Saturday, June 20, 2015

सभी देवताओं में शनि देव का व्यक्तित्व सबसे अलग और निराला है।

सभी देवताओं में शनि देव का व्यक्तित्व सबसे अलग और निराला है।
सभी देवताओं में शनि देव का व्यक्तित्व सबसे अलग और निराला है। शास्त्रों के अनुसार शनि सूर्य पुत्र माने जाते हैं। इनकी माता का नाम छाया है। इन्हें न्यायाधीश का महत्वपूर्ण पद प्राप्त है।
ज्योतिष के अनुसार शनि को भले ही क्रूर ग्रह माना जाता है लेकिन हमें कैसे जीना चाहिए यह शनि देव से सीखा जा सकता है।
जानिए शनि देव के जीवन प्रबंधन के अचूक मंत्र-धीरे चलो पर चलते रहो…
ज्योतिष के अनुसार शनि देव सबसे धीरे चलने वाला ग्रह है। शनि ही एकमात्र ग्रह है जो एक राशि में करीब ढाई वर्ष रुकता है। इसी वजह से इन्हें शनेश्चर भी कहा जाता है क्योंकि ये श्नै: श्नै: चलते हैं। शनि देव की गति इतनी धीमी क्यों है? इस संबंध में माना जाता है कि वे लंगड़े हैं। इसी कारण वे धीरे-धीरे चलते हैं। शनि के इस गुण से सीखा जा सकता है कि हमें भी जीवन में हमेशा आगे की ओर चलते रहना चाहिए। मार्ग में चाहे जितनी रुकावटें आए, हमें रुकना नहीं चाहिए और लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना चाहिए।
दूसरों को कष्ट न हो इसलिए नजरे झुका कर चलते हैं…
शास्त्रों के अनुसार शनि देव पत्नी के शाप से शापित हैं। एक कथा के अनुसार शनि की पत्नी एक गंधर्व की कन्या थीं। इनकी पत्नी का स्वभाव अति उग्र था। एक बार शनि देव भगवान के ध्यान में बैठे थे। उस समय उनकी पत्नी वहां आ गई लेकिन शनि देव भगवान की भक्ति में लीन थे। अत: पत्नी की ओर ध्यान नहीं दे पाए। इसी बात से क्रोधित होकर उनकी पत्नी ने शनि देव को श्राप दे दिया कि वे जिसकी ओर देखेंगे वह नष्ट हो जाएगा। बस तभी से शनि देव नजरे झुकाकर चलते हैं ताकि किसी और का अनिष्ट न हो।
हमें भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारी वजह से किसी का कोई अनिष्ट न हो। किसी को भी हमारी वजह से हानि न उठाना पड़े। अपना कार्य पूरी निष्ठा से करें…
ज्योतिष के अनुसार शनिदेव को न्यायाधीश माना जाता है। हमारे अच्छे-बुरे कर्मों का फल शनि देव ही प्रदान करते हैं। हम जैसा कर्म करते हैं ठीक वैसा ही प्रतिफल हमें शनि से प्राप्त होता है। यदि किसी व्यक्ति ने कोई गलत कार्य किया है तो शनि उसे निश्चित ही कठोर दण्ड भी प्रदान करते हैं। इसी वजह से इन्हें क्रूर ग्रह भी माना जाता है। फिर भी शनि अपना कार्य पूरी निष्ठा से ही करते हैं। अत: हमें भी हमारे कार्य पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करना चाहिए। कोशिश करें कि हमसे कोई बुरा कार्य न हो ताकि शनि के दण्ड का सामना न करना पड़े।
गरीब और असहाय की मदद करें…
शास्त्रों के अनुसार शनि को गरीबों का देवता माना जाता है। जो भी व्यक्ति गरीबों को सताता है शनि उसे कभी क्षमा नहीं करते हैं। जबकि जो इंसान जरूरतमंद लोगों की सहायता करता है शनि उसे सभी सुख प्रदान करते हैं।
शनिवार को तेल मालिश करें…
भगवान शनि को तेल चढ़ाया जाता है। इस संबंध में कथा प्रचलित है कि एक बार हनुमानजी इनका युद्ध हुआ और युद्ध में शनिदेव को हार का सामना करना पड़ा। तभी हनुमान ने इन्हें मार के दर्द को कम करने के लिए तेल प्रदान किया। इस तेल को लगाने से शनि का दर्द समाप्त हो गया। तभी से शनिदेव को तेल अर्पित किया जाने लगा। प्रति शनिवार हमें भी तेल मालिश करना चाहिए ताकि हमारे त्वचा संबंधी रोग भी दूर हो सके और शनि की कृपा प्राप्त हो सके।

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