Wednesday, July 1, 2015

गर्भ रात्रि~सूक्तम्

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं नमः ब्रह्मोवाच मः न क्लीं ह्रीं ऐं ॐ ।। १ ।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं नमः त्वं स्वाहा त्वं स्वधा त्वं हि वषट्कारः स्वरात्मिका ।
सुधा त्वमक्षरे नित्ये त्रिधा मात्रात्मिका स्थिताः ।। मः न क्लीं ह्रीं ऐं ॐ ।। २ ।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं नमः अर्द्धमात्रास्थिता नित्या यानुर्च्चायां विशेषतः ।
त्वमेव सन्ध्या सावित्री त्वं देवि जननी परा ।। मः न क्लीं ह्रीं ऐं ॐ ।। ३ ।

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