्तिश्च देवाश्तु नित्यं मव्यभि चारणी ।।*
🙏🏻🌹🌹🌹🙏🏻

*ॐ हिंगुले परमहिंगुले अमृतरूपीणी तनुशक्ति मनः शिवे श्री हिंगुलाय नमः*
*जय कुलरक्षणी तिलदानी आपको सर्वदा शंत शंत नमन जय माँ हिंगलाज,,,*

*है कुलगुरु दत महाराज है कुलशेष्ठ महाराज,,*
*||जय जय गुरुदेव दत्त, जय श्री सहस्रार्जुन महाराज ||*

जब महाराज को ये वरदान मिले थे तो उनका भ्रमित होने का कोई चांस नही ओर इनके तो काफी मंत्र ओर तंत्र भी है कल एक प्रभु जन ने महाराज सहस्त्रार्जुन पर टिप्पणी करके दिल को अंदर तक झंझोड दिया इसलिए...
ये वो वरदान थे जी महाराज को गुरुशेष्ट से मिले...

यमाहुर्वाषु देवांश हैहय नां फुर्लात्कम।

      हैहया नामी धिपतिरर्जुन :क्षत्रियर्षम।।

भावार्थ :- महाराजा ययाति के यहाँ वासुदेव के अंश से हैहय नामक पुत्र हुआ। जिनके वंश में कार्तवीर्यार्जुन क्षत्रिय हुए है।
               श्री कार्तवीर्यार्जुन ने दस हजार वर्षो की कठिन तपस्या के पश्चात् श्री भगवान् दत्तात्रेय से दस १०, वरदान प्राप्त किये, वे वरदान निम्न प्रकार से है:-

१-ऐश्वर्य शक्ति प्रजा पालन के योग्य हो, किन्तु अधर्म न बन जावे।
२- दूसरो के मन की बात जानने का ज्ञान हो।
३- युद्ध में कोई समानता न कर सके।
४- युद्ध के समय सस्त्र भुजाएं प्राप्त हो, उनका तनिक भी भार न लगे।
५-पर्वत, आकाश, जल, पृथ्वी और पाताल में अव्याहत गति हो।
६-मेरी मृत्यु अधिक श्रेष्ठ के हाथो से हो ओर जीवित सशरीर मे अपने आराध्य देव भोलेनाथ मे समा जाऊ..।
७-कुमार्ग में प्रवृत्ति होने पर सन्मार्ग का उपदेश प्राप्त हो।
८-श्रेष्ठ अतिथि नी निरंतर प्राप्ति होती रहे।
९-निरंतर दान से धन न घटे।
१०-स्मरण मात्र से धन का आभाव दूर हो जाये एवं भक्ति बनी रहे।,,,

श्री राजराजेश्वर कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु जी सात चक्रवर्ती राजाओं में से एक है। इस पृथ्वीपर सबसे अधिक सालो तक धर्म और न्याय से राज उन्हीका माना गया है। ऐसे योगिराज सहस्त्रबाहु जी की बदनामी और उनके बारे में भ्रामक झूठी कहानियां झूठी पुस्तिका, सीरियल और फिल्मो के माध्यम से फैलाने का काम कुछ अधर्मी धर्मभ्रष्ट लोग कर रहे है। ..खैर आपकी कलम है कुछ भी लिख सकते है ओर पहले भी कुछ इतिहास ओर चापलूसो ने महाराज सहस्त्रार्जुन को विलेन तो बना ही दिया है शास्त्रो मे फेर बदल कर ओर भी कई बात है जिनसे प्रर्दा उठना बाकी है क्योंकि मौज अगर लेनी है तो खोज करनी पडेगी ध्यान लगाना पडेगा. यही सत्य है...
ओर हमे गर्व है कि हम इनके वशंज है....

प्रणाम प्रभु...


जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधेकृष्णा अलख आदेश..
🙏🏻🌹🌹🌹🌹🌹🙏🏻 कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु और परशुराम के युद्ध का वर्णन ~

उभयोः सेनयोर्युद्घमभवत्तत्र नारद !
पालयिता रामशिष्या भ्रतश्चमहावलाः !!
क्षत् विक्षत् सर्बांग् कार्तवीर्य प्रपीडिताः !! १
नृपस्यशरजालेनरामः शस्त्रभृता वरः !
न ददर्शस्वसैन्यं न राजसैन्य तथैव च !! २
चिक्षेप रामश्चाssग्नेयंवभूबाग्निमयं रणे !
निर्बापयामास राजा वारुणेव लीलया !! ३
चिक्षेप रामो गान्धर्व शैल सर्प समन्वितम् !
वायव्येन महाराजः प्रेरयामास लीलया !!४
चिक्षेप रामो नागास्त्र दुर्निवार्य भयंकरम् !
गारूणेन महाराजःप्रेरयामास लीलया !!५
माहेश्वर च भगवांश्चिक्षेप भृगुनन्दनः !
निर्वापयामास राजा वैष्णवास्त्रेण लीलया !!६
ब्रहृमास्त्रं चिक्षेप रामो नृप नाशया नारद !
ब्रह्मास्त्रेण च शान्तं तत्प्राणनिर्वापणं रणे !!७
दत्तदत्तं यच्छूलमव्यर्थ मन्त्रपूर्वकम् !
जग्राह राजा परशुरामनाशाय संयुगे !!८
शूलं ददर्श. रामश्च शत् सूर्यसमप्रभम् !
प्रल्याग्निशिखो द्रक्तं दुनिर्वार्य सुरैरपि !!९
पपात शूलं समरे रामस्योपरिनारद !
मूर्छापबाप स. भृगुः पपात च हरि स्मरन् !!१०
पतिते तु तदा रामे सर्वे देवा भया कुलाः !
आजग्मुः समरमं तत्र ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः!!११
शंकरश्च. महाज्ञानी महाज्ञानेन लीलया !
ब्रह्मणं जीवया मास तूर्ण नारायणाज्ञया !!१२
- ब्रह्मवैवर्त पुराण (सत्य प्रत)

भावार्थः-
हे नारद ! अनन्तर दोनो ओर के सैनिको में भयंकर युद्ध आरम्भ हुआ, जिसमे परशुराम के शिष्यगण और महावली भ्राता गण भगवान कार्तबीर्य से अतिपीडित एवं छिन्नभिन्न होकर भाग निकले !१. !!
राजा कार्तवीर्य के बाणजाल से आछन्न होने के कारण परशुराम अपनी सेना और राजा कार्तबीर्य की सेना को नही देख सके ! २ !!
पश्चात परशुराम ने समर मै आग्नेय बाण का प्रयोग किया , जिसमे सव कुछ अग्निमय हो गया , राजा कार्तवीर्य ने वरुण बाण द्वारा उसे लीलापूर्वक भाँति
शान्त कर दिया ! ३ !!
परशुराम ने पर्वत सर्प युक्त गांन्धर्व अस्त्र का प्रयोग किया जिसे कार्तवार्य महाराज ने वायव्य बाण द्वारा समाप्त कर दिया !४!!
फिर परशुराम ने अग्निबार्य एंव भयंकर नागास्त्र का प्रयोग किया , जिसे महाराजा सहस्रबाहु ने गारूण अस्त्र द्वारा बिना यत्न के ही नष्ट कर दिया ! ५ !!
भृगु नन्दन परशुराम ने माहेश्वर अस्त्र का प्रयोग किया जिसे महाराजा ने वैष्णव अस्त्र द्बारा लीलापूर्वक समाप्त कर दिया ! ६!!
हे नारद् !! अनन्तर परशुराम ने कार्तवीर्य महाराजा के विनाशार्थ ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया , कार्तवीर्य महाराजा ने भी ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उस प्राणनाशक को भी युद्ध में शान्त कर दिया !७!!
तब महाराज कार्तवीर्य जी ने उस रण मै परशुराम के वधार्थ दत्तात्रेय द्वारा प्रद्त्त शूल का मन्त्र पूर्वक उपयोग किया , जो कभी भी व्यर्थ ना होने वाला था !८!!
परशुराम ने उस सैकडो सूर्य के समान कान्तिपूर्ण प्रलय कालीन अग्निशिखा से बडा- चडा और देवो के लिये भी दुर्निवार उस शूल को देखा !९!!
हे नारद् !! परशुराम के ऊपर वह शूल गिरा, जिससे भगवान् का स्मरण करते हुए परशुराम मूर्छित होगये !१०!!
परशुराम के गिर जाने के वाद समस्त देव गण व्याकुल होगये , उस समय युद्ध स्थल में ब्रह्मा विष्णु एंव महेश्वर भी आ गये!११ !!
नारायण की आज्ञा से महाज्ञानी शिव ने अपने महाज्ञान द्वारा लीला पूर्वक परशुराम जी को जीवित कर दिया ! १२ !! इति !
- ब्रह्मवैवर्त पुराण (सत्य प्रत)

इसके बाद शिवजी ने दोनों को आशिर्वाद देकर यह युद्ध रोक दिया। इस युद्ध के बाद सहस्त्रबाहु जी ने अपने जेष्ठ पुत्र जयध्वज का राजतिलक करने के पश्चात सन्यास धारण कर शिवजी के साथ महेश्वर स्थित शिवलिंग में विलीन हो गए। जिसे राजराजेश्वर लिंग के नाम से जाना जाता है। आज भी महेश्वर में दीपप्रिय सहस्त्रबाहु जी के राजराजेश्वर मंदिर में ११ अखंड नंददीप प्रज्वलित है। यह राजराजेश्वर शिवलिंग आज करोडो लोगों की आस्था का केंद्र है।

*महाराज कार्तवीर्य अर्जुन को श्री भगवान् दत्तात्रेय का दर्शन*

                   *श्री मार्कंडेय पुराण अध्याय"१८*

*यदि देव प्रसंन्त्वं तत्प्रयाच्छाधि मुक्त माम।*

*यथा प्रजा पाल्यायेम न चा धर्मं मवाप्नुयाम।।*

*परानुस्मरण ज्ञान म प्रति द्वन्दतांरणे।*

*सहस्त्रमाप्तु भिच्छामि बाहुना लघुता गुणाम ।।*

*असँगा गतय: सन्तु शौला काशम्बु मूमिसु।*

*पातालेषु    च सर्वेषु वधश्चाप्याधि कान्नरात।।*

*तथा माग प्रवृ तस्य सन्तु सन्मार्ग देशिवा :।*

*संतुमें तिथय -शलाघ्य  वित्तवान्य तथा क्षयं ।।*

*अन्स्ट द्रव्यता रास्ट्रे  मामनुस्मरणेन च ।*

*त्वयि भक्तिश्च देवाश्तु नित्यं मव्यभि चारणी ।।*
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*ॐ हिंगुले परमहिंगुले अमृतरूपीणी तनुशक्ति मनः शिवे श्री हिंगुलाय नमः*
*जय कुलरक्षणी तिलदानी आपको सर्वदा शंत शंत नमन जय माँ हिंगलाज,,,*

*है कुलगुरु दत महाराज है कुलशेष्ठ महाराज,,*
*||जय जय गुरुदेव दत्त, जय श्री सहस्रार्जुन महाराज ||*

जब महाराज को ये वरदान मिले थे तो उनका भ्रमित होने का कोई चांस नही ओर इनके तो काफी मंत्र ओर तंत्र भी है कल एक प्रभु जन ने महाराज सहस्त्रार्जुन पर टिप्पणी करके दिल को अंदर तक झंझोड दिया इसलिए...
ये वो वरदान थे जी महाराज को गुरुशेष्ट से मिले...

यमाहुर्वाषु देवांश हैहय नां फुर्लात्कम।

      हैहया नामी धिपतिरर्जुन :क्षत्रियर्षम।।

भावार्थ :- महाराजा ययाति के यहाँ वासुदेव के अंश से हैहय नामक पुत्र हुआ। जिनके वंश में कार्तवीर्यार्जुन क्षत्रिय हुए है।
               श्री कार्तवीर्यार्जुन ने दस हजार वर्षो की कठिन तपस्या के पश्चात् श्री भगवान् दत्तात्रेय से दस १०, वरदान प्राप्त किये, वे वरदान निम्न प्रकार से है:-

१-ऐश्वर्य शक्ति प्रजा पालन के योग्य हो, किन्तु अधर्म न बन जावे।
२- दूसरो के मन की बात जानने का ज्ञान हो।
३- युद्ध में कोई समानता न कर सके।
४- युद्ध के समय सस्त्र भुजाएं प्राप्त हो, उनका तनिक भी भार न लगे।
५-पर्वत, आकाश, जल, पृथ्वी और पाताल में अव्याहत गति हो।
६-मेरी मृत्यु अधिक श्रेष्ठ के हाथो से हो ओर जीवित सशरीर मे अपने आराध्य देव भोलेनाथ मे समा जाऊ..।
७-कुमार्ग में प्रवृत्ति होने पर सन्मार्ग का उपदेश प्राप्त हो।
८-श्रेष्ठ अतिथि नी निरंतर प्राप्ति होती रहे।
९-निरंतर दान से धन न घटे।
१०-स्मरण मात्र से धन का आभाव दूर हो जाये एवं भक्ति बनी रहे।,,,

श्री राजराजेश्वर कार्तवीर्य सहस्त्रबाहु जी सात चक्रवर्ती राजाओं में से एक है। इस पृथ्वीपर सबसे अधिक सालो तक धर्म और न्याय से राज उन्हीका माना गया है। ऐसे योगिराज सहस्त्रबाहु जी की बदनामी और उनके बारे में भ्रामक झूठी कहानियां झूठी पुस्तिका, सीरियल और फिल्मो के माध्यम से फैलाने का काम कुछ अधर्मी धर्मभ्रष्ट लोग कर रहे है। ..खैर आपकी कलम है कुछ भी लिख सकते है ओर पहले भी कुछ इतिहास ओर चापलूसो ने महाराज सहस्त्रार्जुन को विलेन तो बना ही दिया है शास्त्रो मे फेर बदल कर ओर भी कई बात है जिनसे प्रर्दा उठना बाकी है क्योंकि मौज अगर लेनी है तो खोज करनी पडेगी ध्यान लगाना पडेगा. यही सत्य है...
ओर हमे गर्व है कि हम इनके वशंज है....


जय माँ जय बाबा महाकाल जय श्री राधेकृष्णा अलख आदेश..
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